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  • क्यों किया जाता है बड़ा महादेव पूजन

    क्यों किया जाता है बड़ा महादेव पूजन, जानें महत्व, पूजा विधि और इस व्रत के बारे में खास जानकारी
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    बड़ा महादेव पूजा: हर शिवभक्त सावन मास, सोमवार तथा बड़ा महादेव पूजन के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई शिव मंदिरों में ‘बड़ा महादेव’ के नाम से विशेष अभिषेक और अनुष्ठान किए जाते हैं। यह पूजन आपको भगवान शिव के करीब लाता है और उनके आशीर्वाद से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

    बड़ा महादेव पूजन का महत्व:- ‘बड़ा महादेव’ से तात्पर्य भगवान शिव के विशाल या सर्वव्यापी स्वरूप से है, जिनकी पूजा से समस्त कष्टों का निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह पूजन भगवान शिव की असीम शक्ति और कल्याणकारी स्वरूप को समर्पित है। और मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थल में बड़ा महादेव में मंदिर स्थित हैं, जहां प्रतिवर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर बड़ा महादेव पूजन किया जाता है।

    • समस्त कष्टों का निवारण:- भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा जाता है, जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उनकी पूजा से जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां, रोग, दोष और बाधाएं दूर होती हैं।
    • ग्रह दोष शांति:- भगवान शिव ग्रहों के अधिपति भी माने जाते हैं। उनकी पूजा से कुंडली में मौजूद अशुभ ग्रह दोष (जैसे शनि, राहु, केतु) के प्रभावों को कम किया जा सकता है।
    • मोक्ष और शांति:- शिव की आराधना से मानसिक शांति मिलती है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
    • काल मृत्यु का भय दूर:- महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिव पूजन अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और दीर्घायु प्रदान करता है।
    • मनोकामना पूर्ति:- भक्त अपनी विभिन्न मनोकामनाओं जैसे संतान प्राप्ति, धन-धान्य, उत्तम स्वास्थ्य, विवाह या करियर में सफलता के लिए महादेव का पूजन करते हैं।

    🚩पूजा विधि:- यह पूजा सामान्यतः सोमवार को या बड़ा महादेव पूजन के दिन की जाती है।

    📿1. प्रातःकाल स्नान और संकल्प:-
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    • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
    • हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव के सामने अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत और पूजन का संकल्प लें।

    📿2. शिवलिंग/शिव प्रतिमा की स्थापना:-
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    • घर में या मंदिर में शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। यदि शिवलिंग है तो उसे पूजा में प्राथमिकता दें।

    📿3. अभिषेक/ रुद्राभिषेक:-
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    • यह ‘बड़ा महादेव पूजन’ का सबसे महत्वपूर्ण अंग है।
    • जल से अभिषेक: सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल की धारा अर्पित करें।
    • पंचामृत अभिषेक:- इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण यानी पंचामृत से अभिषेक करें।
    • पुनः जल से अभिषेक:- पंचामृत के बाद फिर से शुद्ध जल से अभिषेक करें।
    • अन्य द्रव्य:- आप अपनी सामर्थ्य और इच्छा अनुसार गन्ने का रस, चंदन का जल, इत्र, केसर मिश्रित दूध आदि से भी अभिषेक कर सकते हैं।
    • अभिषेक करते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या •महामृत्युंजय मंत्र का जाप लगातार करते रहें।

    📿4. श्रृंगार और अर्पण:-
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    • अभिषेक के बाद शिवलिंग को पोंछकर साफ करें।
    • चंदन:- शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं।
    • भस्म:- भस्म या विभूति अर्पित करें।
    • फूल और माला:- भगवान शिव को 3 पत्तों वाला बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, और सफेद पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। इनकी माला बनाकर भी अर्पित कर सकते हैं।

    5. धूप, दीप और नैवेद्य:-
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    • घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती करें।
    • भोलेनाथ को मिठाई, फल, भांग, धतूरा, या मौसमी फलों का भोग लगाएं। शिव जी को अक्सर ठंडाई और भांग का भोग लगाया जाता है।

    6. मंत्र जाप और पाठ:-
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    • •’ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
    • शिव चालीसा, रुद्राष्टक, शिव तांडव स्तोत्र, या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
    • आप अपनी इच्छानुसार शिव पुराण या शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।

    📿7. कथा और आरती:-
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    • शिव पूजन के बाद शिव कथा पढ़ें या सुनें।
    • अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। पूजा पूर्ण होने के बाद प्रसाद अर्पित करें।

    📿इस व्रत के बारे में खास जानकारी:-
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    • सोमवार का महत्व:- चूंकि सोमवार भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए इस दिन किया गया •’बड़ा महादेव पूजन’ विशेष फलदायी होता है।
    • निर्जला/ फलाहार:- भक्त अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता अनुसार निर्जला या फलाहारी यानी केवल फल खाकर व्रत रखते हैं।
    • शिवलिंग पर जल चढ़ाने का महत्व:- गर्मी के मौसम में शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया था, जिससे उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी थी। जल चढ़ाने से उन्हें शीतलता मिलती है।
    • बेलपत्र का महत्व:- बेलपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। कहा जाता है कि बेलपत्र की जड़ में स्वयं शिव का वास होता है। बेलपत्र पर •’ॐ नमः शिवाय’ लिखकर चढ़ाना बहुत शुभ होता है।
    • रुद्राक्ष धारण:- शिव पूजन के बाद रुद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि रुद्राक्ष शिव का ही स्वरूप है।
      #जय_महाकाल
      🙏🏻🙏🏻🙏🏻
  • 27 नक्षत्र -विस्तृत

