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  • हमेशा पैसों से भरा रखना चाहते हैं अपना पर्स तो अपनाएं ये 12 वास्तु टिप्स

    हमेशा पैसों से भरा रखना चाहते हैं अपना पर्स तो अपनाएं ये 12 वास्तु टिप्स
    पर्स में सिक्के और नोट दोनों को ही अलग-अलग स्थानों पर रखना चाहिए। जिन्हें अपनाने पर व्यक्ति को भी धन की कमी का एहसास ही नहीं होता है।

    पर्स में पैसे रखने के संबंध में वास्तु द्वारा कई महत्वपूर्ण टिप्स दिए गए हैं। आइए जानें :-

    1- पर्स बाईं जेब में रखना अति शुभ माना गया है।

    2- पर्स में चाबी को ना रखें।

    3- पर्स में रुपए कभी भी मोड़ या फोल्ड करके ना रखें।

    4-पर्स में कभी भी रुपयों के साथ कोई बिल-रसीद या टिकट ना रखें इससे विवाद बढ़ता है।

    5- पर्स में कभी भी बीड़ी/सिगरेट या गुटखा आदि ना रखें।

    6- रात्रि में सोते समय पर्स कभी भी सिरहाने ना रखकर उसे हमेशा अलमारी में रखें।

    7- यदि पर्स कभी फट या कट जाए, तुरंत बदल दें।

    8- यदि कर्ज का ब्याज देना हो तो वह रुपए पर्स में भूलकर भी ना रखें, रखोगे तो कर्ज नहीं उतरेगा बल्कि और चढ़ने की संभावना रहेगी।

    9- प्रत्येक जन्म दिवस पर अपने पर्स में एक नोट (छोटा या बड़ा) पर अपने पिता या माता के हाथों से केसर का तिलक लगा कर पूरे वर्ष के लिए रख दें।

    10 -अगले जन्मदिवस पर किसी कन्या को दें। पुनः माता या पिता से तिलक करवा कर वर्ष हेतु रख लें।

    11- पर्स में सिक्कों की व्यवस्था अलग हो तथा बंद करके रखें। पर्स खोलते समय सिक्का नीचे नहीं गिरना चाहिए। इससे अपव्यय बढ़ता है।

    12- अपने पर्स में किसी पूर्णिमा को लाल रेशमी कपड़े में चुटकी भर या 21 दाने अखंडित चावल बांधकर छुपाकर रखने से बेवजह खर्च नहीं होता है।

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  • लकी चार्म अर्थात भाग्यशाली वस्तुएं

    लकी चार्म अर्थात भाग्यशाली वस्तुएं
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    ये वस्तएं आपके लिए लकी चार्म अर्थात भाग्यशाली वस्तुएं कहलाती है। अगर आप भी चाहते हैं आपके हर काम बने तो यहाँ पर बताये हुए लकी चार्म अपने पास अवश्य ही रखें।

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    1. मेष राशि : मेष राशि वाले अपने लकी चार्म के रूप में लाल हकीक पत्थर अपने साथ रखें, उनके बिगड़े कार्य बनने लगेंगे ।
    2. वृष राशि : कोड़ी माँ लक्ष्मी को बहुत प्रिय है । वृष राशि वाले अगर सफेद कोड़ी को अपने पास रखें तो उनका भाग्य प्रबल रहेगा ।

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    1. मिथुन राशि : मिथुन राशि वाले अपने लकी चार्म के रूप में गणेश रूद्राक्ष को अपने साथ रखे , उनके कार्यों में कोई भी विघ्न नहीं आएंगे ।
    2. कर्क राशि : कर्क राशि वाले चांदी का चंद्रमा को हमेशा अपने साथ रखे तो उन्हें अपने सभी कार्यों में आसानी से सफलता प्राप्त होगी ।

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    1. सिंह राशि : सिंह राशि वालें अपने लकी चार्म के रूप में तांबे का बना सूर्य का लॉकेट साथ में रखें , धन-यश सब आपके पास रहेगा ।
    2. कन्या राशि : कन्या राशि वालें गणेश जी का लॉकेट पहने या अपने साथ रखें, सभी कार्य बनते नज़र आएंगे ।
    3. तुला राशि : तुला राशि वाले अपने लकी चार्म के रूप में गौमती चक्र अपने पास रखे। वाकपटुता और आत्मविश्वास बढ़ेगा, धन का भी आगमन आसानी से होगा ।

