Author: admin

  • ज्योतिष से जानें किस दिन क्या करें, क्या न करें?

    ज्योतिष से जानें किस दिन क्या करें, क्या न करें?


    ➡️ज्योतिष शास्त्र में मानव द्वारा किए जाने वाले हर कार्य केे लिए दिन निश्चित किया गया। धार्मिक ग्रंथ व शास्त्रों की मानें तो इसमें उल्लेख मिलता है कि अगर कोई भी शुभ कार्य आदि दिनों के हिसाब से किया जाता है तो उस कार्य के सफल होने की संभावना अधिक रहती है। तो वहीं कार्य से लाभ प्राप्ति के भी आसार होते हैं। तो आइए जानते हैं सोमवार से लेकर रविवार के बारे में कि किस दिन कौन सा काम करना चाहिए।

    सोमवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह सौम्य चंद्रमा है। विवाह, नामकरण, गृह-निर्माण, विद्यालय में प्रवेश के लिए यह वार शुभ है। इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे सज्जन होते हैं। अगर इस दिन दक्षिण की दिशा में यात्रा की जाए तो निश्चित रूप से सफलता मिलती है।

    मंगलवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह सेनापति मंगल है। यह शुभ-अशुभ के मिले-जुले प्रभावों वाला दिन है। यह दिन किसी काम के लिए शुभ है तो कुछ कामों के लिए अशुभ। मकान की खरीद-बिक्री करना, वस्त्र खरीदना, सिलवाना ठीक नहीं। इस दिन जन्म लेने वाले जातक क्रोधी स्वभाव के होते हैं। पूर्व व दक्षिण दोनों ही दिशाओं में यात्रा में कोई कठिनाई नहीं आती।

    बुधवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह कुमार बुध है। यह शुभ वारों की श्रेणी में आता है। इस दिन पूर्व और पश्चिम की यात्रा में कोई परेशानी नहीं आएगी। गृह प्रवेश, हल चलाने, अध्ययन प्रारंभ करने व नए कपड़े पहनने के लिए यह दिन उत्तम है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।

    गुरुवार या बृहस्पतिवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह बृहस्पति है। यह दिन भी सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन से प्रारंभ किए सभी कार्य सिद्ध होते हैं। इस दिन किसी भी दिशा की यात्रा शुभ फलदायक सिद्ध होती है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक सद्गुणी, धार्मिक रुचियों वाले तथा तेजस्वी होते हैं।

    शुक्रवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक रसिक स्वभाव के होने के कारण विलासितापूर्ण जीवन बिताने में दिलचस्पी रखते हैं। इस दिन सूर्यास्त के पश्चात की गई यात्राएं सफल होने के साथ-साथ इस दिन शाम को प्रारंभ किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

    शनिवार

    ➡️इस दिन का स्वामी शनि ग्रह है। समस्त वारों में इसे सबसे अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन आरंभ किया गया कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाता अथवा लटकता रहता है। इस दिन यात्रा करने से भी सफलता की सम्भावना कम होती है। इस दिन जन्म लेने वाले अनेक जातकों को स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैैं।

    रविवार

    ➡️साधारण अथवा आम बोलचाल की भाषा में इसे बंदवार भी कहते हैं। इस वार का स्वामी ग्रह तेजस्वी सूर्य है। सभी प्रकार के कार्यों के लिए यह दिन शुभ है। इस वार को जन्म लेने वाले जातक भाग्यशाली होते हैं। अगर इस दिन पूर्व की दिशा में यात्रा की जाती है तो निश्चित रूप से सफलता मिलती है ।

  • मिथुन संक्रांति आज

    मिथुन संक्रांति आज


    सूर्य जब मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो इस घटना को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य 15 जून को वृष राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्‍योतिष के साथ ही धार्मिक मान्‍यताओं में भी मिथुन संक्रांति का विशेष महत्‍व होता है। ज्‍योतिषीय मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने से सूर्य से संबंधित दोष दूर होते हैं और आपके जीवन में सुख शांति बढ़ती है। इस दिन दान पुण्‍य करने का भी शास्‍त्रों में विशेष महत्‍व माना गया है। मिथुन संक्रांति को लेकर मासिक धर्म से भी जुड़ी मान्‍यता काफी प्रचलित है। इस दिन सिलबट्टे की पूजा की भी परंपरा है।

    मिथुन संक्रांति क्‍या है ?