    27 नक्षत्र -विस्तृत

    जन्म नक्षत्रों से संबंधित वृक्ष आप लगाए या जहा कही ये बृक्ष हो नियमित सेवा करे खाद पानी दिया करे इससे आपको मानसिक शांति और भाग्य में वृद्धि होगी आइये देखे किस नक्षत्र के लोग किस पेड़ की ज्यादा सेवा करे।।
    1– अश्विनी नक्षत्र का वृक्ष :– केला, आक, धतूरा है ।
    2– भरणी नक्षत्र का वृक्ष :–केला, आंवला है ।
    3– कृत्तिका नक्षत्र का वृक्ष :– गूलर है ।
    4– रोहिणी नक्षत्र का वृक्ष :– जामुन है ।
    5– मृगशिरा नक्षत्र का वृक्ष :– खैर है ।
    6– आर्द्रा नक्षत्र का वृक्ष :– आम, बेल है ।
    7– पुनर्वसु नक्षत्र का वृक्ष :– बांस है ।
    8– पुष्य नक्षत्र का वृक्ष :– पीपल है ।
    9– आश्लेषा नक्षत्र का वृक्ष :– नाग केसर और चंदन है ।
    10- मघा नक्षत्र का वृक्ष :– बड़ है ।
    11- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष :- ढाक है ।
    12- उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का वृक्ष :- बड़ और पाकड़ है ।
    13- हस्त नक्षत्र का वृक्ष :– रीठा है ।
    14- चित्रा नक्षत्र का वृक्ष :– बेल है ।
    15- स्वाति नक्षत्र का वृक्ष :– अर्जुन है ।
    16- विशाखा नक्षत्र का वृक्ष :– नीम है ।
    17- अनुराधा नक्षत्र का वृक्ष :– मौलसिरी है ।
    18- ज्येष्ठा नक्षत्र का वृक्ष :– रीठा है ।
    19- मूल नक्षत्र का वृक्ष :– राल का पेड़ है।
    20- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष :– मौलसिरी/जामुन है ।
    21- उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का वृक्ष :– कटहल है ।
    22- श्रवण नक्षत्र का वृक्ष :– आक है ।
    23- धनिष्ठा नक्षत्र का वृक्ष :– शमी और सेमर है ।
    24- शतभिषा नक्षत्र का वृक्ष :– कदम्ब है ।
    25- पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष :– आम है ।
    26- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का वृक्ष :– पीपल और सोनपाठा है।
    27- रेवती नक्षत्र का वृक्ष :– महुआ है ।
    माना जाता है कि इनकी इनके पास बैठने से खाद पानी देने से नक्षत्रों का दोष दूर हो जाता है ।
    पंचक नक्षत्र
    धनिष्ठा के अंतिम दो चरण ,शतभिषा,पूर्वा भाद्रपद ,उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पांच नक्षत्रों के समूह को पंचक कहा जाता है। ये पांचो नक्षत्र कुम्भ तथा मीन राशि के अंतर्गत हैं। पंचक लगने पर लकड़ी और घास का संग्रह,दक्षिण दिशा की यात्रा ,मृतक का दाह संस्कार ,खाट बनवाना त्याज्य होता है। पंचकों में यह कार्य करने पर अग्नि भय ,रोग,दण्ड ,हानि,और शोक होता है।
    चलिए दोस्तो अब देखते है नक्षत्र स्वभाव

    1. :अशिवनी : केतु : ज्योतिष शास्त्र में सबसे प्रमुख और सबसे प्रथम अश्विन नक्षत्र को माना गया है। जो व्यक्ति इस नक्षत्र में जन्म लेता है वह बहुत ऊर्जावान होने के सथ-साथ हमेशा सक्रिय रहना पसंद करता है। इनकी महत्वाकांक्षाएं इन्हें संतुष्ट नहीं होने देतीं। ये लोग रहस्यमयी प्रकृत्ति के इंसान होने के साथ-साथ थोड़े जल्दबाज भी होते हैं जो पहले काम कर लेते हैं और बाद में उस पर विचार करते हैं। ये लोग अच्छे जीवनसाथी और एक आदर्श मित्र साबित होते हैं।