    8.वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि वाले लोग हाथी दांत से बनी कोई भी वस्तु या लॉकेट पहनें या अपने साथ रखें, यश और कीर्ति बढ़ेगी ।
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    1. धनु राशि : धनु राशि वाले जातक अपने लकी चार्म के रूप में हल्दी की गांठ को अपने पास रखे ।
    2. मकर राशि : मकर राशि वाले जातक अपने लकी चार्म के रूप में फिरोजा रत्न को लॉकेट में पहने भाग्य साथ देता रहेगा ।
    3. कुंभ राशि : कुम्भ राशि का स्वामी शनि देव है अत: इस राशि के लोग अष्ट धातु की अंगुठी को पहनें, किस्मत का सितारा बुलंद होगा ।

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    1. मीन राशि : मीन राशि वाले जातक लकी चार्म के रूप में सोने की चैन या अँगूठी धारण करें, भाग्य चमकने लगेगा ।
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  • यदि धन कोई ले और वापिस ना करें

    यदि धन कोई ले और वापिस ना करें
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    यदि धन कोई ले और वापिस ना करें तो पूजा में माँ लक्ष्मी को एक पान और घर में जितने लोग है उतने जोड़े लौंग के अर्पित कर दे लक्ष्मी मन्त्र के साथ पितृ दोष का निवारण अवश्य करे और लौंग का जोड़ा अर्पित करते समाय उस व्यक्ति की शिकायत लक्ष्मी माँ से करे की इस व्यक्ति ने पैसा दबा लिया है ।
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    पंचम भाव से यदि पितृ दोष बने तो मित्र जरूर धोखा देते है घर के करीबी लोग पैसा दबा लेंगे घर की औरते कंप्लेंट करती है की ये पैसा कमा के लाते है और घर में कुछ रखते ही नहीं सब इधर उधर बाँट आते है लोग पैसा लेते समय बहुत सगे बनते है लेकिन बाद में जरूरत के समय यदि आप उस व्यक्ति से पैसा मांगने जाओ तो भूल जाते है ।
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    मौनी अमावस्या और पितृ विसर्जनी अमावस्या पे ऐसे लोग पितृ दोष के उपाय जरूर कर ले ऐसे लोग हवन रेगुलर करे ।
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    पंचमुखी हनुमान जी की पूजा करे मंगल को चमेली का तेल और सिन्दूर हनुमान जी को लगाये गरीब बच्चो को बेसन की मिठाई बांटे लाल धागा दाहिने पैर में बांध के रखे।

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  • Ten Mahavidyas

    • Kali: Ruled by Saturn, associated with Aries and Scorpio (Mars).
    • Tara: Ruled by Jupiter, associated with Sagittarius and Pisces.
    • Tripura Sundari (Shodasi): Ruled by Mercury, associated with Gemini and Virgo.
    • Bhuvaneshwari: Ruled by the Moon, associated with Cancer.
    • Chinnamasta: Ruled by Rahu, associated with Aquarius and Capricorn (Saturn).
    • Bhairavi: Ruled by Lagna (ascendant), representing the self and personality.
    • Dhumavati: Ruled by Ketu, associated with Sagittarius and Pisces (Jupiter).
    • Bagalamukhi: Ruled by Mars, associated with Aries and Scorpio.
    • Matangi: Ruled by the Sun, associated with Leo.
    • Kamala (Lakshmi): Ruled by Venus, associated with Taurus and Libra

    The Ten Mahavidyas, in their usual order, are: Kali, Tara, Tripura Sundari (also known as Shodashi), Bhuvaneshvari, Bhairavi, Chhinnamasta, Dhumavati, Bagalamukhi, Matangi, and Kamala. These are ten Tantric goddesses in Hinduism, each representing a unique aspect of the divine feminine. 

  • Javadhu powder

    Javadhu powder

    The JAVADHU perfume based herbal powder is paradise.
    It is a mixture of Sandal wood with collection of flowers, herbs and spices.
    In Asian times, it was used by the
    Kings, Nobles and Priest.

    Most benefits of JAVADHU
    👉 It evokes mental harmony which makes your Aura more effective.
    👉 It enhances deep breath and helps us during yoga, pranayam , meditation and chakra workout.
    👉 It’s fragrance is a strong aphrodisiac.
    👉 It’s divine and spiritual fragrance, gives mental peace and relaxation from stress.
    👉 It resists body odour causing germs in the skin.
    👉 It stays with the skin and lasts much longer for a whole day.
    👉 It is a herbal remedy to boost odour.
    👉 It keeps body cool and fragrant and keeps the mind calm.
    👉 It is natural, pleasant and safe.
    👉 It helps in cleansing all the chakras and enhances the chakra.
    👉 It also makes the Venus planet powerful.

