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  • निर्जला एकादशी व्रत 🌷

    🌷 निर्जला एकादशी व्रत 🌷
    🌷 भीम एकादशी व्रत 🌷
    🌷 पांडव एकादशी व्रत🌷
    {परसों 25 जून 2026, गुरुवार}

    ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को
    “निर्जला एकादशी”
    ( भीमसैनी या पांडव ग्यारस ) कहां जाता है 🙏

    यह👆 एकादशी पूरे वर्ष भर की सबसे बड़ी “निर्जला एकादशी” कहलाती है🙏 पूरे साल की 25 एकादशी ना कर पाए तो यह एक एकादशी का व्रत कर ले तो साल भर की 26 { 24 नहीं किंतु 26 इस साल अधिक मास होने के कारण} एकादशी के व्रत के बराबर पुण्य फ़ल प्राप्त होता है🙏🏻

    👉 एकादशी तिथि की शुरुआत 👇

    कल 24 जुन 2026,बुधवार सायं 06=12 मिनट से

    👉 एकादशी तिथि का समापन👇

    परसों 25 जुन 2026,गुरुवार प्रातः 08:09 मिनट पर

    👉 एकादशी व्रत के पारण का समय 👇

    नरसों 26 जुन 2026, शुक्रवार को प्रातः 05:25 से 08:13 बजे तक

    👉 विशेष
    एकादशी का व्रत परसों सूर्योदय तिथि 25 जुन 2026, गुरुवार के दिन ही रखें🙏 …. बुधवार सायं एवं गुरुवार व्रत के दिन खाने में चावल या चावल से बनी हुई वस्तुओं का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें ❌ भले ही आपने व्रत ना रखा हो…. फिर भी चावल या चावल से बनी हुई चीज का खाना वर्जित है🙏

    👉 निर्जला एकादशी व्रत रखने का फायदा 👇

    पद्मपुराण में निर्जला एकादशी व्रत द्वारा मनोरथ सिद्ध होने की बात कही गई है। इस एकादशी के व्रत को विधिपूर्वक करने से सभी साल भर की 26 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है🙏

    👉 निर्जला एकादशी व्रत रखने की विधि 👇

    “निर्जला” का अर्थ
    जल रहित,
    निराहार और निर्जल रहकर व्रत करना है 🙏

    इस दिन व्रती को अन्न तो क्या, जलग्रहण करना भी वर्जित है। यानी यह व्रत “निर्जला और निराहार” ही होता है { बिना कोई भी खाना खाए और बिना पानी पिए}

    अगर आप शारीरिक सक्षम नहीं है और व्रत भी करना चाहते हैं तो एक समय फलाहार और जल ले सकते हैं🙏🏻

    शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि संध्योपासना के लिए आचमन में जो जल लिया जाता है उसे ग्रहण करने की अनुमति है 🙏

    इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं करते हैं।

    👉 “एकादश्यां न भुंजीत पक्षयोरुभयोरपि” दोनों पक्षों की एकादशी में भोजन न करें।
    वास्तव में शास्त्रकारों ने व्रत का स्तर स्थापित किया है अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार जो संभव हो करना चाहिए👇

    1) निर्जल व्रत
    {बिना किसी भी प्रकार का जल पिए एवं बिना कुछ भी खाएं}
    2) उपवास व्रत
    {जल भी पी सकते हैं फलाहार भी ले सकते हैं}
    3) केवल दूध पीकर
    {केवल एक बार अन्न रहित दुग्धादि पेय पदार्थ का ग्रहण}
    4) नक्त व्रत
    {दिनभर उपवास रखकर रात्रि में फलाहार करना}
    5) एकभुक्त व्रत
    {किसी भी समय एक बार फलाहार करना}

    अशक्त, वृद्ध ,बालक और रोगी को भी जो व्रत न कर सकें यथासंभव अन्न का परित्याग तो एकादशी के दिन करना ही चाहिए🙏