    मिथुन संक्रांति को मौसम की दृष्टि से भी बहुत खास माना जाता है। इस दिन के बाद से सौर मंडल में भी काफी बड़ा बदलाव आता है। इसके बाद से वर्षा ऋतु का आरंभ माना जाता है। इस दिन सूर्य वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन को देश के अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

    मिथुन संक्रांति पर सिलबट्टे की पूजा क्‍यों की जाती है ?

    मिथुन संक्रांति प्रमुख रूप से महिलाओं का त्‍योहार है। इस पर्व को महिलाएं नाच गाकर और खुशियों के साथ मनाती हैं। इस पर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और सिलबट्टे को भूदेवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन सिलबट्टे को को अच्‍छे से साफ करके रख दिया जाता है और आने वाले चार दिनों तक सिलबट्टे का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए पूजा करती हैं। श्रृंगार करती हैं मेंहदी लगाती हैं। बरगद के पेड़ पर झूला डालकर अपनी सखियों के साथ यह त्‍योहार मनाती हैं।

    ऐसे की जाती है सिल बट्टे की पूजा

    मिथुन संक्रांति का पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है और इस दिन सिलबट्टे को साफ-सुथरा करके उसको दूध और जल से स्‍नान करवाया जाता है। उसके बाद सिल बट्टे पर सिंदूर और चंदन लगाया जाता है। फिर फूल और हल्‍दी चढ़ाकर उसकी पूजा की जाती है।

    मिथुन संक्रांति पर मासिक धर्म को लेकर मान्‍यता

    मिथुन संक्रांति की कथा के अनुसार, जिस प्रकार से महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म होता है उसी प्रकार से सृष्टि के आरंभ में धरती माता को भी शुरुआती 3 दिनों तक मासिक धर्म हुआ था। मासिक धर्म को ही मातृत्‍व सुख का कारक माना जाता है। इसलिए ऐसी मान्‍यता है कि मिथुन संक्रांति से लेकर अगले 3-4 दिन तक धरती माता मासिक धर्म में रहती हैं। इसलिए सिलबट्टे को भूदेवी का रूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। इस दौरान सिल बट्टे का प्रयोग खाना बनाने में नहीं किया जाता है।

    इस तरह करें सूर्य की पूजा

    मिथुन संक्रांति पर सूर्य की पूजा का भी विशेष महत्‍व माना गया है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान करें और सूर्य को प्रणाम करें। ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। उसके बाद सूर्य को अर्घ्‍य दें। तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें रोली और लाल फूल डाल लें। उसके बाद सूर्य को अर्घ्‍य दें। उसके बाद पूर्व दिशा में मुख करके ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का 108 बार जप करें।

