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  • कनिका परमेश्वरी मंत्र

    कनिका परमेश्वरी मंत्र (कनिका परमेश्वरी गायत्री मंत्र) मुख्य रूप से महिलाओं में मासिक धर्म (Periods), PCOD/PCOS, और उससे संबंधित दर्द या अनियमितताओं के समाधान के लिए एक शक्तिशाली दक्षिण भारतीय उपाय माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जाप या श्रवण मानसिक शांति और शारीरिक समस्याओं में राहत प्रदान करता है।

    कनिका परमेश्वरी गायत्री मंत्र:

    “ॐ त्रिपुरा देव्यै च विद्महे, कन्या रूपिण्यै धीमहि, तन्नो कन्या प्रचोदयात्॥”

    जाप विधि और लाभ:

    • विधि: सुबह और शाम को इस मंत्र का 108 बार जाप करें। यदि जाप न कर सकें, तो इसकी ऑडियो सुन सकते हैं।
    • लाभ: यह मंत्र माहवारी की अनियमितताओं, दर्द, और PCOD/PCOS जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है।
    • समय: यह मंत्र विशेष रूप से तब सुना या पढ़ा जा सकता है जब पीरियड से जुड़ी कोई समस्या हो। 

    नोट: इस मंत्र को ‘कनिका परमेश्वरी महागायत्री मंत्र’ के नाम से भी जाना जाता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

  • दुर्गाष्टमी व्रत श्रीराम नवमी आज

    दुर्गाष्टमी व्रत श्रीराम नवमी आज एवं सिद्ध कुंजिका स्तोत्र महत्वता क्या है आओ जानें
    चैत्र नवरात्रि का पर्व अब समापन की ओर है। लेकिन उससे पहले कन्या पूजन का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के अंतिम दिन अष्टमी व्रत करके नवमी तिथि पर विशेष रूप से कन्या पूजन किया जाता है, जिसे देवी की साक्षात उपासना का रूप माना गया है। मान्यता है कि, छोटी कन्याओं में मां दुर्गा का वास होता है, इसलिए उनका पूजन कर भक्त अपने व्रत को पूर्णता प्रदान करते हैं और देवी की कृपा प्राप्त करते हैं।
    दुर्गा अष्टमी का महत्व
    दुर्गा अष्टमी, जिसे महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, देवी दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चना कर उनसे शक्ति, साहस और रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं। कई भक्त इस अवसर पर विधिपूर्वक व्रत रखते हैं और घरों तथा मंदिरों में भव्य पूजा का आयोजन करते हैं।
    रामनवमी का महत्व
    नवरात्रि का नौवां दिन कन्या पूजन नवरात्रि समापन एवं रामनवमी के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्रीराम के पावन जन्मोत्सव का प्रतीक है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु के भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था से भरा होता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, रामायण का पाठ होता है, भजन-कीर्तन और भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। भक्तजन पूरे दिन भक्ति में लीन रहकर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को स्मरण करते हैं। कई श्रद्धालु इसी दिन अपने नवरात्रि व्रत का विधिपूर्वक समापन करते हैं और प्रसाद ग्रहण कर उत्सव मनाते हैं। यह पर्व धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

    नवमी के प्रमुख अनुष्ठान कन्या पूजन
    देशभर में इन दोनों दिनों पर विभिन्न परंपराएं निभाई जाती हैं, हालांकि कुछ प्रमुख अनुष्ठान लगभग हर जगह समान रूप से किए जाते हैं-

    • कन्या पूजन: 9 छोटी कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन और उपहार दिए जाते हैं।
    • व्रत: कई लोग अष्टमी या नवमी तक उपवास रखते हैं।
    • हवन: घरों और मंदिरों में शुद्धिकरण और सकारात्मक ऊर्जा के लिए हवन किया जाता है।
    • विशेष भोग: पूड़ी, चना और हलवा जैसे व्यंजन बनाकर देवी को अर्पित किए जाते हैं।

    प्रातः भ्रमण की महत्ता

    प्रातः एवं सायं भ्रमण उत्तम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद है । पशुओं का राजा सिंह सुबह 3.30 से 5 बजे के दौरान अपने बच्चों के साथ उठकर गुफा से बाहर निकल के साफ हवा में भ्रमण कर आसपास की किसी ऊँची टेकरी पर सूर्य की ओर मुँह करके बैठ जाता है । सूर्य का दर्शन कर शक्तिशाली कोमल किरणों को अपने शरीर में लेने के पश्चात ही गुफा में वापस आता है । यह उसके बलशाली होने का एक राज है ।

    भ्रमण दिनचर्या का एक अभिन्न अंग है । उत्तम स्वास्थ्य की इस कुंजी के द्वारा आप मानो चरैवेति चरैवेति । आगे बढ़ो, आगे बढ़ो । यह वैदिक संदेश ही जनसाधारण तक पहुँचाना चाहते हैं । पूज्य श्री कहते हैं- “प्रातः ब्राह्ममुहूर्त में वातावरण में निसर्ग की शुद्ध एवं शक्तियुक्त ओजोन वायु का बाहुल्य होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हितकारी है ।

    प्रातःकाल की वायु को, सेवन करत सुजान।
    तातें मुख छवि बढ़त है, बुद्धि होत बलवान।।

    रोग प्रतिकारक शक्तिवर्धक अनुभूत प्रयोग

    गाय के दूध की जितनी मात्रा हो उससे आधी मात्रा में पानी मिलाकर उसमे सोने की वस्तु (शुद्ध सोने का साफ़ सुथरा गहना चलेगा) डालकर धीमी आंच पर पानी जल जाने तक उबालें । देशी नस्ल की गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से स्वर्णक्षार पाए जाते हैं । स्वर्ण के साथ दूध उबालने से स्वर्ण में स्थित स्वर्णक्षार भी दूध में मिल जाते हैं । यह स्वर्णसिद्ध गौदुग्ध रोगप्रतिकारक शक्ति को बढ़ाता है । इसका सेवन कर वृद्ध लोग भी तंदुरुस्त रह सकते हैं l सोना न हो तो चांदी का भी उपयोग किया जा सकता है ।

    सिद्ध कुंजिका स्तोत्र विशेष

    जीवन में सफलता की कुंजी है “सिद्ध कुंजिका”

    दुर्गा सप्तशती में वर्णित सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक अत्यंत चमत्कारिक और तीव्र प्रभाव दिखाने वाला स्तोत्र है। जो लोग पूरी दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते वे केवल कुंजिका स्तोत्र का पाठ करेंगे तो उससे भी संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का फल मिल जाता है। जीवन में किसी भी प्रकार के अभाव, रोग, कष्ट, दुख, दारिद्रय और शत्रुओं का नाश करने वाले सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ नवरात्रि में अवश्य करना चाहिए। लेकिन इस स्तोत्र का पाठ करने में कुछ सावधानियां भी हैं, जिनका ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

    सिद्ध कुंजिका स्तोत्र पाठ की विधि

    कुंजिका स्तोत्र का पाठ वैसे तो किसी भी माह, दिन में किया जा सकता है, लेकिन नवरात्रि में यह अधिक प्रभावी होता है। कुंजिका स्तोत्र साधना भी होती है, लेकिन यहां हम इसकी सर्वमान्य विधि का वर्णन कर रहे हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन से नवमी तक प्रतिदिन इसका पाठ किया जाता है। इसलिए साधक प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर अपने पूजा स्थान को साफ करके लाल रंग के आसन पर बैठ जाए। अपने सामने लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सामान्य पूजन करें।