    हमारे धर्मग्रंथों में इस पर्व को आत्मसंयम की साधना का अनूठा पर्व माना गया है। निर्जला एकादशी की उपासना का सीधा संबंध एक ओर जहां पानी न पीने के व्रत की कठिन साधना है,वहीं आम जनता को, गरीबों को, भिक्षुकों को पानी पिलाकर /छबीली बांटकर/ गुलाब जल का मीठा शरबत पिलाकर परोपकार की प्राचीन भारतीय परंपरा भी है 🙏

    मठ, मंदिर एवं गुरुद्वारों में कथा प्रवचन धार्मिक अनुष्ठान एवं कीर्तन आदि के कार्यक्रम जहां दिन भर चलते हैं, वहीं शीतल जल के छबीले लगाकर राहगीरों को बुला-बुला कर बड़ी आस्था के साथ पानी पिलाया जाता है🙏🏻

    सर्वज्ञ वेदव्यास ने पाडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प कराया तो महाबली भीम ने निवेदन किया- पितामह! आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता- मेरे पेट में वृक नाम की जो अग्नि है, उसे शान्त रखने के लिए मुझे कई बार भोजन करना पड़ता है तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्यव्रत से वंचित रह जाउंगा❓ पितामह ने भीम की समस्या का निदान करते और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- नहीं कुंतीनंदन, धर्म की यही तो विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की बड़ी सहज और लचीली व्यवस्था भी उपलब्ध करवाता है। अत: आप ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो और तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होगा। नि:संदेह तुम इस लोक में सुख, यश और प्राप्तव्य प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करोगे। इतने आश्वासन पर तो वृकोदर भीमसेन भी इस व्रत को करने को सहमत हो गए। इसलिए इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पाण्डव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन स्वयं निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा घड़ादान करना चाहिए🙏

    👉 निर्जला एकादशी की विशेष उपाय विधि 👇

    25 जून गुरुवार को 11 पानी के घड़े दान करें और महापुण्य की प्राप्ति करे 🙏

    1. पहला घड़ा प्रभु श्री हरि/श्री कृष्ण मंदिर में🙏
    2. दूसरा घड़ा अपने इष्ट देव को🙏
    3. तीसरा घड़ा माता पिता को🙏
    4. चौथा घड़ा गुरु को🙏
    5. पांचवां घड़ा कुलपुरोहित को🙏
    6. छठा घड़ा सफाई कर्मचारी को🙏
    7. सातवा घड़ा कुष्ठ आश्रम में🙏
    8. आठवा घड़ा पीपल के पेड़ के नीचे🙏 और शेष 3 घड़े गरीब जरूरत मंद लोगो को दान करे।
      आपका पुण्य अनंत गुना बढ़ेगा। 👉 निर्जला एकादशी पर करे ये उपाय 👇

    👉निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें🙏

    👉 प्रभु श्री लक्ष्मीविष्णु के मंदिर जाकर पीले रंग का ध्वज अर्पित करें। ऐसा करने से गुरु के दोष से छुटकारा मिल जाता है🙏 इसके साथ ही विवाह में आने वाली अड़चन से छुटकारा मिल जाता है🙏

    👉मान्यता है कि इस दिन प्याऊ लगवाने या फिर किसी मंदिर के पास जल, शरबत आदि वितरण करने से पितृ दोष और चंद्र दोष से छुटकारा मिल जाता है🙏

    👉इस दिन जरूरतमंद को अपनी योग्यता के अनुसार दान कर सकते हैं। पानी वाले फ्रूट खरबूजा, तरबूज, आम आदि फल भी दान करना शुभ होता है🙏

    👉एकादशी के दिन आप नर्सरी से गेंदे का पौधा लाकर उसे छत पर रखें। ऐसा करने से गुरु की अनुकूलता प्राप्त होती है और भाग्य चमक उठता है🙏

    👉एकादशी का उपाय करके आप आर्थिक समृद्धि भी पा सकते हैं। घर में तुलसी के पौधे को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में रखना चाहिए🙏

    👉शास्त्रों में बताया गया है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु वास करते हैं। इसलिए निर्जला एकादशी व्रत के विशेष दिन पर पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएं । माना जाता है कि ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिल जाती है🙏