    1. : भारिणी : शुक्र : इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है, जिसकी वजह से इस नक्षत्र में जन्में लोग आराम पसंद और आलीशान जीवन जीना चाहते हैं। ये लोग काफी आकर्षक और सुंदर होते हैं, इनका स्वभाव लोगों को आकर्षित करता है। इनके जीवन में प्रेम सर्वोपरि होता है और जो भी ये ठान लेते हैं उसे पूरा करने के बाद ही चैन से बैठते हैं। इनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान हमेशा बना रहता है।
    2. : कृतिका : सूर्य : इस नक्षत्र में जन्में जातक ना तो पहली नजर में प्यार जैसी चीज पर भरोसा करते हैं और ना ही किसी पर बहुत जल्दी एतबार करते हैं ये लोग मतलब से रिश्ता बनाते है और अगर रिश्ते में इनकी बात शादी विवाह के बाद न सुने तो तोडने में देर नही लगाते। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति पर सूर्य का प्रभाव रहता है, जिसकी वजह से ये लोग आत्म गौरव करने वाले होते हैं। ये लोग स्वाभिमानी होने के साथ-साथ तुनक मिजाजी और बहुत उत्साहित रहने वाले होते हैं। ये लोग जिस भी काम को अपने हाथ में लेते हैं उसे पूरी लगन और मेहनत के साथ पूरा करने की कोशिश करते है लेकिन अतिविश्वास के कारण और खूद पर घमंड के कारण हमेशा लगभग फेल होते है सूर्य इनको दम्भी बना देता है इनको लगता है जैसे ये कुछ भी कर सकते है लेकिन हकीकत में सिर्फ हवा होते है । कृतिका नक्षत्र की लड़किया बहुत सुंदर अअच्छेऔर भगवान ग्रह और भाग्य में विश्वास रखती है और पुरुषों से विपरीत विचार रखती है बहुत साफ दिल की होती है छल कपट से दूर रहती है।
    3. : रोहिणी :चन्द्रमा : रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है और चंद्रमा के प्रभाव की वजह से ये लोग काफी कल्पनाशील और रोमांटिक स्वभाव के होते हैं। ये लोग काफी चंचल स्वभाव के होते हैं और स्थायित्व इन्हें रास नहीं आता। इन लोगों की सबसे बड़ी कमी यह होती है कि ये कभी एक ही मुद्दे या राय पर कायम नहीं रहते। ये लोग स्वभाव से काफी मिलनसार तो होते ही हैं लेकिन साथ-साथ जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को पाने की कोशिश भी करते रहते हैं। विपरीत-लिंग के लोगों के प्रति इनके भीतर विशेष आकर्षण देखा जा सकता है।
    4. :मृगशिरा : मंगल : इस नक्षत्र के जातकों पर मंगल का प्रभाव होने की वजह से ये लोग काफी साहसी और दृढ़ निश्चय वाले होते
      इनके गुप्त शत्रु बहुत ज्यादा होते है । राजनीति में ये लोग शिखर पर पहुचते जरूर हैं। ये लोग स्थायी जीवन जीने में विश्वास रखते हैं और हर काम पूरी मेहनत के साथ पूरा करते हैं। इनका व्यक्तित्व काफी आकर्षक होता है और ये हमेशा सचेत रहते हैं क्यो की जान का खतरा हमेशा शत्रु द्वारा होता है वाहन दुर्घटना के भी शिकार होते है क्यो की मृग का जीवन जैसे जंगल मे हमेशा खतरे में रहता है ऐसा ही जीवन मे अनुभव होता है। अगर कोई व्यक्ति इनके साथ धोखा करता है तो ये किसी भी कीमत पर उसे सबक सिखाकर ही मानते हैं। ये लोग काफी बुद्धिमान और मानसिक तौर पर मजबूत होते हैं। इन्हें संगीत का शौक होता है और ये सांसारिक सुखों का उपभोग करने वाले होते हैं इनका हृदय कोमल दयावान भक्तिवान आस्था और ब्राह्मण भगवान सबमे बहुत आस्था होती है जीवन राजा और ताजनीति के इर्दगिर्द घुमता है और एक दिन ताजपोशी होती है
    5. : आर्द्रा : राहु : इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों पर आजीवन बुध और राहु ग्रह का प्रभाव रहता है। राहु का प्रभाव इन्हें राजनीति की ओर लेकर जाता है और इनके प्रति दूसरों में आकर्षण विकसित करता है। ये लोShivaों का दिमाग पढ़ लेते हैं इसलिए इन्हें बहुत आसानी से उलझाया नहीं जा सकता। इनको संघर्ष बहुत करना पड़ता है लांछन आरोप भी लगता है दूसरों से काम निकलवाने में माहिर इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए नैतिकता को भी छोड़ देते हैं।
    6. : पुनर्वसु : गुरु : ऐसा माना जाता है कि इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति के भीतर दैवीय शक्तियां होती हैं। इनका शरीर काफी भारी और याद्दाश्त बहुत मजबूत होती है। ये लोग काफी मिलनसार और प्रेम भावना से ओत-प्रोत होते हैं। आप कह सकते हैं कि जब भी इन पर कोई विपत्ति आती है तो कोई अदृश्य शक्ति इनकी सहायता करने अवश्य आती है। ये लोग काफी धनी भी होते हैं।
    7. : पुष्य : शनि : ज्योतिषशास्त्र के अंतर्गत शनिदेव के प्रभाव वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग दूसरों की भलाई के लिए सदैव तैयार रहते हैं और इनके भीतर सेवा भावना भी बहुत प्रबल होती है। ये लोग मेहनती होते हैं और अपनी मेहनत के बल पर धीरे-धीरे ही सही तरक्की हासिल कर ही लेते हैं। ये लोग कम उम्र में ही कई कठिनाइयों का सामना कर लेते हैं इसलिए ये जल्दी परिपक्व भी हो जाते हैं। चंचल मन वाले ये लोग विपरीत-लिंग के प्रति विशेष आकर्षण भी रखते हैं। इन्हें संयमित और व्यवस्थित जीवन जीना पसंद होता है।
    8. :आश्लेषा : बुध : शास्त्रों के अनुसार यह नक्षत्र विषैला होता है और इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के भीतर भी विष की थोड़ी बहुत मात्रा अवश्य पाई जाती है। आश्लेषा नक्षत्र में जन्में व्यक्ति ईमानदार तो होते हैं किंतु मौका मिलते ही अपने रंग दिखाने से भी बाज नहीं आते। जब तक इन्हें लाभ मिलता है बस तभी तक दोस्ती निभाने वाले ये लोग दूसरों पर बिल्कुल भरोसा नहीं कर पाते।
    9. : मघा : केतु : इस नक्षत्र को गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी में रखा गया है। सूर्य के स्वामित्व के कारण ये लोग काफी ज्यादा प्रभावी बन जाते हैं। इनके भीतर स्वाभिमान की भावना प्रबल होती है और बहुत ही जल्दी इनका दबदबा भी कायम हो जाता है। ये कर्मठ होते हैं और किसी भी काम को जल्दी से जल्दी पूरा करने की कोशिश करते हैं। इनके भीतर ईश्वरीय आस्था बहुत अधिक होती है।
    10. 11. : पुर्वफाल्गुनी : शुक्र : इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों में संगीत और कला की विशेष समझ होती है जो बचपन से ही दिखाई देने लगती है। ये लोग नैतिकता और ईमानदारी के रास्ते पर चलकर ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं, शांति पसंद होने की वजह से किसी भी तरह के विवाद या लड़ाई-झगड़े में पड़ना पसंद नहीं करते। इनके पास धन की मात्रा अच्छी खासी होती है जिसकी वजह से ये भौतिक सुखों का आनंद उठाते हैं। ये लोग अहंकारी प्रवृत्ति के होते हैं।
    11. : उतरा फाल्गुनी : सूर्य : इस नक्षत्र में जन्में लोग समझदार और बुद्धिमान होते हैं। ये अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भरपूर प्रयास करते हैं। ये लोग निजी क्षेत्र में सफलता हासिल नहीं कर सकते इसलिए इन्हें सरकारी क्षेत्र में ही अपना कॅरियर तलाशना चाहिए। ये लोग एक काम को करने में काफी समय लगा देते हैं। अपने हर संबंध को ये लोग लंबे समय तक निभाते हैं।
    12. : हस्त : चन्द्रमा : बौद्धिक, मददगार, निर्णय लेने में अक्षम, कुशल व्यवसायिक गुणों वाले ये लोग दूसरों से अपना काम निकालने में माहिर माने जाते हैं। इन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधाएं मिलती हैं और इनका जीवन आनंद में बीतता है।
    13. 14. : चित्रा : मंगल : इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के स्वभाव में आपको मंगल ग्रह का प्रभाव दिखाई दे सकता है। ये लोग हर किसी के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करते हैं, इन्हें आप सामाजिक हितों के लिए कार्य करते हुए भी देख सकते हैं। ये लोग विपरीत हालातों से बिल्कुल नहीं घबराते और खुलकर मुसीबतों का सामना करते हैं। परिश्रम और हिम्मत ही इनकी ताकत है।
