राहुकेतुऔर_वहम

#राहुकेतुऔर_वहम
राहु और केतु को लेकर ज्योतिष को मानने वालों मे बड़ा डर रहता है यूट्यूब और शार्ट रील की तरह तरह कि बाते से ड़रे रहते है । राहु केतु को लेकर कालसर्प दोष को लेकर सबसे ज्यादा डराया जाता है । वैसे मेरे गुरू इसे एरदम फर्जी दोष बताते थे उनका कहना था कि कालसर्प दोष 1960 से पहले नही था और किसी शास्त्र मे उल्लेखित भी नही है । यह सामने वाले को डराने और पैंसे एठने के लिए बनाया गया है ।
फिर यह राहु केतु क्या है ?

असल मे राहु केतु नाम के कोई ग्रह सौर मंडल नही है । जिस तरह सुर्य से लेकर शनि तक आकाश मे साक्षात ग्रह दिखाई देते है वैसे राहु केतु दिखाई नही देते है । इसलिए ही राहु केतु कोई राशि नही दी गई और ना ही ग्रहों के बल यानी पड्बल मे इनका कोई स्थान है । माना यह जाता है कि यह कुंडली मे जिस ग्रह के साथ बैठेगे व्यक्ति को उस ग्रह से संबंधित वहम जीवन मे परेशान करेगे ।

भारतीय ज्योतिष सुर्य, चंद्र ग्रहणों की सटीक तिथि जिस विधि से निकालता आ रहा है उस विधि मे राहु केतु बड़े महत्वपुर्ण स्रोत है । पृथ्वी अपने पथ पर घूमती हुई सुर्य के चक्कर लगा रही है वही चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है । ऐसे मे होता क्या है कि कभी कभी चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाते हुएं पृथ्वी के पथ को काट देते है । यानि वह पृथ्वी सुर्य के एक सीध मे आगे या पीछे आ जाता है । जिस बिंदु पर चंद्रमा पृथ्वी और सुर्य के बीच या फिर पृथ्वी के पीछे एक सीध मे होता है उन दोनो बिंदुओं को ज्योतिषीय गणनाओं मे राहु केतु कहते है । जो वास्तव मे ग्रह नही एक स्थिति है जिसके कारण कभी पृथ्वी तो कभी चंद्रमा की परछाई ग्रहण का कारण बन जाती है और इसी ज्योतिषीय गणतिय विधि से वर्ष मे पड़ने वाले ग्रहणों की पहले ही भविष्यवाणी कर दी जाती थी ।

असल मे राहु और केतु ज्योतिष मे वहम का प्रतीक है जिस तरह ग्रहण पड़ने पर आम आदमी के मन मे वहम हो जाता है कि सुर्य को कोई खत्म कर रहा है मगर वह अज्ञानता मे जानता नही कि सुर्य को चंद्रमा ने ढका है वरना वह पूरे तेज के साथ अब भी निकल रहा है ।
बस इसी तरह के वहम जीवन मे होते है जिनका प्रतीक राहु केतु है माना जाता है कि कुंडली मे जिस ग्रह के साथ राहु केतु बैठे होगे वही से संबंधित वहम आदमी के अंदर पैदा होगा । मन मे अनजान भय होना, माता, पीर आना, बेवजह पति या पत्नी पर शक करना, यह सोचना कि उसके खिलाफ साजिश रच रही है यानि सारे वहमी मनोरोग जो वास्तव मे होते नही लेकिन मन ने उसे सच मान लिया हो वह सब राहु केतु के प्रतीक है ।
एक आदमी अपने बेटे की जन्म कुंडली लेकर आया और बताने लगा कि उसके बेटे पर किसी पीर का साया है और वह उस पर कभी भी आ जाता है ।
गुरू जी ने उससे कहा कि कल वह अपने बेटे को अपने साथ लाये और यह कहके लाये कि वह एक महान सिद्ध संत से मिलने जा रहे है ।
अगले दिन जब वह आदमी अपने बेटे को लेकर आया तो गुरू जी ने अपनी वेशभूषा एक सिद्ध साधु की तरह बना रखी थी ।
गुरू जी ने बच्चे को देखा और कुछ तंत्र मंत्र बुदबुदाये और चिल्लाये पकड़ लिया इस पीर को अब यह तेरे बच्चे को तंग नही करेगा । उस बच्चे की बांह मे एक धांगा भी बांध दिया । बच्चे के वहम को एक वहम ने मार दिया उसके अवचेतन मन मे बैठे पीर के वहम ने यह मान लिया कि वह पीर संत ने बाहर निकाल दिया है और वह अब अन्दर नही है ।

लेकिन यह तरीका हर बार काम नही करता है । क्योंकि वहम हमेशा अवचेतन मन मे भरा होता है । अवचेतन मन कभी भी तार्किक नही होता है । जैसे जब हम सो रहे हो तब अचेतन मन क्रिया करता है और अवचेतन मन मे से स्मृतियों को निकालकर सपने दिखाता है । अवचेतन अगर हावी हो जाये तो वह कितना खतरनाक होता है आप देखिये कि आप सपने मे सेक्स कर रहे है और आपका वीर्यपात हो जाता है यानि पूरा शरीर अवचेतन मन के उसकी इच्छानुसार ही कार्य करने लगता है ।
यानि जब बुद्धि जो कि तर्क से काम करती है वह काम करना बंद कर देती है और आदमी गहन चिंतन मे जाकर वहमी हो जाता है वह देखने सुनने मानने लगता है जो वास्तव मे सत्य नही होता है ।

अभी मे हिपनोटिज्म की कक्षाएं पढ़ रहा था तब एक आदमी जिसेको अदृश्य आवाजें आ रही थी जिसकी वजह से वह परेशान था । मै उसे हिप्नौथेरिपी दी । यह मेरा पहला अनुभव था जब मैंने पहली बार किसी को हिप्पनोटाइज करके उसके मन के वहम को खत्म करने मे सफलता पाई । उसे हिप्नोथेरिपी के बाद अदृश्य आवाज आनी बंद हो गई ‌।
लेकिन जब मैने यह घटना अपने गुरू जी को बताई तो उन्होंने डाँटते हुएं कहा कि किसी भी मनोरोगी को बिना मनोचिकित्सक की सलाह के हिपनोसिस नही करना चाहिए ।

फिर इस वहम (राहु केतु) का सबसे अच्छा इलाज क्या है ?
सबसे अच्छा उपाय है मनोरोग को भी एक बीमारी समझे रोगी के साथ सहानुभूति वाले व्यवहार के साथ तुरन्त उसे मनोचिकित्सक को दिखाये । उसे सोशल बनाये । उसको गहन चिंतन, समाधि आदि मे ना जाने दे । उसे तार्किक बनाये ताकि वह मन के बजाय बुद्धि से काम ले ।

मनोचिकित्सक की सलाह पर हिप्नोथैरिपी कराये । यह अच्छा परिणाम देती है ।

अगर रोगी आस्तिक है तो उसे अनुभव कराये कि ईश्वर तुम्हारी परेशानी खत्म कर देगा । उसमे ज्योतिष उपाय भी हो सकते है ।

और हाँ यह ध्यान रखना जितनी जल्दी आप चिकित्सक के पास जायेगे वह रोग उतने जल्दी खत्म हो जायेगे ।

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