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  • देवशयनी एकादशी

    देवशयनी’ एकादशी
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    आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी’ एकादशी कहा जाता है। इस वर्ष यह 06 जुलाई 2025  को पड़ रही ‘देवशयनी’ एकादशी है।
    इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए बलि के द्वार पर पाताल लोक में निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को लौटते हैं। इसी दिन से चौमासे का आरम्भ माना जाता है।
    देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। देवशयनी एकादशी के चार माह के बाद भगवान् विष्णु प्रबोधिनी एकादशी के दिन जागतें हैं।
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    देवशयनी एकादशी के बाद विवाह व मांगलिक कार्यों में विराम लग जायेगा..

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    • एकादशी को प्रातःकाल उठें।
    • इसके बाद घर की साफ-सफाई तथा नित्य कर्म से निवृत्त हो जाएं।
    • स्नान कर पवित्र जल का घर में छिड़काव
    • घर के पूजन स्थल अथवा किसी भी पवित्र स्थल पर प्रभु श्री हरि विष्णु की सोने, चांदी, तांबे अथवा पीतल की मूर्ति की स्थापना करें।
    • तत्पश्चात उसका पूजन करें।
    • इसके बाद भगवान विष्णु को पीतांबर आदि से विभूषित करें।
    • तत्पश्चात व्रत कथा सुननी चाहिए।
    • इसके बाद आरती कर प्रसाद वितरण करें।
    • अंत में सफेद चादर से ढंके गद्दे-तकिए वाले पलंग पर श्री विष्णु को शयन कराना चाहिए।

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    इस मंत्र से करें भगवान विष्णु को प्रसन्न :—-

    ‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेदिदम।
    विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चराचरम।’

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    भावार्थ: हे जगन्नाथ! आपके शयन करने पर यह जगत सुप्त हो जाता है और आपके जाग जाने पर सम्पूर्ण चराचर जगत प्रबुद्ध हो जाता है। पीताम्बर, शंख, चक्र और गदा धारी भगवान् विष्णु के शयन करने और जाग्रत होने का प्रभाव प्रदर्शित करने वाला यह मंत्र शुभ फलदायक है जिसे भगवान विष्णु की उपासना के समय उच्चारित किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह चार मास भगवान विष्णु का निद्रा काल माना जाता है। इन दिनों में तपस्वी भ्रमण नहीं करते, वे एक ही स्थान पर रहकर तपस्या (चातुर्मास) करते हैं। इन दिनों केवल बृज की यात्रा की जा सकती है, क्योंकि इन चार महीनों में भू-मण्डल के समस्त तीर्थ ब्रज में आकर निवास करते हैं। ब्रह्म वैवर्त पुराण में इस एकादशी का विशेष माहात्म्य लिखा है। इस व्रत को करने से प्राणी की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, सभी पाप नष्ट होते हैं तथा भगवान हृषीकेश प्रसन्न होते हैं।इस व्रत को करने से समस्त रखते वाले व्यक्ति को अपने चित, इंद्रियों, आहार और व्यवहार पर संयम रखना होता है. एकादशी व्रत का उपवास व्यक्ति को अर्थ-काम से ऊपर उठकर मोक्ष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है. ==============================
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  • *श्री दुर्गाजी के 32 नाम!!*

    *श्री दुर्गाजी के 32 नाम!!*
         ॐ अस्य श्रीदुर्गा द्वात्रिंशंन्नाम स्त्रोत्रमंत्रस्य शिव ऋषि: अनुष्टुप छन्दः श्री दुर्गा देवता निज बीजं, मन्त्रः कीलकं, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं दारिद्रय दुर्भाग्य रोग शोक दुःख विनाशार्थे सर्वाशापूर्णार्थे च तददिव्य द्वात्रिंशंन्नाम मन्त्र जपे विनियोगः ।।

    ॐ दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी।
    दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी
    दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला
    दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी
    दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता
    दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी
    दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी
    दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी
    दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी
    दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी
    नामावली ममायास्तु दुर्गया मम मानसः
    पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः
    पठेत् सर्व भयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः।

