Author: admin

  • केले की जड़ का तांत्रिक उपाय

    🌿 केले की जड़ का तांत्रिक उपाय 🌿

    रवि पुष्य योग में करें यह अद्भुत प्रयोग, पुखराज जैसा फल देगी केले की जड़

    🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ गं गणपतये नमः।यह उपाय इतना प्रभावी है कि यह जड़ आपके लिए बृहस्पति के रत्न पुखराज जैसा काम करेगी। जिन लोगों को पुखराज धारण करने का लाभ नहीं मिल पाता या जो पुखराज नहीं धारण कर सकते, उनके लिए यह उपाय वरदान से कम नहीं है। यह उपाय विशेष रूप से रवि पुष्य योग के दिन किया जाता है।

    रवि पुष्य योग तब बनता है जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन पड़ता है। यह योग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।।

    केले के पेड़ का हमारे सनातन धर्म में बहुत महत्व है। केले का पेड़ भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का प्रतीक माना जाता है। इसकी जड़ में अपार शक्ति होती है। जब इसे सही विधि और सही योग में लिया जाए, तो यह पुखराज रत्न के समान फल देती है। यह जड़ विवाह योग बनाने से लेकर हर मनोकामना पूर्ति में सहायक होती है। जो लोग किसी कारणवश पुखराज रत्न नहीं धारण कर पाते, उनके लिए यह केले की जड़ उसी के समान काम करती है। इसे धारण करने से बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    🌟 रवि पुष्य योग से एक दिन पहले क्या करें

    सबसे पहले रवि पुष्य योग के दिन से एक दिन पहले आपको केले के पेड़ के पास जाना है। वहाँ जाकर विनम्र भाव से पेड़ को न्योता देना है। यह न्योता देते समय पूरी श्रद्धा और विश्वास रखना बहुत जरूरी है। हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी है –

    “हे महाराज! मैं कल आपको लेने आऊँगा/आऊँगी। अपने अमुक कार्य की सिद्धि हेतु आपकी जड़ लेने आऊँगा/आऊँगी।”

    जिस कार्य की सिद्धि चाहिए, उसका नाम लेकर संकल्प करना है। यह संकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। आपको पूरे मन से यह भाव रखना है कि कल आप केले के पेड़ की जड़ को अपने कार्य की सिद्धि के लिए लेने आएंगे। यह न्योता देते समय आसपास कोई न हो तो बेहतर है। चुपचाप, एकांत में यह क्रिया करें। यह भी ध्यान रखें कि जिस केले के पेड़ को आप न्योता दे रहे हैं, वह स्वस्थ और मजबूत हो। किसी रोगग्रस्त या सूखे पेड़ को न चुनें।

    🌱 रवि पुष्य योग के दिन क्या करें

    अगले दिन रवि पुष्य योग के दिन आपको अकेले जाना है। किसी को साथ न ले जाएं। पूरी तरह अकेले ही यह कार्य करें। जाते समय और वहाँ रहते हुए किसी से बात न करें। पूरी तरह चुपचाप रहें। किसी को न बताएं कि आप कहाँ जा रहे हैं और क्या करने जा रहे हैं। यह गुप्त रखें।

    तांत्रिक उपायों में गोपनीयता बहुत महत्वपूर्ण होती है। जितना गुप्त रखेंगे, उतना ही अधिक फल मिलेगा। केले के पेड़ के पास पहुँचकर प्रार्थना करें और फिर जड़ को उखाड़ लें। जड़ उखाड़ते समय भी मन में अपने कार्य की सिद्धि का भाव रखें। ध्यान रहे कि जड़ को नुकसान न पहुंचे, पूरी जड़ सही सलामत निकले।

    जड़ निकालने के बाद वापस आते समय पीछे मुड़कर न देखें। यह बहुत महत्वपूर्ण है। चाहे कोई आवाज आए या कुछ भी हो, पीछे मुड़कर न देखें। सीधे घर आ जाएँ। जितनी देर में गए हैं, उससे आधे समय में वापस आने का प्रयास करें। रास्ते में किसी से बात न करें, कहीं रुकें नहीं। सीधे घर पहुंचें।