  • ईशान कोण में शौचालय होने के नुकसान

    ईशानकोणमेंशौचालयहोनेकेनुकसान

    पूर्व और उत्तर दिशा के कोण को ईशान कोण कहते हैं अर्थात ईशान दिशा होती है .
    वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण देवताओं का और सकारात्मक शक्तियों का स्थान होता है .
    यदि ईशान कोण घर या व्यापार के प्रतिष्ठान में दूषित हो जाए अथवा वहां पर शौचालय स्नानघर बना हो तो वह स्थान दूषित हो जाता है. और घर में सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश बंद हो जाता है.
    आपके अर्जित पुण्य जब तक साथ देते हैं तब तक समस्या नहीं दिखाई पड़ती.
    किंतु समय के साथ यह दोष अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है इसका प्रमुख लक्षण यह है कि घर में रोग बीमारी अधिक से अधिक संख्या में होने लगती हैं एक व्यक्ति ठीक होता है तो दूसरा व्यक्ति बीमार हो जाता है ऐसी स्थिति में घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश भूत प्रेत आदि का प्रभाव और तंत्र आदि का प्रभाव बहुत आसानी से हो जाता है
    #उपाय
    ईशान कोण में बने हुए शौचालय को तत्काल हटा देना चाहिए.
    उस स्थान को शुद्ध कर देना चाहिए
    वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर में पारिजात अर्थात हरसिंगार का पौधा लगा देना चाहिए

  • शश योग एक शक्तिशाली राजयोग

    शश योग एक शक्तिशाली राजयोग है, जो ज्योतिष में शनि के विशेष प्रभाव को दर्शाता है ….

    जब शनि किसी कुंडली में लग्न या चंद्रमा से केंद्र भाव (1, 4, 7 या 10) में उच्च राशि (तुला, मकर या कुंभ) में स्थित होता है।

    इस योग वाले व्यक्ति भाग्यशाली, धनी, और समाज में सम्मानित होते हैं। वे प्रायः बड़े व्यवसायी, राजनेता, या उच्च पद पर आसीन होते हैं.

    शश योग के लक्षण:
    भाग्यशाली और धनवान:
    शश योग वाले व्यक्ति भाग्यशाली होते हैं और उनके पास धन की कमी नहीं होती है.

    सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा:
    वे समाज में सम्मानित और प्रतिष्ठित होते हैं और लोग उन्हें पसंद करते हैं.

    सफलता:
    वे हर क्षेत्र में सफल होते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं.

    अच्छे नेता:
    वे नेतृत्व क्षमता रखते हैं और अच्छे नेता साबित होते हैं.

    सत्यनिष्ठ:वे ईमानदार और सत्यनिष्ठ होते हैं.
    कठिन परिश्रम: वे अपने काम में पूरी निष्ठा से लगे रहते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं.

    कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता:
    वे मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होते हैं और उनसे हार नहीं मानते.

    सहानुभूति:
    वे दूसरों के लिए सहानुभूति रखते हैं और उनकी मदद करने के लिए तैयार रहते हैं.

    यात्रा का शौक:
    वे यात्रा करने के शौकीन होते हैं और दुनिया को देखना पसंद करते हैं.

    लॉजिकल:
    वे तार्किक होते हैं और तर्क पर आधारित निर्णय लेते हैं.शश योग वाले व्यक्ति किस क्षेत्र में सफल होते हैं?

    व्यवसाय:
    शनि के प्रभाव से वे व्यवसाय में सफल होते हैं, विशेष रूप से लोहा, मशीनरी, और पेट्रोलियम जैसे उद्योगों में.

    राजनेता:
    वे राजनीति में भी सफल होते हैं और उच्च पदों पर पहुंच सकते हैं. सरकारी कर्मचारी:वे सरकारी नौकरी में भी सफल होते हैं और उच्च पद प्राप्त करते हैं.

    जज और वकील:
    वे न्यायपालिका में भी सफल होते हैं और जज या वकील के रूप में अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं.
    शश योग कैसे बनता है?

    शश योग तब बनता है जब शनि लग्न या चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें घर में तुला, मकर या कुंभ राशि में स्थित होता है. यह एक महत्वपूर्ण राजयोग है जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है.