    अपनी सुविधानुसार तेल या घी का दीपक लगाए

    अपनी सुविधानुसार तेल या घी का दीपक लगाए और देवी को हलवे या मिष्ठान्न् का नैवेद्य लगाएं। इसके बाद अपने दाहिने हाथ में अक्षत, पुष्प, एक रुपए का सिक्का रखकर नवरात्रि के नौ दिन कुंजिका स्तोत्र का पाठ संयम-नियम से करने का संकल्प लें। यह जल भूमि पर छोड़कर पाठ प्रारंभ करें। यह संकल्प केवल पहले दिन लेना है। इसके बाद प्रतिदिन उसी समय पर पाठ करें।

    कुंजिका स्तोत्र के लाभ
    धन लाभ👉 जिन लोगों को सदा धन का अभाव रहता हो। लगातार आर्थिक नुकसान हो रहा हो। बेवजह के कार्यों में धन खर्च हो रहा हो उन्हें कुंजिका स्तोत्र के पाठ से लाभ होता है। धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं। धन संग्रहण बढ़ता है।

    शत्रु मुक्ति👉 शत्रुओं से छुटकारा पाने और मुकदमों में जीत के लिए यह स्तोत्र किसी चमत्कार की तरह काम करता है। नवरात्रि के बाद भी इसका नियमित पाठ किया जाए तो जीवन में कभी शत्रु बाधा नहीं डालते। कोर्ट-कचहरी के मामलों में जीत हासिल होती है।

    रोग मुक्ति👉 दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ जीवन से रोगों का समूल नाश कर देते हैं। कुंजिका स्तोत्र के पाठ से न केवल गंभीर से गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है, बल्कि रोगों पर होने वाले खर्च से भी मुक्ति मिलती है।

    कर्ज मुक्ति👉 यदि किसी व्यक्ति पर कर्ज चढ़ता जा रहा है। छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है, तो कुंजिका स्तोत्र का नियमित पाठ जल्द कर्ज मुक्ति करवाता है।

    सुखद दांपत्य जीवन👉 दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए कुंजिका स्तोत्र का नियमित पाठ किया जाना चाहिए। आकर्षण प्रभाव बढ़ाने के लिए भी इसका पाठ किया जाता है।

    इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक

    देवी दुर्गा की आराधना, साधना और सिद्धि के लिए तन, मन की पवित्रता होना अत्यंत आवश्यक है। साधना काल या नवरात्रि में इंद्रिय संयम रखना जरूरी है। बुरे कर्म, बुरी वाणी का प्रयोग भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इससे विपरीत प्रभाव हो सकते हैं।

    कुंजिका स्तोत्र का पाठ बुरी कामनाओं, किसी के मारण, उच्चाटन और किसी का बुरा करने के लिए नहीं करना चाहिए। इसका उल्टा प्रभाव पाठ करने वाले पर ही हो सकता है।

    साधना काल में मांस, मदिरा का सेवन न करें। मैथुन के बारे में विचार भी मन में न लाएं।

    श्री दुर्गा सप्तशती में से हम आपको एक एसा पाठ बता रहे हैं, जिसके करने से आपकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इस पाठ को करने के बाद आपको किसी अन्य पाठ की आवश्यकता नहीं होगी। यह पाठ है..सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्। समस्त बाधाओं को शांत करने, शत्रु दमन, ऋण मुक्ति, करियर, विद्या, शारीरिक और मानसिक सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो सिद्धकुंजिकास्तोत्र का पाठ अवश्य करें। श्री दुर्गा सप्तशती में यह अध्याय सम्मिलित है। यदि समय कम है तो आप इसका पाठ करके भी श्रीदुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ जैसा ही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। नाम के अनुरूप यह सिद्ध कुंजिका है। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा हो, समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करिए। भगवती आपकी रक्षा करेंगी।

    सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा
    भगवान शंकर कहते हैं कि सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करने वाले को देवी कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और यहां तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल प्राप्त हो जाता है।

    क्यों है सिद्ध
    इसके पाठ मात्र से मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन आदि उद्देश्यों की एक साथ पूर्ति हो जाती है। इसमें स्वर व्यंजन की ध्वनि है। योग और प्राणायाम है।

    संक्षिप्त मंत्र

    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ( सामान्य रूप से हम इस मंत्र का पाठ करते हैं लेकिन संपूर्ण मंत्र केवल सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में है)

    संपूर्ण मंत्र यह है

    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊं ग्लौं हुं क्लीं जूं स: ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।।

    कैसे करें
    सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को अत्यंत सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। प्रतिदिन की पूजा में इसको शामिल कर सकते हैं। लेकिन यदि अनुष्ठान के रूप में या किसी इच्छाप्राप्ति के लिए कर रहे हैं तो आपको कुछ सावधानी रखनी होंगी।
    1👉 संकल्प: सिद्ध कुंजिका पढ़ने से पहले हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर संकल्प करें। मन ही मन देवी मां को अपनी इच्छा कहें।
    2👉 जितने पाठ एक साथ ( 1, 2, 3, 5. 7. 11) कर सकें, उसका संकल्प करें। अनुष्ठान के दौरान माला समान रखें। कभी एक कभी दो कभी तीन न रखें।
    3👉 सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के अनुष्ठान के दौरान जमीन पर शयन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।
    4👉 प्रतिदिन अनार का भोग लगाएं। लाल पुष्प देवी भगवती को अर्पित करें।
    5👉 सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में दशों महाविद्या, नौ देवियों की आराधना है।

    सिद्धकुंजिका स्तोत्र के पाठ का समय

    👉 रात्रि 9 बजे करें तो अत्युत्तम।
    2👉 रात को 9 से 11.30 बजे तक का समय रखें।

    आसन

    लाल आसन पर बैठकर पाठ करें

    दीपक

    घी का दीपक दायें तरफ और सरसो के तेल का दीपक बाएं तरफ रखें। अर्थात दोनों दीपक जलाएं

    किस इच्छा के लिए कितने पाठ करने हैं

    1👉 विद्या प्राप्ति के लिए….पांच पाठ ( अक्षत लेकर अपने ऊपर से तीन बार घुमाकर किताबों में रख दें)
    2👉 यश-कीर्ति के लिए…. पांच पाठ ( देवी को चढ़ाया हुआ लाल पुष्प लेकर सेफ आदि में रख लें)
    3👉 धन प्राप्ति के लिए….9 पाठ ( सफेद तिल से अग्यारी करें)
    4👉 मुकदमे से मुक्ति के लिए…सात पाठ ( पाठ के बाद एक नींबू काट दें। दो ही हिस्से हों ध्यान रखें। इनको बाहर अलग-अलग दिशा में फेंक दें)
    5👉 ऋण मुक्ति के लिए….सात पाठ ( जौं की 21 आहुतियां देते हुए अग्यारी करें। जिसको पैसा देना हो या जिससे लेना हो, उसका बस ध्यान कर लें)
    6👉 घर की सुख-शांति के लिए…तीन पाठ ( मीठा पान देवी को अर्पण करें)
    7👉 स्वास्थ्यके लिए…तीन पाठ ( देवी को नींबू चढाएं और फिर उसका प्रयोग कर लें)
    8👉 शत्रु से रक्षा के लिए…, 3, 7 या 11 पाठ ( लगातार पाठ करने से मुक्ति मिलेगी)
    9👉 रोजगार के लिए…3,5, 7 और 11 ( एच्छिक) ( एक सुपारी देवी को चढाकर अपने पास रख लें)
    10👉 सर्वबाधा शांति- तीन पाठ ( लोंग के तीन जोड़े अग्यारी पर चढ़ाएं या देवी जी के आगे तीन जोड़े लोंग के रखकर फिर उठा लें और खाने या चाय में प्रयोग कर लें।

