होमाहुति विशेष
१- अग्नि के “मुख” में आहुति देने से सर्व कार्य सिद्धि
होते है।
२-अग्नि के “कर्ण प्रदेश” में – व्याधि होती है।
३- अग्नि के “नेत्र” में – अन्धापन आ सकता है।
४,-अग्नि के “नासिका” में – मानसिक कष्ट होंगे।
५-अग्नि के “मस्तक” में आहुति देने से – धन का क्षय
होता है।
अग्निदेव जानकारी
१ जिस भाग में काष्ठ हो – कर्ण
२ कम जलने वाला भाग – नेत्र
३ धुआं वाला भाग – नासिका
४ अंगारों वाला भाग- मस्तक व
५ अग्नि शिखा वाला भागअग्निकामुख(जिह्वा)कहलाताहै
हवन आहुति फल
१ मधु के होम से – उपद्रव नष्ट
२ घी-सम्पत्ति प्राप्ति
३ दही-आरोग्य प्राप्ति
४ दूध-गांव प्राप्ति
५ अंगूर-इष्ट सिद्धि
६ लाजा(खील)-राज्य प्राप्ति
७ कमल-धन प्राप्ति
८ अनार-राजा वश
९ बिजौरा-क्षत्रिय वश
१० नारंगी-वैश्य वश
११ पेठा-शूद्र वश
१२ केला-मंत्री वश
१३ चम्पा व गुलाब-विश्व वश
१४ नारियल-सम्पत्ति प्राप्ति
१५ गुग्गुल-दु:ख नष्ट
१६ गुड़-मनोरथ सिद्धि
१७ तिल-अभीष्ट सिद्धि
१८ क्षीर-धन धान्य प्राप्ति
१९ आम-जीव वश
२० बेल फल-अतुल लक्ष्मी प्राप्ति
२१ ईख-सुख प्राप्ति
२२ कपूर-कवित्व प्राप्ति
२३ राई नमक-दु:ख नाश
२४ घी,तिल,चावल-शांति प्राप्ति
२५ केशर,कुमकुम,कपूर-रूप प्राप्ति।
२६ मालती फूल-वागीशता की प्राप्ति होती
अग्निवास का मुहूर्त जानना – होम,यज्ञ या हवन आदि में
कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है
और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति – आवश्यक है ,
अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है ।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन ‘अग्नि के वास ‘ का पता करना ताकि हवन का शुभ फल आपको प्राप्त हो सके ।
1-जिस दिन आपको होम करना हो , उस दिन की तिथि और वार की संख्या को जोड़कर 1 जमा (1 जोड़ ) करें फिर कुल जोड़ को 4 से भाग देवें- अर्थात् शुक्ल प्रतिपदा से वर्तमान तिथि तक गिनें तथा एक जोड़े , रविवारसे दिन गिने पुनः दोनों को जोड़कर चार का भाग दें।
2-यदि शेष शुन्य (0) अथवा 3 बचे, तो अग्नि का वास पृथ्वी पर होगा और इस दिन होम करना कल्याणकारक होता है ।
3-यदि शेष 2 बचे तो अग्नि का वास पाताल में होता है और इस दिन होम करने से धन का नुक्सान होता है ।
4-यदि शेष 1बचे तो आकाश में अग्नि का वास होगा, इसमें होम करने से आयु का क्षय होता है ।
अतः यह आवश्यक है की होम में अग्नि के वास का पता करने के बाद ही हवन करें ।
5-शास्त्रीय विधान के अनुसार वार की गणना रविवार से तथा तिथि की गणना शुक्ल-पक्ष की प्रतिपदा से करनी चाहिए।
6-मान लो आज हम कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि मे चल रहे है तो।
शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक 15 तिथि तो कुल योग
आया 15 + 4 + 1 = 20 आज कौन सा दिन हैं
और इस दिन को रविवार से गिने।मानलो आज बुधवार हैं
तो रविवार से गिनने पर बुधवार 3आया ।
कुल योग 20 + 3 = 23/4 कर दे तो शेषकितना
बचा । 4 – 23 / 5- 20 । 3 को शेष कहा जायेगा । परिणाम इस प्रकार से होंगे ।
शेष 0 तो अग्नि का निवास पृथ्वी पर ।
शेष 1 तो अग्नि का निवास आकाश मे ।
शेष 2 तो अग्नि का निवास पाताल मे ।
शेष 3 बचे तो पृथ्वी पर माने ।
पृथ्वी पर अग्नि वास सुख कारी होता हैं ।
आकाश मे प्राणनाश और पाताल मे धन नाश होता हैं । मतलब हमें वह तिथि चुनना हैं जिस तिथि मे शेष 3 बचे । वह तिथि ही लाभकारी होगी।
इस तरह से अग्नि वास का पता हमें लगाना हैं।
समस्याएं आपकी समाधान हमारा
Category: Uncategorized
-
होमाहुति विशेष
-
Homahuti
Homahuti
Many astrologers requested to include homahuti into panchangam. This is based on the distance between the sun’s nakshatra and the moon’s nakshatra. It is auspicious to do shanti karma/ shraut karma when the fire location is on earth and the ahuti goes to Budha — showers intelligence., Venus –> all material wishes fulfilled, worldly wealth property. Jupiter -> fulfillment of desires. moon->crops will be inundated, Sun->destruction of auspicious effects, Mars->fear of fire, Saturn->destruction of wealth, Rahu/ketu-> loss of every kind, famine, health troubles.