  • राहुकेतुऔर_वहम

    #राहुकेतुऔर_वहम
    राहु और केतु को लेकर ज्योतिष को मानने वालों मे बड़ा डर रहता है यूट्यूब और शार्ट रील की तरह तरह कि बाते से ड़रे रहते है । राहु केतु को लेकर कालसर्प दोष को लेकर सबसे ज्यादा डराया जाता है । वैसे मेरे गुरू इसे एरदम फर्जी दोष बताते थे उनका कहना था कि कालसर्प दोष 1960 से पहले नही था और किसी शास्त्र मे उल्लेखित भी नही है । यह सामने वाले को डराने और पैंसे एठने के लिए बनाया गया है ।
    फिर यह राहु केतु क्या है ?

    असल मे राहु केतु नाम के कोई ग्रह सौर मंडल नही है । जिस तरह सुर्य से लेकर शनि तक आकाश मे साक्षात ग्रह दिखाई देते है वैसे राहु केतु दिखाई नही देते है । इसलिए ही राहु केतु कोई राशि नही दी गई और ना ही ग्रहों के बल यानी पड्बल मे इनका कोई स्थान है । माना यह जाता है कि यह कुंडली मे जिस ग्रह के साथ बैठेगे व्यक्ति को उस ग्रह से संबंधित वहम जीवन मे परेशान करेगे ।

    भारतीय ज्योतिष सुर्य, चंद्र ग्रहणों की सटीक तिथि जिस विधि से निकालता आ रहा है उस विधि मे राहु केतु बड़े महत्वपुर्ण स्रोत है । पृथ्वी अपने पथ पर घूमती हुई सुर्य के चक्कर लगा रही है वही चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है । ऐसे मे होता क्या है कि कभी कभी चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाते हुएं पृथ्वी के पथ को काट देते है । यानि वह पृथ्वी सुर्य के एक सीध मे आगे या पीछे आ जाता है । जिस बिंदु पर चंद्रमा पृथ्वी और सुर्य के बीच या फिर पृथ्वी के पीछे एक सीध मे होता है उन दोनो बिंदुओं को ज्योतिषीय गणनाओं मे राहु केतु कहते है । जो वास्तव मे ग्रह नही एक स्थिति है जिसके कारण कभी पृथ्वी तो कभी चंद्रमा की परछाई ग्रहण का कारण बन जाती है और इसी ज्योतिषीय गणतिय विधि से वर्ष मे पड़ने वाले ग्रहणों की पहले ही भविष्यवाणी कर दी जाती थी ।

    असल मे राहु और केतु ज्योतिष मे वहम का प्रतीक है जिस तरह ग्रहण पड़ने पर आम आदमी के मन मे वहम हो जाता है कि सुर्य को कोई खत्म कर रहा है मगर वह अज्ञानता मे जानता नही कि सुर्य को चंद्रमा ने ढका है वरना वह पूरे तेज के साथ अब भी निकल रहा है ।
    बस इसी तरह के वहम जीवन मे होते है जिनका प्रतीक राहु केतु है माना जाता है कि कुंडली मे जिस ग्रह के साथ राहु केतु बैठे होगे वही से संबंधित वहम आदमी के अंदर पैदा होगा । मन मे अनजान भय होना, माता, पीर आना, बेवजह पति या पत्नी पर शक करना, यह सोचना कि उसके खिलाफ साजिश रच रही है यानि सारे वहमी मनोरोग जो वास्तव मे होते नही लेकिन मन ने उसे सच मान लिया हो वह सब राहु केतु के प्रतीक है ।
    एक आदमी अपने बेटे की जन्म कुंडली लेकर आया और बताने लगा कि उसके बेटे पर किसी पीर का साया है और वह उस पर कभी भी आ जाता है ।
    गुरू जी ने उससे कहा कि कल वह अपने बेटे को अपने साथ लाये और यह कहके लाये कि वह एक महान सिद्ध संत से मिलने जा रहे है ।
    अगले दिन जब वह आदमी अपने बेटे को लेकर आया तो गुरू जी ने अपनी वेशभूषा एक सिद्ध साधु की तरह बना रखी थी ।
    गुरू जी ने बच्चे को देखा और कुछ तंत्र मंत्र बुदबुदाये और चिल्लाये पकड़ लिया इस पीर को अब यह तेरे बच्चे को तंग नही करेगा । उस बच्चे की बांह मे एक धांगा भी बांध दिया । बच्चे के वहम को एक वहम ने मार दिया उसके अवचेतन मन मे बैठे पीर के वहम ने यह मान लिया कि वह पीर संत ने बाहर निकाल दिया है और वह अब अन्दर नही है ।