    देह शुद्धि के बाद कुश या कंबल के आसन पर बैठ कर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके घी का दिया जलाकर यदि इन नामो का जाप किया जाए तो व्यक्ति विनियोग में वर्णित हर भय से मुक्त हो जाता है । इस का जाप 5/11/21 बार करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

  • श्री बगला अष्टकम

       

    श्री बगला अष्टकम (Shri Bagla Ashtakam)


    ॥ श्री बगलाष्टक ॥
    पीत सुधा सागर में विराजत,
    पीत-श्रृंगार रचाई भवानी ।
    ब्रह्म -प्रिया इन्हें वेद कहे,
    कोई शिव प्रिया कोई विष्णु की रानी ।
    जग को रचाती, सजाती, मिटाती,
    है कृति बड़ा ही अलौकिक तेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करों न बिलम्ब हरो दुःख मेरो ॥1॥null

    पीत वसन, अरु पीत ही भूषण,
    पीत-ही पीत ध्वजा फहरावे ।
    उर बीच चम्पक माल लसै,
    मुख-कान्ति भी पीत शोभा सरसावे ।
    खैच के जीभ तू देती है त्रास,
    हैं शत्रु के सन्मुख छाये अंधेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥2॥

    ध्यावै धनेश , रमेश सदा तुम्हें,
    पूजै प्रजेश पद-कंज तुम्हारे ।
    गावें महेश, गणेश ,षडानन,
    चारहु वेद महिमा को बखाने ।
    देवन काज कियो बहु भाँति,
    एक बार इधर करुणाकर हेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न बिलम्ब हरो दुःख मेरो ॥3॥

    नित्य ही रोग डरावे मुझे,
    करुणामयी काम और क्रोध सतावे ।
    लोभ और मोह रिझावे मुझे,
    अब शयार और कुकुर आँख दिखावे ।
    मैं मति-मंद डरु इनसे,
    मेरे आँगन में इनके है बसेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥4॥

    नाम पुकारत दौडी तू आवत,
    वेद पुराण में बात लिखी है ।
    आ के नसावत दुःख दरिद्रता,
    संतन से यह बात सुनी है ।
    दैहिक दैविक, भौतिक ताप,
    मिटा दे भवानी जो है मुझे घेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥5॥

    जग में है तेरो अनेको ही पुत्र,
    विलक्षण ज्ञानी और ध्यानी, सुजानी ।
    मैं तो चपल, व्याकुल अति दीन,
    मलिन, कुसंगी हूँ और अज्ञानी ।
    हो जो कृपा तेरो, गूंगा बके,
    अंधा के मिटे तम छाई घनेरो ।
    हे जगदम्ब! तू ही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥6॥

    विद्या और लक्ष्मी भरो घर में,
    दुःख दीनता को तुम आज मिटा दो ।
    जो भी भजे तुमको, पढ़े अष्टक,
    जीवन के सब कष्ट मिटा दो ।
    धर्म की रक्षक हो तू भवानी,
    यह बात सुनी ओ-पढ़ी बहुतेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥7॥

    अष्ट ही सिद्धि नवो निधि के तुम,
    दाता उदार हो बगला भवानी ।
    आश्रित जो भी है तेरे उसे,
    कर दो निर्भय तू हे कल्याणी ।
    `बैजू` कहे ललकार, करो न विचार,
    बुरा ही पर हूँ तेरो चेरो ।
    हे जगदम्ब! तूही अवलम्ब,
    करो न विलम्ब हरो दुःख मेरो ॥8॥

    ॥ दोहा ॥
    यह अष्टक जो भी पढे, माँ बगला चितलाई ।
    निश्चय अम्बे प्रसाद से कष्ट रहित हो जाई ॥

