मानव जीवन के लिए अरिष्ट कारक ग्रहों का विवेचन –

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मानव जीवन के लिए अरिष्ट कारक ग्रहों का विवेचन –
ग्रह रहित अष्टम भाव पर जिस भी बलवान ग्रह की दृष्टि होती है उस ग्रह के धातु अथवा वात, पित्त, कफ आदि दोषों के प्रकोप से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
यथा – ग्रह और उनकी धातुएं-
सूर्य — पित्त प्रधान
चंद्रमा — वात/ कफ
मंगल — पित्त प्रधान
बुध — कफ वात पित्त
गुरु — कफ़/ वात
शनि — वात प्रधान
काल पुरुष के अष्टम स्थान स्थित मे‌षादि राशि का जो कथित अंग स्थान है, शरीर के उस अंग में उस राशि के या राशि अधिपति ग्रह के कथित धातु- ताम्र और लोहा आदि से चोट आदि लगने से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
अधिक संख्या बलशाली ग्रहों की अष्टम भाव पर दृष्टि से उन सभी ग्रहों के कथित धातु दोष विशेष से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
अष्टम भाव स्थित ग्रह का प्रभाव –
सूर्य से अग्नि कोप
चंद्र से जल द्वारा
मंगल से अस्त्र-शस्त्र द्वारा
बुध से वात पित्त कफ आदि दोष उत्पन्न रोग द्वारा
गुरु से ऐसे रोग से मृत्यु होती है की रोग का ज्ञान ही नहीं हो पाता‌।
शुक्र से तृषा पिपासा द्वारा
शनि से क्षुधा पीड़ित होकर जातक की मृत्यु होती है।

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