निर्जला एकादशी व्रत 🌷

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🌷 निर्जला एकादशी व्रत 🌷
🌷 भीम एकादशी व्रत 🌷
🌷 पांडव एकादशी व्रत🌷
{परसों 25 जून 2026, गुरुवार}

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को
“निर्जला एकादशी”
( भीमसैनी या पांडव ग्यारस ) कहां जाता है 🙏

यह👆 एकादशी पूरे वर्ष भर की सबसे बड़ी “निर्जला एकादशी” कहलाती है🙏 पूरे साल की 25 एकादशी ना कर पाए तो यह एक एकादशी का व्रत कर ले तो साल भर की 26 { 24 नहीं किंतु 26 इस साल अधिक मास होने के कारण} एकादशी के व्रत के बराबर पुण्य फ़ल प्राप्त होता है🙏🏻

👉 एकादशी तिथि की शुरुआत 👇

कल 24 जुन 2026,बुधवार सायं 06=12 मिनट से

👉 एकादशी तिथि का समापन👇

परसों 25 जुन 2026,गुरुवार प्रातः 08:09 मिनट पर

👉 एकादशी व्रत के पारण का समय 👇

नरसों 26 जुन 2026, शुक्रवार को प्रातः 05:25 से 08:13 बजे तक

👉 विशेष
एकादशी का व्रत परसों सूर्योदय तिथि 25 जुन 2026, गुरुवार के दिन ही रखें🙏 …. बुधवार सायं एवं गुरुवार व्रत के दिन खाने में चावल या चावल से बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें ❌ भले ही आपने व्रत ना रखा हो…. फिर भी चावल या चावल से बनी हुई चीज का खाना वर्जित है🙏

👉 निर्जला एकादशी व्रत रखने का फायदा 👇

पद्मपुराण में निर्जला एकादशी व्रत द्वारा मनोरथ सिद्ध होने की बात कही गई है। इस एकादशी के व्रत को विधिपूर्वक करने से सभी साल भर की 26 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है🙏

👉 निर्जला एकादशी व्रत रखने की विधि 👇

“निर्जला” का अर्थ
जल रहित,
निराहार और निर्जल रहकर व्रत करना है 🙏

इस दिन व्रती को अन्न तो क्या, जलग्रहण करना भी वर्जित है। यानी यह व्रत “निर्जला और निराहार” ही होता है { बिना कोई भी खाना खाए और बिना पानी पिए}

अगर आप शारीरिक सक्षम नहीं है और व्रत भी करना चाहते हैं तो एक समय फलाहार और जल ले सकते हैं🙏🏻

शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि संध्योपासना के लिए आचमन में जो जल लिया जाता है उसे ग्रहण करने की अनुमति है 🙏

इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं करते हैं।

👉 “एकादश्यां न भुंजीत पक्षयोरुभयोरपि” दोनों पक्षों की एकादशी में भोजन न करें।
वास्तव में शास्त्रकारों ने व्रत का स्तर स्थापित किया है अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार जो संभव हो करना चाहिए👇

1) निर्जल व्रत
{बिना किसी भी प्रकार का जल पिए एवं बिना कुछ भी खाएं}
2) उपवास व्रत
{जल भी पी सकते हैं फलाहार भी ले सकते हैं}
3) केवल दूध पीकर
{केवल एक बार अन्न रहित दुग्धादि पेय पदार्थ का ग्रहण}
4) नक्त व्रत
{दिनभर उपवास रखकर रात्रि में फलाहार करना}
5) एकभुक्त व्रत
{किसी भी समय एक बार फलाहार करना}

अशक्त, वृद्ध ,बालक और रोगी को भी जो व्रत न कर सकें यथासंभव अन्न का परित्याग तो एकादशी के दिन करना ही चाहिए🙏

हमारे धर्मग्रंथों में इस पर्व को आत्मसंयम की साधना का अनूठा पर्व माना गया है। निर्जला एकादशी की उपासना का सीधा संबंध एक ओर जहां पानी न पीने के व्रत की कठिन साधना है,वहीं आम जनता को, गरीबों को, भिक्षुकों को पानी पिलाकर /छबीली बांटकर/ गुलाब जल का मीठा शरबत पिलाकर परोपकार की प्राचीन भारतीय परंपरा भी है 🙏