    👉पारण के दिन गरीबों को भोजन कराना या अन्न अर्थात् चावल, शक्कर, दाल, आटा का दान करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जातक की आय में वृद्धि होती है🙏🙏 *ओम नमो नारायणाय* 🙏

  • मंगल दोष – सम्पूर्ण जानकारी + उपाय

    मंगल दोष – सम्पूर्ण जानकारी + उपाय

    1. मंगल दोष क्या है
    जब कुंडली में मंगल 1, 4, 7, 8, 12वें घर में बैठे तो मंगल दोष बनता है। मंगल = आग, हिम्मत, गुस्सा, एनर्जी, एक्सीडेंट। ये दोष आग है – जलाती भी है, काम भी बनाती है।

    2. 5 प्रकार और असर
    1ला घर लग्न मंगल बहुत गुस्सा, चोट,मैं स्ट्रॉन्ग। झगड़ालू स्वभाव।
    4था घर चतुर्थ मंगल घर में अशांति, मां से टकराव, प्रॉपर्टी केस।
    7वां घर सप्तम मंगल शादी में ego clash, पार्टनर से लड़ाई, तलाक का डर। सबसे ज्यादा बोला जाने वाला।
    8वां घर अष्टम मंगल सबसे खतरनाक माना जाता है। अचानक चोट, सर्जरी, ससुराल दिक्कत, सेक्स में एग्रेसन।
    12वां घर द्वादश मंगल नींद खराब, बेडरूम झगड़ा, खर्च ज्यादा, विदेश में दिक्कत।

    3. कब कैंसिल हो जाता है
    डरने की जरूरत नहीं, 80% कुंडलियों में होता है। ये स्थिति में दोष कम/खत्म
    👉दूसरा साथी भी मांगलिक हो ,आग बैलेंस हो जाती है।
    👉मंगल मेष, वृश्चिक, या उच्च मकर राशि में हो।
    👉गुरु, शनि, शुक्र मंगल को देख रहे हों – कंट्रोल मिलता है।
    👉उम्र 28 के बाद – मंगल मैच्योर, असर कम।

    4. सबसे आसान 4 उपाय
    हनुमान पूजा मंगलवार को हनुमान जी को लाल चोला, सिंदूर, चमेली तेल। मंत्र ॐ हं हनुमते नमः 108 बार। हनुमान मंगल के गुरु हैं, गुस्सा कंट्रोल होता है।
    दान मंगलवार को लाल मसूर दाल, गुड़, लाल कपड़ा, तांबा दान करो। फौजी/सिक्योरिटी की मदद करो।
    एनर्जी निकालो रोज 10 मिनट व्यायाम, दौड़, मार्शल आर्ट। गुस्सा बाहर निकालो वरना घर में फूटेगा। मांस, शराब, लाल मिर्च कम खाओ।
    शादी टिप सप्तम मंगल हो तो 28 साल बाद शादी करो या मांगलिक से करो। झगड़ा हो तो तुरंत पानी पियो – मंगल ठंडा होता है।

    5. बेस्ट करियर + रंग + रत्न
    करियर फौज, पुलिस, सर्जन, फायर फाइटर, स्पोर्ट्स, रियल एस्टेट, बिजनेस, लीडरशिप। जहां हिम्मत और रिस्क चाहिए, मंगल दोष वरदान बनता है।
    रंग/दिन लाल, मरून, नारंगी पहनो। मंगलवार सबसे पावरफुल दिन। काला-नीला ज्यादा मत पहनो।
    रत्न मूंगा/लाल कोरल सिर्फ तभी पहनो जब कुंडली में मंगल योगकारक हो। बिना चेक किए मत पहनो – गुस्सा बढ़ सकता है। सेफ है तांबे का कड़ा या लाल धागा दाएं हाथ में।

    आखिरी सच मंगल दोष वाले 28 से पहले टूटते हैं, 28 के बाद फोड़ते हैं। गुस्सा कंट्रोल कर लो तो दुनिया जीत लोगे। हिम्मत ही तुम्हारी सुपरपावर है।

