चित्रगुप्त पूजा आज

चित्रगुप्त पूजा आज


हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज को लेकर अपना आराध्य मानते हैं। इसलिए अन्य समाजों की अपेक्षा कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजन विशेष रूप से करने की परंपरा है। भगवान चित्रगुप्त हर प्राणी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और यमराज को बताते हैं।

मार्च 2026 में कब करें चित्रगुप्त पूजा?
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि 4 मार्च, बुधवार की शाम 04 बजकर 49 मिनिट से शुरू होगी जो 5 मार्च, गुरुवार की शाम 05 बजकर 03 मिनिट तक रहेगी। चूंकि द्वितिया तिथि का सूर्योदय 5 मार्च को होगा, इसलिए इसी दिन चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।

ये है पूजा के शुभ मुहूर्त
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
सुबह 11:11 से दोपहर 12:38 तक
दोपहर 12:15 से 01:01 तक (अभिजीत मुहर्त)
दोपहर 12:38 से 02:05 तक
दोपहर 02:05 से 03:33 तक
शाम 06:27 से रात 08:00 तक

भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
-5 मार्च, गुरुवार की सुबह भगवान चित्रगुप्त की पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।

  • किसी साफ स्थान पर लकड़ी का बाजोट स्थापित कर सफेद कपड़ा बिछाएं और भगवान चित्रगुप्त का चित्र रखें।
  • शुद्ध घी का दीपक लगाएं। चन्दन, रोली, हल्दी, पान, सुपारी आदि चीजें एक-एक करके भगवान को चढ़ाएं।
  • अपनी इच्छा अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं। पुस्तक और कलम की पूजा भी करें। पूजा के दौरान ये मंत्र बोलें-
    मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
    लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।
  • इस तरह शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने के बाद परिवाह सहित आरती भी करें।
  • इस तरह पूजा करने से भगवान चित्रगुप्त अपने भक्तों प्रसन्न होते हैं और उनकी हर इच्छा जल्दी ही पूरी करते हैं।

चित्रगुप्त पूजा का महत्व
≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈≈
भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का गणमान्य देवता माना जाता है, जो पुण्य और पाप दोनों का हिसाब रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूजा भक्तों को बुद्धि, ज्ञान और स्पष्ट सोच की प्राप्ति कराती है। कई लोग शिक्षा और व्यापार में सफलता पाने के लिए भी यह अनुष्ठान करते हैं।

यह दिन धार्मिकता, जवाबदेही और ज्ञान जैसे नैतिक मूल्यों की याद दिलाता है, जिनका प्रतीक भगवान चित्रगुप्त हैं।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *