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  • *अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु


    हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते है

    *अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु

    बुध के लिए
    ०१. एक हरी इलाईची प्रतेक बुधवार को जल में प्रवाहित करें
    ०२. बुधवार को इलाईची व तुलसी के पत्ते सेवन करें |
    ०३. हरे सीता फल के अन्दर ताम्बे के पैसे डालकर नदी में प्रवाहित करें |
    ०५. संकटनाशन गणपति स्तोत्र का पाठ नित्य करें ।
    ०६. बुधवार के दिन ५ बालक व बालिकाओं को भोजन कराएँ ।
    ०७. बुधवार को गाय को हरी घास खिलाएं |
    ०८. दुर्गासप्तशती का पाठ करवाएं | यदि संभव हो तो स्वयं करें
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  • शुभकर्तरि – पापकर्तरि योग

    शुभकर्तरि – पापकर्तरि योग

    किसी भी जातक की कुंडली में अनेक शुभाशुभ योग होते हैं। इन्हीं योगों के आधार पर जातक जीवन में अपना मुकाम हासिल कर पाता है। अशुभ योगों के प्रभाव से राजपरिवार में जन्मे जातक को भी दर-दर की ठोकर खानी पड़ सकती हैं और रंक सा जीवन जीना पड़ सकता है। वहीं शुभ योगों के प्रभाव से भिक्षा मांग कर जीवन यापन करने वाले का भाग्य भी बदलने में वक्त नहीं लगता। हालांकि जन्म के समय जातक की कुंडली में जो योग ग्रह बना रहे होते हैं उनका प्रभाव दीर्घकालीन होता है लेकिन क्योंकि परिवर्तन सृष्टि का नियम है और समय के साथ हर चीज गतिमान है। इसी कारण ग्रहों के गोचर से समयानुसार शुभाशुभ दौर जातक के जीवन में आते रहते हैं। ऐसा ही एक दौर तब आता है जब गोचर करते-करते ग्रह जातक की कुंडली में शुभ एवं पापकर्तरि योग का निर्माण करते हैं। आइये जानते हैं कैंची की तरह काम करने वाले इस शुभ और पाप कर्तरियोग के बारे में।

    क्या है शुभ कर्तरि और पापकर्तरि योग?
    जब जातक की कुंडली के किसी भी भाव के दोनों और शुभाशुभ ग्रह गोचररत हों तो ऐसी अवस्था में शुभ एवं पाप कर्तरि योग का निर्माण होता है। यदि किसी भी भाव के दोनों तरफ शुभ ग्रह हों तो यह शुभ कर्तरि योग कहलायेगा और दोनों और पाप अथवा क्रूर ग्रह हों तो जातक की कुंडली में पाप कर्तरि योग बनता है। अब आपके जहन में यह सवाल भी उठ सकता है कि आखिर शुभ और पाप या क्रूर ग्रह कौनसे माने जाते हैं। तो बुध, चंद्रमा, बृहस्पति एवं शुक्र को ज्योतिषशास्त्र में शुभ ग्रह माना जाता है तो सूर्य, मंगल, शनि व राहू को अशुभ ग्रह माना जाता है।

    शुभ एवं पाप कर्तरि योग का प्रभाव
    शुभ कर्तरि संजातस्तेजोवित्तबलाधिक:

    पापकर्तरिके पापी भिक्षाशी मलिनो भवेत

    अर्थात शुभ कर्तरि योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति तेजस्तवी, धनी एवं बल से परिपूर्ण होता है वहीं पाप कर्तरि योग में जन्म लेने वाला मनुष्य भिक्षा मांगकर गंदगी में अपना जीवन यापन करने पर विवश होता है। इस श्लोक से आप शुभ एवं पाप कर्तरि योग के प्रभाव को तो समझ ही गये होंगे लेकिन यदि शुभ कर्तरि योग में भी शुभ ग्रहों पर पाप ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो इस योग का शुभ प्रभाव नहीं मिलता। इसी प्रकार यदि पाप कर्तरि योग के दौरान शुभ ग्रह पूरे बल से अशुभ ग्रहों को देख रहे हों तो अशुभ फल में भी कुछ कमी आ जाती है। दोनों ही स्थितियों में जिस भी भाव में इन योगों का निर्माण हो रहा हो उस भाव के अनुसार सकारात्मक व नकारात्मक परिणाम मिलते हैं। इतना ही नहीं जो शुभाशुभ ग्रह यह योग बना रहे हों आपकी राशि के अनुसार उनके कारक तत्वों पर भी प्रभाव पड़ता है। उदाहरण के तौर पर यदि शुक्र ग्रह जो कि लाभ व सुख-समृद्धि के कारक हैं इस योग से प्रभावित हैं तो आपके लिये लाभ के अवसर बढ़ेंगें और सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। लेकिन वहीं पाप कर्तरि योग में जो भी पापी या क्रूर ग्रह इसे बना रहे हों उनके कारक तत्वों में वृद्धि हो जायेगी यानि हानि के संकेत बढ़ जायेंगें

  • अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु


    हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं।

    *अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु

    सूर्य के लिए

    ०१. ग्यारह या इक्कीस रविवार तक गणेश जी पर लाल फूलों चढ़ाएं |

    ०२. चांदी के बर्तन में जल पीयें, और चांदी के वर्क का सेवन करें।

    ०३. रविवार को नमक का सेवन करें |

    ०४. सूर्य की होरा {समय} में निर्जल {बिना पानी पीये} रहें ।

    ०५. विष्णु भगवान का पूजन करें |

    ०६. “ॐ घ्रिणी सूर्याय नमः” इस मन्त्र का १०८ या ५१ या फिर २१ बार सुबह शाम जाप करें |

    ०७. सूर्य को ताम्बे के लोटे से “जल, चावल, लाल फूल, लाल सिंदूर” मिला कर अ

  • बुध की शांति के लिए

    बुध की शांति के लिए स्वर्ण का दान करना चाहिए। हरा वस्त्र, हरी सब्जी, मूंग का दाल एवं हरे रंग के वस्तुओं का दान उत्तम कहा जाता है। हरे रंग की चूड़ी और वस्त्र का दान किन्नरो को देना भी इस ग्रह दशा में श्रेष्ठ होता है। बुध ग्रह से सम्बन्धित वस्तुओं का दान भी ग्रह की पीड़ा में कमी ला सकती है। इन वस्तुओं के दान के लिए ज्योतिषशास्त्र में बुधवार के दिन दोपहर का समय उपयुक्त माना गया है। बुध की दशा में सुधार हेतु बुधवार के दिन व्रत रखना चाहिए। गाय को हरी घास और हरी पत्तियां खिलानी चाहिए। ब्राह्मणों को दूध में पकाकर खीर भोजन करना चाहिए। बुध की दशा में सुधार के लिए विष्णु सहस्रनाम का जाप भी कल्याणकारी कहा गया है। रविवार को छोड़कर अन्य दिन नियमित तुलसी में जल देने से बुध की दशा में सुधार होता है। अनाथों एवं गरीब छात्रों की सहायता करने से बुध ग्रह से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मौसी, बहन, चाची बेटी के प्रति अच्छा व्यवहार बुध ग्रह की दशा से पीड़ित व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है।

        अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।
        बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
        हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।
        बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें।
        घर में खंडित एवं फटी हुई धार्मिक पुस्तकें एवं ग्रंथ नहीं रखने चाहिए।
        अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
        तोता पालने से भी बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
        बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

  • अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु


    हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते हैं।

    *अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु

    मंगल के लिए* ०१. मंगलवार को रेवड़ियाँ पानी में प्रवाहित करें | ०२. ⁠आटे के पेड़े में गुड व चीनी मिलाकर गाय को खिलाएं | ०३. ताम्बे के बर्तन से जल पियें | ०४. लाल पुष्पों को जल में प्रवाहित करें, मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर जा के हनुमान जी के चरणों से सिंदूर अपने मस्तक से लगायें | ०५. नित्य सुबह शाम हनुमान चालीसा व बजरंग बाण का पाठ करें | ०६. दूध का उबाल चूल्हे पर न गिरने दें |

  • सूर्य रत्न ओरेंज हकीक

    सूर्य रत्न ओरेंज हकीक
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    यह रत्न लाईट ओरेंज कलर का अपारदर्शी रत्न होता है. यह प्रशांत महासागर में पाया जाने वाला दुर्लभ रत्न है.
    इसे विशेष तौर पर :—
    🌲सूर्य जनित दोषों को दूर करने,
    🌲सरकार व सत्ता से लाभ उठाने,
    🌲सरकारी नौकरी प्राप्त करने,
    🌲पिता के अच्छे स्वास्थय के लिए,
    🌲नेत्र रोग, सिर दर्द, सर्वाईकल, माईग्रेशन, डिप्रैशन से निदान के लिए,
    🌲पैतृक संपत्ती प्राप्ती तथा डूबते हुए बिजनैस व पैसों की रिकवरी हेतु धारण किया जाता है.

