मेष संक्रांति

मेष संक्रांति (14 अप्रैल 2026) पर सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जो नए साल का प्रतीक है। इस दिन सूर्य पूजा, तांबे/गुड़/लाल मसूर दाल का दान और पवित्र स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, करियर की बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में मंगल, राहु-शनि के अशुभ प्रभाव कम होकर सुख-समृद्धि आती है। 

मेष संक्रांति पर मुख्य ज्योतिषीय उपाय (14 अप्रैल 2026):

  • सूर्य देव की पूजा: सुबह जल्दी स्नान करके सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, कुमकुम और गुड़ डालकर “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।
  • दान-पुण्य (विशेष उपाय): मेष संक्रांति पर तांबा, गुड़, चावल, गेहूँ, या लाल मसूर की दाल का दान करना उत्तम है, जो ग्रहों का बुरा असर कम करता है।
  • मंगल दोष के लिए: मसूर की दाल, लाल कपड़े, या चंदन का दान करें। इस दिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
  • करियर और सफलता: आदित्य हृदय स्तोत्र का 3 बार पाठ करें।
  • विशेष उपाय (राहु-शनि): अगर करियर में परेशानियां हैं, तो कत्था (pan item) या खैर की लकड़ी को प्रवाहित करें, इससे राहु-शनि शांत होते हैं।
  • सत्तू का दान: मेष संक्रांति को ‘सत्तू संक्रांति’ भी कहते हैं, इसलिए सत्तू का सेवन और दान करने से मंगल 

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