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  • चित्रगुप्त पूजा आज

    चित्रगुप्त पूजा आज


    हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज को लेकर अपना आराध्य मानते हैं। इसलिए अन्य समाजों की अपेक्षा कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजन विशेष रूप से करने की परंपरा है। भगवान चित्रगुप्त हर प्राणी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और यमराज को बताते हैं।

    मार्च 2026 में कब करें चित्रगुप्त पूजा?
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    पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि 4 मार्च, बुधवार की शाम 04 बजकर 49 मिनिट से शुरू होगी जो 5 मार्च, गुरुवार की शाम 05 बजकर 03 मिनिट तक रहेगी। चूंकि द्वितिया तिथि का सूर्योदय 5 मार्च को होगा, इसलिए इसी दिन चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।

    ये है पूजा के शुभ मुहूर्त
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    सुबह 11:11 से दोपहर 12:38 तक
    दोपहर 12:15 से 01:01 तक (अभिजीत मुहर्त)
    दोपहर 12:38 से 02:05 तक
    दोपहर 02:05 से 03:33 तक
    शाम 06:27 से रात 08:00 तक

    भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि
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    -5 मार्च, गुरुवार की सुबह भगवान चित्रगुप्त की पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।

    • किसी साफ स्थान पर लकड़ी का बाजोट स्थापित कर सफेद कपड़ा बिछाएं और भगवान चित्रगुप्त का चित्र रखें।
    • शुद्ध घी का दीपक लगाएं। चन्दन, रोली, हल्दी, पान, सुपारी आदि चीजें एक-एक करके भगवान को चढ़ाएं।
    • अपनी इच्छा अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं। पुस्तक और कलम की पूजा भी करें। पूजा के दौरान ये मंत्र बोलें-
      मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
      लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।
    • इस तरह शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने के बाद परिवाह सहित आरती भी करें।
    • इस तरह पूजा करने से भगवान चित्रगुप्त अपने भक्तों प्रसन्न होते हैं और उनकी हर इच्छा जल्दी ही पूरी करते हैं।

    चित्रगुप्त पूजा का महत्व
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    भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का गणमान्य देवता माना जाता है, जो पुण्य और पाप दोनों का हिसाब रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूजा भक्तों को बुद्धि, ज्ञान और स्पष्ट सोच की प्राप्ति कराती है। कई लोग शिक्षा और व्यापार में सफलता पाने के लिए भी यह अनुष्ठान करते हैं।

    यह दिन धार्मिकता, जवाबदेही और ज्ञान जैसे नैतिक मूल्यों की याद दिलाता है, जिनका प्रतीक भगवान चित्रगुप्त हैं।

  • मूलांक के अनुसार चुनें अपना करियर, खूब मिलेगी तरक्की

    आपको किस क्षेत्र में जाना चाहिए? मूलांक के अनुसार चुनें अपना करियर, खूब मिलेगी तरक्की
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    हर व्यक्ति के जीवन में करियर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सही करियर का चयन सफलता और संतुष्टि दोनों के लिए आवश्यक होता है. लेकिन कई बार यह निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि किस क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकते हैं. अंक ज्योतिष, जो कि संख्याओं के अध्ययन पर आधारित एक प्राचीन विद्या है, करियर चुनाव में सहायक सिद्ध हो सकती है. इसमें मूलांक (जन्मतिथि का एकल अंक) के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, गुण और संभावित करियर क्षेत्रों का विश्लेषण किया जाता है.

    मूलांक के आधार पर करियर का चयन करने से व्यक्ति की स्वाभाविक क्षमताओं और गुणों के अनुसार सफलता पाने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, मेहनत और लगन किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए आवश्यक होती है. अंक ज्योतिष एक मार्गदर्शन का साधन हो सकता है, लेकिन करियर में सफलता के लिए खुद की रुचि, कड़ी मेहनत और सही अवसरों का लाभ उठाना भी जरूरी होता है. यदि आप अपने मूलांक के अनुसार सही करियर चुनते हैं, तो आपकी संभावनाएं और भी बेहतर हो सकती हैं.