    14. : स्वाति : राहु : इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक मोती के समान चमकते हैं अर्थात इनका स्वभाव और आचरण स्वच्छ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस नक्षत्र में पानी की बूंद सीप पर गिरती है तो वह मोती बन जाती है। तुला राशि में होने की वजह से स्वाति नक्षत्र के जातक सात्विक और तामसिक दोनों ही प्रवृत्ति वाले होते हैं। ये लोग राजनीतिक दांव-पेंचों को अच्छी तरह समझते हैं और अपने प्रतिद्वंदियों पर हमेशा जीत हासिल करते हैं।
    15. : विशाखा : गुरु : पठन-पाठन के कार्यों में उत्तम साबित होते हैं इस  नक्षत्र में जन्में लोग। ये लोग शारीरिक श्रम तो नहीं कर पाते लेकिन अपनी बुद्धि के प्रयोग से सभी को पराजित करते हैं। ये लोग काफी सामाजिक होते हैं जिसकी वजह से इनका सामाजिक दायरा भी बहुत विस्तृत होता है। ये लोग महत्वाकांक्षी होते हैं और अपनी हर महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए बहुत मेहनत करते हैं।
    16. : अनुराधा : शनि : इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने आदर्शों और सिद्धांतों पर जीते हैं। ये लोग अपने गुस्से को नियंत्रित नहीं कर पाते इस कारण इन्हें कई बार बड़े नुकसान उठाने पड़ते हैं। ये लोग अपने दिमाग से ज्यादा दिल से काम लेते हैं और अपनी भावनाओं को छिपाकर नहीं रख पाते। ये लोग जुबान से थोड़े कड़वे होते हैं जिसकी वजह से लोग इन्हें ज्यादा पसंद नहीं करते ऐसे लोग जीवन मे कभी न कभी किसी आध्यात्मिक पुरुष किसी ज्योतिष किसी साधु संयासी से संबंध जरूर स्थापित करते है ये जीवन मे अध्यात्मक की तरफ आकर्षित होते है ये सारी इच्छाओं को पूरा करने के बाद आध्यात्मिक जीवन जीना शुरू कर देते है ।शनि का नक्षत्र होने के कारण विवाह में परेशानी आती है लेकिन अपनी।कोशिश और धैर्य से संभाल लेते है अगर इनका जीवन साथी भी शनि के ही नक्षत्र या शनि मित्र राहु केतु मूल नक्षत्र का हो तो जीवन खुशी पूर्वक चलता है नही तो शनि वैरागी है विवाह नही चलने देते है शनि नक्षत्र के कारण चापलूसों झूठी तारीफ करने वालो से दूर रहते है हमेशा सच और सच के साथ।जीते है इनका झुकाव इनसे बड़ी उम्र के पुरुषों की तरफ रहता है और अगर विवाह का जीवन अच्छा न हो तो अध्यतामिक पुरुष की तरफ आकर्षित होती है क्योंकि ये अध्यतामिक जीवन इनको अपनी तरफ खिंचता है है
      इनको बड़ी बड़ी बाते ढिंग हाँकने वाले से दूर रहते है और गरीबो अनाथो बच्चो की सेवा करने के लिए ततपर रहते है ,रोड एक्सीडेंट से ब्रेन डेड या स्ट्रोक लगता है इसलिए वाहन सेदूर रहे या फिर जीवन तुलसिंसंजीवनी सिद्धि करवा कर रखे
    17. 18. : ज्येष्ठा : बुध : गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी में होने की वजह से यह भी अशुभ नक्षत्र ही माना जाता है। ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग तुनक मिजाजी होते है और छोटी-छोटी बातों पर लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। खुली मानसिकता वाले ये लोग सीमाओं में बंधकर अपना जीवन नहीं जी पाते।
    18. : मूल : केतु : यह नक्षत्र गण्डमूल नक्षत्र की श्रेणी का सबसे अशुभ नक्षत्र माना गया है इस नक्षत्र के लोगो को वाहन दान अनाथ बच्चों के लिए मदद और अपने वजन के हिसाब से ग्राम स्वर्ण दान जरूर करना चाहिए नही तो बचपन या वृद्धा अवस्था मे नाना प्रकार की परेशानी आती है । इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के परिवार को भी इसके दोष का सामना करना पड़ता है। इस केतु के नक्षत्र में जन्मे व्यक्तिओ को उधार पैसे नही देना चाहिए न रिश्तरदारो कि मदद करनी चाहिए क्योंकि इसका कोई फल लाभ नाम नही मिलेगा उल्टा बदनामी और रिश्ते खराब करेगा केतु। लेकिन इनमें कई विशेषताएं भी होती हैं जैसे कि इनका बुद्धिमान होना, इनकी वफादारी, सामाजिक रूप से जिम्मेदार, आदि। इन्हें आप विद्वानों की श्रेणी में रख सकते हैं।दिल के बहुत साफ जो वादा कर दिया पूरा अवश्य करते है तथा दान पूण्य मदद में सबसे आगे रहते है अपनी मेहनत और केतु के आशीर्वाद से बहुत धन अर्जित करते है धन की कमी नही रहती जितना दान करेगे उससे 20 गुना फल श्री केतु महाराज देते है।
    19. . : पूर्वाषाढ़ा : शुक्र : ईमानदार, प्रसन्न, खुशमिजाज, कला, सहित्य और अभिनय प्रेमी, बेहतरीन दोस्त और आदर्श जीवनसाथी, ये सभी पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्में लोगों के खासियत होती है।
    20. : उतराषाढ़ा : सूर्य : ये लोग काफी आशावादी और खुशमिजाज स्वभाव के होते हैं। इस नक्षत्र में पैदा होने वाले लोग नौकरी और व्यवसाय दोनों ही में सफलता प्राप्त करते हैं। ये पूरी भावना के साथ अपने मित्रों का साथ देते हैं और इसी स्वभाव के कारण इन्हें अपने मित्रों से परस्पर सहयोग और सहायता इन्हें मिलती रहती है। ये लोग काफी धनी भी होते हैं।
    21. : श्रवण : चन्द्रमा : ज्योतिषशास्त्र के अनुसार माता-पिता के लिए अपना सर्वस्व त्यागने वाले श्रवण कुमार के नाम पर ही इस नक्षत्र का नाम पड़ा है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों में कई विशेषताएं होती हैं जैसे कि इनका ईमानदार होना, इनकी समझदारी, कर्तव्यपरायणता आदि। ये लोग जिस भी कार्य में हाथ डालते हैं उसमें सफलता हासिल करते हैं। ये लोग कभी अनावश्यक खर्च नहीं करते, जिसकी वजह से लोग इन्हें कंजूस भी समझ बैठते हैं।
    22. : धनिष्ठा : मंगल : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग काफी उर्जावान होते हैं और उन्हें खाली बैठना बिल्कुल पसंद नहीं होता। ये लोग अपनी मेहनत और लगन के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर ही लेते हैं। इनके पास अचानक धन आता है इन्हें दूसरों को अपने नियंत्रण में रखना अच्छा लगता है और ये अधिकार भावना भी रखते हैं। इन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपना जीवन जीना पसंद है।
    23. : शतभिषा : राहु : ये लोग शारीरिक श्रम में बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं और हर समय अपनी बुद्धि का परिचय देते हैं। इस नक्षत्र में जन्में लोग स्वच्छंद विचारधारा के होते है अत: साझेदारी की अपेक्षा स्वतंत्र रूप से कार्य करना पसंद करते हैं। ये लोग उन्मुक्त विचारधारा के होते हैं और मशीनी तौर पर जीना इन्हें कतई बरदाश्त नहीं होता। ये अपने शत्रुओं पर हमेशा हावी रहते हैं।
    24. : पूर्वाभाद्रपद : गुरु : गुरु ग्रह के स्वामित्व वाले इस नक्षत्र में जन्में जातक सत्य और नैतिक नियमों का पालन करने वाले होते हैं। दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहने वाले ये लोग बहुत अधिक व्यवहार कुशल और मिलनसार कहे जा सकते हैं। ये लोग आध्यात्मिक प्रवृत्ति के तो होते ही हैं साथ ही साथ ज्योतिष के भी अच्छे जानकार कहे जाते हैं।
    25. : उतरा भाद्रपद : शनि : इस नक्षत्र में जन्में लोग हवाई किलों या कल्पना की दुनिया में विश्वास अहीं करते। ये लोग बेहद यथार्थवादी और हकीकत को समझने वाले होते हैं। व्यापार हो या नौकरी, इनका परिश्रम इन्हें हर जगह सफलता दिलवाता है। इनके भीतर त्याग भावना भी बहुत ज्यादा होती है।
    26. : रेवती : बुध : रेवती नक्षत्र में जन्में जातक बहुत ईमानदार होते है और इस कारण ये किसी भी रूप में धोखा नहीं दे सकते। परंपराओं और मान्यताओं को लेकर ये लोग काफी रूढ़िवादी होने के बावजूद अपने व्यवहार में लचीलापन रखते हैं। इनकी शिक्षा का स्तर काफी ऊंचा होता है और अपनी सूझबूझ से ये बहुत सी मुश्किलों को हल कर लेते हैं।
  • बुध का मिथुन राशि में गोचर, 4 राशियों के लिए शुभ💐💐💐💐

