नित्य योग (Nithya Yoga)

पंचांग में “योग” वह अंग है जो चंद्र और सूर्य की ज्योतिषीय स्थिति के योग (जोड़) पर आधारित होता है। इसे नित्य योग (Nithya Yoga) कहते हैं। कुल मिलाकर 27 योग होते हैं, प्रत्येक 13°20′ में विभाजित। नीचे प्रमुख 27 योग नामों के साथ उनके सारांश दिए गए हैं:

🔢 27 नित्य योग – नाम एवं अर्थ

  1. विश्कुम्भ (Vishkumbha) – संपन्नता, धन‑समृद्धि (समृद्धि, विजयी)
  2. प्रीति (Preeti) – प्रेम, आनंद, सामाजिक लोकप्रियता
  3. आयुष्मान (Ayushman) – दीर्घायु, स्वास्थ्य, ऊर्जा
  4. सौभाग्य (Saubhagya) – भाग्यशाली, सौभाग्य की स्थिति
  5. शोभन (Shobhana) – आकर्षक, सुंदरता, विलासिता
  6. अतिगण्ड (Atiganda) – बाधा, जोखिम, संघर्ष
  7. सुकर्मा (Sukarma) – पुण्य, दानशील, उदारता
  8. धृति (Dhriti) – दृढ़ता, धैर्य, संपन्नता
  9. शूल (Shoola) – कटुता, तर्क, विवाद †
  10. गण्ड (Ganda) – चिंता, तनाव, अक्षम सिद्धांत
  11. वृद्धि (Vriddhi) – वृद्धि और प्रगति
  12. ध्रुव (Dhruva) – स्थिरता, अनुकूल योग
  13. व्याघात (Vyaghata) – बाधा, अवरोध
  14. हर्षण (Harshana) – आनन्द, उत्साह
  15. वज्र (Vajra) – क्रियाशील, दृढ, साहस
  16. सिद्धि (Siddhi) – सफलता, सिद्धि
  17. व्यतीपात (Vyatipata) – आपदा, संकट
  18. वारिण (Variyan) – आदरणीय, सम्मानीय
  19. परिघ (Parigha) – प्रतिबंध, अड़चन
  20. शिव (Shiva) – शुभ, कल्याणकारी
  21. सिद्ध (Siddha) – सिद्ध, सिद्धिकारक
  22. साध्य (Sadhya) – साध्य, समाधानशील
  23. शुभ (Shubha) – शुभ, सौभाग्यकारी
  24. शुक्ल (Shukla) – उज्जवल, शुभ–प्रवण
  25. ब्रह्म (Brahma) – पारलौकिक, बृहद प्रभाव
  26. इन्द्र (Indra) – प्रमुख, अभिजात्य योग
  27. वैधृति (Vaidhrti) – महान संकट, भारी दोष योग

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: योग ज्योतिषीय गणना पर आधारित हैं, जैसे द्वितीय कोणों में ‘महापात’ आदि अवस्थाएँ ।

🧩 उपयोग और प्रभाव

मूल चार्ट में (जन्मकुंडली, प्रश्न, गोचर): व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, भाग्य, अनुकूल‑विरोधी समय का आकलन।

मुहूर्त में: विशेष योग जैसे सिद्धि, सिद्ध, शुभ, शिव आदि को शुभ कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश आदि) हेतु चुना जाता है।

इनमें अनेकों योग: जैसे अमृत‑सिद्धि योग, मृत्यु‑योग, मरन‑योग भी पंचांग में देखे जाते हैं ।

📊 संक्षेप तालिका

योग नाम सारांश

सिद्धि, सिद्ध, शुभ, शिव, साध्य आदि अत्यंत शुभ, कार्य में सफलता की संभावना

आयुष्मान, सौभाग्य, सुकरमा, धृति आदि सामान्यतः सकारात्मक, लाभदायक

अतिगण्ड, व्याघात, परिघ, वैधृति, व्यतीपात आदि चुनौतिपूर्ण या आपदाजनक समय

इस प्रकार पंचांग में दिए गए 27 नित्य योग समय‑समय पर दिनचर्या के निर्णयों एवं ज्योतिषीय मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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