    ⚜️मूलांक के अनुसार करियर के विकल्प
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    • 1. मूलांक 1 (नेता और निर्णायक):- जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 1 होता है. ये लोग स्वभाव से नेतृत्वकारी, आत्मविश्वासी और स्वतंत्र विचारधारा वाले होते हैं. इनके लिए बिज़नेस, राजनीति, मैनेजमेंट, प्रशासन, और सरकारी सेवाओं में करियर बनाना फायदेमंद हो सकता है. ये लोग स्वभाव से बॉस बनने की योग्यता रखते हैं, इसलिए नौकरी से अधिक खुद का व्यवसाय इनके लिए बेहतर होता है.
    • 2. मूलांक 2 (संवेदनशील और रचनात्मक):- मूलांक 2 वाले लोग (जन्मतिथि: 2, 11, 20, 29) भावुक और सहृदय होते हैं. ये दूसरों की भावनाओं को अच्छी तरह समझ सकते हैं और टीम में बेहतर काम कर सकते हैं. इनके लिए काउंसलिंग, शिक्षा, मनोविज्ञान, और कला से जुड़े क्षेत्र उपयुक्त होते हैं. ऐसे लोग समाजसेवा और लोगों की मदद करने वाले पेशों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं.
    • 3. मूलांक 3 (रचनात्मक और अभिव्यक्तिपूर्ण):- जिनका मूलांक 3 होता है (जन्मतिथि: 3, 12, 21, 30), वे क्रिएटिव होते हैं और किसी भी चीज़ को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं. इनके लिए लेखन, मीडिया, मार्केटिंग, और अभिनय अच्छे करियर विकल्प होते हैं. ऐसे लोग प्रबंधन और शिक्षण कार्यों में भी सफल हो सकते हैं.
    • 4. मूलांक 4 (व्यवस्थित और मेहनती):- जन्मतिथि 4, 13, 22, 31 वाले लोग बहुत अनुशासित और मेहनती होते हैं। ये लोग किसी भी काम को गहराई से समझते हैं और उसकी बारीकियों पर ध्यान देते हैं। इनके लिए इंजीनियरिंग, अकाउंटिंग, लॉ, रिसर्च, और टेक्निकल फील्ड में करियर बनाना फायदेमंद रहेगा.
    • 5. मूलांक 5 (स्वतंत्रता पसंद करने वाले और साहसी):- जिनका जन्म 5, 14, 23 को हुआ है, वे नए-नए अवसरों को तलाशने और यात्रा करने में रुचि रखते हैं. इनके लिए ट्रैवलिंग, सेल्स, मार्केटिंग, मीडिया, और पब्लिक रिलेशंस बेहतर करियर विकल्प हैं. ये लोग नई चीज़ें सीखने और लोगों से जुड़ने में माहिर होते हैं.
    • 6. मूलांक 6 (सौंदर्य और आकर्षण प्रेमी):- जन्म 6, 15, 24 को होने वाले लोग सौंदर्य, कला, और शांति के प्रेमी होते हैं. ये फैशन, इंटीरियर डिज़ाइन, होटल मैनेजमेंट, और कला से जुड़े करियर में सफलता पा सकते हैं. इनकी आकर्षक और सौम्य व्यक्तित्व शैली इन्हें ग्लैमर इंडस्ट्री में भी आगे बढ़ने में मदद कर सकती है.
    • 7. मूलांक 7 (गूढ़ और आध्यात्मिक सोच वाले):- मूलांक 7 (जन्मतिथि: 7, 16, 25) वाले लोग गहरी सोच वाले और ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक होते हैं. इनके लिए रिसर्च, साइंस, फिलॉसफी, मेडिटेशन, और हीलिंग प्रोफेशन उपयुक्त हो सकते हैं. ये लोग मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी अच्छा कर सकते हैं.
    • 8. मूलांक 8 (मेहनती और व्यावहारिक):- जन्मतिथि 8, 17, 26 वालों को मेहनत से सफलता मिलती है. इनके लिए बिज़नेस, बैंकिंग, प्रशासन, और लॉ से जुड़े क्षेत्र अच्छे विकल्प हैं. ये लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं.
    • 9. मूलांक 9 (ऊर्जावान और जुझारू):- जिन लोगों की जन्मतिथि 9, 18, 27 होती है, वे साहसी और ऊर्जावान होते हैं. इनके लिए आर्मी, पुलिस, स्पोर्ट्स, चिकित्सा और सामाजिक कार्य बेहतरीन करियर विकल्प हैं. ये लोग हमेशा समाज की भलाई के लिए तत्पर रहते हैं और चुनौतियों से नहीं घबराते.
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  • चंद्र ग्रहण का 12 राशियों पर प्रभाव

    चंद्र ग्रहण का 12 राशियों पर प्रभाव
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    1. मेष राशि👉 आपकी राशि पर इसका प्रभाव अशुभ रहेगा चिन्ता, विकार की सम्भावना रहेगी।
    2. वृषभ राशि👉 आपकी राशि पर इसका प्रभाव अशुभ रहेगा। अपवाद, खेदजनक रह सकता है।
    3. मिथुन राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण शुभ फल दायक रहेगा सुयोगद, सौख्य, लाभकारक हो सकती है।
    4. कर्क राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण अपवाद, व्यर्थ खर्च का परिचायक बन सकता है।
    5. सिंह राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण अशुभ है। शरीर विकार, कष्टप्रदायक होने की संभावना है।
    6. कन्या राशि👉 आपकी राशि पर यह चंद्र ग्रहण अशुभ है। आर्थिक चिन्तन, अपव्यय सूचक हो सकता है।
    7. तुला राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण शुभ है। सुखद लाभद, सुयोगद हो सकता है।

    8.वृश्चिक राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण शुभ रहेगा रोग, इसके प्रभाव सुख सुविधा, शुभ फल की सम्भावना रहेगी।

    1. धनु राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ माना जा रहा है। मानद रूप में कमी, चिन्तन सूचक रह सकता है।
    2. मकर राशि👉 आपकी राशि पर भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ है। विकार, प्रपीड़ा प्रभार प्रदायक हो सकता है.