However, please remember for performing devi yaaga different chakra is used.
If you find any discrepancy please let us know.
-
अग्निवास का फल
विभिन्न स्थानों पर अग्निवास का फल-
- पृथ्वी पर अग्नि का वास सुखकारी होता है।
- आकाश में अग्नि का वास कष्टकारी होता है।
- पाताल में अग्नि का निवास धन- सम्पत्ति का नाश करता है।
किन वस्तुओं से होम करने से क्या लाभ होता है
- शान्ति की स्थापना हेतु पीपल के पत्ते, गिलोय अथवा घी के द्वारा होम करना चाहिए।
- शारीरिक पुष्टता हेतु बिल्वपत्र, चमेली का पुष्प अथवा घी से हवन करना चाहिए।
- सुन्दर स्त्री प्राप्ति हेतु कमल पुष्प से हवन करना चाहिए।
- आकर्षण हेतु पलाश पुष्प से हवन करना श्रेयस्कर है।
किस कार्य में कौन से हवन कुण्ड का उपयोग करना चाहिए
- शान्ति कार्यों में स्वर्ण, रजत अथवा तांबे का हवन कुण्ड उत्तम है।
- अभिचार- (अनिष्ट कार्यों की सिद्धि के लिए जादू, टोना आदि) लोहे का हवन कुण्ड उत्तम है।
- उच्चाटन- (भूत, प्रेत, डाकिनी के उत्पात या कुदृष्टि से उत्पन्न रोगों के निवारण के लिए) मिट्टी का हवन कुण्ड होना चाहिए।
किस क्रिया में किस नाम की अग्नि का आवाहन किया जाना चाहिए
- शान्ति कार्यों में वरदा नामक की अग्नि स्थापना की जाती है।
- विवाह में योजक नामक अग्नि का आवाहन होता है।
- पूर्णाहुति में (मृडा) शतमंगल नाम की अग्नि का आवाहन किया जाता है।
- वशीकरण में कामद नाम की अग्नि की स्थापना होती है।
- अभिचार कार्यों में क्रोध नाम की अग्नि की स्थापना होती है।
- इसके अलावा भी और भी अग्नियों का नाम है जो विभिन्न संस्कारों में आवाहन किया जाता है।
अग्नि स्थापन का मन्त्र
ॐ अग्निं दूतं पुरो दधे हव्यवाहमुप ब्रुवे। देवां२आ सादयादिह।
इस वैदिक मन्त्र के द्वारा अग्नि नारायण का आवाहन किया जाता है।
अग्नि का ध्यान मन्त्र
ॐ चत्वारि श्रृङ्गा त्रयो अस्य पादा द्वे शीर्षे सप्त हस्तासो अस्य।
त्रिधा बद्धो वृषभो रोरवीति महो देवो मर्त्यां२ आविवेश।ॐ मुखं य: सर्वदेवानां हव्यभुक् कव्यभुक् तथा।
पितृणां च नमस्तस्मै विष्णवे पावकात्मने।।ऐसा ध्यान करते हुए – ‘ॐ अग्ने शाण्डिल्य गोत्र मेषध्वज प्राङ्मुख मम सम्मुखो भव‘।

-
Advanced Astrology Course
Advanced Astrology Course Content suitable for professional-level learners or those who already have a foundation in basic astrology:
—
Advanced Astrology Course Outline
Duration: 3–6 Months (can be customized)
Mode: Online / Offline / Hybrid
Instructor: Astro Dr. Shalini Malhotra—
Module 1: Recap of Fundamentals
Quick review of planets, signs, houses, aspects
Chart analysis basics (Lagna, Moon chart, Chalit chart)
Mahadasha system overview
—
Module 2: Advanced House Analysis
Deep dive into Bhava Chart (Chalit Chakra)
House strength, Bhava Madhya, and Bhava Sandhi
Hidden significations and multiple layers of house interpretation
—
Module 3: Divisional Charts (Vargas)
Importance and rules of Vargas
D9 (Navamsa) – marriage, dharma, spouse
D10 (Dashamsa) – career, profession
D7 (Saptamsa), D12 (Dwadashamsa), D60 (Shashtiamsha), etc.