    श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्रम् विनियोग

    विनियोग👉 ॐ अस्य श्री कुन्जिका स्त्रोत्र मंत्रस्य सदाशिव ऋषि: अनुष्टुपूछंदः श्रीत्रिगुणात्मिका देवता ॐ ऐं बीजं ॐ ह्रीं शक्ति: ॐ क्लीं कीलकं मम सर्वाभीष्टसिध्यर्थे जपे विनयोग: ॥

    श्री सिद्धकुंजिकास्तोत्र
    शिव उवाच
    शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
    येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत् ॥१॥

    न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
    न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥२॥

    कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
    अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥३॥

    गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
    मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।

    पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥

    अथ मन्त्रः

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
    ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
    ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
    इति मन्त्रः॥
    नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
    नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥१॥

    नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥२॥

    जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ।
    ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ॥३॥

    क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ।
    चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ॥४॥

    विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥५॥

    धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
    क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥६॥

    हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
    भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥७॥

    अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
    धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥
    पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ॥८॥
    सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे ॥
    इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे ।
    अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
    यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् ।
    न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
    इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
    संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्ण।

    📲9910057645
    हिन्दू धर्म और पूजन में ९ शुभ पेड़ के पत्ते

    वैसे आपने कड़ी पत्ता, पत्तागोभी, तेजपत्ता, पुदीना, पालक, बेल पत्ता, हरे प्याज के पत्ते आदि का उपयोग तो किया ही होगा। पत्तों का उपयोग खाने, पूजा करने और घाव आदि पर लगाने में किया जाता है। हालांकि कुछ पत्ते ऐसे हैं जिन्हें शुभ और पवित्र मानकर उनका पूजा में उपयोग किया जाता है। ऐसे ही कुछ पत्ते की जानकारी यहां प्रस्तुत है।

    🍃१. तुलसी पत्ता :-

    भगवान विष्णु को सबसे प्रिय है तुलसी का पत्ता। भगवान को जब भोग लगाते हैं या उन्हें जल अर्पित करते हैं तो उसमें तुलसी का एक पत्ता रखना जरूरी होता है। तुलसी का पत्ता खाते रहने से किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता। तुलसी के पत्ते को शाम को नहीं तोड़ते और किसी रजस्वला स्त्री की उस पर छाव भी नहीं पड़ना चाहिए। दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियां डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है। तांबे के लोटे में एक तुलसी का पत्ता डालकर ही रखना चाहिए। तांबा और तुलसी दोनों ही पानी को शुद्ध करने की क्षमता रखते हैं।

    🍃२. बिल्वपत्र :-

    हिन्दू धर्म में बिल्व अथवा बेल (बिल्ला) पत्र भगवान शिव की आराधना का मुख्य अंग है। कहते हैं शिव को बिल्वपत्र चढ़ाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और किसी माह की संक्राति को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए। बिल्वपत्र का सेवन, त्रिदोष यानी वात (वायु), पित्त (ताप), कफ (शीत) व पाचन क्रिया के दोषों से पैदा बीमारियों से रक्षा करता है। यह त्वचा रोग और डायबिटीज के बुरे प्रभाव बढ़ने से भी रोकता है व तन के साथ मन को भी चुस्त-दुरुस्त रखता है।

    🍃३. पान का पत्ता :-

    पान को संस्कृत में तांबूल कहते हैं। इसका उपयोग पूजा में किया जाता है। दक्षिण भारत में तो पान के पत्ते के बीच पान का बीज एवं साथ ही एक रुपए का सिक्का रखकर भगवान को चढ़ाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में पूजा की सुपारी के साथ एक रुपए का सिक्का चढ़ाया जाता है। कलश स्थापना में आम और पान के पत्तों का उपयोग होता है। प्राचीनकाल में पान का इस्तेमाल रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता था। इसे खाने से भीतर कहीं बह रहा खून भी रुक जाता है। दूध के साथ पान का रस लिया जाए, तो पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।

    🍃४. केला के पत्ते :-

    केला का पत्ता हर धार्मिक कार्य में इस्तेमाल किया जाता रहा है। केले का पेड़ काफी पवित्र माना जाता है। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को केले का भोग लगाया जाता है। केले के पत्तों में प्रसाद बांटा जाता है। माना जाता है कि समृद्धि के लिए केले के पेड़ की पूजा अच्छी होती है। केला रोचक, मधुर, शक्तिशाली, वीर्य व मांस बढ़ाने वाला, नेत्रदोष में हितकारी है।

    🍃५. आम के पत्ते :-

    अक्सर मांगलिक कार्यों में आम के पत्तों का इस्तेमाल मंडप, कलश आदि सजाने के कार्यों में किया जाता है। इसके पत्तों से द्वार, दीवार, यज्ञ आदि स्थानों को भी सजाया जाता है। तोरण, बांस के खंभे आदि में भी आम की पत्तियां लगाने की परंपरा है। घर के मुख्य द्वार पर आम की पत्तियां लटकाने से घर में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति के प्रवेश करने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है।
    आम के पेड़ की लकड़ियों का उपयोग समिधा के रूप में वैदिक काल से ही किया जा रहा है। माना जाता है कि आम की लकड़ी, घी, हवन सामग्री आदि के हवन में प्रयोग से वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है। वैज्ञानिक दृष्टि के अनुसार आम के पत्तों में डायबिटीज को दूर करने की क्षमता है। कैंसर और पाचन से संबंधित रोग में भी आम का पत्ता गुणकारी होता है।

    🍃६. सोम की पत्तियां :-

    सोम की पत्तियां प्राचीन काल में सभी देवी और देवताओं की अर्पित की जाती थी। वर्तमान में यह दुर्लभ है इसलिए इसका प्रचलन नहीं रहा। सोम की लताओं से निकले रस को सोमरस कहा जाता है। उल्लेखनीय है कि यह न तो भांग है और न ही किसी प्रकार की नशे की पत्तियां। सोम लताएं पर्वत श्रृंखलाओं में पाई जाती हैं।

    🍃७. शमी के पत्ते :-

    दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में बांटी जाने वाली शमी की पत्त‍ियां, जिन्हें सफेद कीकर, खेजडो, समडी, शाई, बाबली, बली, चेत्त आदि भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म की परंपरा में शामिल है। आयुर्वेद में भी शमी के वृक्ष का काफी महत्व बताया गया है। मान्यता अनुसार बुधवार के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करने से तीक्ष्ण बुद्धि होती है। इसके साथ ही कलह का नाश होता

    🍃८. पीपल के पत्ते :-

    पीपल के पत्तों का भी हिंदू धर्म में खास महत्व है। जय श्रीराम लिखकर पीपल के पत्तों की माला हनुमानजी को पहनाने से वे प्रसन्न हो जाते हैं। पीपल के पत्ते के और भी कई उपयोग हैं।

    🍃९. बड़ के पत्ते :-

    मान्यता अनुसार आटे का दीपक बनाकर बड़ के पत्तों पर रखकर उसे हनुमानजी मंदिर में रखा जाता है जिससे कर्ज से मुक्ति मिलती है। बड़ के पत्ते का भी पूजा में और भी कई उपयोग है।
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    वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती है
    १. घर में पूजा करने वाला एक ही मूर्ति की पूजा नहीं करें। अनेक देवी-देवताओं की पूजा करें। घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश नहीं रखें।
    २. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।
    ३. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।
    ४. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।
    ५. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।
    ६. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।
    ७. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।
    ८. कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।
    ९. देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।
    ९. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।
    १०. भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।
    ११. भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।
    १२. लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।
    १३. हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें। समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए। छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं। पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।
    १४. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।
    १५. जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।
    १६. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।
    १७. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।
    १८. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।
    १९. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।
    २०. संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।
    २१. दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।
    २२. यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए,सफेद तिल का नहीं।