    11.कुम्भ राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ रहेगा, चिन्तन, विकार, अपवाद सूचक कलह होने की सम्भावना बढ़ेगी।

    12.मीन राशि👉 आपकी राशि पर यह चंद्र ग्रहण शुभ असर देने वाला माना जा रहा है। सुखद, फलद योग करा सकता है।

    ग्रहण का अन्य फल
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    मलेच्छ, मेकल (छतीसगढ़ के भाग के) पर्वतवासियों, बलीष्ठ जन्तुओं, राजा एवं राजाश्रितजनों, वन में निवास करने वाले मनुष्यों के लिए कष्टप्रद है-

    “सिहे पुलिन्दगणमेकलसत्त्वयुक्तान् । राजोपमान्नपतीन् वनगोचरांश्च ।।”

    क्योंकि यह ग्रहण ग्रस्तोदित है, अतः शारद्धान्यों की हानि हो-“ग्रस्तावदितास्तमितौ शारद्धान्यावनीश्वरक्षयदौ ।।”

    वारफल 👉 क्योंकि यह ग्रहण मंगलवार के दिन होगा, अतः गजादिकों को कष्ट रहे। दुर्भिक्ष, चौर, अग्नि आदि का भय और अवन्ती देशवासियों को कष्ट रहे।

    मासफल 👉 फाल्गुन पूर्णिमा का यह ग्रहण नाचने गाने वाले, क्षत्रियों, तपस्वियों, स्त्रियों के लिए कष्टप्रद है और बंग, अश्मक, अवन्त (म. प्र. का मालवा, उज्जैन) आदि देशों में राजद्रोह की सम्भावना बने।

    नक्षत्रफल 👉 पू. फा. नक्षत्र का यह ग्रहण शिल्पीजनों, खरीद-फरोख्त का व्यापार करने वाले लोगों, कुवांरी कन्याओं क लिए पीड़ाप्रद है। कपास, रुई, सूत, कपड़ा, सब प्रकार के तेल, नमक महंगे हों।

    अयनफल 👉 यह ग्रहण उत्तरायण में घटित हो रहा है, अतः आगामी मासों में सवर्ण (ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य) लोगों को राजनैतिक परेशानी रहे। गोजाति पर निर्दयतापूर्ण व्याहार हो। चना, गेहूं, जौ एवम् दालवाना महंगे हों।

    चन्द्रग्रहण पर बाधा नाशक खास उपाय
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    चंद्र ग्रहण के शुभ प्रभाव प्राप्त करने के उपाय धर्म शास्त्रों और वेदों में ग्रहण के दौरान बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम नहीं बताया गया है ।

    1👉 चीटियों को पिसा हुआ चावल व आटा डालें।

    2👉 मोती, चांदी, चावल, मिश्री, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करें।

    3👉 चन्द्रमा को मन और मां का कारक माना गया है, जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में बैठा हो उसके स्वामी अनुसार दान-पुण्य करना चाहिए।

    4👉 चन्द्र वृष राशि के लिए शुभ और वृश्चिक राशी के लिए अशुभ होता है, जब चन्द्र जन्म कुण्डली में उच्च भाव का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुओं का दान नही करना चाहिए।

    5👉 अगर चन्द्र कुण्डली के दूसरे और चौथे भाव में हो तो चावल चीनी दूध का दान न करें।

    6👉 यदि वृश्चिक राशि में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए धार्मिक स्थल या शमशान के पास आम जनता के लिए प्याउ (पानी की टंकी) बनवाएं या किसी मिट्टी के बर्तन में पक्षियों के लिये पानी रखें।

    7👉 चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीड़ित के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें अपने श्री इष्ट देवता जाप करें।

    8👉 यदि आपका व्यवसाय ठीक नहीं चल रहा है तो ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।

    9👉 जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें ।

    !! ऊँ कीली कीली स्वाहा !!
    इसके बाद इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को शांत कर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें। इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।

    10👉 तंत्र शास्त्र के अनुसार चन्द्रग्रहण किया गया प्रयोग बहुत प्रभावी होता है और इसका फल भी तुरंत प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी ।और आपको धन लाभ होगा।

    11 उपाय👉 चंद्र ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें और ग्रहण काल शुरु होने पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठ जाएं।
    अपने सामने चौकी पर एक थाली में केसर का स्वास्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें। अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-

    मन्त्र👉 सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।
    पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।

    मंत्र जप के बाद इस पूरी सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।
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  • केले की जड़ का तांत्रिक उपाय