—
Module 4: Advanced Planetary Combinations (Yogas)
Raj Yogas, Dhan Yogas, Vipreet Raj Yogas
Arishta Yogas (malefic combinations)
Neech Bhanga Raj Yogas and exceptions
Rare Yogas and their application in real charts
—
Module 5: Predictive Techniques
Ashtakavarga system
Transit analysis (Gochar)
Double transit theory
Dasha + Transit + Gochar blending
—
Module 6: Remedies and Applications
Advanced remedial measures (Mantras, Gemstones, Donations)
Choosing correct remedies per Dasha and chart weaknesses
Role of intention and timing in remedy effectiveness
—
Module 7: Profession & Career Predictions
Career indicators in the chart (10th house, D10, Atmakaraka, Amatyakaraka)
Identifying best professional line
Timing of job change, promotions, business success
—
Module 8: Marriage & Relationship Insights
Marriage timing and delay analysis
Compatibility using Ashtakoota and Nadi
Role of Navamsa in married life
Love vs arranged marriage indicators
—
Module 9: Health and Medical Astrology
Understanding disease potential from charts
Predicting timing of health events
Astrological diagnosis using 6th, 8th, 12th houses
—
Module 10: Practical Chart Analysis & Case Studies
Live chart discussions
Real client case studies
Predictive accuracy sharpening
Assignments and mock consultations
—
Certification & Final Assessment
Written and oral examination
Chart interpretation project
Certification of Completion: Advanced Astrology by Dr. Shalini Malhotra
—
(more…) -
Basic Vedic Astrology (8 Classes)
Course Title: Basic Vedic Astrology (8 Classes)
Instructor: Astro Dr. Shalini Malhotra
Mode: Online Duration per Class: 1.5 HoursClass 1: Introduction to Vedic Astrology
History and origin of Vedic Astrology (Jyotish Shastra)
Importance and applications in life
Basic structure of a horoscope (Kundli)
Introduction to Zodiac signs (Rashis) – 12 Rashis and their qualities
Concept of Lagna (Ascendant) and its significance
Class 2: The Planets (Grahas) in Vedic Astrology
Overview of the 9 planets: Sun, Moon, Mars, Mercury, Jupiter, Venus, Saturn, Rahu, Ketu
Natural characteristics, nature (benefic/malefic), gender, direction, element
Planetary ownership of signs (Rulership)
Functional benefics and malefics
Class 3: The 12 Houses (Bhavas)
Overview of the 12 houses and their significations
Relationship between houses and areas of life (career, health, marriage, etc.)
Trikona, Kendra, Dusthana concepts
Importance of house lords and their placement
Class 4: Rashis (Zodiac Signs) – In-depth Study
Detailed traits and elements of all 12 signs
Signs classification by element (fire, earth, air, water), mode (movable, fixed, dual)
Compatibility and nature of Rashis
Lordship of signs and their relationships
Class 5: Understanding Nakshatras (Lunar Mansions)
Introduction to 27 Nakshatras
Symbol, ruling planet, deity, and characteristics of major Nakshatras
Nakshatra and Moon sign connection
Importance of Nakshatra in predictions and personality analysis
Class 6: Chart Reading Basics – Lagna & Moon Charts
How to read and interpret a basic North and South Indian horoscope
Identifying Ascendant, planets in houses
Lagna Chart vs Chandra Kundli
Role of planetary aspects (Drishti)
Class 7: Yogas & Planetary Combinations
Introduction to common Yogas: Raj Yoga, Dhan Yoga, Vipreet Raj Yoga, Gaj Kesari Yoga, etc.