    🏠 घर आकर पूजा विधि

    घर आकर जड़ की पूजा करें। यह पूजा बहुत महत्वपूर्ण है। 16 उपचार यानी षोडशोपचार से पूजा करें यदि संभव हो। 16 उपचार में ये सब शामिल होते हैं –

    ✅ आसन – जड़ को आसन पर विराजमान करें
    ✅ स्वागत – जड़ का स्वागत करें
    ✅ पाद्य – पैर धोने के लिए जल अर्पित करें
    ✅ अर्घ्य – हाथ धोने के लिए जल अर्पित करें
    ✅ आचमन – मुख शुद्धि के लिए जल अर्पित करें
    ✅ स्नान – जड़ को स्नान कराएं
    ✅ वस्त्र – लाल या पीला वस्त्र अर्पित करें
    ✅ गंध – चंदन का लेप लगाएं
    ✅ पुष्प – फूल चढ़ाएं
    ✅ धूप – धूप दिखाएं
    ✅ दीप – दीप जलाएं
    ✅ नैवेद्य – भोग लगाएं
    ✅ ताम्बूल – पान का बीड़ा अर्पित करें
    ✅ नीराजन – आरती उतारें
    ✅ मंत्रपुष्प – मंत्रों से पुष्प अर्पित करें
    ✅ प्रदक्षिणा – परिक्रमा करें

    यदि 16 उपचार संभव न हों तो जड़ को स्नान कराएं। पहले जल से स्नान कराएं, फिर दही से, फिर घी से, फिर शहद से और अंत में गुड़ के पानी से स्नान कराएं। इसके बाद जड़ का पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाया जाता है। फिर जड़ पर चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं और मीठा भोग लगाएं। पूजा के दौरान अपने कार्य की सिद्धि की प्रार्थना करें। पूजा पूरी श्रद्धा और विधि से करें।

    💪 जड़ धारण करने की विधि

    पूजा के बाद जड़ का एक छोटा टुकड़ा लें। यह टुकड़ा इतना छोटा हो कि आप इसे अपने हाथ में बांध सकें। बाकी जड़ को किसी पवित्र स्थान पर रख दें या किसी बहते पानी में प्रवाहित कर दें। पुरुष इस टुकड़े को दाएँ हाथ में धारण करें। महिलाएं इसे बाएँ हाथ में धारण करें।

    इसे धारण करने से पहले इसे लाल कपड़े में लपेट लें और फिर हाथ में बांध लें। इसे धारण करते समय फिर से अपने कार्य की सिद्धि का संकल्प करें। यह जड़ आपके हाथ में पुखराज की तरह काम करेगी। इसे धारण करने से बृहस्पति देव की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसे कम से कम 21 दिन तक लगातार धारण करें। इसके बाद भी आप चाहें तो धारण कर सकते हैं।

    ✨ इस उपाय के अद्भुत लाभ

    इस जड़ को धारण करने से कई लाभ होते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह जड़ बृहस्पति के रत्न पुखराज जैसा काम करती है। पूजा का जो फल जल्दी नहीं मिलता, वह जल्दी मिलने लगता है। विवाह योग्य व्यक्ति विवाह योग्य बनते हैं और उनके विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए यह उपाय बहुत प्रभावी है।

    ✅ विवाह योग बनता है
    ✅ पूजा का फल जल्दी मिलता है
    ✅ बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं
    ✅ व्यापार में लाभ होता है
    ✅ नौकरी में तरक्की मिलती है
    ✅ संतान सुख की प्राप्ति होती है
    ✅ आर्थिक समृद्धि आती है
    ✅ जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
    ✅ मनोकामनाएं पूरी होती हैं

    इसके अलावा व्यापार में लाभ, नौकरी में तरक्की, संतान सुख, आर्थिक समृद्धि आदि में भी यह जड़ सहायक होती है। जो लोग किसी कार्य में सफलता नहीं पा रहे, उनके लिए यह जड़ रास्ता खोलती है। यह जड़ नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा करती है और घर में सुख-शांति लाती है।