    लेकिन यह तरीका हर बार काम नही करता है । क्योंकि वहम हमेशा अवचेतन मन मे भरा होता है । अवचेतन मन कभी भी तार्किक नही होता है । जैसे जब हम सो रहे हो तब अचेतन मन क्रिया करता है और अवचेतन मन मे से स्मृतियों को निकालकर सपने दिखाता है । अवचेतन अगर हावी हो जाये तो वह कितना खतरनाक होता है आप देखिये कि आप सपने मे सेक्स कर रहे है और आपका वीर्यपात हो जाता है यानि पूरा शरीर अवचेतन मन के उसकी इच्छानुसार ही कार्य करने लगता है ।
    यानि जब बुद्धि जो कि तर्क से काम करती है वह काम करना बंद कर देती है और आदमी गहन चिंतन मे जाकर वहमी हो जाता है वह देखने सुनने मानने लगता है जो वास्तव मे सत्य नही होता है ।

    अभी मे हिपनोटिज्म की कक्षाएं पढ़ रहा था तब एक आदमी जिसेको अदृश्य आवाजें आ रही थी जिसकी वजह से वह परेशान था । मै उसे हिप्नौथेरिपी दी । यह मेरा पहला अनुभव था जब मैंने पहली बार किसी को हिप्पनोटाइज करके उसके मन के वहम को खत्म करने मे सफलता पाई । उसे हिप्नोथेरिपी के बाद अदृश्य आवाज आनी बंद हो गई ‌।
    लेकिन जब मैने यह घटना अपने गुरू जी को बताई तो उन्होंने डाँटते हुएं कहा कि किसी भी मनोरोगी को बिना मनोचिकित्सक की सलाह के हिपनोसिस नही करना चाहिए ।

    फिर इस वहम (राहु केतु) का सबसे अच्छा इलाज क्या है ?
    सबसे अच्छा उपाय है मनोरोग को भी एक बीमारी समझे रोगी के साथ सहानुभूति वाले व्यवहार के साथ तुरन्त उसे मनोचिकित्सक को दिखाये । उसे सोशल बनाये । उसको गहन चिंतन, समाधि आदि मे ना जाने दे । उसे तार्किक बनाये ताकि वह मन के बजाय बुद्धि से काम ले ।

    मनोचिकित्सक की सलाह पर हिप्नोथैरिपी कराये । यह अच्छा परिणाम देती है ।

    अगर रोगी आस्तिक है तो उसे अनुभव कराये कि ईश्वर तुम्हारी परेशानी खत्म कर देगा । उसमे ज्योतिष उपाय भी हो सकते है ।

    और हाँ यह ध्यान रखना जितनी जल्दी आप चिकित्सक के पास जायेगे वह रोग उतने जल्दी खत्म हो जायेगे ।

  • गुरु बृहस्पति होंगे अस्त

    🪐 ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐
    गुरु बृहस्पति होंगे अस्त
    { 12 जून 2025 }

    ज्ञान, शिक्षा, धन, संतान, और धर्म के कारक गुरु एक निश्चित अवधि के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, और ज्योतिष शास्त्र में देवताओं के गुरु बृहस्पति को सबसे शुभ और महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। ऐसे में इसकी स्थिति में जरा सा बदलाव हर राशि के जातकों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव अवश्य डालते हैं।