    बुध का मिथुन राशि में गोचर, 4 राशियों के लिए शुभ
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    6 जून 2025 की सुबह 09 बजकर 15 मिनट पर मिथुन राशि में गोचर हुआ हैं। बुध ग्रह यहां पर 22 जून तक रहने वाले हैं। बुध के इस गोचर से 4 राशियों को लाभ होगा। ये राशियां हैं वृषभ, सिंह, कन्या और मकर राशि।

    ⚛️1. वृषभ राशि:- दूसरे तथा पांचवें भाव के स्वामी बुध का गोचर आपकी कुंडली के दूसरे भाव में होगा। इस गोचर के चलते आपको शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। आप लग्जरी लाइफ पर खर्चा करेंगे। करियर में आपका अच्‍छा प्रदर्शन होगा। नौकरी में पदोन्नति मिलने की संभावना है। कारोबारी हैं तो मुनाफा बढ़ जाएगा। वाणी के माध्यम से आप लोगों में लोकप्रिय होंगे। घर परिवार में समय अच्‍छा गुजरेगा।

    ⚛️2. सिंह राशि:- दूसरे तथा ग्यारहवें भाव के स्वामी का आपकी कुंडली के 11वें यानी लाभ भाव में गोचर लाभ ही दिलाएगा। साथ ही साथ पंचमेश बृहस्पति की संगति में होने के कारण बुध ग्रह के काफी अच्छे परिणाम मिलेंगे। प्रत्येक कार्य आप समझदारी से करेंगे। कारोबारी हैं तो व्यापार में आमदनी में वृद्धि भी होगी। सेहत भी अच्‍छी रहेगी। भाई बंधुओं और मित्रों से अच्छा सहयोग मिलेगा।

    ⚛️3. कन्या राशि:- लग्न और कर्म भाव के स्वामी का कर्म भाव में ही यानी दशम भाव में गोचर आपके कार्यक्षेत्र में उन्नति प्रदान करेगा। विशेषकर कारोबार से जुड़े हुए व्यापारी अपने कार्यों में अच्छा लाभ प्राप्त कर सकेंगे। नौकरी के मामलों में बुध ग्रह के इस गोचर को अच्छा माना जाएगा। क्योंकि यह गोचर आपको पदोन्नति करवाने में मदद कर सकता है। घर परिवार में खुशियां रहेगी।

    ⚛️4. मकर राशि:- बुध आपकी कुंडली में छठे तथा भाग्य भाव के स्वामी हैं और अब वर्तमान में आपकी कुंडली के छठे भाव में गोचर कर रहे हैं। बुध का अपनी ही राशि में छठे भाव में होना काफी शुभ परिणाम देने वाला है। आर्थिक पक्ष मजबूत रहने वाला है। हालांकि काम की बातों का खर्चा भी खूब होगा। प्रतियोगी परीक्षा में लाभ होगा। सेहत अच्छी बनी रहेगी। मान सम्मान में इजाफा होगा।

    🚩#हरिऊँ🚩
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  • ज्योतिष से जानें किस दिन क्या करें, क्या न करें?

    ज्योतिष से जानें किस दिन क्या करें, क्या न करें?


    ➡️ज्योतिष शास्त्र में मानव द्वारा किए जाने वाले हर कार्य केे लिए दिन निश्चित किया गया। धार्मिक ग्रंथ व शास्त्रों की मानें तो इसमें उल्लेख मिलता है कि अगर कोई भी शुभ कार्य आदि दिनों के हिसाब से किया जाता है तो उस कार्य के सफल होने की संभावना अधिक रहती है। तो वहीं कार्य से लाभ प्राप्ति के भी आसार होते हैं। तो आइए जानते हैं सोमवार से लेकर रविवार के बारे में कि किस दिन कौन सा काम करना चाहिए।

    सोमवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह सौम्य चंद्रमा है। विवाह, नामकरण, गृह-निर्माण, विद्यालय में प्रवेश के लिए यह वार शुभ है। इस दिन जन्म लेने वाले बच्चे सज्जन होते हैं। अगर इस दिन दक्षिण की दिशा में यात्रा की जाए तो निश्चित रूप से सफलता मिलती है।

    मंगलवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह सेनापति मंगल है। यह शुभ-अशुभ के मिले-जुले प्रभावों वाला दिन है। यह दिन किसी काम के लिए शुभ है तो कुछ कामों के लिए अशुभ। मकान की खरीद-बिक्री करना, वस्त्र खरीदना, सिलवाना ठीक नहीं। इस दिन जन्म लेने वाले जातक क्रोधी स्वभाव के होते हैं। पूर्व व दक्षिण दोनों ही दिशाओं में यात्रा में कोई कठिनाई नहीं आती।

    बुधवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह कुमार बुध है। यह शुभ वारों की श्रेणी में आता है। इस दिन पूर्व और पश्चिम की यात्रा में कोई परेशानी नहीं आएगी। गृह प्रवेश, हल चलाने, अध्ययन प्रारंभ करने व नए कपड़े पहनने के लिए यह दिन उत्तम है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं।

    गुरुवार या बृहस्पतिवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह बृहस्पति है। यह दिन भी सभी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन से प्रारंभ किए सभी कार्य सिद्ध होते हैं। इस दिन किसी भी दिशा की यात्रा शुभ फलदायक सिद्ध होती है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक सद्गुणी, धार्मिक रुचियों वाले तथा तेजस्वी होते हैं।

    शुक्रवार

    ➡️इस दिन का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस दिन जन्म लेने वाले जातक रसिक स्वभाव के होने के कारण विलासितापूर्ण जीवन बिताने में दिलचस्पी रखते हैं। इस दिन सूर्यास्त के पश्चात की गई यात्राएं सफल होने के साथ-साथ इस दिन शाम को प्रारंभ किए गए सभी कार्य सिद्ध होते हैं।

    शनिवार

    ➡️इस दिन का स्वामी शनि ग्रह है। समस्त वारों में इसे सबसे अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन आरंभ किया गया कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाता अथवा लटकता रहता है। इस दिन यात्रा करने से भी सफलता की सम्भावना कम होती है। इस दिन जन्म लेने वाले अनेक जातकों को स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैैं।