  • दो विवाह के योग

    दो विवाह के योग – वैदिक ज्योतिष मेंज्योतिष में सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी का भाव है। जब सप्तम भाव, उसके स्वामी, या विवाह के कारक ग्रह पीड़ित हों तो “द्विभार्या योग” या दो विवाह की संभावना बनती है। आपने जो बिंदु लिखे हैं, उन्हें एक-एक कर विस्तार से समझते हैं: महत्वपूर्ण निष्कर्ष और […]

    दो विवाह के योग
  • यदि हो कोई लंबे समय से बीमार तो अपनाएं ये 14 उपाय –

    यदि हो कोई लंबे समय से बीमार तो अपनाएं ये 14 उपाय –

    यदि आप या आपके घर का कोई सदस्य लंबे समय से बीमारी हो या बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही रहो तो यहां लाल किताब के कुछ सामान्य उपाय बताए जा रहे हैं परंतु इन उपायों को लाल किताब के किसी जानकार से पूछकर ही करें।

    1. प्रति सप्ताह गाय, कौए और कुत्तों को मीठी रोटियां खिलाएं। रोगी के उपर से एक रोटी वारकर कुत्ते को खिलाएं। प्रतिदिन कुत्ते को रोटी खिलाने से आकस्मिक संकट दूर रहते हैं।
    2. ब्लड प्रेशर या अनावश्यक बैचेनी को कंट्रोल करने के लिए प्रतिदिन रात में सोते समय एक तांबे के लौटे में पानी भरकर रखें और सुबह उसे किसी बबूल के वृक्ष या पौधे में डाल दें या बाहर ढोल दें। ऐसा 43 दिनों तक करें।
    3. पका हुआ कद्दू या सीताफल गुरुवार को मंदिर में दान करें।
    4. कान की बीमारी के लिए काले-सफेद तिल सफेद और काले कपड़े में बांधकर जंगल या किसी सुनसान जगह पर गाड़कर आ जाएं।
    5. शुगर, जोड़ों का दर्द, मूत्र रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द के लिए काले कुत्ते की सेवा करें।
    6. काला और सफेद अर्थात दोरंगी कंबल को 21 बार खुद पर से वारकर उसे किसी मंदिर में या गरीब को दान कर दें। इससे संकट टल जाता है।
    7. पानीदार एक नारियल लें और उसे अपने ऊपर से 21 बार वारें। वारने के बाद उसे किसी देवस्थान पर या घर के बाहर जाकर अग्नि में जला दें। 5 शनिवार ऐसा करने से जीवन में अचानक आए कष्ट से छुटकारा मिलेगा। यदि किसी सदस्य की सेहत खराब है उसके लिए यह उपाय उत्तम है।
    8. शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं।
    9. शुक्रवार को लकड़ी के पाट पर बैठकर अच्‍छे से दही स्नान करने से चर्म रोग ठीक होते हैं।
    10. प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर जरूर जलाएं।
    11. प्रतिदिन संध्यावंदन के साथ हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। हनुमान चालीसा पढ़ने से जहां पितृदोष, मंगलदोष, राहु-केतू दोष आदि दूर होते हैं वहीं भूत-प्रेतादि का बुरा असर या साया भी हट जाता है। हनुमान बहुक पढ़ने से भी शरीर का दर्द मिट जाता है।
    12. जब भी श्मशान या कब्रिस्तान से गुजरना हो तो तांबे के सिक्के उक्त स्थान पर डालने से दैवीय सहायता प्राप्त होगी।
    13. यदि आंखों में पीड़ा हो तो शनिवार को चार सूखे नारियल नदी में प्रवाहित करें।
    14. सिरहाने कुछ रुपए-पैसे रख कर प्रात: सफाईकर्मी को दे दें।

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  • कुछ सरल उपाय जिन्हें हर किसी को करना चाहिए –