    How to use
    Javadhu powder being in powder form is easy to apply and will not give any suffocation.
    You can apply directly or mix it with water or rosewater, make a paste of it and then apply directly to the body.

    🙏

  • शमी का पेड़

    शमी का पेड़ (Prosopis cineraria) को वास्तुशास्त्र और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ माना गया है। इसे लगाने का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होता है। नीचे इसकी सही दिशा और स्थान की जानकारी दी गई है:

    🌳 शमी का पेड़ कहाँ लगाना चाहिए?

    ✅ उत्तम दिशा:

    पश्चिम दिशा (West) — शमी का पेड़ लगाने के लिए सबसे शुभ दिशा मानी जाती है।

    वैकल्पिक रूप से दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में भी लगाया जा सकता है।

    📍 स्थान का चयन:

    घर या बगीचे के बाहरी हिस्से में लगाना उत्तम होता है।

    इसे मुख्य द्वार के पास भी लगाया जा सकता है, लेकिन ऐसा करते समय यह ध्यान रखें कि यह द्वार को ढकने न लगे।

    भूमि में लगाना ज्यादा शुभ होता है, गमले में सिर्फ अस्थायी रूप से लगा सकते हैं।

    धार्मिक मान्यता:

    शमी वृक्ष को शनि देव और भगवान शिव दोनों का प्रिय माना जाता है।

    दशहरे और शनि अमावस्या पर इसकी पूजा विशेष फलदायी होती है।

    इसे लगाकर रोज़ाना जल अर्पित करने से शनि दोष, नजर दोष, और राहु-केतु के दुष्प्रभाव कम होते हैं।

    ध्यान रखें:

    शमी का वृक्ष कांटेदार होता है, इसलिए इसे बच्चों के खेलने के स्थान से दूर लगाएँ।

    इसे सूखी और धूप वाली जगह में लगाना उत्तम होता है, क्योंकि यह कम पानी में भी पनपता है।

  • देवशयनी एकादशी

    देवशयनी’ एकादशी
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    आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी’ एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह 06 जुलाई 2025  को पड़ रही ‘देवशयनी’ एकादशी है।
    इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए बलि के द्वार पर पाताल लोक में निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इसी दिन से चौमासे का आरम्भ माना जाता है।
    देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान् विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं।
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    देवशयनी एकादशी के बाद विवाह व मांगलिक कार्यों में विराम लग जायेगा..

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    • एकादशी को प्रातःकाल उठें।
    • इसके बाद घर की साफ-सफाई तथा नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएं।
    • स्नान कर पवित्र जल का घर में छिड़काव
    • घर के पूजन स्थल अथवा किसी भी पवित्र स्थल पर प्रभु श्री हरि विष्णु की सोने, चांदी, तांबे अथवा पीतल की मूर्ति की स्थापना करें।
    • तत्पश्चात उसका पूजन करें।
    • इसके बाद भगवान विष्णु को पीतांबर आदि से विभूषित करें।
    • तत्पश्चात व्रत कथा सुननी चाहिए।
    • इसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें।
    • अंत में सफेद चादर से ढंके गद्दे-तकिए वाले पलंग पर श्री विष्णु को शयन कराना चाहिए।

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    इस मंत्र से करें भगवान विष्णु को प्रसन्न :—-

    ‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम।
    विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।’

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    भावार्थ: हे जगन्नाथ! आपके शयन करने पर यह जगत सुप्त हो जाता है और आपके जाग जाने पर सम्पूर्ण चराचर जगत प्रबुद्ध हो जाता है। पीताम्बर, शंख, चक्र और गदा धारी भगवान् विष्णु के शयन करने और जाग्रत होने का प्रभाव प्रदर्शित करने वाला यह मंत्र शुभ फलदायक है जिसे भगवान विष्णु की उपासना के समय उच्चारित किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह चार मास भगवान विष्णु का निद्रा काल माना जाता है। इन दिनों में तपस्वी भ्रमण नहीं करते, वे एक ही स्थान पर रहकर तपस्या (चातुर्मास) करते हैं। इन दिनों केवल बृज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन चार महीनों में भू-मण्डल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर निवास करते हैं। ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस एकादशी का विशेष माहात्म्य लिखा है। इस व्रत को करने से प्राणी की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, सभी पाप नष्ट होते हैं तथा भगवान हृषीकेश प्रसन्न होते हैं।इस व्रत को करने से समस्त रखते वाले व्यक्ति को अपने चित, इंद्रियों, आहार और व्यवहार पर संयम रखना होता है. एकादशी व्रत का उपवास व्यक्ति को अर्थ-काम से ऊपर उठकर मोक्ष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. ==============================
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  • *श्री दुर्गाजी के 32 नाम!!*