    🙏 महत्वपूर्ण सुझाव

    यह उपाय करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। सबसे पहले तो पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यह उपाय करें। बिना विश्वास के किया गया कोई भी कार्य फलदायी नहीं होता। इस उपाय को करते समय पूरी गोपनीयता बनाए रखें। किसी को न बताएं कि आप यह उपाय कर रहे हैं।

    ✅ पूरी श्रद्धा और विश्वास रखें
    ✅ गोपनीयता बनाए रखें
    ✅ नियमितता का पालन करें
    ✅ सात्विक भोजन करें
    ✅ ब्रह्मचर्य का पालन करें
    ✅ क्रोध से दूर रहें
    ✅ किसी की निंदा न करें

    सात्विक भोजन करें, तामसिक चीजों से दूर रहें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। क्रोध से दूर रहें और किसी की निंदा न करें। नियमितता का पालन करें। यह उपाय करते समय अपने इष्ट देव का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करें कि आपका कार्य सफल हो।

  • होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ


    🌼 होली 2026 – ग्रह एवं खगोलीय विशेषताएँ

    1. उत्सव का संदर्भ
    • होली फाल्गुनी पूर्णिमा (फाल्गुन मास की पूर्णिमा) पर मनाई जाती है।
    • होलीका दहन परंपरागत रूप से पूर्णिमा की रात को किया जाता है।
    • परंतु इसे भद्रा काल और ग्रहण काल में नहीं करना चाहिए।

    1. भद्रा विचार
    • प्रत्येक पूर्णिमा पर प्रथम करण भद्रा होता है।
    • विश्टि करण में भद्रा तब होती है जब चंद्रमा इन राशियों में हो:• कर्क (4), सिंह (5), कुंभ (11), मीन (12)।
    • इन राशियों में भद्रा पृथ्वी (प्रिथ्वी लोक) में रहती है।
    • 3 मार्च 2026 को चंद्रमा सिंह राशि (पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र) में होगा → भद्रा पृथ्वी पर होगी।
    • शास्त्र (निर्णय सिंधु) के अनुसार भद्रा काल में होलीका दहन वर्जित है, अन्यथा रोग, विनाश और हानि जैसी विपत्तियाँ आती हैं।

    1. ग्रहण विचार
    • इस वर्ष पूर्णिमा के साथ चंद्र ग्रहण भी है।
    • भारत में यह ग्रहण चंद्र उदय के समय होगा → इसे ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण कहते हैं।
    • ग्रहण समय: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न – 6:48 अपराह्न (IST)।
    • पूर्ण ग्रहण काल: 4:34 अपराह्न IST।
    • अधिकांश भारत में दृश्य (पश्चिमी भागों को छोड़कर)।
    • यह आंशिक ग्रहण होगा → चंद्रमा पृथ्वी की छाया (Umbra) से आंशिक रूप से गुज़रेगा।

    1. खगोलीय समय
    • फाल्गुनी पूर्णिमा: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 5:06 अपराह्न।
    • भद्रा काल: 2 मार्च, 5:55 अपराह्न → 3 मार्च, 4:27 प्रातः।
    • ग्रहण काल: 3 मार्च, 3:20 अपराह्न → 6:48 अपराह्न।
    • सूतक काल: ग्रहण से 9 घंटे पूर्व आरंभ → 3 मार्च, 6:20 प्रातः।
    • वैदिक सूर्योदय (लखनऊ): 3 मार्च, 6:28 प्रातः।

    1. अनुशंसित अनुष्ठान समय
    • होलीका दहन:• भद्रा समाप्ति के बाद (4:27 प्रातः)
    • सूतक प्रारंभ से पहले (6:20 प्रातः)
    • → 3 मार्च 2026, 4:27 प्रातः – 6:20 प्रातः IST
    • रंगोत्सव (होली खेलना):• ग्रहण दिवस से बचना चाहिए।
    • → 4 मार्च 2026 को होली खेलें।

    ✅ सारांश

    • होलीका दहन: 3 मार्च 2026, प्रातः 4:27 – 6:20 बजे।
    • रंगोत्सव (होली खेलना): 4 मार्च 2026।
    • इन समयों का पालन करने से भद्रा काल और ग्रहण सूतक से बचाव होगा।