    🌿 केले की जड़ का तांत्रिक उपाय 🌿

    रवि पुष्य योग में करें यह अद्भुत प्रयोग, पुखराज जैसा फल देगी केले की जड़

    🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ गं गणपतये नमः।यह उपाय इतना प्रभावी है कि यह जड़ आपके लिए बृहस्पति के रत्न पुखराज जैसा काम करेगी। जिन लोगों को पुखराज धारण करने का लाभ नहीं मिल पाता या जो पुखराज नहीं धारण कर सकते, उनके लिए यह उपाय वरदान से कम नहीं है। यह उपाय विशेष रूप से रवि पुष्य योग के दिन किया जाता है।

    रवि पुष्य योग तब बनता है जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है। यह योग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।।

    केले के पेड़ का हमारे सनातन धर्म में बहुत महत्व है। केले का पेड़ भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का प्रतीक माना जाता है। इसकी जड़ में अपार शक्ति होती है। जब इसे सही विधि और सही योग में लिया जाए, तो यह पुखराज रत्न के समान फल देती है। यह जड़ विवाह योग बनाने से लेकर हर मनोकामना पूर्ति में सहायक होती है। जो लोग किसी कारणवश पुखराज रत्न नहीं धारण कर पाते, उनके लिए यह केले की जड़ उसी के समान काम करती है। इसे धारण करने से बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    🌟 रवि पुष्य योग से एक दिन पहले क्या करें

    सबसे पहले रवि पुष्य योग के दिन से एक दिन पहले आपको केले के पेड़ के पास जाना है। वहाँ जाकर विनम्र भाव से पेड़ को न्योता देना है। यह न्योता देते समय पूरी श्रद्धा और विश्वास रखना बहुत जरूरी है। हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी है –

    “हे महाराज! मैं कल आपको लेने आऊँगा/आऊँगी। अपने अमुक कार्य की सिद्धि हेतु आपकी जड़ लेने आऊँगा/आऊँगी।”

    जिस कार्य की सिद्धि चाहिए, उसका नाम लेकर संकल्प करना है। यह संकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। आपको पूरे मन से यह भाव रखना है कि कल आप केले के पेड़ की जड़ को अपने कार्य की सिद्धि के लिए लेने आएंगे। यह न्योता देते समय आसपास कोई न हो तो बेहतर है। चुपचाप, एकांत में यह क्रिया करें। यह भी ध्यान रखें कि जिस केले के पेड़ को आप न्योता दे रहे हैं, वह स्वस्थ और मजबूत हो। किसी रोगग्रस्त या सूखे पेड़ को न चुनें।

    🌱 रवि पुष्य योग के दिन क्या करें

    अगले दिन रवि पुष्य योग के दिन आपको अकेले जाना है। किसी को साथ न ले जाएं। पूरी तरह अकेले ही यह कार्य करें। जाते समय और वहाँ रहते हुए किसी से बात न करें। पूरी तरह चुपचाप रहें। किसी को न बताएं कि आप कहाँ जा रहे हैं और क्या करने जा रहे हैं। यह गुप्त रखें।

    तांत्रिक उपायों में गोपनीयता बहुत महत्वपूर्ण होती है। जितना गुप्त रखेंगे, उतना ही अधिक फल मिलेगा। केले के पेड़ के पास पहुँचकर प्रार्थना करें और फिर जड़ को उखाड़ लें। जड़ उखाड़ते समय भी मन में अपने कार्य की सिद्धि का भाव रखें। ध्यान रहे कि जड़ को नुकसान न पहुंचे, पूरी जड़ सही सलामत निकले।

    जड़ निकालने के बाद वापस आते समय पीछे मुड़कर न देखें। यह बहुत महत्वपूर्ण है। चाहे कोई आवाज आए या कुछ भी हो, पीछे मुड़कर न देखें। सीधे घर आ जाएँ। जितनी देर में गए हैं, उससे आधे समय में वापस आने का प्रयास करें। रास्ते में किसी से बात न करें, कहीं रुकें नहीं। सीधे घर पहुंचें।

    🏠 घर आकर पूजा विधि

    घर आकर जड़ की पूजा करें। यह पूजा बहुत महत्वपूर्ण है। 16 उपचार यानी षोडशोपचार से पूजा करें यदि संभव हो। 16 उपचार में ये सब शामिल होते हैं –

    ✅ आसन – जड़ को आसन पर विराजमान करें
    ✅ स्वागत – जड़ का स्वागत करें
    ✅ पाद्य – पैर धोने के लिए जल अर्पित करें
    ✅ अर्घ्य – हाथ धोने के लिए जल अर्पित करें
    ✅ आचमन – मुख शुद्धि के लिए जल अर्पित करें
    ✅ स्नान – जड़ को स्नान कराएं
    ✅ वस्त्र – लाल या पीला वस्त्र अर्पित करें
    ✅ गंध – चंदन का लेप लगाएं
    ✅ पुष्प – फूल चढ़ाएं
    ✅ धूप – धूप दिखाएं
    ✅ दीप – दीप जलाएं
    ✅ नैवेद्य – भोग लगाएं
    ✅ ताम्बूल – पान का बीड़ा अर्पित करें
    ✅ नीराजन – आरती उतारें
    ✅ मंत्रपुष्प – मंत्रों से पुष्प अर्पित करें
    ✅ प्रदक्षिणा – परिक्रमा करें