    *श्री दुर्गाजी के 32 नाम!!*
         ॐ अस्य श्रीदुर्गा द्वात्रिंशंन्नाम स्त्रोत्रमंत्रस्य शिव ऋषि: अनुष्टुप छन्दः श्री दुर्गा देवता निज बीजं, मन्त्रः कीलकं, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं दारिद्रय दुर्भाग्य रोग शोक दुःख विनाशार्थे सर्वाशापूर्णार्थे च तददिव्य द्वात्रिंशंन्नाम मन्त्र जपे विनियोगः ।।

    ॐ दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।
    दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी
    दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला
    दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी
    दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता
    दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी
    दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी
    दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी
    दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी
    दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी
    नामावली ममायास्तु दुर्गया मम मानसः
    पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः
    पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः।

    देह शुद्धि के बाद कुश या कंबल के आसन पर बैठ कर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके घी का दिया जलाकर यदि इन नामो का जाप किया जाए तो व्यक्ति विनियोग में वर्णित हर भय से मुक्त हो जाता है । इस का जाप 5/11/21 बार करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

  • श्री बगला अष्टकम

       

    श्री बगला अष्टकम (Shri Bagla Ashtakam)


    ॥ श्री बगलाष्टक ॥
    पीत सुधा सागर में विराजत,
    पीत-श्रृंगार रचाई भवानी ।
    ब्रह्म -प्रिया इन्हें वेद कहे,
    कोई शिव प्रिया कोई विष्णु की रानी ।
    जग को रचाती, सजाती, मिटाती,
    है कृति बड़ा ही अलौकिक तेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करों न बिलम्ब हरो दुःख मेरो ॥1॥null

    पीत वसन, अरु पीत ही भूषण,
    पीत-ही पीत ध्वजा फहरावे ।
    उर बीच चम्पक माल लसै,
    मुख-कान्ति भी पीत शोभा सरसावे ।
    खैच के जीभ तू देती है त्रास,
    हैं शत्रु के सन्मुख छाये अंधेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥2॥

    ध्यावै धनेश , रमेश सदा तुम्हें,
    पूजै प्रजेश पद-कंज तुम्हारे ।
    गावें महेश, गणेश ,षडानन,
    चारहु वेद महिमा को बखाने ।
    देवन काज कियो बहु भाँति,
    एक बार इधर करुणाकर हेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न बिलम्ब हरो दुःख मेरो ॥3॥

    नित्य ही रोग डरावे मुझे,
    करुणामयी काम और क्रोध सतावे ।
    लोभ और मोह रिझावे मुझे,
    अब शयार और कुकुर आँख दिखावे ।
    मैं मति-मंद डरु इनसे,
    मेरे आँगन में इनके है बसेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥4॥

    नाम पुकारत दौडी तू आवत,
    वेद पुराण में बात लिखी है ।
    आ के नसावत दुःख दरिद्रता,
    संतन से यह बात सुनी है ।
    दैहिक दैविक, भौतिक ताप,
    मिटा दे भवानी जो है मुझे घेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥5॥

    जग में है तेरो अनेको ही पुत्र,
    विलक्षण ज्ञानी और ध्यानी, सुजानी ।
    मैं तो चपल, व्याकुल अति दीन,
    मलिन, कुसंगी हूँ और अज्ञानी ।
    हो जो कृपा तेरो, गूंगा बके,
    अंधा के मिटे तम छाई घनेरो ।
    हे जगदम्ब! तू ही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥6॥

    विद्या और लक्ष्मी भरो घर में,
    दुःख दीनता को तुम आज मिटा दो ।
    जो भी भजे तुमको, पढ़े अष्टक,
    जीवन के सब कष्ट मिटा दो ।
    धर्म की रक्षक हो तू भवानी,
    यह बात सुनी ओ-पढ़ी बहुतेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥7॥

    अष्ट ही सिद्धि नवो निधि के तुम,
    दाता उदार हो बगला भवानी ।
    आश्रित जो भी है तेरे उसे,
    कर दो निर्भय तू हे कल्याणी ।
    `बैजू` कहे ललकार, करो न विचार,
    बुरा ही पर हूँ तेरो चेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥8॥

    ॥ दोहा ॥
    यह अष्टक जो भी पढे, माँ बगला चितलाई ।
    निश्चय अम्बे प्रसाद से कष्ट रहित हो जाई ॥