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  • OCD क्या है? एस्ट्रोलॉजी लाल किताब की नजर से –

    OCD क्या है? एस्ट्रोलॉजी लाल किताब की नजर से –

    OCD (Obsessive Compulsive Disorder) एक मानसिक विकार है।जिसमें व्यक्ति बार-बार एक ही विचार या काम करता है, चाहे वह जानता हो कि यह अनावश्यक है।
    उदाहरण:
    बार-बार हाथ धोना।
    बार-बार दरवाज़ा लॉक चेक करना।
    किसी एक डर में फँसा रहना।
    सोच से बाहर न निकल पाना।
    🪐 OCD के कारण
    ➤ 1. चंद्रमा – मन का ग्रह।
    चंद्रमा हमारे मन, भावना, सोच और स्मृति का कारक है।
    जब चंद्रमा कमज़ोर, पीड़ित या पाप ग्रहों से ग्रस्त होता है, तब मन असंतुलित हो सकता है।
    कैसे कमजोर होता है चंद्रमा:
    चंद्रमा अष्टम, द्वादश या षष्ठ भाव में हो।
    चंद्रमा पर राहु, शनि या केतु की दृष्टि या युति हो।
    कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी/अमावस्या को जन्म हुआ हो।
    चंद्रमा नीच राशि (वृश्चिक) में हो।
    👉 इससे व्यक्ति को बार-बार चिंता, भय, अनावश्यक सोच सताने लगती है।
    ➤ 2. राहु का प्रभाव – भूत, भ्रम, वहम।
    राहु अगर चंद्रमा के साथ हो (चंद्र-राहु युति) = ग्रहण योग।
    यह योग व्यक्ति को मानसिक उलझन, चिंता, वहम और मजबूरी में काम दोहराने पर मजबूर कर देता है।
    राहु की दृष्टि भी मानसिक बीमारियाँ दे सकती है।
    ➤ 3. शनि का प्रभाव – डर, तनाव, अवसाद।
    शनि यदि चंद्रमा के साथ या उस पर दृष्टि में हो, तो व्यक्ति अंदर ही अंदर सोचता रहता है, खुद पर भरोसा नहीं कर पाता।
    डर, मानसिक थकान और अकेलापन बढ़ता है।
    ➤ 4. केतु का प्रभाव – विचित्र और अंतर्मुखी सोच।
    केतु जब चंद्रमा या पंचम भाव पर हो तो व्यक्ति की सोच अंतर्मुखी, अलग-थलग, और कभी-कभी सनकी बन जाती है।
    ➤ 5. बुध की भूमिका – सोच और विश्लेषण।
    बुध बुद्धि और निर्णय क्षमता का ग्रह है।
    बुध अगर राहु-केतु से ग्रस्त हो तो व्यक्ति सोचता ही रहता है, लेकिन निर्णय नहीं ले पाता।
    ➤ 6. भावों का योगदान।
    भाव भूमिका प्रभाव (यदि पीड़ित हो)।
    चतुर्थ मन और शांति अशांति, बेचैनी
    पंचम सोच और विवेक सोच की अधिकता, भ्रम।।
    षष्ठ रोग भाव OCD जैसा मानसिक विकार
    अष्टम छिपे डर मानसिक गहराई, भय
    द्वादश अवचेतन मन मनोचिकित्सालय, अकेलापन।
    🔍 कुंडली में कैसे पहचानें?
    अगर कुंडली में निम्नलिखित योग मिलते हैं, तो OCD या मिलती-जुलती मानसिक समस्या का खतरा रहता है:
    🔸 चंद्रमा + राहु = ग्रहण योग।
    🔸 चंद्रमा + शनि = विषाद योग (डिप्रेशन)।
    🔸 चंद्रमा पर केतु की दृष्टि = अजीब कल्पनाएँ।
    🔸 चतुर्थ, पंचम, अष्टम या द्वादश भाव में पाप ग्रह।
    🔸 बुध राहु से ग्रस्त = अत्यधिक सोच, भय।
    🕉️ OCD के लिए उपाय
    🔸 1. चंद्रमा शांति के उपाय:
    सोमवार व्रत रखें।
    रोज़ सुबह “ॐ चं चंद्राय नमः” 108 बार जपें।
    चंद्र यंत्र घर में रखें।
    जल में दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
    🔸 2. हनुमान जी की उपासना (राहु-शनि दोष के लिए):
    हनुमान चालीसा का पाठ रोज़ करें।
    मंगलवार और शनिवार को सिंदूर और तिल का तेल चढ़ाएं।
    “ॐ हं हनुमते नमः” 108 बार जपें।
    🔸 3. केतु शांति के लिए:
    गणेश जी की पूजा करें।
    “ॐ कें केतवे नमः” का जाप करें।
    हर बुधवार को हरे मूंग दान करें।
    🔸 4. अनुलोम-विलोम और ध्यान:
    प्राणायाम मानसिक विकारों का सबसे सरल उपाय है।
    OCD में सबसे प्रभावशाली: भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, त्राटक
    💎 रत्न:
    मोती : यदि चंद्रमा पीड़ित हो तो धारण किया जा सकता है, लेकिन बिना कुंडली देखे रत्न न पहनें। पहले कुंडली का परीक्षण करवाएं।
    ✨ संकेत
    बार-बार सोच चंद्र पीड़ित, राहु/शनि प्रभाव
    डर या वहम राहु + चंद्र
    सोच का नियंत्रण न होना बुध + राहु
    अकेलापन और अंदर घुटन चंद्र-शनि, द्वादश भाव पीड़ा।

    अगर आप भी ऐसी किसी समस्या से प्रेरित है तो छोटे-छोटे उपाय के द्वारा इन समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है आज ही अपनी 👉कुंडली के अनुसार उनके उपाय करें –
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  • कुंडली में बाधक ग्रह

    कुंडली में बाधक ग्रह (Badhaka Planet) जीवन में चल रहे कार्यों में रुकावट, देरी या असफलता का कारण बनते हैं। इनके उपाय मुख्य रूप से भगवान गणेश की पूजा, बाधक ग्रह के मंत्र जाप और विशिष्ट वस्तुओं के दान पर आधारित हैं। सामान्यतः, बाधक ग्रह के लिए संबंधित दिन पर उपाय करने से लाभ होता है

    बाधक ग्रह के सामान्य उपाय (General Remedies)

    • गणेश पूजा: गणेश जी को दुर्वा, मोदक और चंदन अर्पित करें। “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
    • गाय की सेवा: गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं।
    • दान: बुधवार को साबूत मूंग का दान करें।
    • मुख्य द्वार के उपाय: रोज सुबह घर के मुख्य द्वार पर एक लोटा पानी डालें और “ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः” बोलें। 

    लग्न अनुसार बाधक ग्रह और विशिष्ट उपाय 

    • मेष, सिंह, धनु (अग्नि तत्व): बाधक ग्रह – शनि। उपाय: शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं, हनुमान चालीसा का पाठ करें, और जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
    • वृषभ, कन्या, मकर (पृथ्वी तत्व): बाधक ग्रह – चंद्रमा। उपाय: सोमवार को शिवजी का दुग्धाभिषेक करें, सफेद वस्तुओं (दूध, चावल) का दान करें।
    • मिथुन, तुला, कुंभ (वायु तत्व): बाधक ग्रह – गुरु/बृहस्पति। उपाय: गुरुवार को मंदिर में पीली वस्तुएं (चना दाल, पीले कपड़े) दान करें, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
    • कर्क, वृश्चिक, मीन (जल तत्व): बाधक ग्रह – मंगल/केतु। उपाय: मंगलवार को गणेश जी की पूजा करें, मसूर की दाल दान करें या केतु के लिए काले कुत्ते को भोजन कराएं। 