  • 2 या 3 मार्च – होलिका दहन कब होगा,

    🕉️2 या 3 मार्च – होलिका दहन कब होगा, क्या चंद्र ग्रहण 2026 की वजह से बदल जाएगी डेट, यहां जानें होलिका दहन 2026 की तारीख🕉️
    ===============================
    〰️🌼〰️〰️〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️〰️🌼〰️〰️〰️🌼〰️
    ⭕होलिका दहन 2026 कब है, कब है: होलिका दहन हिंदू धर्म में बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक पर्व है, जिसे फाल्गुन पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस दिन भक्त प्रह्लाद की भक्ति और हिरण्यकशिपु की क्रूरता की कथा याद की जाती है, जिसमें अहंकार और अधर्म का अंत होता है।

    मान्यता है कि अग्नि में जलने से नकारात्मक ऊर्जा, दोष और पुराने कष्ट समाप्त हो जाते हैं, इसलिए लोग होलिका की आग में गेहूं की बालियां, उपले और नारियल अर्पित करते हैं। ऐसे तो होलिका दहन को होली के त्योहार से एक दिन पहले मनाया जाता है। लेकिन 2026 में होलिका दहन की तिथि पर ग्रहण का साया है। यहां जानें कि होलिका दहन 2026 में कब है, 2026 में होलिका दहन का पर्व कब मनाया जाएगा।

    ⚜️2026 में होलिका दहन कब है
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    पंचांग के अनुसार, होलिका दहन का पर्व फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर आता है। 2026 में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। ऐसे में तिथि के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा का चांद 3 मार्च को दिखेगा। लेकिन इस तारीख में चंद्र ग्रहण लग रहा है और शाम के समय भद्रा का साया भी है। ऐसे में अधिकांश पंडित और ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि 2026 में होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाना शास्त्र अनुसार शुभ रहेगा।

    हालांकि कुछ स्थानीय पंचांगों में 3 मार्च के शाम का समय भी शुभ बताया गया है। लेकिन ग्रहण वाले दिन पूजा और अनुष्ठान नहीं करने का नियम देखते हुए होलिका दहन 2 मार्च 2026, दिन सोमवार को करना सही माना जा रहा है।

    ⚜️चंद्र ग्रहण की वजह से क्यों बदल रही है होलिका दहन की डेट
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    3 मार्च 2026 को लगने वाला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भारत में दिखाई देगा। यह भारतीय समय के अनुसार 3:20 दोपहर से दिखना शुरू होगा। यह लगभग 5 घंटे 39 मिनट तक का ग्रहण चक्र रहेगा, जिसमें आंशिक और पूर्ण दोनों चरण शामिल हैं। चांद निकलते ही ग्रहण का कुछ हिस्सा लगभग 6:26 PM से 6:46 PM (भारतीय समय) के बीच दिखाई देगा। इस दौरान चांद थोड़ा धुंधला या ढका हुआ नजर आ सकता है क्योंकि वह पहले ही पृथ्वी की छाया में कुछ हिस्सा में है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल को भी माना जाता है। मार्च 2026 में लगने वाले चंद्र ग्रहण का सूतक समय सुबह 06:20 बजे से लेकर शाम 06:46 बजे तक रहेगा।

    चूंकि होलिका दहन का समय भी संध्या का ही माना जाता है, इस वजह से इस तारीख पर दिखने वाला चांद ग्रहण से दूषित माना जाता है। वहीं सूतक काल का भी प्रभाव रहेगा। यह समय पूजा पाठ या किसी भी शुभ काम के लिए सही नहीं माना जाता है। यही वजह है कि ज्योतिष के जानकार 3 मार्च को होलिका दहन नहीं मनाने की सलाह दे रहे हैं।

    हालांकि कई जानकारों का ये भी कहना है कि सूतक के समाप्त होने के बाद 3 मार्च को 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक होलिका दहन किया जा सकता है।

    ⚜️होलिका दहन 2026 डेट एंड टाइम
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    अगर आप 2 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो इसके लिए शाम को 6:30 बजे के बाद का समय चुन सकते हैं। इस बार होलिका दहन को 2 मार्च 2026 की शाम को शुभ मुहूर्त में करना बेहतर समझा जा रहा है। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार इसका शुभ समय लगभग शाम 6:28 बजे से रात 8:52 बजे तक (IST) का है, जब प्रदोष काल और पूर्णिमा तिथि दोनों अनुकूल रहते हैं, इसलिए इस समय के बीच होलिका दहन करना शुभ फलदायी माना जाता है।