    यदि 16 उपचार संभव न हों तो जड़ को स्नान कराएं। पहले जल से स्नान कराएं, फिर दही से, फिर घी से, फिर शहद से और अंत में गुड़ के पानी से स्नान कराएं। इसके बाद जड़ का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाया जाता है। फिर जड़ पर चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं और मीठा भोग लगाएं। पूजा के दौरान अपने कार्य की सिद्धि की प्रार्थना करें। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि से करें।

    💪 जड़ धारण करने की विधि

    पूजा के बाद जड़ का एक छोटा टुकड़ा लें। यह टुकड़ा इतना छोटा हो कि आप इसे अपने हाथ में बांध सकें। बाकी जड़ को किसी पवित्र स्थान पर रख दें या किसी बहते पानी में प्रवाहित कर दें। पुरुष इस टुकड़े को दाएँ हाथ में धारण करें। महिलाएं इसे बाएँ हाथ में धारण करें।

    इसे धारण करने से पहले इसे लाल कपड़े में लपेट लें और फिर हाथ में बांध लें। इसे धारण करते समय फिर से अपने कार्य की सिद्धि का संकल्प करें। यह जड़ आपके हाथ में पुखराज की तरह काम करेगी। इसे धारण करने से बृहस्पति देव की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसे कम से कम 21 दिन तक लगातार धारण करें। इसके बाद भी आप चाहें तो धारण कर सकते हैं।

    ✨ इस उपाय के अद्भुत लाभ

    इस जड़ को धारण करने से कई लाभ होते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह जड़ बृहस्पति के रत्न पुखराज जैसा काम करती है। पूजा का जो फल जल्दी नहीं मिलता, वह जल्दी मिलने लगता है। विवाह योग्य व्यक्ति विवाह योग्य बनते हैं और उनके विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए यह उपाय बहुत प्रभावी है।

    ✅ विवाह योग बनता है
    ✅ पूजा का फल जल्दी मिलता है
    ✅ बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं
    ✅ व्यापार में लाभ होता है
    ✅ नौकरी में तरक्की मिलती है
    ✅ संतान सुख की प्राप्ति होती है
    ✅ आर्थिक समृद्धि आती है
    ✅ जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
    ✅ मनोकामनाएं पूरी होती हैं

    इसके अलावा व्यापार में लाभ, नौकरी में तरक्की, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि आदि में भी यह जड़ सहायक होती है। जो लोग किसी कार्य में सफलता नहीं पा रहे, उनके लिए यह जड़ रास्ता खोलती है। यह जड़ नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा करती है और घर में सुख-शांति लाती है।

    🙏 महत्वपूर्ण सुझाव

    यह उपाय करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। सबसे पहले तो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यह उपाय करें। बिना विश्वास के किया गया कोई भी कार्य फलदायी नहीं होता। इस उपाय को करते समय पूरी गोपनीयता बनाए रखें। किसी को न बताएं कि आप यह उपाय कर रहे हैं।

    ✅ पूरी श्रद्धा और विश्वास रखें
    ✅ गोपनीयता बनाए रखें
    ✅ नियमितता का पालन करें
    ✅ सात्विक भोजन करें
    ✅ ब्रह्मचर्य का पालन करें
    ✅ क्रोध से दूर रहें
    ✅ किसी की निंदा न करें

    सात्विक भोजन करें, तामसिक चीजों से दूर रहें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। क्रोध से दूर रहें और किसी की निंदा न करें। नियमितता का पालन करें। यह उपाय करते समय अपने इष्ट देव का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करें कि आपका कार्य सफल हो।

  • होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ


    🌼 होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ

    1. उत्सव का संदर्भ
    • होली फाल्गुनी पूर्णिमा (फाल्गुन मास की पूर्णिमा) पर मनाई जाती है।
    • होलीका दहन परंपरागत रूप से पूर्णिमा की रात को किया जाता है।
    • परंतु इसे भद्रा काल और ग्रहण काल में नहीं करना चाहिए।

    1. भद्रा विचार
    • प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रथम करण भद्रा होता है।
    • विश्टि करण में भद्रा तब होती है जब चंद्रमा इन राशियों में हो:• कर्क (4), सिंह (5), कुंभ (11), मीन (12)।
    • इन राशियों में भद्रा पृथ्वी (प्रिथ्वी लोक) में रहती है।
    • 3 मार्च 2026 को चंद्रमा सिंह राशि (पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र) में होगा → भद्रा पृथ्वी पर होगी।
    • शास्त्र (निर्णय सिंधु) के अनुसार भद्रा काल में होलीका दहन वर्जित है, अन्यथा रोग, विनाश और हानि जैसी विपत्तियाँ आती हैं।

