रुक्मिणी स्वयंवर मंत्र

रुक्मिणी स्वयंवर मंत्र, “ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय स्वाहा”, भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह से जुड़ा एक शक्तिशाली मंत्र है. रुक्मिणी, भगवान कृष्ण की पटरानी थीं, और उनका स्वयंवर (स्वयं का चुनाव) हिंदू पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण घटना है. 

मंत्र का महत्व:

  • यह मंत्र विवाह में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए उपयोगी माना जाता है. 
  • जिन लोगों को मनचाहा जीवनसाथी नहीं मिल रहा है, वे भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं. 
  • रुक्मिणी अष्टमी के दिन इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है. 

मंत्र जाप की विधि:

  • पवित्र अवस्था में एकांत में बैठकर 108 बार मंत्र का जाप करें.
  • जाप करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए.
  • इस मंत्र का जाप कम से कम 3 महीने तक नियमित रूप से करना चाहिए. 

अन्य उपयोगी मंत्र:

विवाह से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए कुछ अन्य मंत्र भी उपयोगी माने जाते हैं:

  • स्वयंवर पार्वती मंत्र:“ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी। सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयं मम वशं। आकर्षय आकर्षय नमः।।” 
  • जल्दी विवाह के लिए मंत्र:“विवाहं भाग्यमारोग्यं शीघ्रलाभं च देहि मे ॥ चतुस्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु-कुरु स्वाहा ।। तथा मां कुरु कल्याणि । कान्त कांता सुदुर्लभाम्।।” 

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