    अगर आप 3 मार्च 2026 को होलिका दहन करते हैं तो 06:47 PM से लेकर 8:50 PM तक यह पूजन किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने एरिया के पंडित जी या जानकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ⚜️होलिका दहन पर क्या किया जाता है
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    होलिका दहन पर शाम के समय तय शुभ मुहूर्त में होलिका जलाई जाती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानी जाती है। आग जलाने से पहले लोग होलिका की परिक्रमा करते हैं और घर-परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और नकारात्मकता से मुक्ति की कामना करते हैं। कई जगह गोबर के उपले, लकड़ी, सूखी घास के साथ गेहूं की बालियां, चना, नारियल या नई फसल अर्पित की जाती है, ताकि आने वाला साल समृद्ध रहे। होलिका की अग्नि में अहंकार, डर और पुराने गिले-शिकवे छोड़ने का भाव रखा जाता है। दहन के बाद कुछ लोग राख को तिलक के रूप में लगाते हैं, जिसे सुरक्षा और शुभता का संकेत माना जाता है। कुल मिलाकर, होलिका दहन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि मन को हल्का करने और नई शुरुआत का भाव जगाने का पर्व है।
    🚩#〰️〰️〰️🌼〰️〰️

  • पूजा सुपारी के 10 ऐसे उपाय

    🌹पूजा सुपारी के 10 ऐसे उपाय, जो बदल देंगे आपके मुसीबत के दिन
    🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
    जब सुपारी की विधिवत पूजा की जाती है तो वह चमत्कारी हो जाती है। अगर आप इस चमत्कारी सुपारी को हमेशा अपने पास रखते हैं तो जीवन में कभी भी पैसों की तंगी नहीं रहती है। आइए जानें सुपारी के 10 सटीक उपाय

    1. पूजा की सुपारी पर जनेऊ चढ़ाकर जब पूजा जाता है तो यह अखंडित सुपारी गौरी गणेश का रूप बन जाती है। इस सुपारी को तिजोरी में रखने पर घर में लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करने लगती हैं और इससे सौभाग्य आने लगता है।
    2. पूजा में इस्तेमाल की गई सुपारी को तिजोरी में रखना भी लाभदायक होता है। सुपारी को धागे में लपेटें और अक्षत, कुमकुम लगाकर पूजा जरूर कर लें। पूजा करके तिजोरी में रखी गई सुपारी बहुत लाभदायक होती है।
    3. व्यापार में तरक्की के लिए भी सुपारी बहुत सहायक होती है। माना जाता है कि शनिवार की रात पीपल के पेड़ की पूजा करके सुपारी और उसके साथ एक रुपये का सिक्का रखें। अगले दिन उस पेड़ का पत्ता तोड़कर लाएं उस पर सुपारी रखें और इसे अपनी तिजोरी में रखें इससे व्यापार में बढ़ोत्तरी होती है।
    4. पान का पत्ता रखें उस पर सिन्दूर में घी मिलाकर स्वस्तिक बनाएं और उस पत्ते पर कलावे में लपेटी हुई सुपारी रख कर पूजा करनी चाहिए। यह उपाय घर में सफलता के लिए द्वार खोलता है।
    5. अगर आपका कोई काम बनते बनते रह जाता है या आपको किसी कार्य में लगातार असफलता मिल रही है तो जब भी उस कार्य को करने जाए तो एक लौंग और सुपारी अपने पास रख लिया करें। काम के समय लौंग को अपने मुंह में रख लें और उसे चूसें। सुपारी घर आने के बाद वापस गणेशजी के फोटो के सामने रख दें। इससे रूका हुआ काम यकीनन पूरा होगा।
    6. सुपारी को चांदी की डिबिया में अबीर लगाकर किसी भी पूर्णिमा के दिन पूजा घर में रखें तो घर में मंगल कार्य जल्दी होते हैं।
    7. हल्दी, कुंकुम् और चावल लगाकर सुपारी पर मौली लपेटें और इसे किसी भी गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी मंदिर में छुपाकर आ जाएं। इससे अविवाहित कन्या की शादी के योग बनते हैं। जब रिश्ता पक्का हो जाए तो सुपारी को शादी तक घर में रखें। फिर जलाशय में विसर्जित कर दें।
    8. अगर घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो उसके निर्विघ्न संपन्न होने के लिए सुपारी को बोलकर लाल कपड़े में बांधकर छुपा दें। जब कार्य अच्छे से संपन्न हो जाए तो यह सुपारी किसी गणेश मंदिर में जाकर रख दें।
    9. घर से जब कोई तीर्थ यात्रा पर जाए तो उसके सकुशल वापिस आने तक तुलसी के गमले में सुपारी गाड़ दें। आने पर उसे धोकर किसी भी मंदिर में चढ़ा दें।
    10. सुपारी को 7 बार अपने ऊपर से उतार कर हवन कुंड में डालने से हर तरह की अला-बला दूर होती है।
      📲9910057645
      🚩#हरिऊँ🚩
      🙏🏼🙏🏼🙏🏼
  • चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट ज्योतिष उपाय

    चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट ज्योतिष उपाय करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और शुभता प्राप्त की जा सकती है। यहाँ राशि अनुसार उपाय दिए गए हैं👇🌝🕉️

    मेष राशि
    ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं ओम स्वाहा मंत्र का 108 बार जाप करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    वृषभ राशि
    ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम: मंत्र का जाप करें और सफेद वस्तुओं का दान करें।

    मिथुन राशि
    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः मंत्र का जाप करें और माता दुर्गा को फल चढ़ाएं।

    कर्क राशि
    शिवजी, राहु और चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें और चावल का दान करें।

    सिंह राशि
    आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें।

    कन्या राशि
    गणेश चालीसा का पाठ करें और ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम: मंत्र का जाप करें।

    तुला राशि
    ॐ ऐं क्लीं सौमाय नमाय नमः मंत्र का जाप करें और लक्ष्मी स्तोत्र या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

    वृश्चिक राशि
    ॐ क्राम क्रीम क्रौम सह भौमाय नमः मंत्र का जाप करें और हनुमान चालीसा पढ़ें।

    धनु राशि
    ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।

    मकर राशि
    ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें और शनि चालीसा का पाठ करें।

    कुंभ राशि
    ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: मंत्र का जाप करें।

    मीन राशि
    ॐ ह्लीं दुं दुर्गाय: नम: मंत्र का जाप करें और पीले फल या मिठाई का दान करें

  • होलाष्टक के दिनों में जाप कैसे करें

    होलाष्टक के दिनों में जाप कैसे करें

    होलाष्टक के दिनों में जाप करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

    1. नरसिंह मंत्र का जाप: होलाष्टक के दिनों में नरसिंह मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। आप “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्” मंत्र का जाप कर सकते हैं।
    2. समय और तिथि: होलाष्टक 23 फरवरी से 3 मार्च तक है, इस दौरान शाम के समय जाप करना उत्तम माना जाता है।
    3. विधि: जाप करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद, घर में तिल के तेल का दीपक जलाएं और पीली सरसों को एक कटोरी में रखें।
    4. जाप की प्रक्रिया: नरसिंह मंत्र का जाप करते हुए, आप अपनी समस्याओं और इच्छाओं के बारे में सोच सकते हैं। जाप के बाद, पीली सरसों को एक छोटी सी पोटली में बांधकर अपने साथ रख सकते हैं और बाद में इसे मंदिर में रख दें।
    5. नियम और सावधानियां: जाप के दौरान शुद्धता और संयम का पालन करें। तामसिक भोजन से बचें और जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखें।
  • राम नवमी तिथि 2026:

    राम नवमी तिथि 2026: इस बार क्यों राम नवमी मानी जा रही है खास, समय और संयोग पर एक नजर🌹
    💐💐💐💐💐💐💐💐💐
    ⭕हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्र मनाया जाता है। इस साल 19 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। यह पर्व जगत की देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है।

    साथ ही देवी मां को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के लिए नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