मठ, मंदिर एवं गुरुद्वारों में कथा प्रवचन धार्मिक अनुष्ठान एवं कीर्तन आदि के कार्यक्रम जहां दिन भर चलते हैं, वहीं शीतल जल के छबीले लगाकर राहगीरों को बुला-बुला कर बड़ी आस्था के साथ पानी पिलाया जाता है🙏🏻

सर्वज्ञ वेदव्यास ने पाडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो महाबली भीम ने निवेदन किया- पितामह! आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता- मेरे पेट में वृक नाम की जो अग्नि है, उसे शान्त रखने के लिए मुझे कई बार भोजन करना पड़ता है तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्यव्रत से वंचित रह जाउंगा❓ पितामह ने भीम की समस्या का निदान करते और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- नहीं कुंतीनंदन, धर्म की यही तो विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की बड़ी सहज और लचीली व्यवस्था भी उपलब्ध करवाता है। अत: आप ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो और तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होगा। नि:संदेह तुम इस लोक में सुख, यश और प्राप्तव्य प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करोगे। इतने आश्वासन पर तो वृकोदर भीमसेन भी इस व्रत को करने को सहमत हो गए। इसलिए इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पाण्डव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन स्वयं निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा घड़ादान करना चाहिए🙏

👉 निर्जला एकादशी की विशेष उपाय विधि 👇

25 जून गुरुवार को 11 पानी के घड़े दान करें और महापुण्य की प्राप्ति करे 🙏

  1. पहला घड़ा प्रभु श्री हरि/श्री कृष्ण मंदिर में🙏
  2. दूसरा घड़ा अपने इष्ट देव को🙏
  3. तीसरा घड़ा माता पिता को🙏
  4. चौथा घड़ा गुरु को🙏
  5. पांचवां घड़ा कुलपुरोहित को🙏
  6. छठा घड़ा सफाई कर्मचारी को🙏
  7. सातवा घड़ा कुष्ठ आश्रम में🙏
  8. आठवा घड़ा पीपल के पेड़ के नीचे🙏 और शेष 3 घड़े गरीब जरूरत मंद लोगो को दान करे।
    आपका पुण्य अनंत गुना बढ़ेगा। 👉 निर्जला एकादशी पर करे ये उपाय 👇

👉निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें🙏

👉 प्रभु श्री लक्ष्मीविष्णु के मंदिर जाकर पीले रंग का ध्वज अर्पित करें। ऐसा करने से गुरु के दोष से छुटकारा मिल जाता है🙏 इसके साथ ही विवाह में आने वाली अड़चन से छुटकारा मिल जाता है🙏

👉मान्यता है कि इस दिन प्याऊ लगवाने या फिर किसी मंदिर के पास जल, शरबत आदि वितरण करने से पितृ दोष और चंद्र दोष से छुटकारा मिल जाता है🙏

👉इस दिन जरूरतमंद को अपनी योग्यता के अनुसार दान कर सकते हैं। पानी वाले फ्रूट खरबूजा, तरबूज, आम आदि फल भी दान करना शुभ होता है🙏

👉एकादशी के दिन आप नर्सरी से गेंदे का पौधा लाकर उसे छत पर रखें। ऐसा करने से गुरु की अनुकूलता प्राप्त होती है और भाग्य चमक उठता है🙏

👉एकादशी का उपाय करके आप आर्थिक समृद्धि भी पा सकते हैं। घर में तुलसी के पौधे को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखना चाहिए🙏

👉शास्त्रों में बताया गया है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु वास करते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत के विशेष दिन पर पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं । माना जाता है कि ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिल जाती है🙏

👉पारण के दिन गरीबों को भोजन कराना या अन्न अर्थात् चावल, शक्कर, दाल, आटा का दान करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातक की आय में वृद्धि होती है🙏🙏 *ओम नमो नारायणाय* 🙏

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