    1. ग्रहण विचार
    • इस वर्ष पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण भी है।
    • भारत में यह ग्रहण चंद्र उदय के समय होगा → इसे ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहते हैं।
    • ग्रहण समय: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न – 6:48 अपराह्न (IST)।
    • पूर्ण ग्रहण काल: 4:34 अपराह्न IST।
    • अधिकांश भारत में दृश्य (पश्चिमी भागों को छोड़कर)।
    • यह आंशिक ग्रहण होगा → चंद्रमा पृथ्वी की छाया (Umbra) से आंशिक रूप से गुज़रेगा।

    1. खगोलीय समय
    • फाल्गुनी पूर्णिमा: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 5:06 अपराह्न।
    • भद्रा काल: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 4:27 प्रातः।
    • ग्रहण काल: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न → 6:48 अपराह्न।
    • सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पूर्व आरंभ → 3 मार्च, 6:20 प्रातः।
    • वैदिक सूर्योदय (लखनऊ): 3 मार्च, 6:28 प्रातः।

    1. अनुशंसित अनुष्ठान समय
    • होलीका दहन:• भद्रा समाप्ति के बाद (4:27 प्रातः)
    • सूतक प्रारंभ से पहले (6:20 प्रातः)
    • → 3 मार्च 2026, 4:27 प्रातः – 6:20 प्रातः IST
    • रंगोत्सव (होली खेलना):• ग्रहण दिवस से बचना चाहिए।
    • → 4 मार्च 2026 को होली खेलें।

    ✅ सारांश

    • होलीका दहन: 3 मार्च 2026, प्रातः 4:27 – 6:20 बजे।
    • रंगोत्सव (होली खेलना): 4 मार्च 2026।
    • इन समयों का पालन करने से भद्रा काल और ग्रहण सूतक से बचाव होगा।

  • 2 या 3 मार्च – होलिका दहन कब होगा,

    🕉️2 या 3 मार्च – होलिका दहन कब होगा, क्या चंद्र ग्रहण 2026 की वजह से बदल जाएगी डेट, यहां जानें होलिका दहन 2026 की तारीख🕉️
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    ⭕होलिका दहन 2026 कब है, कब है: होलिका दहन हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पर्व है, जिसे फाल्गुन पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस दिन भक्त प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु की क्रूरता की कथा याद की जाती है, जिसमें अहंकार और अधर्म का अंत होता है।

    मान्यता है कि अग्नि में जलने से नकारात्मक ऊर्जा, दोष और पुराने कष्ट समाप्त हो जाते हैं, इसलिए लोग होलिका की आग में गेहूं की बालियां, उपले और नारियल अर्पित करते हैं। ऐसे तो होलिका दहन को होली के त्योहार से एक दिन पहले मनाया जाता है। लेकिन 2026 में होलिका दहन की तिथि पर ग्रहण का साया है। यहां जानें कि होलिका दहन 2026 में कब है, 2026 में होलिका दहन का पर्व कब मनाया जाएगा।

    ⚜️2026 में होलिका दहन कब है
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    पंचांग के अनुसार, होलिका दहन का पर्व फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर आता है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। ऐसे में तिथि के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का चांद 3 मार्च को दिखेगा। लेकिन इस तारीख में चंद्र ग्रहण लग रहा है और शाम के समय भद्रा का साया भी है। ऐसे में अधिकांश पंडित और ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि 2026 में होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाना शास्त्र अनुसार शुभ रहेगा।

    हालांकि कुछ स्थानीय पंचांगों में 3 मार्च के शाम का समय भी शुभ बताया गया है। लेकिन ग्रहण वाले दिन पूजा और अनुष्ठान नहीं करने का नियम देखते हुए होलिका दहन 2 मार्च 2026, दिन सोमवार को करना सही माना जा रहा है।

    ⚜️चंद्र ग्रहण की वजह से क्यों बदल रही है होलिका दहन की डेट
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    3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भारत में दिखाई देगा। यह भारतीय समय के अनुसार 3:20 दोपहर से दिखना शुरू होगा। यह लगभग 5 घंटे 39 मिनट तक का ग्रहण चक्र रहेगा, जिसमें आंशिक और पूर्ण दोनों चरण शामिल हैं। चांद निकलते ही ग्रहण का कुछ हिस्सा लगभग 6:26 PM से 6:46 PM (भारतीय समय) के बीच दिखाई देगा। इस दौरान चांद थोड़ा धुंधला या ढका हुआ नजर आ सकता है क्योंकि वह पहले ही पृथ्वी की छाया में कुछ हिस्सा में है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल को भी माना जाता है। मार्च 2026 में लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक समय सुबह 06:20 बजे से लेकर शाम 06:46 बजे तक रहेगा।