    विशेष सलाह

    • बाधक ग्रह जिस भाव का स्वामी हो (जैसे 7, 11, या 9), उस स्थान से संबंधित व्यक्ति या स्थान की सेवा करने से बाधा कम होती है।
    • शनिवार को घर में मांसाहार न पकाएं और न खाएं। 
  • शीतला सप्तमी आज

    शीतला सप्तमी आज


    हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि देवी मां शीतला को समर्पित मानी जाती है। इन दोनों तिथियों पर मां शीतला की पूजा विशेष रूप से की जाती है। कई स्थानों पर सप्तमी के दिन व्रत और पूजा की जाती है, जबकि अष्टमी के दिन बसोड़ा मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से मां शीतला की पूजा करने से रोग-कष्ट दूर होते हैं और परिवार को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में शीतला सप्तमी का पर्व बड़ी आस्था के साथ मनाया जाता है।

    शीतला सप्तमी 2026 की तिथि

    वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 9 मार्च को रात 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 11 मार्च को रात 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शीतला सप्तमी 10 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त देवी मां शीतला की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार के सुख-स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

    शीतला सप्तमी 2026 पूजा का शुभ समय

    पंचांग के अनुसार शीतला सप्तमी के दिन पूजा करने के लिए पूरा दिन शुभ माना गया है।

    पूजा का शुभ समय

    सुबह 06:24 बजे से शाम 06:26 बजे तक

    इस दौरान भक्त देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं। कई स्थानों पर अगले दिन यानी अष्टमी को बसोड़ा मनाया जाता है, जिसमें ठंडे भोजन का विशेष महत्व होता है।

    शीतला सप्तमी पर बन रहे शुभ योग

    ज्योतिष गणनाओं के अनुसार इस बार शीतला सप्तमी के दिन कुछ शुभ योग भी बन रहे हैं। इस दिन हर्षण योग का प्रभाव सुबह 08:21 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में देवी मां शीतला की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है।

    शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व

    धार्मिक मान्यता है कि मां शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। खासकर त्वचा और संक्रमण से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए उनकी पूजा की जाती है। इस दिन भक्त मां शीतला से परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। कई जगहों पर इस दिन घर में एक दिन पहले बना हुआ भोजन देवी को अर्पित करने की परंपरा भी होती है।

    शीतला सप्तमी पूजा विधि

    शीतला सप्तमी के दिन सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर मां शीतला की पूजा की जाती है। इसके बाद देवी को हल्दी, रोली, फूल और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई लोग इस दिन ठंडे भोजन का भोग लगाते हैं और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्रद्धा के साथ की गई पूजा से देवी मां शीतला की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

  • हस्त नक्षत्र और गुरुवार का शुभ संयोग,

    🌹5 मार्च आज हस्त नक्षत्र और गुरुवार का शुभ संयोग, इन उपायों को करने से सुधर जाएगा जीवन, देखें आजमाकर🌹
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    ⭕आज चैत्र कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और गुरुवार का दिन है। साथ ही आज सुबह 8 बजकर 18 मिनट के बाद हस्त नक्षत्र रहेगा और पूरे दिन भर चलेगा। हस्त नक्षत्र शुभ ग्रह चंद्रमा का नक्षत्र है।

    ऐसे में गुरुवार के दिन हस्त नक्षत्र में कुछ उपाय आपके जीवन में बेहद सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। आज हम आपको इन्हीं उपायों के बारे में जानकारी देंगे।

    ⚜️गुरुवार और हस्त नक्षत्र के संयोग में करें ये काम
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    • अगर आप चाहते हैं कि आपकी धन की तिजोरियां हमेशा भरी रहें, तो इसके लिए हस्त नक्षत्र में चांदी की अंगूठी बनवाकर अपने दाएं हाथ की उंगुली में धारण करें। ऐसा करने से आपके धन में बढ़ोतरी होगी।
    • अगर आपको हमेशा किसी न किसी प्रकार की मानसिक परेशानी बनी रहती है, तो उससे बचने के लिये हस्त नक्षत्र में आप जिस कमरे में सोते हैं, वहां पर एक मिट्टी के दीपक में 2 कपूर जलाएं और पूरे कमरे में उसकी धूप दिखाने के बाद एक कोने में रख दें। ऐसा करने से आप मानसिक रूप से अच्छा फील करने लगेंगे।
    • अगर यदि आप कोई प्रतियोगिता परीक्षा देने जा रहे हैं, तो उसमें अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिए हस्त नक्षत्र में रीठा के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और अपनी सफलता हासिल करने के लिए पेड़ की जड़ को छूकर प्रणाम करें। ऐसा करने से आपको सफलता जरूर मिलेगी।
    • अगर यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में स्थायी रूप से सुख-समृद्धि बनी रहे तो हस्त नक्षत्र में घर में श्वेत दक्षिणावर्त्त शंख की स्थापना करें और रोज पूजा के समय उस शंख का उपयोग करें। गुरुवार को ऐसा करने से आपकी सुख-समृद्धि हमेशा बनी रहेगी।
    • अगर यदि आपके परिवार के सदस्यों के बीच किसी भी बात को लेकर सामंजस्य स्थापित नहीं हो पाता, तो इसके लिए हस्त नक्षत्र में रीठा का पेड़ अपने घर के बाहर लगाएं और रोज़ उसकी देखभाल करें। ऐसा करने से आपके परिवार के बीच सामंजस्य स्थापित होने लगेगा।
    • अगर यदि आपको किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी है, आप अपने कार्यों में बार-बार असफल हो रहे हैं, तो इसके लिए हस्त नक्षत्र में एक सफेद कोरा कागज लें और उस पर चार कपूर की टिकिया रखकर शाम के समय घर के बाहर जला दें। ऐसा करने से आर्थिक कार्यों में धीरे-धीरे करके सफलता मिलने लगेगी।
    • अगर आप विदेश जाने के इच्छुक हैं, लेकिन विदेश जाने के लिये आपने जो व्यवस्था बना रखी है, उसमें बार-बार किसी न किसी प्रकार की परेशानी आ रही है, तो हस्त नक्षत्र में सफेद कपड़े में चावल और थोड़ी-सी मिश्री बांध कर बहते जल में प्रवाहित कर दें। आपकी इच्छा जल्द ही पूरी होगी।
    • अगर आपका व्यापार किसी दूसरे शहर या राज्य में है और आपको अधिक धनलाभ नहीं मिल पा रहा है, तो इसके लिए हस्त नक्षत्र में सफेद सुगंधित पुष्प वाला पौधा गमले में लगाकर अपने ऑफिस में रख दें और उस गमले को अपने ऑफिस की पूर्व दिशा में रख लें। ऐसा करने से आपके व्यापार में धनलाभ होगा और उसकी ख्याति दूर-दूर तक फैलेगी।
    • अगर यदि आपके निवास स्थान पर कोई वास्तु दोष है,जिससे आपको कई तरह की परेशानी महसूस होती है, तो इससे बचने के लिए हस्त नक्षत्र में शिव मन्दिर में जाकर शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और अपने घर की परेशानी को दूर करने के लिये प्रार्थना करें। ऐसा करने से आपकी परेशानी का हल जल्द ही निकलेगा।
    • अगर लाख परिश्रम के बाद भी आपके कारोबार की गति ठीक से नहीं चल रही है और आपको मन मुताबिक फायदा नहीं मिल पा रहा है तो इसके लिये हस्त नक्षत्र में सवा किलो चावल या चांदी का दान करना चाहिए और संभव हो तो हस्त नक्षत्र के दौरान गले में सफेद फूलों की माला धारण करनी चाहिए। ऐसा करने से आपके कारोबार की गति बढ़ने लगेगी।
    • अगर आपके दाम्पत्य जीवन में कुछ वैचारिक मतभेद चल रहे हैं, जिसकी वजह से अक्सर आपके और आपके जीवनसाथी के बीच तकरार होती रहती है, तो इस स्थिति से बाहर निकलने के लिये गुरुवार के दिन दूध, चावल की खीर बनाएं और हो सके तो उसमें थोड़ा-सा केसर भी डाल दें। अब श्री विष्णु को इस खीर का भोग लगाएं। साथ ही इस मंत्र का जाप करें- •’माधवाय नमः।’ इस प्रकार मंत्र का जाप करने से आज ये उपाय करने से आपके दाम्पत्य जीवन में चल रहे वैचारिक मतभेद जल्द ही समाप्त होंगे।
    • अगर आप अपनी व्यवसायिक यात्रा से अर्थ लाभ पाना चाहते हैं, अपनी फाइनेंशियल कंडिशन को बेहतर करना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन एक केसर की डिब्बी लेकर, उसे भगवान विष्णु के चरणों से लगाकर अपने पास रख लें और जब कभी आप किसी व्यवसायिक यात्रा से बाहर जायें, तो उस केसर से अपने माथे पर तिलक लगाकर जायें। लेकिन अगर आप केसर ना ले सकें, तो आप एक डिब्बी में सुखी हल्दी ले लें। ऐसा करने से आपको व्यावसायिक यात्राओं से अर्थ लाभ जरूर मिलेगा। लिहाजा आपकी फाइनेंशियल कंडिशन बेहतर होगी।
  • गणगौर पूजा

