होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ


🌼 होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ

  1. उत्सव का संदर्भ
  • होली फाल्गुनी पूर्णिमा (फाल्गुन मास की पूर्णिमा) पर मनाई जाती है।
  • होलीका दहन परंपरागत रूप से पूर्णिमा की रात को किया जाता है।
  • परंतु इसे भद्रा काल और ग्रहण काल में नहीं करना चाहिए।

  1. भद्रा विचार
  • प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रथम करण भद्रा होता है।
  • विश्टि करण में भद्रा तब होती है जब चंद्रमा इन राशियों में हो:• कर्क (4), सिंह (5), कुंभ (11), मीन (12)।
  • इन राशियों में भद्रा पृथ्वी (प्रिथ्वी लोक) में रहती है।
  • 3 मार्च 2026 को चंद्रमा सिंह राशि (पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र) में होगा → भद्रा पृथ्वी पर होगी।
  • शास्त्र (निर्णय सिंधु) के अनुसार भद्रा काल में होलीका दहन वर्जित है, अन्यथा रोग, विनाश और हानि जैसी विपत्तियाँ आती हैं।

  1. ग्रहण विचार
  • इस वर्ष पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण भी है।
  • भारत में यह ग्रहण चंद्र उदय के समय होगा → इसे ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहते हैं।
  • ग्रहण समय: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न – 6:48 अपराह्न (IST)।
  • पूर्ण ग्रहण काल: 4:34 अपराह्न IST।
  • अधिकांश भारत में दृश्य (पश्चिमी भागों को छोड़कर)।
  • यह आंशिक ग्रहण होगा → चंद्रमा पृथ्वी की छाया (Umbra) से आंशिक रूप से गुज़रेगा।

  1. खगोलीय समय
  • फाल्गुनी पूर्णिमा: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 5:06 अपराह्न।
  • भद्रा काल: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 4:27 प्रातः।
  • ग्रहण काल: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न → 6:48 अपराह्न।
  • सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पूर्व आरंभ → 3 मार्च, 6:20 प्रातः।
  • वैदिक सूर्योदय (लखनऊ): 3 मार्च, 6:28 प्रातः।

  1. अनुशंसित अनुष्ठान समय
  • होलीका दहन:• भद्रा समाप्ति के बाद (4:27 प्रातः)
  • सूतक प्रारंभ से पहले (6:20 प्रातः)
  • → 3 मार्च 2026, 4:27 प्रातः – 6:20 प्रातः IST
  • रंगोत्सव (होली खेलना):• ग्रहण दिवस से बचना चाहिए।
  • → 4 मार्च 2026 को होली खेलें।

✅ सारांश

  • होलीका दहन: 3 मार्च 2026, प्रातः 4:27 – 6:20 बजे।
  • रंगोत्सव (होली खेलना): 4 मार्च 2026।
  • इन समयों का पालन करने से भद्रा काल और ग्रहण सूतक से बचाव होगा।

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