  • श्रीकालिकाष्टकं

    ध्यानम्

    गलदरक्तमुण्डावलीकण्ठमाला

    महाघोररावा सुदंष्ट्रा कराला।

    विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशी

    महाकालकामाकुला कालिकेयम्।।1।।

    अर्थ – ये भगवती कालिका गले में रक्त टपकते हुए मुण्डसमूहों की माला पहने हुए हैं, ये अत्यन्त घोर शब्द कर रही हैं, इनकी दाढ़े हैं तथा स्वरूप भयानक है, ये वस्त्ररहित हैं, ये श्मशान में निवास करती हैं, इनके केश बिखरे हुए हैं और ये महाकाल के साथ कामलीला में निरत हैं।

    भुजे वामयुग्मे शिरोSसिं दधाना

    वरं दक्षयुग्मेSभयं वै तथैव।

    सुमध्याSपि तुंगस्तनाभारनम्रा

    लसदरक्तसृक्कद्वया सुस्मितास्या।।2।।

    अर्थ – ये अपने दोनों बाएं हाथों में नरमुण्ड और खड्ग ली हुई हैं तथा अपने दोनों दाहिने हाथों में वर और अभयमुद्रा धारण किये हुई हैं। ये सुन्दर कटिप्रदेश वाली हैं, ये उन्नत स्तनों के भार से झुकी हुई सी हैं, इनके ओष्ठ-द्वय का प्रान्त भाग रक्त से सुशोभित है और इनका मुख मण्डल मधुर मुस्कान से युक्त है।

    शवद्वन्द्वकर्णावतंसा सुकेशी

    लसत्प्रेतपाणिं प्रयुक्तैककाञ्ची।

    शवाकारमञ्चाधिरूढ़ा शिवाभि-

    श्चतुर्दिक्षुशब्दायमानाSभिरेजे।।3।।

    अर्थ – इनके दोनों कानों में दो शवरूपी आभूषण हैं, ये सुन्दर केशवाली हैं, शवों के हाथों से बनी सुशोभित करधनी ये पहने हुई हैं, शवरूपी मंच पर ये आसीन हैं और चारों दिशाओं में भयानक शब्द करती हुई सियारिनों से घिरी हुई सुशोभित हैं।

    स्तुति:

    विरञ्च्यादिदेवास्त्रयस्ते गुणांस्त्रीन्

    समाराध्य कालीं प्रधाना बभूवु:।

    अनादिं सुरादिं मखादिं भवादिं

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।4।।

    अर्थ – ब्रह्मा आदि तीनों देवता आपके तीनों गुणों का आश्रय लेकर तथा आप भगवती काली की ही आराधना कर प्रधान हुए हैं। आपका स्वरूप आदि रहित है, देवताओं में अग्रगण्य है, प्रधान यज्ञस्वरुप है और विश्व का मूलभूत है; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    जगन्मोहनीयं तु वाग्वादिनीयं

    सुहृत्पोषिणीशत्रुसंहारणीयम्।

    वचस्तम्भनीयं किमुच्चाटनीयं

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।5।।

    अर्थ – आपका यह स्वरुप सारे विश्व को मुग्ध करने वाला है, वाणी द्वारा स्तुति किये जाने योग्य है, यह सुहृदों का पालन करने वाला है, शत्रुओं का विनाशक है, वाणी का स्तम्भन करने वाला है और उच्चाटन करने वाला है; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    इयं स्वर्गदात्री पुन: कल्पवल्ली

    मनोजांस्तु कामान् यथार्थं प्रकुर्यात्।

    तथा ते कृतार्था भवन्तीति नित्यं

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।6।।

    अर्थ – ये स्वर्ग को देने वाली हैं और कल्पता के समान हैं। ये भक्तों के मन में उत्पन्न होने वाली कामनाओं को यथार्थ रूप में पूर्ण करती हैं और वे सदा के लिए कृतार्थ हो जाते हैं; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    सुरापानमत्ता सुभक्तानुरक्ता