    रविवार

    ➡️साधारण अथवा आम बोलचाल की भाषा में इसे बंदवार भी कहते हैं। इस वार का स्वामी ग्रह तेजस्वी सूर्य है। सभी प्रकार के कार्यों के लिए यह दिन शुभ है। इस वार को जन्म लेने वाले जातक भाग्यशाली होते हैं। अगर इस दिन पूर्व की दिशा में यात्रा की जाती है तो निश्चित रूप से सफलता मिलती है ।

  • मिथुन संक्रांति आज

    मिथुन संक्रांति आज


    सूर्य जब मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो इस घटना को मिथुन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य 15 जून को वृष राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्‍योतिष के साथ ही धार्मिक मान्‍यताओं में भी मिथुन संक्रांति का विशेष महत्‍व होता है। ज्‍योतिषीय मान्‍यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने से सूर्य से संबंधित दोष दूर होते हैं और आपके जीवन में सुख शांति बढ़ती है। इस दिन दान पुण्‍य करने का भी शास्‍त्रों में विशेष महत्‍व माना गया है। मिथुन संक्रांति को लेकर मासिक धर्म से भी जुड़ी मान्‍यता काफी प्रचलित है। इस दिन सिलबट्टे की पूजा की भी परंपरा है।

    मिथुन संक्रांति क्‍या है ?

    मिथुन संक्रांति को मौसम की दृष्टि से भी बहुत खास माना जाता है। इस दिन के बाद से सौर मंडल में भी काफी बड़ा बदलाव आता है। इसके बाद से वर्षा ऋतु का आरंभ माना जाता है। इस दिन सूर्य वृषभ राशि से मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन को देश के अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।

    मिथुन संक्रांति पर सिलबट्टे की पूजा क्‍यों की जाती है ?

    मिथुन संक्रांति प्रमुख रूप से महिलाओं का त्‍योहार है। इस पर्व को महिलाएं नाच गाकर और खुशियों के साथ मनाती हैं। इस पर्व में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और सिलबट्टे को भूदेवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस दिन सिलबट्टे को को अच्‍छे से साफ करके रख दिया जाता है और आने वाले चार दिनों तक सिलबट्टे का प्रयोग नहीं किया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए पूजा करती हैं। श्रृंगार करती हैं मेंहदी लगाती हैं। बरगद के पेड़ पर झूला डालकर अपनी सखियों के साथ यह त्‍योहार मनाती हैं।

    ऐसे की जाती है सिल बट्टे की पूजा

    मिथुन संक्रांति का पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है और इस दिन सिलबट्टे को साफ-सुथरा करके उसको दूध और जल से स्‍नान करवाया जाता है। उसके बाद सिल बट्टे पर सिंदूर और चंदन लगाया जाता है। फिर फूल और हल्‍दी चढ़ाकर उसकी पूजा की जाती है।

    मिथुन संक्रांति पर मासिक धर्म को लेकर मान्‍यता

    मिथुन संक्रांति की कथा के अनुसार, जिस प्रकार से महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म होता है उसी प्रकार से सृष्टि के आरंभ में धरती माता को भी शुरुआती 3 दिनों तक मासिक धर्म हुआ था। मासिक धर्म को ही मातृत्‍व सुख का कारक माना जाता है। इसलिए ऐसी मान्‍यता है कि मिथुन संक्रांति से लेकर अगले 3-4 दिन तक धरती माता मासिक धर्म में रहती हैं। इसलिए सिलबट्टे को भूदेवी का रूप मानकर उसकी पूजा की जाती है। इस दौरान सिल बट्टे का प्रयोग खाना बनाने में नहीं किया जाता है।

    इस तरह करें सूर्य की पूजा

    मिथुन संक्रांति पर सूर्य की पूजा का भी विशेष महत्‍व माना गया है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्‍नान करें और सूर्य को प्रणाम करें। ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। उसके बाद सूर्य को अर्घ्‍य दें। तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें रोली और लाल फूल डाल लें। उसके बाद सूर्य को अर्घ्‍य दें। उसके बाद पूर्व दिशा में मुख करके ऊं घृणि सूर्याय नम: मंत्र का 108 बार जप करें।

  • ईशान कोण में शौचालय होने के नुकसान

    ईशानकोणमेंशौचालयहोनेकेनुकसान

    पूर्व और उत्तर दिशा के कोण को ईशान कोण कहते हैं अर्थात ईशान दिशा होती है .
    वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण देवताओं का और सकारात्मक शक्तियों का स्थान होता है .
    यदि ईशान कोण घर या व्यापार के प्रतिष्ठान में दूषित हो जाए अथवा वहां पर शौचालय स्नानघर बना हो तो वह स्थान दूषित हो जाता है. और घर में सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश बंद हो जाता है.
    आपके अर्जित पुण्य जब तक साथ देते हैं तब तक समस्या नहीं दिखाई पड़ती.
    किंतु समय के साथ यह दोष अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देता है इसका प्रमुख लक्षण यह है कि घर में रोग बीमारी अधिक से अधिक संख्या में होने लगती हैं एक व्यक्ति ठीक होता है तो दूसरा व्यक्ति बीमार हो जाता है ऐसी स्थिति में घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश भूत प्रेत आदि का प्रभाव और तंत्र आदि का प्रभाव बहुत आसानी से हो जाता है
    #उपाय
    ईशान कोण में बने हुए शौचालय को तत्काल हटा देना चाहिए.
    उस स्थान को शुद्ध कर देना चाहिए
    वास्तु दोष को दूर करने के लिए घर में पारिजात अर्थात हरसिंगार का पौधा लगा देना चाहिए

  • शश योग एक शक्तिशाली राजयोग

    शश योग एक शक्तिशाली राजयोग है, जो ज्योतिष में शनि के विशेष प्रभाव को दर्शाता है ….

    जब शनि किसी कुंडली में लग्न या चंद्रमा से केंद्र भाव (1, 4, 7 या 10) में उच्च राशि (तुला, मकर या कुंभ) में स्थित होता है।

    इस योग वाले व्यक्ति भाग्यशाली, धनी, और समाज में सम्मानित होते हैं। वे प्रायः बड़े व्यवसायी, राजनेता, या उच्च पद पर आसीन होते हैं.

    शश योग के लक्षण:
    भाग्यशाली और धनवान:
    शश योग वाले व्यक्ति भाग्यशाली होते हैं और उनके पास धन की कमी नहीं होती है.

    सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा:
    वे समाज में सम्मानित और प्रतिष्ठित होते हैं और लोग उन्हें पसंद करते हैं.

    सफलता:
    वे हर क्षेत्र में सफल होते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं.

    अच्छे नेता:
    वे नेतृत्व क्षमता रखते हैं और अच्छे नेता साबित होते हैं.