    1. कब करें: गणगौर पूजा का आरम्भ फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि से चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक की जाती है। होली के दुसरे दिन से गणगौर पूजा की जाती हैं। यह पूजा सोलह दिन तक चलती हैं। नवविवाहिताएं अपने सुहाग के लिए शादी के बाद की पहली गणगौर की विशेष रूप से पूजा करती हैं। होली के दुसरे दिन स्नान करके होली की राख़ और कुम्हार के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से ईसर जी और गौरी जी की मूर्ति और आठ गणगौर बनाई जाती हैं। टोकरी में दूब बिछा कर इन गणगौरों को रख दिया जाता हैं। इसके बाद उन्हें छोटे छोटे कपड़ों से लपेट देते हैं।
    2. स्थापना एवं दिशा: पूर्व दिशा की दिवार के पास एक साफ लकड़ी के पाटे (चौकी) पर लाल कपड़ा बिछाकर ईसर-गौर (शिव-पार्वती) की मूर्तियों और गणगौर की स्थापित को विराजमान करें। (दीवार पर भी गणगौर और ईसर का चित्र बना सकते है)
    3. जल के छींटे (पाणी पिलाना): एक लोटे में जल भर लें उसके ऊपर दूब और फुल रख लें। इसके बाद अपने हाथ में दूब (घास) का गुच्छा लें। अब उसमें चांदी का छल्ला फंसाएं। अब लोटे के जल में दूब को डुबोकर ईसर-गौर को 16 बार जल के छींटे दें। इस दौरान आपको “गोर-गोर गोमती” (दूब वाला गीत) गीत गाएं।
    4. 16 टीकी का नियम (सबसे महत्वपूर्ण): अलग अलग चार कटोरियाँ में हल्दी, रोली, मेहंदी, और काजल की एक डिबिया लेकर दीवार पर इन सभी से अलग अलग सोलह बिंदिया लगाई जाती हैं। एक कागज या दीवार पर (जहाँ पूजा कर रही हैं) माता के नाम की 16-16 बिंदियां (टीकी) लगाई जाती हैं:
      • सबसे पहले रोली की 16 टीकी लगाएं।
      • फिर मेहंदी की 16 टीकी लगाएं।
      • फिर हल्दी की 16 टीकी लगाएं।
      • अंत में काजल की 16 टीकी लगाएं।(कुंवारी कन्याएं 16 की जगह 8-8 टीकी ही लगाती हैं)।
      • बिंदी लगाने के बाद पूजा ख़त्म करके ही उठाना चाहिए। एक मिटटी की कटोरी में थोडा सा जल, एक हल्दी की गांठ, कौड़ी, चांदी की अंगूठी और थोड़ी सी दूब रख लें।
      • गणगौर के फुल चढाने के बाद सवेर का गीत गाए। गणगौर की पूजा दो महिलाएं को जोड़े से करनी चाहिए। दोनों महिलाये एक दुसरे की छोटी अंगुली से हाथ पकड़ लेती हैं। गणगौर पूजा पूरी करने के बाद ही हाथ से जोड़ा छोड़ा हैं। यदि किसी महिला का जोड़ा नहीं हैं तो वह अपनी चूड़ी या चुनड़ी को पकड़कर भी जोड़ा ले सकती हैं। दोनों हाथों में दूब लेकर मिटटी की कटोरी को थाली से थोडा सा उठाकर धीर धीरे हिलाते हैं और और खेल वाला गीत गाते हैं। इसके बाद दूब से पाटा धोते हैं और पाटा धोने का गीत गाते हैं और गणगौर पूजा हैं।
    5. भोग और सुहाग सामग्री: माता गौरी को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी अर्पित करें और ईसर जी को जनेऊ व वस्त्र रूपी कलावा चढ़ाएं। इसके बाद मीठे का भोग लगाएं।
    6. कथा और आरती: पूजा अर्चना के अंत में हाथ में गेहूं के दाने लेकर ‘गणगौर की व्रत कथा’ पढ़ें। इसके बाद कपूर या घी का दीपक जलाकर गणगौर माता की आरती पढ़ें।
  • चित्रगुप्त पूजा आज

    चित्रगुप्त पूजा आज


    हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाती है। भगवान चित्रगुप्त को कायस्थ समाज को लेकर अपना आराध्य मानते हैं। इसलिए अन्य समाजों की अपेक्षा कायस्थ समाज में चित्रगुप्त पूजन विशेष रूप से करने की परंपरा है। भगवान चित्रगुप्त हर प्राणी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और यमराज को बताते हैं।

    मार्च 2026 में कब करें चित्रगुप्त पूजा?
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    पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि 4 मार्च, बुधवार की शाम 04 बजकर 49 मिनिट से शुरू होगी जो 5 मार्च, गुरुवार की शाम 05 बजकर 03 मिनिट तक रहेगी। चूंकि द्वितिया तिथि का सूर्योदय 5 मार्च को होगा, इसलिए इसी दिन चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।

    ये है पूजा के शुभ मुहूर्त
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    सुबह 11:11 से दोपहर 12:38 तक
    दोपहर 12:15 से 01:01 तक (अभिजीत मुहर्त)
    दोपहर 12:38 से 02:05 तक
    दोपहर 02:05 से 03:33 तक
    शाम 06:27 से रात 08:00 तक

    भगवान चित्रगुप्त की पूजा विधि
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    -5 मार्च, गुरुवार की सुबह भगवान चित्रगुप्त की पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूरी तैयारी कर लें।