    • इस समय गुरु ग्रह मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं। इसके साथ ही गुरु बृहस्पति 12 जून को शाम 7 बजकर 37 मिनट पर इसी राशि में अस्त हो गए और करीब 27 दिन तक अस्त रहने के बाद 9 जुलाई को उदित हो जाएंगे।
    • गुरु ग्रह सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा मंगलकारी व शुभ ग्रह माने गए हैं अतः इनका अस्त होना अच्छा नहीं माना जाता। इस अस्त समय के दौरान मांगलिक कार्य विशेष कर शादी- विवाह, गृह प्रवेश इत्यादि नहीं किए जाते।
    • गुरु बृहस्पति ग्रह के अस्त होने से सभी 12 राशियों पर भी अलग- अलग प्रभाव देखने को मिलेंगे// 🕉️🚩🕉️
  • सूर्य का मिथुन राशि में गोचर

    🪐ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र🪐
    {सूर्य का मिथुन राशि में गोचर}
    (15 जून 2025, रविवार)

    15 जून को सूर्य ग्रह वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे, सूर्य ग्रह का मिथुन राशि में गोचर लगभग 1 महीने का रहेगा।

    सूर्य जिस दिन अपनी राशि परिवर्तन करते हैं और जिस राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन संक्रांति काल होता है अतः 15 जून को मिथुन संक्रांति होगी।प्रत्येक संक्रांति काल में दान- पुण्य- स्नान इत्यादि का विशेष महत्व बताया गया है।

    सूर्य ग्रह का मिथुन राशि में यह गोचर सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा। सूर्य का गोचर हमेशा खास प्रभाव डालता है क्योंकि यह हमारे आत्मविश्वास, ऊर्जा, और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है। मिथुन राशि में सूर्य का गोचर कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है आईए जानते हैं सूर्य का यह गोचर किन राशियों के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है-:

    वृषभ राशि-:

    • सूर्य ग्रह का गोचर आपकी द्वितीय भाव में होगा। यह भाव धन, परिवार, भाषण इत्यादि से संबंध रखता है। अतः इस समय आर्थिक मामले या धन के मामलों में कुछ तनाव उत्पन्न हो सकता है। परिवार के बीच भी खर्चों को लेकर मतभेद हो सकते हैं। इस समय के दौरान कोई बड़ा निवेश सोच समझकर करना चाहिए। और बोलचाल में संयम रखें वरना विवाद का कारण बन सकता है।

    कर्क राशि-:

    • आपकी राशि से 12वें भाव में सूर्य गोचर करेंगे, घर के खर्च बढ़ सकते हैं। वाणी का संयम रखें। यह समय विवाद से बचने का है विशेष कर घर परिवार व भाई-बहनों के विवाद से बचें। वृश्चिक राशि
    • आपके लिए यह गोचर विशेष सावधानी का है। साझेदारी और रिश्तों को लेकर बेहद सतर्क रहें। जीवनसाथी के साथ भी धैर्य से काम ले। स्वास्थ्य का ध्यान रखें व्हीकल ध्यान से चलाएं। मकर राशि-:
    • मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर संघर्ष लेकर आ सकता है। परिवार में शांति और संघर्षों का दौर शुरू हो सकता है। कोई भी फैसला विवेक व संयम के साथ लें// उपाय-:
    • उपाय के तौर पर सूर्य के सबसे अच्छे उपाय हैं सूर्य नमस्कार करना, सूर्य को जल अर्पित करना, और विधिवत रविवार का व्रत रखना इत्यादि। नोट-:
    • हमने यहां कुछ राशियों का फलादेश लिखा है वह केवल चंद्र राशि पर आधारित है। लेकिन इसे संपूर्ण फलादेश नहीं मानना चाहिए। क्योंकि आपकी जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति, दशा अंतर्दशा इत्यादि महत्वपूर्ण है, उसी हिसाब से आपके ऊपर कम और ज्यादा सूर्य ग्रह‌ गोचर का प्रभाव देखने को मिलेगा। 🕉️🚩🕉️
  • पुरुष को महादयालु और आदर्शवादी, सुंदर पत्नी योग