    सत्यनिष्ठ:वे ईमानदार और सत्यनिष्ठ होते हैं.
    कठिन परिश्रम: वे अपने काम में पूरी निष्ठा से लगे रहते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं.

    कठिन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता:
    वे मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में सक्षम होते हैं और उनसे हार नहीं मानते.

    सहानुभूति:
    वे दूसरों के लिए सहानुभूति रखते हैं और उनकी मदद करने के लिए तैयार रहते हैं.

    यात्रा का शौक:
    वे यात्रा करने के शौकीन होते हैं और दुनिया को देखना पसंद करते हैं.

    लॉजिकल:
    वे तार्किक होते हैं और तर्क पर आधारित निर्णय लेते हैं.शश योग वाले व्यक्ति किस क्षेत्र में सफल होते हैं?

    व्यवसाय:
    शनि के प्रभाव से वे व्यवसाय में सफल होते हैं, विशेष रूप से लोहा, मशीनरी, और पेट्रोलियम जैसे उद्योगों में.

    राजनेता:
    वे राजनीति में भी सफल होते हैं और उच्च पदों पर पहुंच सकते हैं. सरकारी कर्मचारी:वे सरकारी नौकरी में भी सफल होते हैं और उच्च पद प्राप्त करते हैं.

    जज और वकील:
    वे न्यायपालिका में भी सफल होते हैं और जज या वकील के रूप में अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं.
    शश योग कैसे बनता है?

    शश योग तब बनता है जब शनि लग्न या चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें घर में तुला, मकर या कुंभ राशि में स्थित होता है. यह एक महत्वपूर्ण राजयोग है जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है.

  • राहुकेतुऔर_वहम

    #राहुकेतुऔर_वहम
    राहु और केतु को लेकर ज्योतिष को मानने वालों मे बड़ा डर रहता है यूट्यूब और शार्ट रील की तरह तरह कि बाते से ड़रे रहते है । राहु केतु को लेकर कालसर्प दोष को लेकर सबसे ज्यादा डराया जाता है । वैसे मेरे गुरू इसे एरदम फर्जी दोष बताते थे उनका कहना था कि कालसर्प दोष 1960 से पहले नही था और किसी शास्त्र मे उल्लेखित भी नही है । यह सामने वाले को डराने और पैंसे एठने के लिए बनाया गया है ।
    फिर यह राहु केतु क्या है ?

    असल मे राहु केतु नाम के कोई ग्रह सौर मंडल नही है । जिस तरह सुर्य से लेकर शनि तक आकाश मे साक्षात ग्रह दिखाई देते है वैसे राहु केतु दिखाई नही देते है । इसलिए ही राहु केतु कोई राशि नही दी गई और ना ही ग्रहों के बल यानी पड्बल मे इनका कोई स्थान है । माना यह जाता है कि यह कुंडली मे जिस ग्रह के साथ बैठेगे व्यक्ति को उस ग्रह से संबंधित वहम जीवन मे परेशान करेगे ।

    भारतीय ज्योतिष सुर्य, चंद्र ग्रहणों की सटीक तिथि जिस विधि से निकालता आ रहा है उस विधि मे राहु केतु बड़े महत्वपुर्ण स्रोत है । पृथ्वी अपने पथ पर घूमती हुई सुर्य के चक्कर लगा रही है वही चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है । ऐसे मे होता क्या है कि कभी कभी चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाते हुएं पृथ्वी के पथ को काट देते है । यानि वह पृथ्वी सुर्य के एक सीध मे आगे या पीछे आ जाता है । जिस बिंदु पर चंद्रमा पृथ्वी और सुर्य के बीच या फिर पृथ्वी के पीछे एक सीध मे होता है उन दोनो बिंदुओं को ज्योतिषीय गणनाओं मे राहु केतु कहते है । जो वास्तव मे ग्रह नही एक स्थिति है जिसके कारण कभी पृथ्वी तो कभी चंद्रमा की परछाई ग्रहण का कारण बन जाती है और इसी ज्योतिषीय गणतिय विधि से वर्ष मे पड़ने वाले ग्रहणों की पहले ही भविष्यवाणी कर दी जाती थी ।

    असल मे राहु और केतु ज्योतिष मे वहम का प्रतीक है जिस तरह ग्रहण पड़ने पर आम आदमी के मन मे वहम हो जाता है कि सुर्य को कोई खत्म कर रहा है मगर वह अज्ञानता मे जानता नही कि सुर्य को चंद्रमा ने ढका है वरना वह पूरे तेज के साथ अब भी निकल रहा है ।
    बस इसी तरह के वहम जीवन मे होते है जिनका प्रतीक राहु केतु है माना जाता है कि कुंडली मे जिस ग्रह के साथ राहु केतु बैठे होगे वही से संबंधित वहम आदमी के अंदर पैदा होगा । मन मे अनजान भय होना, माता, पीर आना, बेवजह पति या पत्नी पर शक करना, यह सोचना कि उसके खिलाफ साजिश रच रही है यानि सारे वहमी मनोरोग जो वास्तव मे होते नही लेकिन मन ने उसे सच मान लिया हो वह सब राहु केतु के प्रतीक है ।
    एक आदमी अपने बेटे की जन्म कुंडली लेकर आया और बताने लगा कि उसके बेटे पर किसी पीर का साया है और वह उस पर कभी भी आ जाता है ।
    गुरू जी ने उससे कहा कि कल वह अपने बेटे को अपने साथ लाये और यह कहके लाये कि वह एक महान सिद्ध संत से मिलने जा रहे है ।
    अगले दिन जब वह आदमी अपने बेटे को लेकर आया तो गुरू जी ने अपनी वेशभूषा एक सिद्ध साधु की तरह बना रखी थी ।
    गुरू जी ने बच्चे को देखा और कुछ तंत्र मंत्र बुदबुदाये और चिल्लाये पकड़ लिया इस पीर को अब यह तेरे बच्चे को तंग नही करेगा । उस बच्चे की बांह मे एक धांगा भी बांध दिया । बच्चे के वहम को एक वहम ने मार दिया उसके अवचेतन मन मे बैठे पीर के वहम ने यह मान लिया कि वह पीर संत ने बाहर निकाल दिया है और वह अब अन्दर नही है ।

    लेकिन यह तरीका हर बार काम नही करता है । क्योंकि वहम हमेशा अवचेतन मन मे भरा होता है । अवचेतन मन कभी भी तार्किक नही होता है । जैसे जब हम सो रहे हो तब अचेतन मन क्रिया करता है और अवचेतन मन मे से स्मृतियों को निकालकर सपने दिखाता है । अवचेतन अगर हावी हो जाये तो वह कितना खतरनाक होता है आप देखिये कि आप सपने मे सेक्स कर रहे है और आपका वीर्यपात हो जाता है यानि पूरा शरीर अवचेतन मन के उसकी इच्छानुसार ही कार्य करने लगता है ।
    यानि जब बुद्धि जो कि तर्क से काम करती है वह काम करना बंद कर देती है और आदमी गहन चिंतन मे जाकर वहमी हो जाता है वह देखने सुनने मानने लगता है जो वास्तव मे सत्य नही होता है ।