    • किसी साफ स्थान पर लकड़ी का बाजोट स्थापित कर सफेद कपड़ा बिछाएं और भगवान चित्रगुप्त का चित्र रखें।
    • शुद्ध घी का दीपक लगाएं। चन्दन, रोली, हल्दी, पान, सुपारी आदि चीजें एक-एक करके भगवान को चढ़ाएं।
    • अपनी इच्छा अनुसार फल और मिठाई का भोग लगाएं। पुस्तक और कलम की पूजा भी करें। पूजा के दौरान ये मंत्र बोलें-
      मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्।
      लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।
    • इस तरह शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने के बाद परिवाह सहित आरती भी करें।
    • इस तरह पूजा करने से भगवान चित्रगुप्त अपने भक्तों प्रसन्न होते हैं और उनकी हर इच्छा जल्दी ही पूरी करते हैं।

    चित्रगुप्त पूजा का महत्व
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    भगवान चित्रगुप्त को कर्मों का गणमान्य देवता माना जाता है, जो पुण्य और पाप दोनों का हिसाब रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह पूजा भक्तों को बुद्धि, ज्ञान और स्पष्ट सोच की प्राप्ति कराती है। कई लोग शिक्षा और व्यापार में सफलता पाने के लिए भी यह अनुष्ठान करते हैं।

    यह दिन धार्मिकता, जवाबदेही और ज्ञान जैसे नैतिक मूल्यों की याद दिलाता है, जिनका प्रतीक भगवान चित्रगुप्त हैं।

  • मूलांक के अनुसार चुनें अपना करियर, खूब मिलेगी तरक्की

    आपको किस क्षेत्र में जाना चाहिए? मूलांक के अनुसार चुनें अपना करियर, खूब मिलेगी तरक्की
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    हर व्यक्ति के जीवन में करियर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सही करियर का चयन सफलता और संतुष्टि दोनों के लिए आवश्यक होता है. लेकिन कई बार यह निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि किस क्षेत्र में बेहतर अवसर मिल सकते हैं. अंक ज्योतिष, जो कि संख्याओं के अध्ययन पर आधारित एक प्राचीन विद्या है, करियर चुनाव में सहायक सिद्ध हो सकती है. इसमें मूलांक (जन्मतिथि का एकल अंक) के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव, गुण और संभावित करियर क्षेत्रों का विश्लेषण किया जाता है.

    मूलांक के आधार पर करियर का चयन करने से व्यक्ति की स्वाभाविक क्षमताओं और गुणों के अनुसार सफलता पाने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, मेहनत और लगन किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए आवश्यक होती है. अंक ज्योतिष एक मार्गदर्शन का साधन हो सकता है, लेकिन करियर में सफलता के लिए खुद की रुचि, कड़ी मेहनत और सही अवसरों का लाभ उठाना भी जरूरी होता है. यदि आप अपने मूलांक के अनुसार सही करियर चुनते हैं, तो आपकी संभावनाएं और भी बेहतर हो सकती हैं.

    ⚜️मूलांक के अनुसार करियर के विकल्प
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    • 1. मूलांक 1 (नेता और निर्णायक):- जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 1 होता है. ये लोग स्वभाव से नेतृत्वकारी, आत्मविश्वासी और स्वतंत्र विचारधारा वाले होते हैं. इनके लिए बिज़नेस, राजनीति, मैनेजमेंट, प्रशासन, और सरकारी सेवाओं में करियर बनाना फायदेमंद हो सकता है. ये लोग स्वभाव से बॉस बनने की योग्यता रखते हैं, इसलिए नौकरी से अधिक खुद का व्यवसाय इनके लिए बेहतर होता है.
    • 2. मूलांक 2 (संवेदनशील और रचनात्मक):- मूलांक 2 वाले लोग (जन्मतिथि: 2, 11, 20, 29) भावुक और सहृदय होते हैं. ये दूसरों की भावनाओं को अच्छी तरह समझ सकते हैं और टीम में बेहतर काम कर सकते हैं. इनके लिए काउंसलिंग, शिक्षा, मनोविज्ञान, और कला से जुड़े क्षेत्र उपयुक्त होते हैं. ऐसे लोग समाजसेवा और लोगों की मदद करने वाले पेशों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं.
    • 3. मूलांक 3 (रचनात्मक और अभिव्यक्तिपूर्ण):- जिनका मूलांक 3 होता है (जन्मतिथि: 3, 12, 21, 30), वे क्रिएटिव होते हैं और किसी भी चीज़ को बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं. इनके लिए लेखन, मीडिया, मार्केटिंग, और अभिनय अच्छे करियर विकल्प होते हैं. ऐसे लोग प्रबंधन और शिक्षण कार्यों में भी सफल हो सकते हैं.
    • 4. मूलांक 4 (व्यवस्थित और मेहनती):- जन्मतिथि 4, 13, 22, 31 वाले लोग बहुत अनुशासित और मेहनती होते हैं। ये लोग किसी भी काम को गहराई से समझते हैं और उसकी बारीकियों पर ध्यान देते हैं। इनके लिए इंजीनियरिंग, अकाउंटिंग, लॉ, रिसर्च, और टेक्निकल फील्ड में करियर बनाना फायदेमंद रहेगा.
    • 5. मूलांक 5 (स्वतंत्रता पसंद करने वाले और साहसी):- जिनका जन्म 5, 14, 23 को हुआ है, वे नए-नए अवसरों को तलाशने और यात्रा करने में रुचि रखते हैं. इनके लिए ट्रैवलिंग, सेल्स, मार्केटिंग, मीडिया, और पब्लिक रिलेशंस बेहतर करियर विकल्प हैं. ये लोग नई चीज़ें सीखने और लोगों से जुड़ने में माहिर होते हैं.
    • 6. मूलांक 6 (सौंदर्य और आकर्षण प्रेमी):- जन्म 6, 15, 24 को होने वाले लोग सौंदर्य, कला, और शांति के प्रेमी होते हैं. ये फैशन, इंटीरियर डिज़ाइन, होटल मैनेजमेंट, और कला से जुड़े करियर में सफलता पा सकते हैं. इनकी आकर्षक और सौम्य व्यक्तित्व शैली इन्हें ग्लैमर इंडस्ट्री में भी आगे बढ़ने में मदद कर सकती है.
    • 7. मूलांक 7 (गूढ़ और आध्यात्मिक सोच वाले):- मूलांक 7 (जन्मतिथि: 7, 16, 25) वाले लोग गहरी सोच वाले और ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक होते हैं. इनके लिए रिसर्च, साइंस, फिलॉसफी, मेडिटेशन, और हीलिंग प्रोफेशन उपयुक्त हो सकते हैं. ये लोग मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक गुरु के रूप में भी अच्छा कर सकते हैं.
    • 8. मूलांक 8 (मेहनती और व्यावहारिक):- जन्मतिथि 8, 17, 26 वालों को मेहनत से सफलता मिलती है. इनके लिए बिज़नेस, बैंकिंग, प्रशासन, और लॉ से जुड़े क्षेत्र अच्छे विकल्प हैं. ये लोग दृढ़ निश्चयी होते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं.
    • 9. मूलांक 9 (ऊर्जावान और जुझारू):- जिन लोगों की जन्मतिथि 9, 18, 27 होती है, वे साहसी और ऊर्जावान होते हैं. इनके लिए आर्मी, पुलिस, स्पोर्ट्स, चिकित्सा और सामाजिक कार्य बेहतरीन करियर विकल्प हैं. ये लोग हमेशा समाज की भलाई के लिए तत्पर रहते हैं और चुनौतियों से नहीं घबराते.
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  • चंद्र ग्रहण का 12 राशियों पर प्रभाव

    चंद्र ग्रहण का 12 राशियों पर प्रभाव
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    1. मेष राशि👉 आपकी राशि पर इसका प्रभाव अशुभ रहेगा चिन्ता, विकार की सम्भावना रहेगी।
    2. वृषभ राशि👉 आपकी राशि पर इसका प्रभाव अशुभ रहेगा। अपवाद, खेदजनक रह सकता है।
    3. मिथुन राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण शुभ फल दायक रहेगा सुयोगद, सौख्य, लाभकारक हो सकती है।
    4. कर्क राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण अपवाद, व्यर्थ खर्च का परिचायक बन सकता है।
    5. सिंह राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण अशुभ है। शरीर विकार, कष्टप्रदायक होने की संभावना है।
    6. कन्या राशि👉 आपकी राशि पर यह चंद्र ग्रहण अशुभ है। आर्थिक चिन्तन, अपव्यय सूचक हो सकता है।
    7. तुला राशि👉 आपकी राशि पर यह ग्रहण शुभ है। सुखद लाभद, सुयोगद हो सकता है।

    8.वृश्चिक राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण शुभ रहेगा रोग, इसके प्रभाव सुख सुविधा, शुभ फल की सम्भावना रहेगी।

    1. धनु राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ माना जा रहा है। मानद रूप में कमी, चिन्तन सूचक रह सकता है।
    2. मकर राशि👉 आपकी राशि पर भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ है। विकार, प्रपीड़ा प्रभार प्रदायक हो सकता है.