    ज्योतिष शास्त्र में कई योग होते हैं जो किसी पुरुष को महादयालु और आदर्शवादी, सुंदर पत्नी योग की संभावना को दर्शा सकते हैं। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण योग हैं:

    महादयालु और आदर्शवादी पत्नी योग

    1. सप्तम भाव में बृहस्पति और शुक्र की युति: यदि सप्तम भाव में बृहस्पति और शुक्र की युति हो तो पुरुष की पत्नी दयालु, आदर्शवादी और सुंदर हो सकती है।
    2. सप्तम भाव में चंद्र और शुक्र की युति: यदि सप्तम भाव में चंद्र और शुक्र की युति हो तो पुरुष की पत्नी दयालु, सौम्य और सुंदर हो सकती है।
    3. सप्तम भाव में बृहस्पति की स्थिति: यदि सप्तम भाव में बृहस्पति हो तो पुरुष की पत्नी आदर्शवादी, दयालु और सुंदर हो सकती है।

    सुंदर पत्नी योग

    1. सप्तम भाव में शुक्र की स्थिति: यदि सप्तम भाव में शुक्र हो तो पुरुष की पत्नी सुंदर और आकर्षक हो सकती है।
    2. सप्तम भाव में चंद्र और शुक्र की युति: यदि सप्तम भाव में चंद्र और शुक्र की युति हो तो पुरुष की पत्नी सुंदर और सौम्य हो सकती है।
    3. सप्तम भाव में बृहस्पति और शुक्र की युति: यदि सप्तम भाव में बृहस्पति और शुक्र की युति हो तो पुरुष की पत्नी सुंदर और आदर्शवादी हो सकती है।

    अन्य कारक

    1. शुक्र की स्थिति: यदि शुक्र मजबूत और शुभ स्थिति में हो तो पुरुष की पत्नी सुंदर और आकर्षक हो सकती है।
    2. चंद्र की स्थिति: यदि चंद्र मजबूत और शुभ स्थिति में हो तो पुरुष की पत्नी सौम्य और सुंदर हो सकती है।
    3. बृहस्पति की स्थिति: यदि बृहस्पति मजबूत और शुभ स्थिति में हो तो पुरुष की पत्नी आदर्शवादी और दयालु हो सकती है।

    कृपया ध्यान दें कि ये योग और कारक पुरुष को महादयालु और आदर्शवादी, सुंदर पत्नी योग की संभावना को दर्शा सकते हैं, लेकिन अन्य कारक जैसे कि पुरुष की व्यक्तिगतता, अनुभव और परिस्थितियाँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • मशान काली साबर मन्त्र🕉️

    मशान काली साबर मन्त्र🕉️

    काली काली महा-काली, इन्द्र की बेटी, ब्रह्मा की साली। पीती भर भर रक्त प्याली, उड़ बैठी पीपल की डाली। दोनों हाथ बजाए ताली। जहाँ जाए वज्र की ताली, वहाँ ना आए दुश्मन हाली। दुहाई कामरो कामाख्या नैना योगिनी की, ईश्वर महादेव गोरा पार्वती की, दुहाई वीर मसान की।।”

    विधिः-👇

    प्रतिदिन १०८ बार ४० दिन तक जप कर सिद्ध करे। प्रयोग के समय पढ़कर तीन बार जोर से ताली बजाए। जहाँ तक ताली की आवाज जायेगी, दुश्मन का कोई वार या भूत, प्रेत असर नहीं करेगा।

    कार्य-सिद्धि हेतु गणेश शाबर मन्त्र👇

    “ॐ गनपत वीर, भूखे मसान, जो फल माँगूँ, सो फल आन। गनपत देखे, गनपत के छत्र से बादशाह डरे। राजा के मुख से प्रजा डरे, हाथा चढ़े सिन्दूर। औलिया गौरी का पूत गनेश, गुग्गुल की धरुँ ढेरी, रिद्धि-सिद्धि गनपत धनेरी। जय गिरनार-पति। ॐ नमो स्वाहा।”