Auspicious and inauspicious combinations
Importance of conjunctions and planetary aspects
House-lord interactions and yoga formation
Class 8: Practical & Q&A

-
वास्तु और तत्व
हर दिशा एक तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।
उत्तर के रूप में घर का वायु / जल तत्व को दर्शाता है
दक्षिण आग / पृथ्वी तत्व को दर्शाता है, पश्चिम को दर्शाता है वायु / पृथ्वी तत्व और पूर्व आग / अंतरिक्ष को दर्शाता है
यहाँ इस लेख में, मेरे पास कुछ तथ्य हैं
मानव रोग वास्तु के बारे में कैसे बता सकता है?
किसी भी घर के दोष पहले हमें इसके बारे में पता होना चाहिए। घर में कोई वास्तु दोष
मानव शरीर में रोग का कारण बनता है।
हमारे शरीर में पांच तत्व हैं-
*पृथ्वी तत्व हमारे शरीर को आकार और गंध देता है,
*अंतरिक्ष तत्व ध्वनि,
*आग हमारे शरीर में भूख और पयास पैदा करता है
*पानी तत्व रक्त का समर्थन करता है और
अन्य तरल पदार्थ और
*वायु तत्व देता है
स्पर्श की भावना।नीचे दिए गए सभी रोग
मानव शरीर में तत्वों का असंतुलन से होते है ।
इन बीमारियों के साथ, हम
एक घर के वास्तु दोष का पता लगाएं।मानव शरीर में सभी पांच तत्व, तो
शरीर स्वस्थ रहेगा। ऐसे ही घर में पंच तत्व का संतुलन होना भी वास्तु दोज़ह ख़तम करता है रोगो को भी नही आने देता ।अगर आपको ये बीमारी हो रही है तो समझे की आपके घर का ये तत्व असंतुलित है
जैसे
1 बुखार, आंखों की बीमारी, कुष्ठ रोग: ये
सूर्य के कारण होने वाली बीमारियां
और सूर्य की दिशा पूर्व है।
पूर्व दिशा का तत्व आग / हवा है।
तो यह दिखाता है कि असंतुलन है।
पूर्व दिशा में आग / वायु तत्व की असंतुलित होना बीमारी का कारण बनता है ।2 हड्डी फ्रैक्चर, हड्डी सर्जरी, स्लीप डिस्क, त्वचा
एलर्जीः इस तरह की बीमारियां होती हैं
शनि और शनि की दिशा पश्चिम है
पश्चिम दिशा का तत्व वायु/पृथ्वी है। तो
यह दिखाता है कि हवा / पृथ्वी का असंतुलन है।3.Skinallergy.sense-organs रोग, paralysis
इस प्रकार की बीमारियां बुध के कारण होती हैं
और बुध् की दिशा उत्तर है।
उत्तर दिशा का तत्व पानी / हवा है। तो यह
जल का असंतुलन होने की संभावना है।4 दुर्घटनाएं, सर्जरी, हृदय रोग, पथरी
रक्त संक्रमण: इस प्रकार की बीमारियां हैं
मंगल की दिशा और मंगल की दिशा दक्षिण है
दक्षिण दिशा का तत्व Fire/earth है। तो
यह दिखाता है कि fire /earth
घर की दक्षिण दिशा में तत्व का असंतुलन है
5. पेट रोग, फैटी लिवर, बांझपन
अधिक वजन: इस प्रकार की बीमारियां होने वाली हैं
बृहस्पति के कारण ये उतर पूर्वी की दिशा है-इस् दिशा का तत्व पानी है
यह दिखाता है कि पानी का असंतुलन है।
घर की दिशा में NE में तत्व कि कमी है ।
6. हर्निया, पत्थर की सर्जरी, प्रमुख सर्जरी,
इस तरह की बीमारियां केतु के कारण होती हैं।
और केतु की दिशा उत्तर-पूर्व है।
NE दिशा का तत्व पानी है। तो यह दिखाता है
कि जल तत्व का असंतुलन है ।7. बीपी, sugar, टीबी, मनोवैज्ञानिक रोग,
फेफड़ों की समस्या: इस प्रकार की बीमारियां हैं
चंद्रमा और चंद्रमा की दिशा के कारण है
उत्तर-पश्चिम. N W दिशा का तत्व है
हवा है तो हवा का असंतुलन है8. सिस्ट (महिलाओं में रासोली मूत्राशय), यौन