    11.कुम्भ राशि👉 आपकी राशि के लिए भी यह चंद्र ग्रहण अशुभ रहेगा, चिन्तन, विकार, अपवाद सूचक कलह होने की सम्भावना बढ़ेगी।

    12.मीन राशि👉 आपकी राशि पर यह चंद्र ग्रहण शुभ असर देने वाला माना जा रहा है। सुखद, फलद योग करा सकता है।

    ग्रहण का अन्य फल
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    मलेच्छ, मेकल (छतीसगढ़ के भाग के) पर्वतवासियों, बलीष्ठ जन्तुओं, राजा एवं राजाश्रितजनों, वन में निवास करने वाले मनुष्यों के लिए कष्टप्रद है-

    “सिहे पुलिन्दगणमेकलसत्त्वयुक्तान् । राजोपमान्नपतीन् वनगोचरांश्च ।।”

    क्योंकि यह ग्रहण ग्रस्तोदित है, अतः शारद्धान्यों की हानि हो-“ग्रस्तावदितास्तमितौ शारद्धान्यावनीश्वरक्षयदौ ।।”

    वारफल 👉 क्योंकि यह ग्रहण मंगलवार के दिन होगा, अतः गजादिकों को कष्ट रहे। दुर्भिक्ष, चौर, अग्नि आदि का भय और अवन्ती देशवासियों को कष्ट रहे।

    मासफल 👉 फाल्गुन पूर्णिमा का यह ग्रहण नाचने गाने वाले, क्षत्रियों, तपस्वियों, स्त्रियों के लिए कष्टप्रद है और बंग, अश्मक, अवन्त (म. प्र. का मालवा, उज्जैन) आदि देशों में राजद्रोह की सम्भावना बने।

    नक्षत्रफल 👉 पू. फा. नक्षत्र का यह ग्रहण शिल्पीजनों, खरीद-फरोख्त का व्यापार करने वाले लोगों, कुवांरी कन्याओं क लिए पीड़ाप्रद है। कपास, रुई, सूत, कपड़ा, सब प्रकार के तेल, नमक महंगे हों।

    अयनफल 👉 यह ग्रहण उत्तरायण में घटित हो रहा है, अतः आगामी मासों में सवर्ण (ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य) लोगों को राजनैतिक परेशानी रहे। गोजाति पर निर्दयतापूर्ण व्याहार हो। चना, गेहूं, जौ एवम् दालवाना महंगे हों।

    चन्द्रग्रहण पर बाधा नाशक खास उपाय
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    चंद्र ग्रहण के शुभ प्रभाव प्राप्त करने के उपाय धर्म शास्त्रों और वेदों में ग्रहण के दौरान बालक, वृद्ध और रोगी के लिए कोई नियम नहीं बताया गया है ।

    1👉 चीटियों को पिसा हुआ चावल व आटा डालें।

    2👉 मोती, चांदी, चावल, मिश्री, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, श्वेत चंदन, पलाश की लकड़ी, दूध, दही, चावल, घी, चीनी आदि का दान करें।

    3👉 चन्द्रमा को मन और मां का कारक माना गया है, जन्म कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में बैठा हो उसके स्वामी अनुसार दान-पुण्य करना चाहिए।

    4👉 चन्द्र वृष राशि के लिए शुभ और वृश्चिक राशी के लिए अशुभ होता है, जब चन्द्र जन्म कुण्डली में उच्च भाव का हो तब चन्द्र से सम्बन्धित वस्तुओं का दान नही करना चाहिए।

    5👉 अगर चन्द्र कुण्डली के दूसरे और चौथे भाव में हो तो चावल चीनी दूध का दान न करें।

    6👉 यदि वृश्चिक राशि में हो तो चन्द्र की शुभता प्राप्त करने के लिए धार्मिक स्थल या शमशान के पास आम जनता के लिए प्याउ (पानी की टंकी) बनवाएं या किसी मिट्टी के बर्तन में पक्षियों के लिये पानी रखें।

    7👉 चन्द्र दोष दूर करने के लिए सोमवार, अमावस्या का दिन बहुत ही शुभ होता है। किंतु चन्द्र दोष से पीड़ित के लिए चन्द्रग्रहण के दौरान चन्द्र उपासना बहुत ही जरूरी होती है। शिव जी की आराधना करें अपने श्री इष्ट देवता जाप करें।

    8👉 यदि आपका व्यवसाय ठीक नहीं चल रहा है तो ग्रहण से पहले नहाकर लाल या सफेद कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन व रेशम से बने आसन को बिछाकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।

    9👉 जब ग्रहण काल प्रारंभ हो तब चमेली के तेल का दीपक जला लें। अब दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला लें तथा बाएं हाथ में 5 गोमती चक्र लेकर नीचे लिखे मंत्र का 54 बार जप करें ।

    !! ऊँ कीली कीली स्वाहा !!
    इसके बाद इन गोमती चक्रों को एक डिब्बी में डाल दें और फिर क्रमश: 5 हकीक दाने व 5 मूंगे के दाने लेकर पुन: इस मंत्र का 54 बार उच्चारण करें। अब इन्हें भी एक डिब्बी में डालकर उसके ऊपर सिंदूर भर दें। अब दीपक को शांत कर उसका तेल भी इस डिब्बी में डाल दें। इस डिब्बी को बंद करके अपने घर, दुकान या ऑफिस में रखें। आपका बिजनेस चल निकलेगा।

    10👉 तंत्र शास्त्र के अनुसार चन्द्रग्रहण किया गया प्रयोग बहुत प्रभावी होता है और इसका फल भी तुरंत प्राप्त होता है। इस मौके का लाभ उठाकर यदि आप धनवान होना चाहते हैं तो नीचे लिखा उपाय करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी ।और आपको धन लाभ होगा।

    11 उपाय👉 चंद्र ग्रहण के पूर्व नहाकर साफ पीले रंग के कपड़े पहन लें और ग्रहण काल शुरु होने पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठ जाएं।
    अपने सामने चौकी पर एक थाली में केसर का स्वास्तिक या ऊँ बनाकर उस पर महालक्ष्मी यंत्र स्थापित करें। इसके बाद उसके सामने एक दिव्य शंख थाली में स्थापित करें। अब थोड़े से चावल को केसर में रंगकर शंख में डालें। घी का दीपक जलाकर नीचे लिखे मंत्र का कमलगट्टे की माला से ग्यारह माला जप करें-

    मन्त्र👉 सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी।
    पुते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते।

    मंत्र जप के बाद इस पूरी सामग्री को किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अचानक धन लाभ होगा।
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