    चूंकि होलिका दहन का समय भी संध्या का ही माना जाता है, इस वजह से इस तारीख पर दिखने वाला चांद ग्रहण से दूषित माना जाता है। वहीं सूतक काल का भी प्रभाव रहेगा। यह समय पूजा पाठ या किसी भी शुभ काम के लिए सही नहीं माना जाता है। यही वजह है कि ज्योतिष के जानकार 3 मार्च को होलिका दहन नहीं मनाने की सलाह दे रहे हैं।

    हालांकि कई जानकारों का ये भी कहना है कि सूतक के समाप्त होने के बाद 3 मार्च को 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक होलिका दहन किया जा सकता है।

    ⚜️होलिका दहन 2026 डेट एंड टाइम
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    अगर आप 2 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो इसके लिए शाम को 6:30 बजे के बाद का समय चुन सकते हैं। इस बार होलिका दहन को 2 मार्च 2026 की शाम को शुभ मुहूर्त में करना बेहतर समझा जा रहा है। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इसका शुभ समय लगभग शाम 6:28 बजे से रात 8:52 बजे तक (IST) का है, जब प्रदोष काल और पूर्णिमा तिथि दोनों अनुकूल रहते हैं, इसलिए इस समय के बीच होलिका दहन करना शुभ फलदायी माना जाता है।

    अगर आप 3 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक यह पूजन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने एरिया के पंडित जी या जानकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ⚜️होलिका दहन पर क्या किया जाता है
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    होलिका दहन पर शाम के समय तय शुभ मुहूर्त में होलिका जलाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। आग जलाने से पहले लोग होलिका की परिक्रमा करते हैं और घर-परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं। कई जगह गोबर के उपले, लकड़ी, सूखी घास के साथ गेहूं की बालियां, चना, नारियल या नई फसल अर्पित की जाती है, ताकि आने वाला साल समृद्ध रहे। होलिका की अग्नि में अहंकार, डर और पुराने गिले-शिकवे छोड़ने का भाव रखा जाता है। दहन के बाद कुछ लोग राख को तिलक के रूप में लगाते हैं, जिसे सुरक्षा और शुभता का संकेत माना जाता है। कुल मिलाकर, होलिका दहन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मन को हल्का करने और नई शुरुआत का भाव जगाने का पर्व है।
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  • पूजा सुपारी के 10 ऐसे उपाय

    🌹पूजा सुपारी के 10 ऐसे उपाय, जो बदल देंगे आपके मुसीबत के दिन
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    जब सुपारी की विधिवत पूजा की जाती है तो वह चमत्कारी हो जाती है। अगर आप इस चमत्कारी सुपारी को हमेशा अपने पास रखते हैं तो जीवन में कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है। आइए जानें सुपारी के 10 सटीक उपाय

    1. पूजा की सुपारी पर जनेऊ चढ़ाकर जब पूजा जाता है तो यह अखंडित सुपारी गौरी गणेश का रूप बन जाती है। इस सुपारी को तिजोरी में रखने पर घर में लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करने लगती हैं और इससे सौभाग्य आने लगता है।
    2. पूजा में इस्तेमाल की गई सुपारी को तिजोरी में रखना भी लाभदायक होता है। सुपारी को धागे में लपेटें और अक्षत, कुमकुम लगाकर पूजा जरूर कर लें। पूजा करके तिजोरी में रखी गई सुपारी बहुत लाभदायक होती है।
    3. व्यापार में तरक्की के लिए भी सुपारी बहुत सहायक होती है। माना जाता है कि शनिवार की रात पीपल के पेड़ की पूजा करके सुपारी और उसके साथ एक रुपये का सिक्का रखें। अगले दिन उस पेड़ का पत्ता तोड़कर लाएं उस पर सुपारी रखें और इसे अपनी तिजोरी में रखें इससे व्यापार में बढ़ोत्तरी होती है।
    4. पान का पत्ता रखें उस पर सिन्दूर में घी मिलाकर स्वस्तिक बनाएं और उस पत्ते पर कलावे में लपेटी हुई सुपारी रख कर पूजा करनी चाहिए। यह उपाय घर में सफलता के लिए द्वार खोलता है।
    5. अगर आपका कोई काम बनते बनते रह जाता है या आपको किसी कार्य में लगातार असफलता मिल रही है तो जब भी उस कार्य को करने जाए तो एक लौंग और सुपारी अपने पास रख लिया करें। काम के समय लौंग को अपने मुंह में रख लें और उसे चूसें। सुपारी घर आने के बाद वापस गणेशजी के फोटो के सामने रख दें। इससे रूका हुआ काम यकीनन पूरा होगा।
    6. सुपारी को चांदी की डिबिया में अबीर लगाकर किसी भी पूर्णिमा के दिन पूजा घर में रखें तो घर में मंगल कार्य जल्दी होते हैं।
    7. हल्दी, कुंकुम् और चावल लगाकर सुपारी पर मौली लपेटें और इसे किसी भी गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में छुपाकर आ जाएं। इससे अविवाहित कन्या की शादी के योग बनते हैं। जब रिश्ता पक्का हो जाए तो सुपारी को शादी तक घर में रखें। फिर जलाशय में विसर्जित कर दें।
    8. अगर घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो उसके निर्विघ्न संपन्न होने के लिए सुपारी को बोलकर लाल कपड़े में बांधकर छुपा दें। जब कार्य अच्छे से संपन्न हो जाए तो यह सुपारी किसी गणेश मंदिर में जाकर रख दें।
    9. घर से जब कोई तीर्थ यात्रा पर जाए तो उसके सकुशल वापिस आने तक तुलसी के गमले में सुपारी गाड़ दें। आने पर उसे धोकर किसी भी मंदिर में चढ़ा दें।
    10. सुपारी को 7 बार अपने ऊपर से उतार कर हवन कुंड में डालने से हर तरह की अला-बला दूर होती है।
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  • चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट ज्योतिष उपाय

    चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट ज्योतिष उपाय करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और शुभता प्राप्त की जा सकती है। यहाँ राशि अनुसार उपाय दिए गए हैं👇🌝🕉️

    मेष राशि
    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं ओम स्वाहा मंत्र का 108 बार जाप करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    वृषभ राशि
    ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम: मंत्र का जाप करें और सफेद वस्तुओं का दान करें।

    मिथुन राशि
    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः मंत्र का जाप करें और माता दुर्गा को फल चढ़ाएं।

    कर्क राशि
    शिवजी, राहु और चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें और चावल का दान करें।

    सिंह राशि
    आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।

    कन्या राशि
    गणेश चालीसा का पाठ करें और ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम: मंत्र का जाप करें।

    तुला राशि
    ॐ ऐं क्लीं सौमाय नमाय नमः मंत्र का जाप करें और लक्ष्मी स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

    वृश्चिक राशि
    ॐ क्राम क्रीम क्रौम सह भौमाय नमः मंत्र का जाप करें और हनुमान चालीसा पढ़ें।

    धनु राशि
    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।

    मकर राशि
    ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें और शनि चालीसा का पाठ करें।

    कुंभ राशि
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: मंत्र का जाप करें।

    मीन राशि
    ॐ ह्लीं दुं दुर्गाय: नम: मंत्र का जाप करें और पीले फल या मिठाई का दान करें

  • होलाष्टक के दिनों में जाप कैसे करें

    होलाष्टक के दिनों में जाप कैसे करें

    होलाष्टक के दिनों में जाप करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

    1. नरसिंह मंत्र का जाप: होलाष्टक के दिनों में नरसिंह मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। आप “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
    2. समय और तिथि: होलाष्टक 23 फरवरी से 3 मार्च तक है, इस दौरान शाम के समय जाप करना उत्तम माना जाता है।
    3. विधि: जाप करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद, घर में तिल के तेल का दीपक जलाएं और पीली सरसों को एक कटोरी में रखें।
    4. जाप की प्रक्रिया: नरसिंह मंत्र का जाप करते हुए, आप अपनी समस्याओं और इच्छाओं के बारे में सोच सकते हैं। जाप के बाद, पीली सरसों को एक छोटी सी पोटली में बांधकर अपने साथ रख सकते हैं और बाद में इसे मंदिर में रख दें।
    5. नियम और सावधानियां: जाप के दौरान शुद्धता और संयम का पालन करें। तामसिक भोजन से बचें और जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें।
  • राम नवमी तिथि 2026:

    राम नवमी तिथि 2026: इस बार क्यों राम नवमी मानी जा रही है खास, समय और संयोग पर एक नजर🌹
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    ⭕हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। इस साल 19 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। यह पर्व जगत की देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है।

    साथ ही देवी मां को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के लिए नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

    सनातन शास्त्रों में निहित है कि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ है। इसके लिए हर साल चैत्र माह में राम नवमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विशेष पूजा की जाती है। वहीं, पूजा समापन होने तक व्रत रखा जाता है। आइए, राम नवमी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

    ⚜️राम नवमी शुभ मुहूर्त
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    वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को दिन 11 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण मध्याह्न बेला में हुआ था। इसके लिए 26 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी।

    🪔राम नवमी पूजा समय
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    ज्योतिषियों की मानें तो राम नवमी तिथि यानी 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक पूजा का शुभ समय है। वहीं, दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मध्याह्न बेला का समय है। आसान शब्दों में कहें तो दोपहर 12 बजकर 27 मिनट भगवान श्रीराम का अवतरण समय है। साधक इस समय में भगवान श्रीराम की पूजा कर सकते हैं।

    ⚜️राम नवमी शुभ योग
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    ज्योतिषियों की मानें तो रामनवमी के दिन शोभन और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही रवि और शिववास योग का भी संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान श्रीराम की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलेगी।
    🚩#रामरामजी🚩
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