    कुछ सरल उपाय जिन्हें हर किसी को करना चाहिए –

    सफाईकर्मी को कुछ सिक्के दान करें।

    अपने घर में मिट्टी के बर्तन में शहद रखें।

    बहते जल में रेवड़ियां व बताशे प्रभावित दें।

    चांदी या तांबे के गिलास में ही जल ग्रहण करें।

    बुधवार के दिन कन्याओं को हरे वस्त्र या हरी चूड़ियों दान करें।

    पीपल, बरगद, नीम तथा केले की जड़ में नित्य जल अर्पित करें।

    प्रतिदिन कुत्ते को रोटी खिलाएं, यदि कुत्ता काला हो तो उत्तम रहेगा।

    भोजन के उपरांत देशी गुड़ अवश्य खाएं तथा परिवार के लोगों को भी दें।

    चींटी, पक्षी, गाय, कुत्ता, कौवा, आदि प्राणियों के लिए अन्न-जल की व्यवस्था अवश्य करें।

    हमेश चांदी का छोटा सा चौकोर टुकड़ा अपने पास रखें. इसे घर की तिजोरी में भी रख सकते हैं।

    तांबे के लोटे में जल भरकर उसे सिरहाने रखकर सोएं तथा अगले दिन सुबह जल को बाहर फेंक दें।

    अगर इन उपायों को करने के बाद भी राहत महसूस ना हो तो अपनी कुंडली किसी विद्वान को चेक करवा ले।
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  • बुधवार विशेष

    👉बुधवार विशेष –

    बुद्ध नवे घर में सबसे अच्छा और सबसे बुरा परिणाम इसी घर में देता है

    इसलिए इस घर में बुध का उपाय करने से पहले बुद्ध का भेद निकालना बहुत जरूरी हो जाता है अगर बुध बुरा परिणाम दे रहा हो
    सावधानियाँ
    चाँदी धारण करें
    चाँदी पहनना बुध के अशुभ प्रभाव को कम करता है।
    लाल रंग की लोहे की गोली साथ रखें
    लाल रंग से रंगी लोहे की गोली जेब में रखें।
    साबुत मूंग का दान
    बुध दोष कम करने के लिए साबुत मूंग दान करें।
    नाक छेदन
    बुध के नकारात्मक प्रभाव को कम करने हेतु नाक छिदवाएँ।
    फकीरों से ताबीज न लें
    किसी साधु या फकीर से ताबीज या लॉकेट स्वीकार न करें।
    पीले चावल का जल प्रवाह
    लगातार 43 दिनों तक पीले चावल जल में प्रवाहित करें।
    नए कपड़े धोकर पहनें
    कोई भी नया वस्त्र पहले धोकर ही धारण करें।
    देवी दुर्गा का पाठ और बुधवार व्रत
    नियमित रूप से दुर्गा पाठ करें और बुधवार का व्रत रखें।
    लाल गाय को रोटी खिलाएँ
    लाल गाय को रोटी खिलाना शुभ माना जाता है।
    हरे कपड़ों से परहेज
    हरे वस्त्र न पहनें और घर में भी हरे कपड़ों का अत्यधिक प्रयोग न करें।
    मशरूम का दान
    मिट्टी के बर्तन में मशरूम भरकर धार्मिक स्थान पर दान करें।
    🟢 बुध ग्रह – उपाय
    बंद कुएँ वाले मकान से बचें
    ऐसे घर में न रहें जहाँ कुआँ या जल स्रोत बंद हो, या बार-बार सीढ़ियाँ पुनः बनी हों।
    पीले चावल 43 दिन प्रवाहित करें
    लगातार 43 दिनों तक जल में पीले चावल प्रवाहित करें।
    नाक छेदन (100 घंटे)
    नाक छिदवाकर कम से कम 100 घंटे तक धारण करें।
    लाल रंग की लोहे की गोली रखें
    इसे हमेशा अपने पास रखें।
    यंत्र, ताबीज और हरे कपड़े न रखें
    घर में अनावश्यक यंत्र, ताबीज, हाथी की मूर्ति तथा हरे कपड़े न रखें।
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  • वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व===========================

    वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों का महत्व
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    श्रुतदेव जी कहते हैं – राजेन्द्र ! वैशाख के शुक्ल पक्ष में जो अन्तिम तीन तिथियाँ, त्रयोादशी से पूर्णिमा तक, हैं वे बड़ी पवित्र और शुभ कारक हैं। उनका नाम “पुष्करिणी” हैं, वे सब पापों का क्षय करने वाली हैं। जो संपूर्ण वैशाख मास में स्नान करने में असमर्थ हैं, वह यदि इन तीन तिथियों में भी स्नान करें तो वैशाख मास का पूरा फल पा लेता है। पूर्वकाल में वैशाख मास की एकादशी तिथि को शुभ अमृत प्रकट हुआ। द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। त्रयोदशी तिथि को उन श्रीहरि ने देवताओं को सुधा-पान कराया। चतुर्दशी तिथि को देव विरोधी दैत्यों का संहार किया और पूर्णिमा के दिन समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य प्राप्त हो गया इसलिए देवताओं ने संतुष्ट होकर इन तीन तिथियों को वर दिया।

    “वैशाख मास की ये तीन शुभ तिथियाँ मनुष्यों के पापों का नाश करने वाली तथा उन्हें पुत्र-पौत्रादि फल देने वाली हों। जो मनुष्य इस संपूर्ण मास में स्नान न कर सका तो वह इन तिथियों में स्नान कर लेने पर पूर्ण फल को ही पाता है। वैशाख मास में लौकिक कामनाओं का नियमन करने पर मनुष्य निश्चय ही भगवान विष्णु का सायुज्य प्राप्त कर लेता है। महीने भर नियम निभाने में असमर्थ मानव यदि उक्त तीन दिन भी कामनाओं का संयम कर सके तो उतने से ही पूर्ण फल को पाकर भगवान विष्णु के धाम में आनन्द का अनुभव करता है।”

    इस प्रकार वर देकर देवता अपने धाम को चले गए। अत: पुष्करिणी नाम से प्रसिद्ध अन्तिम तीन तिथियाँ पुण्यदायिनी, समस्त पाप राशि का नाश करने वाली तथा पुत्र-पौत्र को बढ़ाने वाली हैं। जो वैशाख मास में अन्तिम तीन दिन गीता का पाठ करता है, उसे प्रतिदिन अश्वमेघ-यज्ञ का फल मिलता है। जो उक्त तीनों दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करता है उसके पुण्य फल का वर्णन करने में इस भूलोक तथा स्वर्गलोक में कौन समर्थ है? पूर्णिमा को सहस्त्रनामों के द्वारा भगवान मधुसूदन को दूध से नहलाकर मनुष्य पापहीन वैकुण्ठ धाम में जाता है।
    वैशाख मास में प्रतिदिन भागवत के आधे या चौथाई श्लोक का पाठ करने वाला मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है। जो वैशाख के अंतिम तीन दिनों में भागवत शास्त्र का श्रवण करता है, वह जल से कमल के पत्ते की भाँति कभी पापों से लिप्त नहीं होता। उक्त तीनों दिनों के सेवन से कितने ही मनुष्यों ने देवत्व प्राप्त कर लिया, कितने ही सिद्ध हो गए और कितने ही मनुष्यों ने ब्रह्मत्व प्राप्त कर लिया। ब्रह्मज्ञान से मुक्ति होती है अथवा प्रयाग में मृत्यु होने से या वैशाख मास में नियमपूर्वक प्रात:काल जल में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए वैशाख के अन्तिम तीन दिनों में स्नान, दान और भगवत्पूजन आदि अवश्य करना चाहिए। वैशाख मास के उत्तम माहात्म्य का पूरा-पूरा वर्णन रोग-शोक से रहित जगदीश्वर भगवान नारायण के सिवा दूसरा कौन कर सकता है। तुम भी वैशाख मास में दान आदि उत्तम कर्म का अनुष्ठान करो। इससे निश्चय ही तुम्हें भोग और मोक्ष की प्राप्ति होगी।

    इस प्रकार मिथिलापति जनक को उपदेश देकर श्रुतदेव जी ने उनकी अनुमति ले वहाँ से जाने का विचार किया। वस्त्र, आभूषण, गौ, भूमि, तिल और सुवर्न आदि से उनकी पूजा और वन्दना करके राजा ने उनकी परिक्रमा की। तत्पश्चात उनसे विदा हो महातेजस्वी एवं परम यशस्वी श्रुतदेव जी संतुष्ट हो प्रसन्नतापूर्वक वहाँ से अपने स्थान को गए। राजा ने वैशाख धर्म का पालन करके मोक्ष प्राप्त किया।

