नरक चतुर्दशी महत्व

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(छोटी दिवाली)

नरक चतुर्दशी महत्व
*आज के दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था
*अभ्यंग स्नान तथा लौकी/अपामार्ग का प्रोक्षण
*हनुमान जन्मोत्सव
*अकाल मृत्यु के भय से मुक्त होने के लिए यमराज का पूजन
*सांयकालीन दीपदान

प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर शौचादि से निवृत्त हो तेल मालिश, उबटन करें। तिल के तेल में बेसन मिलाकर शरीर पर मलें। उसके बाद जल से स्नान करें। जल में केसर, गंगाजल मिला लें। इसको अभ्यंग स्नान कहते हैं. “तैले लक्ष्मी: जले गंगा दीपावल्या चतुर्दशीम्। ” रूप चतुर्दशी के दिन तेल में लक्ष्मी का वास और जल में गंगा की पवित्रता होती है। स्नान के उपरान्त देवताओं का पूजन तथा दीपदान करें। इससे व्यक्ति के समस्त पाप कटते है, रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है (इसलिए इसको रूप चतुर्दशी कहते हैं), शरीर निरोगी होता है तथा नरक का भय दूर होता है।

अभ्यंग स्नान के बाद सबसे पहले लक्ष्मी विष्णु की प्रतिमा अथवा फोटो को कमलगट्टे की माला और पीले पुष्प अर्पित करें, धन लाभ होगा।

हनुमान जन्मोत्सव

अञ्जनादेवी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था।

हालांकि चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हनुमान जयंती सर्वविदित है। हनूमान भक्त को इस दिन उपवास करना चाहिए । दोपहर में हनूमान् जी पर सिन्दूर में सुगन्धित तेल या घी मिलाकर उसका लेप (चोला) करना चाहिए (कहते है की इसी दिन माता सीता ने हनुमान जी को सिंदूर प्रदान किया था तभी से हनुमान जी पर सिंदूर अर्पित किया जाने लगा है)। तदुपरान्त चॉंदी के वर्क लगाने चाहिए । चोला चढ़ाने के उपरान्त हनूमान् जी का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए । हनुमान चालीसा, राम रक्षा स्तोत्र, सुंदर कांड का पाठ करें।

नरक चतुर्दशी तथा दीपदान

इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश का पूजन करके 13 दीपकों के मध्य चार बातियों वाला एक तेल का दीपक रखकर उसकी चारों बातियों को प्रज्वलित करना चाहिए एवं दीपमालिका का पूजन करके उन दीपों को घर में प्रत्येक स्थान पर रखें एवं चार बातियों वाला दीपक रातभर जलता रहे ऐसा प्रयास करें।

नरक चतुर्दशी को संध्या के समय घर की पश्चिमी दिशा में खुले स्थान पर अथवा छत के पश्चिम में 14 दीपक पूर्वजों के नाम से जलाएं। उनके आशीर्वाद से समृद्धि प्राप्त होगी।

अन्य महत्वपूर्ण बातें

👉👉माँ लक्ष्मी की, भगवन गणेश की, नारायण की मिटटी की मूर्ति घर लाकर रखनी चाहिए जिसका पूजन हम दीपावली वाले दिन करेंगे
👉👉शाम को भगवन गणेश, माँ लक्ष्मी का पूजन करें.
लिङ्ग पुराण के अनुसार इस दिन उड़द के पत्तों के साग से युक्त भोजन करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है ।
👉👉👉इस दिन सांयकाल घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर 4 बत्तियों का दीपक जलाकर धर्मराज का ध्यान करते हुए पूरब दिशा की ओर मुखं करके दीप दान करना चाहिए इससे व्यक्ति के यम के मार्ग का अंधकार समाप्त हो जाता है ओर सनत कुमार संहिता के अनुसार पितरों को भी स्वर्ग का मार्ग दीखता है ओर उनको नरक से मुक्ति मिलती है साथ ही भगवान वामन ओर राजा बलि का स्मरण करना चाहिए ऐसे करने से लक्ष्मी जी स्थायी रूप से आपके घर में निवास करती है ।
👉👉नरक चतुर्दशी के दिन दोपहर के उपरांत वस्त्रदान किया जाता है ।
👉👉छोटी दीपावाली को प्रातःकाल हाथी को गन्ना या मीठा खिलाने से अधिक तकलीफों से मुक्ति मिलती है।
👉👉नरक चतुर्दशी को शिव पूजा करने तथा ब्राह्मण को भोजन कराने का भी विधान है।

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