*श्री दुर्गाजी के 32 नाम!!*
ॐ अस्य श्रीदुर्गा द्वात्रिंशंन्नाम स्त्रोत्रमंत्रस्य शिव ऋषि: अनुष्टुप छन्दः श्री दुर्गा देवता निज बीजं, मन्त्रः कीलकं, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं दारिद्रय दुर्भाग्य रोग शोक दुःख विनाशार्थे सर्वाशापूर्णार्थे च तददिव्य द्वात्रिंशंन्नाम मन्त्र जपे विनियोगः ।।
ॐ दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।
दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी
दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला
दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता
दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी
दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी
दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी
दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी
नामावली ममायास्तु दुर्गया मम मानसः
पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः
पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः।
देह शुद्धि के बाद कुश या कंबल के आसन पर बैठ कर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके घी का दिया जलाकर यदि इन नामो का जाप किया जाए तो व्यक्ति विनियोग में वर्णित हर भय से मुक्त हो जाता है । इस का जाप 5/11/21 बार करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है।
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