    नारदजी कहते हैं – अम्बरीष ! यह उत्तम उपाख्यान मैंने तुम्हें सुनाया है, जो कि सब पापों का नाशक तथा सम्पूर्ण संपत्तियों को देने वाला है। इससे मनुष्य भुक्ति, मुक्ति, ज्ञान एवं मोक्ष पाता है। नारद जी का यह वचन सुनकर महायशस्वी राजा अम्बरीष मन ही मन बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने बाह्य जगत के व्यापारों से निवृत होकर मुनि को साष्टांग प्रणाम किया और अपने संपूर्ण वैभवों से उनकी पूजा की। तत्पश्चात उनसे विदा लेकर देवर्षि नारद जी दूसरे लोक में चले गए क्योंकि दक्ष प्रजापति के शाप से वे एक स्थान पर नहीं ठहर सकते।

    राजर्षि अम्बरीष भी नारदजी के बताए हुए सब धर्मों का अनुष्ठान करके निर्गुण परब्रह्म परमात्मा में विलीन हो गए। जो इस पाप नाशक एवं पुण्यवर्द्धक उपाख्यान को सुनता या पढ़ता है वह परम गति को प्राप्त होता है। जिनके घर में यह लिखी हुई पुस्तक रहती है, उनके हाथ में मुक्ति आ जाती है फिर जो सदा इसके श्रवण में मन लगाते हैं उनके लिए तो कहना ही क्या है!
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  • 12वें भाव के स्वामी का 12वें भाव में होना

    🔺 12वें भाव के स्वामी का 12वें भाव में होना

    आध्यात्मिक साधकों के लिए सबसे अच्छे योगों में से एक है। यह समर्पण, ध्यान और वैराग्य के माध्यम से मोक्ष की ओर एक स्वाभाविक मार्ग का संकेत देता है। आपको एकांत में या निर्जन स्थानों पर रहने से गहरी आंतरिक शांति मिल सकती है।

    🔺 चूंकि 12वां भाव विदेश का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसके स्वामी का यहाँ होना विदेश में बसने या विदेशी भूमि में सफलता का एक मजबूत संकेत है। आप विदेश प्रवास कर सकते हैं या दूर देशों में काम करते हुए मनचाहे पेशेवर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

    🔺 आपको बार-बार खर्चों का सामना करना पड़ सकता है, चाहे वे आपकी इच्छा से हों या नहीं। हालांकि, चूंकि इस भाव का स्वामी मजबूत है, इसलिए आप आकस्मिक नुकसान के बजाय शुभ या धर्मार्थ कार्यों पर खर्च कर सकते हैं।

    🔺 यह भाव नींद और “शैया सुख” को नियंत्रित करता है। 12वें भाव के स्वामी का यहाँ अच्छी स्थिति में होना अच्छी नींद और शारीरिक सुख सुनिश्चित करता है, हालांकि विशिष्ट ग्रहों का प्रभाव (जैसे सूर्य) कभी-कभी नींद में खलल या विवाद का कारण बन सकता है। जबकि 12वां भाव गुप्त शत्रुओं का प्रतिनिधित्व करता है, इसका स्वामी अपने ही घर में होने के कारण सुरक्षा प्रदान करता है और गुप्त चुनौतियों पर विजय पाने की क्षमता देता है।

    🔴विभिन्न ग्रहों का प्रभाव

    *सूर्य (Sun): पिता के साथ दूरी या पिता का अपनी ही दुनिया में व्यस्त रहना; सोने (Gold) या सरकारी कार्यों पर खर्च।

    चंद्रमा (Moon): तीव्र अंतर्ज्ञान (Intuition) और सहानुभूति; स्पष्ट सपने आने की संभावना और भावनात्मक संवेदनशीलता।

    मंगल (Mars): प्रत्यक्ष टकराव में कठिनाई हो सकती है, लेकिन गुप्त शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के माध्यम से लाभ मिलता है।

    गुरु (Jupiter): अक्सर गहरा आध्यात्मिक ज्ञान, दार्शनिक शांति और धर्मार्थ गतिविधियों में सफलता दिलाता है।