  • शनि जयन्ती & वट सावित्री व्रत

    शनि जयन्ती & वट सावित्री व्रत
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    ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाएगी. इस दिन शनि देव की विशेष पूजा का विधान है.शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव को प्रणाम करे और सरसों या तिल के तेल से स्नान कराएं तथा पूजन करें साथ ही शनि मंत्र का उच्चारण करें :-ॐ शनिश्चराय नम:।।
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    इसके बाद पूजा सामग्री सहित शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान करें. इस प्रकार पूजन के बाद दिन भर निराहार रहें व मंत्र का जप करें. शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल , उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए, शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपडे, गुलाब जामुन, काली उडद, काले जूते, तिल, लोहा, तेल, आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं.
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    “Om Pram Pri Prom Sah Shanaye Namah”. (ॐ प्रां प्रीं प्रौ स. शनये नमः॥
    मंत्र की एक माला जपे ।

    जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह से संबंधित दोष है उनको 25 मई को शनिदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए. शनि ग्रह से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए और ईमानदारी के कर्म करने का प्रण लेना चाहिए. यदि कोई पूरी आस्था से ये सब करता है तो शनि से संबंधित सारे दोष शनिदेव हर लेते हैं और दौलत, शोहरत प्रदान करते हैं.

    • तेल में बनी खाद्य सामग्री का दान गाय, कुत्ता व भिखारी को करें।
    • विकलांग व वृद्ध व्यक्तियों की सेवा करें।
    • शनिजी का जन्म दोपहर या सायंकाल में है। अतः दोपहर व सायंकाल में मौन रखें।
    • शनिजी की प्रतिमा को देखते समय उनकी आँखों को नहीं देखें।
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    • हनुमान मंदिर जाये ।

    *अपने आस पास पेड़ पौधे लगाये ।

    पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत
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    ज्येष्ठ मास की अमास्या को वट सावित्री व्रत का विधान धर्म ग्रंथों में बताया गया है. महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए, उनके जीवन से परेशानी दूर करने के लिए वट सावित्री व्रत पूरी आस्था से रखती है शास्त्रों के अनुसार ये व्रत सौभाग्य को बढ़ाने वाला और पुण्य प्रदान करने वाला माना जाता है ये व्रत पति-पत्नी के बीच प्रेम भाव को और बढ़ता है, घर में खुशहाली आती है, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.

  • ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा

    ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के दिन मूल नक्षत्र होने पर मथुरा में स्नान करके विधिवत् व्रत-उपवास करके भगवान कृष्ण की पूजा उपासना करते हुए श्री नारद पुराण का श्रवण करें तो भक्ति जन्म-जन्मान्तरों के पाप से मुक्त हो जाता है। माया के जाल से मुक्त होकर निरंजन हो जाता है। भगवान् विष्णु के चरणों में वृत्ति रखने वाला संसार के प्रति अनासक्त होकर फलस्वरूप जीव मुक्ति को प्राप्त करता हुआ वैकुंठ वासी हो जाता है।

    धर्मसिन्धु के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को तिलों के दान से अश्वमेध यज्ञ का फल होता है।

  • अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु


    हमारे घर में ही कई ऐसी भाग्यवर्धक चीजें होती है, जिनका प्रयोग करने पर हम स्वयं अपने घर-ऑफिस आदि के नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि कर सकते हैं। ऐसे आसान उपाय जिससे हम सकारात्मक ऊर्जा का विकास कर अपने भाग्य को बदल सकते हैं, अपना भाग्य जागृत कर सकते है

    *अनिष्ट ग्रहों के निवारण हेतु

    चन्द्र के लिए* ०१. दक्षिणावर्ती शंख का नित्य पूजन करें | ०२. ग्यारह सोमवार को दोपहर में केवल दही-भात ही खाएं | ०३. सूर्यास्त के बाद दूध न पियें | न ही पिलायें | ०४. तीन सफ़ेद फूल हर सोमवार और पूर्णिमा को नदी या बहती दरिया में विसर्जित करें | ०५. मोतियों की माला या चन्द्रकान्तमणि गले में धारण करें । ०६. पूर्णिमा की रात को चन्द्र दर्शन करें व चन्द्रमा को चावल एवं दूध मिलाकर चांदी के बर्तन से अर्घ्य दें | ०७.सोमवती अमावस्या को ५ सुहागन स्त्रियों को खीर का भोजन कराएँ व दक्षिणा दें | 

  • Rog nash mantra

    अच्युतानंद गोविंद नामोच्चारण
    भेषजात। नश्यन्ति सकलारोगा: सत्यं
    सत्यं वदाम्यहम्