विभिन्न स्थानों पर अग्निवास का फल-
- पृथ्वी पर अग्नि का वास सुखकारी होता है।
- आकाश में अग्नि का वास कष्टकारी होता है।
- पाताल में अग्नि का निवास धन- सम्पत्ति का नाश करता है।
किन वस्तुओं से होम करने से क्या लाभ होता है
- शान्ति की स्थापना हेतु पीपल के पत्ते, गिलोय अथवा घी के द्वारा होम करना चाहिए।
- शारीरिक पुष्टता हेतु बिल्वपत्र, चमेली का पुष्प अथवा घी से हवन करना चाहिए।
- सुन्दर स्त्री प्राप्ति हेतु कमल पुष्प से हवन करना चाहिए।
- आकर्षण हेतु पलाश पुष्प से हवन करना श्रेयस्कर है।
किस कार्य में कौन से हवन कुण्ड का उपयोग करना चाहिए
- शान्ति कार्यों में स्वर्ण, रजत अथवा तांबे का हवन कुण्ड उत्तम है।
- अभिचार- (अनिष्ट कार्यों की सिद्धि के लिए जादू, टोना आदि) लोहे का हवन कुण्ड उत्तम है।
- उच्चाटन- (भूत, प्रेत, डाकिनी के उत्पात या कुदृष्टि से उत्पन्न रोगों के निवारण के लिए) मिट्टी का हवन कुण्ड होना चाहिए।
किस क्रिया में किस नाम की अग्नि का आवाहन किया जाना चाहिए
- शान्ति कार्यों में वरदा नामक की अग्नि स्थापना की जाती है।
- विवाह में योजक नामक अग्नि का आवाहन होता है।
- पूर्णाहुति में (मृडा) शतमंगल नाम की अग्नि का आवाहन किया जाता है।
- वशीकरण में कामद नाम की अग्नि की स्थापना होती है।
- अभिचार कार्यों में क्रोध नाम की अग्नि की स्थापना होती है।
- इसके अलावा भी और भी अग्नियों का नाम है जो विभिन्न संस्कारों में आवाहन किया जाता है।
अग्नि स्थापन का मन्त्र
ॐ अग्निं दूतं पुरो दधे हव्यवाहमुप ब्रुवे। देवां२आ सादयादिह।
इस वैदिक मन्त्र के द्वारा अग्नि नारायण का आवाहन किया जाता है।
अग्नि का ध्यान मन्त्र
ॐ चत्वारि श्रृङ्गा त्रयो अस्य पादा द्वे शीर्षे सप्त हस्तासो अस्य।
त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति महो देवो मर्त्यां२ आविवेश।
ॐ मुखं य: सर्वदेवानां हव्यभुक् कव्यभुक् तथा।
पितृणां च नमस्तस्मै विष्णवे पावकात्मने।।
ऐसा ध्यान करते हुए – ‘ॐ अग्ने शाण्डिल्य गोत्र मेषध्वज प्राङ्मुख मम सम्मुखो भव‘।

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