    शुक्र (Venus): शारीरिक सुख-सुविधाओं के लिए उत्कृष्ट और अपरंपरागत या आध्यात्मिक परिवेश में प्रेम संबंध बनाने में सहायक।

    शनि (Saturn): आध्यात्मिक साधनाओं में सख्त अनुशासन की आवश्यकता होती है और अक्सर यह भारी पिछले कर्मों के निपटारे का संकेत देता है।

    विशेष नोट:
    जब 12वें भाव का स्वामी क्रियात्मक अशुभ ग्रहों (functional malefic) या राहु, केतु, मांदी, गुलिका जैसे पाप ग्रहों के साथ युति करता है, या उन पर किसी प्रबल अशुभ ग्रह की दृष्टि होती है, अथवा यदि 12वें भाव का स्वामी षडबल में कमजोर हो, तो यह सभी सकारात्मक परिणामों को नष्ट कर देता है और प्रतिकूल प्रभाव पैदा करता है।

    यदि 12वें भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो और वह पीड़ित हो, तो जातक को जीवन के किसी भी पहलू में सफलता मिलना कठिन हो जाता है, क्योंकि 12वां भाव पिछले जन्म का प्रतिनिधित्व करता है।
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  • मेष संक्रांति

    मेष संक्रांति (14 अप्रैल 2026) पर सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जो नए साल का प्रतीक है। इस दिन सूर्य पूजा, तांबे/गुड़/लाल मसूर दाल का दान और पवित्र स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है। इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, करियर की बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में मंगल, राहु-शनि के अशुभ प्रभाव कम होकर सुख-समृद्धि आती है। 

    मेष संक्रांति पर मुख्य ज्योतिषीय उपाय (14 अप्रैल 2026):

    • सूर्य देव की पूजा: सुबह जल्दी स्नान करके सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, कुमकुम और गुड़ डालकर “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें।
    • दान-पुण्य (विशेष उपाय): मेष संक्रांति पर तांबा, गुड़, चावल, गेहूँ, या लाल मसूर की दाल का दान करना उत्तम है, जो ग्रहों का बुरा असर कम करता है।
    • मंगल दोष के लिए: मसूर की दाल, लाल कपड़े, या चंदन का दान करें। इस दिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
    • करियर और सफलता: आदित्य हृदय स्तोत्र का 3 बार पाठ करें।
    • विशेष उपाय (राहु-शनि): अगर करियर में परेशानियां हैं, तो कत्था (pan item) या खैर की लकड़ी को प्रवाहित करें, इससे राहु-शनि शांत होते हैं।
    • सत्तू का दान: मेष संक्रांति को ‘सत्तू संक्रांति’ भी कहते हैं, इसलिए सत्तू का सेवन और दान करने से मंगल 
  • जानिए किस ग्रह की खराबी से होता है पेट का अल्सर ?

    जानिए किस ग्रह की खराबी से होता है पेट का अल्सर ?

    प्रश्न : कैसे ठीक करें पेट में होने वाले रोग ?
    उत्तर : ज्योतिष के अनुसार जब जन्म कुंडली का राहु चौथे घर में बैठ जाता है या फिर चौथे घर से संबंध रखता है तो हमे हमारे शरीर में पेट से संबन्धित दिक्कतों का सामना करना पड़ता है l जब कुंडली का राहु खराब हो जाता है तो हमारे पेट में हमेशा दर्द रहता है, अल्सर की बीमारी भी हो जाती है और जीतने भी पेट से संबन्धित रोग है वो सब इस ग्रह की खरबी की वजह से होता है l हर किसी इंसान को किसी न किसी ग्रह से जुड़ी बीमारी अवश्य होती है l अब इस बात का पता हम अपनी जन्म कुंडली में खराब ग्रह की स्थिति का आंकलन कर उस बीमारी का पता लगा सकते है l

    लाल किताब उपाय : 27 दिन लगातार 6 नीले फूल या 6 नीले कंचे लेकर सांझ के समय सूर्यास्त के बाद इसे वीरान जमीन में दबाएँ l