    सनातन शास्त्रों में निहित है कि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ है। इसके लिए हर साल चैत्र माह में राम नवमी मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की विशेष पूजा की जाती है। वहीं, पूजा समापन होने तक व्रत रखा जाता है। आइए, राम नवमी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त जानते हैं-

    ⚜️राम नवमी शुभ मुहूर्त
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को दिन 11 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का अवतरण मध्याह्न बेला में हुआ था। इसके लिए 26 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी।

    🪔राम नवमी पूजा समय
    🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
    ज्योतिषियों की मानें तो राम नवमी तिथि यानी 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 01 बजकर 41 मिनट तक पूजा का शुभ समय है। वहीं, दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मध्याह्न बेला का समय है। आसान शब्दों में कहें तो दोपहर 12 बजकर 27 मिनट भगवान श्रीराम का अवतरण समय है। साधक इस समय में भगवान श्रीराम की पूजा कर सकते हैं।

    ⚜️राम नवमी शुभ योग
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    ज्योतिषियों की मानें तो रामनवमी के दिन शोभन और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही रवि और शिववास योग का भी संयोग बन रहा है। इन योग में भगवान श्रीराम की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलेगी।
    🚩#रामरामजी🚩
    ✍️

  • कड़े का मूल चमत्कार

    कड़े का मूल चमत्कार
    =^=^=^=^=^=^=^=
    कड़ा हनुमानजी का प्रतीक है। पीतल और तांबा मिश्रित धातु का कड़ा पहनने से सभी तरह के भूत-प्रेत आदि नकारात्मक शक्तियों से व्यक्ति की रक्षा होती है।

    astroshaliini.blogspot.com

    इसके अलावा हाथ में कड़ा धारण करने से कई तरह की बीमारियों से भी रक्षा होती है। जो व्यक्ति बार-बार बीमार होता है उसे सीधे हाथ में अष्टधातु का कड़ा पहनना चाहिए। मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवाएं। इसके बाद शनिवार को वह कड़ा लेकर आएं। शनिवार को ही किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर कड़े को बजरंग बली के चरणों में रख दें। अब हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके बाद कड़े में हनुमानजी का थोड़ा सिंदूर लगाकर बीमार व्यक्ति स्वयं सीधे हाथ में पहन लें।

    www.astroshalini.com

    ध्यान रहे, यह कड़ा हनुमानजी का आशीर्वाद स्वरूप है अत: अपनी पवित्रता पूरी तरह बनाए रखें। कोई भी अपवित्र कार्य कड़ा पहनकर न करें अन्यथा कड़ा प्रभावहीन हो जाता है ।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण तो फिर कैसे करेंगे स्नान-दान? सुबह से ही लगेगा सूतक काल, जानें क्या करें🕉️

    🕉️फाल्गुन पूर्णिमा 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण तो फिर कैसे करेंगे स्नान-दान? सुबह से ही लगेगा सूतक काल, जानें क्या करें🕉️
    ===============================
    ✍️〰️〰️🌼〰️〰️〰️🌼〰️
    ⭕हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा को बेहद शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण का साया रहेगा। वहीं ग्रहण के कारण सभी भक्तों में मन में कंफ्यूजन है कि पूर्णिमा के दिन ग्रहण है तो फिर स्नान और दान कैसे करेंगे और पूजा-पाठ किस तरह किया जाएगा?

    आइए इस लेख में विस्तार जानते हैं कि फाल्गुन पूर्णिमा के दिन स्नान और दान कब और कैसे करें और इसका महत्व क्या है?

    ⚜️चंद्र ग्रहण का साया और फाल्गुन पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का महत्व
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है। •इसी दिन होलिका दहन होता है। वहीं •इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को पड़ रही है और चंद्र ग्रहण भी इसी दिन फाल्गुन पूर्णिमा पड़ रही है। लेकिन इस बार इस पावन तिथि पर चंद्र ग्रहण लग रहा है, जिससे सूतक काल और पूजा की विधियों में बदलाव आएगा।