रोग, प्रजनन क्षमता में, महिलाओं में पीठ की समस्या
इस प्रकार की बीमारियां शुक्र के कारण होती हैं
और शुक्र की दिशा दक्षिण-पूर्व है।
SE दिशा का तत्व खराब है। तो यह दिखता है ।
राहु और दिशा के कारण समुद्र हैं
9, कैंसर, एड्स, सर्जरी। ये प्रकार
राहु देता है इस् कि दिशा है दक्षिण-पश्चिम है।
यहाँ का तत्व पृथ्वी है। तो यह दर्शाता है कि वहाँ है
SW दिशा में पृथ्वी तत्व का असंतुलन
कभी-कभी यह पाया जाता है .एक या एक से अधिक रोगो का होना आपके घर के तत्वों में असंतुलित होना दर्शाता है और साथ में वहां की दिशा में वास्तु दोष उत्पन करता है ।
आप्के घर् के सदस्यो मको अगर् आकस्मिक सर्जरी का सामना करना पड़ रहा है
उदाहरण के लिए, यदि कोई घर में एक्सीडेंट सर्जरी बार बार हो रही है
तब यह कहा जा सकता है कि यह सब होने के कारण है
मंगल और शनि ग्रह की दिशा
मंगल दक्षिण है और शनि पश्चिम है तो दोनों
इन दिशाओं में खराब दोष हो सकते हैं।
हर इंसान पांच तत्वों से बना है।
हम सभी बीमारियों का इलाज कर सकते हैं
इन 5 को संतुलित करके हम सभी बिमारियों से निजात पा सकते है ।
इन वास्तु दोषों को
किसी भी वास्तु विशेषज्ञ से परामर्श लेकर् सन्तुलित् किया कजा सकता है ।यह balancing
सभी बीमारियों को तेजी से ठीक करने मे सहायक हैकुछ सलाह जो सबके लिए सकारात्मक प्रभाव लाएगी ।
अपने बेडरुम में जूते चप्पल
नये या पुराने बिल्कुल न रखें।
ईशान कोण से लोहे की सारी
वस्तुयों हटा लें।
मुख्य द्वार को साफ सुथरा और सुन्दर रखे ।
मुख्या द्वार पर जूते चपल नही रखने चाहिए
ध्यान रखे दीवारों पर कोई दरार ना हो
सीलन वाले घर भी रोग का एक कारण बनते है ।। उसको समय पर ठीक करा के रखे
द्वार खोलते बंद करते समय आवाज़ नही करे ये ध्यान रखे
घर के नल भी नही टपकने चाहिए ।
घर का पूरा क्षेत्र साफ सुथरा होना चाहिए।
घर में हल्के चंदन की खुशबू से वातावरण मेहकना चाहिए ।
पानी में समुद्री नमक के साथ फर्श को पोछा करें।
गौमुत्र का छिड़काव घर में करते रहे विशेष कर रोगी के कमरे में करे ।
अपने घर के मुखिया को पूर्ण
सम्मान दें।
हर मंगलवार प्रसाद चलायें ।
हर रविवार सूर्य भगवान को
जल दें और बन्दरों को गुड
खिलाये ।
कुछ cystals आपकी रोग में काम आते है ।।सभी बीमारियों के लिए अलग अलग रहते है ।। अपने कमरे में वो क्रिस्टल रखे और हफ्ते मैं बार क्रिस्टल को पानी से धो दे ।
-

About Astro Dr. Shaliini Malhotra
Astro Dr. Shaliini Malhotra from Delhi, an eminent Vedic certified Vedic Astrologer and Crystal healer having 12 years of experience in the same field. She holds a Ph. D degree in Astrology. And post Vishrad from Indian Council of Astrological Sciences (ICAS) Delhi Chapter and attained a gold medallist degree for the same. By providing people with complex life problem solutions, she is skilled in Astrology, Numerology, & crystal healing, Reiki Healing. She Provides Remedies Of All Kinds, And Practicing Sahajayoga Meditation For Years. She does predictions and provide modern guidance and remedies combining traditional and modern scientific techniques in astrology.