    विधि-👇

    सामग्रीः- धूप या गुग्गुल, दीपक, घी, सिन्दूर, बेसन का लड्डू। दिनः- बुधवार, गुरुवार या शनिवार। निर्दिष्ट वारों में यदि ग्रहण, पर्व, पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ-सिद्धि योग हो तो उत्तम। समयः- रात्रि १० बजे। जप संख्या-१२५। अवधिः- ४० दिन।

  • मंगल ग्रह सिंह राशि में गोचर

    🪐 ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐
    मंगल ग्रह सिंह राशि में गोचर

    07 जून 2025 यानी आज देर रात लगभग 2:00 बजे मंगल ग्रह सिंह राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मंगल ग्रह इस राशि में 28 जुलाई 2025 तक रहेंगे। मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस, क्रियाशीलता और प्रतिस्पर्धा का प्रतीक होता है, जबकि सिंह राशि आत्मविश्वास, नेतृत्व और रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करती है। जब ये दोनों शक्तियां मिलती हैं, तो व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा, तेज़ निर्णय क्षमता और ‘कुछ बड़ा कर दिखाने’ का जुनून जाग उठता है। यह गोचर उन लोगों के लिए विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है जो किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व करते हैं, अपना बिज़नेस चलाते हैं या कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में हैं।

    • हालांकि यह गोचर साहस और आत्मबल को बढ़ाता है, लेकिन इसके उग्र प्रभाव से कुछ राशियों को सावधान रहने की ज़रूरत भी होगी। विशेष रूप से मेष, वृषभ, कर्क, कन्या, मकर, कुंभ, राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान धन हानि, धोखे या विरोधियों से मानसिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आवश्यकता है आत्मनियंत्रण और दूरदर्शिता की, इस समय के दौरान आपको विवेक से काम लेना चाहिए और विवादों से बचना चाहिए। ध्यान रहे अतिरिक्त क्रोध आपके लिए समस्या बन सकता है।
    • मंगल का राशि परिवर्तन को ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है। खास बात यह भी है कि सिंह राशि में पहले से ही केतू विराजमान है, जिसकी वजह से यहां मंगल-केतू से कुज केतु योग बनेगा, यह एक नकारात्मक व अशुभ योग है जिसका दुष्प्रभाव कुछ विशेष राशियों पर देखने को मिल सकता है।
    • मंगल-केतु की युति के साथ ही राहू से समसप्तक योग और शनि से षड़ाष्टक योग का निर्माण भी होगा। इसका असर यह होगा कि मौसम में बार-बार बदलाव देखने को मिलेंगे। भूकंप- आगजनी जैसी घटनाएं प्रकृति में देखने को मिल सकती है। विश्व में युद्ध- विवादों का बड़ा विस्तार भी हो सकता है/
    • जिनकी जन्म कुंडली में मंगल ग्रह शुभ स्थिति में है और शुभ भाव में गोचर करेंगे उनके लिए अनुकूलताएं देखने को मिलेगी। वहीं जिनकी जन्म कुंडली में मंगल ग्रह अशुभ भाव में है और अशुभ भाव में गोचर करेंगे तो उनके लिए परिणाम विपरीत आ सकते हैं//
    • यदि आपकी चंद्र राशि से मंगल 1, 4, 7, 8 और 12 वें भाव में गोचर करने जा रहे हैं तो यहां आपके दांपत्य (वैवाहिक) जीवन परेशानियां उत्पन्न कर सकते हैं और आपके साझेदारी के मामलों में भी समस्या पैदा कर सकते हैं अतः सावधान रहें और समस्याओं को आपस में बैठकर सुलझाएं और विवादों से बचें// 🕉️🚩🕉️