    ⚜️फाल्गुन पूर्णिमा पर कैसे करें स्नान और दान?
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    ग्रहण के साये में भी फाल्गुन पूर्णिमा का पुण्य फल प्राप्त किया जा सकता है। चूंकि पूर्णिमा तिथि सुबह से लग जाएगी, इसलिए ग्रहण के सूतक काल शुरू होने से पहले ही पवित्र नदियों में स्नान कर लेना श्रेष्ठ है। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो पानी में गंगाजल मिला लें।

    ग्रहण काल समाप्त होने के बाद दान करना •’अक्षय पुण्य’ देता है। 3 मार्च की शाम या अगले दिन सुबह सफेद वस्तुओं का दान करना चंद्रमा को मजबूत करता है और दोषों का निवारण करता है। साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    ⚜️फाल्गुन पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का मुहूर्त
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    🚩पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 3 मार्च 2026, सुबह 03:55 बजे से

    🚩पूर्णिमा तिथि समाप्त- 4 मार्च 2026, रात 01:50 बजे तक

    🚩स्नान के लिए मुहूर्त- सुबह 05:05 से 05:54 तक

    🚩दान के लिए मुहूर्त- दोपहर 12:09 से 12:56 तक

    ⚜️सूतक कब से हो रहा है शुरू?
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    🚩सूतक शुरू- 3 मार्च 2026, सुबह 9:39 से

    🚩सूतक समाप्त- 3 मार्च 2026, शाम 6:46

    ⚜️फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व क्या है?
    卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विधिवत रूप से पूजा करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। चंद्र ग्रहण के कारण इस बार संयम और साधना का महत्व दोगुना हो गया है।
    🚩#हरिऊँ🚩
    ✍️

  • फुलेरादौज आज

    फुलेरादौज आज


    पौराणिक कथा के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के संग फूलों की होली खेली थी। इसलिए इस दिन फुलेरा दूज का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर ब्रज के मंदिरों में खास रौनक देखने को मिलती है और मंदिरो को फूलों से सुंदर तरीके से सजाया जाता है। 

    शुभ मुहूर्त और तारीख

    हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि इस बार 18 फरवरी 2026 की शाम 04:57 बजे से शुरू होगी और 19 फरवरी को दोपहर 03:58 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यताओं का पालन करते हुए, फुलेरा दूज का मुख्य उत्सव 19 फरवरी 2026 यानी गुरुवार को मनाया जाएगा।
    इस दिन को शास्त्रों में ‘अबूझ मुहूर्त’ कहा गया है, जिसका अर्थ है कि आज के दिन कोई भी मांगलिक कार्य- जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश- बिना पंचांग देखे किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह दिन दोषमुक्त होता है और इस दिन शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना प्रबल रहती है।

    फुलेरा दूज पर किए जाने वाले शुभ कार्य

    • शास्त्रों के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और राधा-कृष्ण के पूजन का संकल्प लें।
    • पूजा में ताजे और सुगंधित फूलों का उपयोग अनिवार्य है। भगवान श्री कृष्ण को पीले फूल विशेष रूप से अर्पित करें क्योंकि यह उन्हें अत्यंत प्रिय हैं।
    • ठाकुर जी को प्रेमपूर्वक गुलाल का टीका लगाएं।
    • भगवान की कमर पर गुलाल से भरी एक छोटी पोटली बांधने की परंपरा निभाएं, जो होली के आगमन का संकेत देती है।
    • प्रसाद में माखन-मिश्री, पोहा या सफेद मिठाइयों का भोग लगाना उत्तम माना गया है।

    इन बातों का रखें खास ध्यान

    मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काले या गहरे रंग के कपड़ों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। घर में सात्विक भोजन ही बनाएं और तामसिक चीजों (मांस-मदिरा) से दूर रहें। इसके अलावा, किसी भी व्यक्ति का अपमान न करें और मन में ईर्ष्या या क्रोध जैसे भाव न लाएं, क्योंकि यह दिन प्रेम और क्षमा का प्रतीक है।

    विवाह में आ रही बाधा दूर

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, फुलेरा दूज के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राधा रानी की पूजा-अर्चना करने से जातक के विवाह में आ रही बाधा दूर होती है और पति-पत्नी के रिश्ते में मधुरता आती है। साथ ही प्रभु की कृपा से प्राप्त होती है। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।