She is an astrologer par excellence who makes accurate and precise predictions of the future and guides people to help lessen their many problems in life and give them efficient solutions to come out stronger.- One of the Best Vedic Astrologers in Delhi
- Expertise in Horoscope Reading
- Affordable astrological solutions
- Most reliable astrological remedies
- Long lasting effects of the astrological remedies
-
किस कामना के लिए क्या प्रदार्थ एवं कौनसा फूल शिव को चढ़ाएं
👉वाहन सुख के लिए चमेली का फूल।
👉 दौलतमंद बनने के लिए कमल का फूल, शंखपुष्पी या बिल्वपत्र।
👉 विवाह में समस्या दूर करने के लिए बेला के फूल। इससे योग्य वर-वधू मिलते हैं।
👉 पुत्र प्राप्ति के लिए धतुरे का लाल फूल वाला धतूरा शिव को चढ़ाएं। यह न मिलने पर सामान्य धतूरा ही चढ़ाएं।
👉 मानसिक तनाव दूर करने के लिए शिव को शेफालिका के फूल चढ़ाएं।
👉 जूही के फूल को अर्पित करने से अपार अन्न-धन की कमी नहीं होती।
👉 अगस्त्य के फूल से शिव पूजा करने पर पद, सम्मान मिलता है।
👉 शिव पूजा में कनेर के फूलों के अर्पण से वस्त्र-आभूषण की इच्छा पूरी होती है।
👉 लंबी आयु के लिए दुर्वाओं से शिव पूजन करें।
👉सुख-शांति और मोक्ष के लिए महादेव की तुलसी के पत्तों या सफेद कमल के फूलों से पूजा करें।
इसी तरह भगवान शिव की प्रसन्नता से मनोरथ पूरे करने के लिए शिव पूजा में कई तरह के अनाज चढ़ाने का महत्व बताया गया है। इसलिए श्रद्धा और आस्था के साथ इस उपाय को भी करना न चूकें। जानिए किस अन्न के चढ़ावे से कैसी कामना पूरी होती है –
👉 शिव पूजा में गेहूं से बने व्यंजन चढ़ाने पर कुंटुब की वृद्धि होती है।
👉 मूंग से शिव पूजा करने पर हर सुख और ऐश्वर्य मिलता है।
👉 चने की दाल अर्पित करने पर श्रेष्ठ जीवन साथी मिलता है।
👉 कच्चे चावल अर्पित करने पर कलह से मुक्ति और शांति मिलती है।
👉तिलों से शिवजी पूजा और हवन में एक लाख आहुतियां करने से हर पाप का अंत हो जाता है।
👉 उड़द चढ़ाने से ग्रहदोष और खासतौर पर शनि पीड़ा शांति होती है।
इसी तरह भगवान शिव की प्रसन्नता से मनोरथ पूरे करने के लिए शिव पूजा में कई तरह के अनाज चढ़ाने का महत्व बताया गया है। इसलिए श्रद्धा और आस्था के साथ इस उपाय को भी करना न चूकें। जानिए किस अन्न के चढ़ावे से कैसी कामना पूरी होती है –
👉 शिव पूजा में गेहूं से बने व्यंजन चढ़ाने पर कुंटुब की वृद्धि होती है।
👉 मूंग से शिव पूजा करने पर हर सुख और ऐश्वर्य मिलता है।
👉 चने की दाल अर्पित करने पर श्रेष्ठ जीवन साथी मिलता है।
👉 कच्चे चावल अर्पित करने पर कलह से मुक्ति और शांति मिलती है।
👉 तिलों से शिवजी पूजा और हवन में एक लाख आहुतियां करने से हर पाप का अंत हो जाता है।
👉 उड़द चढ़ाने से ग्रहदोष और खासतौर पर शनि पीड़ा शांति होती है।