    अभी मे हिपनोटिज्म की कक्षाएं पढ़ रहा था तब एक आदमी जिसेको अदृश्य आवाजें आ रही थी जिसकी वजह से वह परेशान था । मै उसे हिप्नौथेरिपी दी । यह मेरा पहला अनुभव था जब मैंने पहली बार किसी को हिप्पनोटाइज करके उसके मन के वहम को खत्म करने मे सफलता पाई । उसे हिप्नोथेरिपी के बाद अदृश्य आवाज आनी बंद हो गई ‌।
    लेकिन जब मैने यह घटना अपने गुरू जी को बताई तो उन्होंने डाँटते हुएं कहा कि किसी भी मनोरोगी को बिना मनोचिकित्सक की सलाह के हिपनोसिस नही करना चाहिए ।

    फिर इस वहम (राहु केतु) का सबसे अच्छा इलाज क्या है ?
    सबसे अच्छा उपाय है मनोरोग को भी एक बीमारी समझे रोगी के साथ सहानुभूति वाले व्यवहार के साथ तुरन्त उसे मनोचिकित्सक को दिखाये । उसे सोशल बनाये । उसको गहन चिंतन, समाधि आदि मे ना जाने दे । उसे तार्किक बनाये ताकि वह मन के बजाय बुद्धि से काम ले ।

    मनोचिकित्सक की सलाह पर हिप्नोथैरिपी कराये । यह अच्छा परिणाम देती है ।

    अगर रोगी आस्तिक है तो उसे अनुभव कराये कि ईश्वर तुम्हारी परेशानी खत्म कर देगा । उसमे ज्योतिष उपाय भी हो सकते है ।

    और हाँ यह ध्यान रखना जितनी जल्दी आप चिकित्सक के पास जायेगे वह रोग उतने जल्दी खत्म हो जायेगे ।

  • गुरु बृहस्पति होंगे अस्त

    🪐 ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र 🪐
    गुरु बृहस्पति होंगे अस्त
    { 12 जून 2025 }

    ज्ञान, शिक्षा, धन, संतान, और धर्म के कारक गुरु एक निश्चित अवधि के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, और ज्योतिष शास्त्र में देवताओं के गुरु बृहस्पति को सबसे शुभ और महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है। ऐसे में इसकी स्थिति में जरा सा बदलाव हर राशि के जातकों के जीवन में किसी न किसी तरह से प्रभाव अवश्य डालते हैं।

    • इस समय गुरु ग्रह मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं। इसके साथ ही गुरु बृहस्पति 12 जून को शाम 7 बजकर 37 मिनट पर इसी राशि में अस्त हो गए और करीब 27 दिन तक अस्त रहने के बाद 9 जुलाई को उदित हो जाएंगे।
    • गुरु ग्रह सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा मंगलकारी व शुभ ग्रह माने गए हैं अतः इनका अस्त होना अच्छा नहीं माना जाता। इस अस्त समय के दौरान मांगलिक कार्य विशेष कर शादी- विवाह, गृह प्रवेश इत्यादि नहीं किए जाते।
    • गुरु बृहस्पति ग्रह के अस्त होने से सभी 12 राशियों पर भी अलग- अलग प्रभाव देखने को मिलेंगे// 🕉️🚩🕉️
  • सूर्य का मिथुन राशि में गोचर

    🪐ज्योतिष- ग्रह- नक्षत्र🪐
    {सूर्य का मिथुन राशि में गोचर}
    (15 जून 2025, रविवार)

    15 जून को सूर्य ग्रह वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में गोचर करेंगे, सूर्य ग्रह का मिथुन राशि में गोचर लगभग 1 महीने का रहेगा।

    सूर्य जिस दिन अपनी राशि परिवर्तन करते हैं और जिस राशि में प्रवेश करते हैं उस दिन संक्रांति काल होता है अतः 15 जून को मिथुन संक्रांति होगी।प्रत्येक संक्रांति काल में दान- पुण्य- स्नान इत्यादि का विशेष महत्व बताया गया है।

    सूर्य ग्रह का मिथुन राशि में यह गोचर सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा। सूर्य का गोचर हमेशा खास प्रभाव डालता है क्योंकि यह हमारे आत्मविश्वास, ऊर्जा, और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है। मिथुन राशि में सूर्य का गोचर कुछ राशियों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है आईए जानते हैं सूर्य का यह गोचर किन राशियों के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकता है-:

    वृषभ राशि-:

    • सूर्य ग्रह का गोचर आपकी द्वितीय भाव में होगा। यह भाव धन, परिवार, भाषण इत्यादि से संबंध रखता है। अतः इस समय आर्थिक मामले या धन के मामलों में कुछ तनाव उत्पन्न हो सकता है। परिवार के बीच भी खर्चों को लेकर मतभेद हो सकते हैं। इस समय के दौरान कोई बड़ा निवेश सोच समझकर करना चाहिए। और बोलचाल में संयम रखें वरना विवाद का कारण बन सकता है।

    कर्क राशि-:

    • आपकी राशि से 12वें भाव में सूर्य गोचर करेंगे, घर के खर्च बढ़ सकते हैं। वाणी का संयम रखें। यह समय विवाद से बचने का है विशेष कर घर परिवार व भाई-बहनों के विवाद से बचें। वृश्चिक राशि
    • आपके लिए यह गोचर विशेष सावधानी का है। साझेदारी और रिश्तों को लेकर बेहद सतर्क रहें। जीवनसाथी के साथ भी धैर्य से काम ले। स्वास्थ्य का ध्यान रखें व्हीकल ध्यान से चलाएं। मकर राशि-:
    • मकर राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर संघर्ष लेकर आ सकता है। परिवार में शांति और संघर्षों का दौर शुरू हो सकता है। कोई भी फैसला विवेक व संयम के साथ लें// उपाय-:
    • उपाय के तौर पर सूर्य के सबसे अच्छे उपाय हैं सूर्य नमस्कार करना, सूर्य को जल अर्पित करना, और विधिवत रविवार का व्रत रखना इत्यादि। नोट-:
    • हमने यहां कुछ राशियों का फलादेश लिखा है वह केवल चंद्र राशि पर आधारित है। लेकिन इसे संपूर्ण फलादेश नहीं मानना चाहिए। क्योंकि आपकी जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति, दशा अंतर्दशा इत्यादि महत्वपूर्ण है, उसी हिसाब से आपके ऊपर कम और ज्यादा सूर्य ग्रह‌ गोचर का प्रभाव देखने को मिलेगा। 🕉️🚩🕉️