पूजा करते समय ध्यान रखें दीपक से जुड़ी ये 5 बाते
देवी-देवताओं के पूजन में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। आरती के बाद ही पूजन कर्म पूर्ण होते हैं। आरती के महत्व को देखते हुए दीपक तैयार करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि विधि-विधान से दीपक तैयार किया जाता है तो देवी-देवताओं की कृपा जल्दी प्राप्त होती है।
जानिए दीपक से जुड़ी 5 खास बातें…
- देवी-देवताओं को घी का दीपक अपने बाएं हाथ की ओर तथा तेल का दीपक दाएं हाथ की ओर लगाना चाहिए।
- पूजन कर्म में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पूजा के बीच में दीपक बुझना नहीं चाहिए। ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
- दीपक हमेशा भगवान की प्रतिमा के ठीक सामने लगाना चाहिए। कभी-कभी भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर इधर-उधर लगा दिया जाता है, जबकि यह सही नहीं है।
- घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती उपयोग किया जाना चाहिए। जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ बताई गई है।
- पूजन में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक कार्यों में खंडित सामग्री शुभ नहीं मानी जाती है।
दीपक से मिलते हैं ये लाभ
- यदि किसी घर में नियमित रूप से दीपक जलाया जाता है तो वहां हमेशा सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है। दीपक के धुएं से वातावरण में उपस्थित हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट हो जाते हैं। दीपक अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाता है, इसी वजह से घर में सदैव प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है।
- शास्त्रों के अनुसार यदि प्रतिदिन शाम के समय मुख्य द्वार के पास दीपक लगाया जाता है तो देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसी वजह से शाम के समय द्वार पर दीपक लगाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।
दीपक जलाते समय इस मंत्र का जप करना चाहिए
मंत्र- शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्। शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।
इस मंत्र का सरल अर्थ यह है कि शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन संपदा देने वाली, शत्रु बुद्धि का विनाश करने वाली दीपक की ज्योति को नमस्कार है।
ऐसे दीपक जलाने से घर-परिवार में शुभ समय बना रहता है, सभी को स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं और धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। साथ ही, शत्रुओं की बुद्धि का विनाश होता है।
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