    लसत्पूतचित्ते सदाविर्भवत्ते।

    जपध्यानपूजासुधाधौतपंका

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।7।।

    अर्थ – आप सुरापान से मत्त रहती हैं और अपने भक्तों पर सदा स्नेह रखती हैं। भक्तों के मनोहर तथा पवित्र हृदय में ही सदा

    आपका आविर्भाव होता है। जप, ध्यान तथा पूजारूपी अमृत से आप भक्तों के अज्ञानरूपी पंक(कीचड़) को धो डालने वाली हैं; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    चिदानन्दकन्दं हसन् मन्दमन्दं

    शरच्चन्द्रकोटिप्रभापुञ्जबिम्बम् ।

    मुनीनां कवीनां हृदि द्योतयन्तं

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।8।।

    अर्थ – आपका स्वरुप चिदानन्दघन, मन्द-मन्द मुस्कान से संपन्न, शरत्कालीन करोड़ों चन्द्रमा के प्रभास समूह के प्रतिबिम्ब सदृश और मुनियों तथा कवियों के हृदय को प्रकाशित करने वाला है; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    महामेघकाली सुरक्तापि शुभ्रा

    कदाचिद् विचित्राकृतिर्योगमाया।

    न बाला न वृद्धा न कामातुरापि

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।9।।

    अर्थ – आप प्रलयकारी घटाओं के समान कृष्णवर्णा हैं, आप कभी रक्तवर्णवाली तथा कभी उज्जवल वर्ण वाली भी हैं। आप विचित्र आकृति वाली तथा योगमायास्वरुपिणी हैं। आप न बाला, न वृद्धा और ना कामातुरा युवती ही हैं; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    क्षमस्वापराधं महागुप्तभावं

    मया लोकमध्ये प्रकाशीकृतं यत् ।

    तव ध्यानपूतेन चापल्यभावात्

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।10।।

    अर्थ – आपके ध्यान से पवित्र होकर चंचलतावश इस अत्यन्त गुप्त भाव को जो मैंने संसार में प्रकट कर दिया है, मेरे इस अपराध को आप क्षमा करें; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    फलश्रुति:

    यदि ध्यानयुक्तं पठेद् यो मनुष्य-

    स्तदा सर्वलोके विशालो भवेच्च।

    गृहे चाष्टसिद्धिर्मृते चापि मुक्ति:

    स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवा:।।11।।

    अर्थ – यदि कोई मनुष्य ध्यानयुक्त होकर इसका पाठ करता है, तो वह सारे लोकों में महान हो जाता है। उसे अपने घर में आठों सिद्धियाँ प्राप्त रहती हैं और मरने पर मुक्ति भी प्राप्त हो जाती है; आपके इस स्वरुप को देवता भी नहीं जानते।

    ।।इति श्रीमच्छंकराचार्यविरचितं श्रीकालिकाष्टकं सम्पूर्णम्।।

  • उतारा कैसे करें

    उतारा कैसे करें
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    उपाय

    remedies

    किस दिन किस मिठाई से उतारा करना चाहिए,–

    💐रविवार को बर्फी से उतारा करना चाहिए।
    💐सोमवार को बर्फी से उतारा कर लड्डू कुत्ते को खिला दें।
    💐मंगलवार को बूंदी से उतारा कर कुत्ते को खिला दें।
    💐बुधवार को इमरती से उतारा करें व उसे कुत्ते को खिला दें।
    💐 गुरूवार को सायं काल एक दोने में अथवा कागज़ पर पांच मिठाइयां रखकर उतारा करें। उतारे के बाद उसमें छोटी इलाइची रखें व धूपबत्ती जलाकर किसी पीपल के वृक्ष के नीचे पश्चिम दिशा में रखकर घर वापस जाएँ। ध्यान रहे, वापस जाते समय पीछे मुड कर न देखें और घर आकर हाथ और पैर धोकर व कुल्ला करके ही अन्य कार्य करें।
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    💐शुक्रवार को मोती चूर के लड्डू से उतारा कर लड्डू कुत्ते को खिला दें या किसी चौराहे पर रख दें।
    💐शनिवार को उतारा करना हो तो इमरती या बूंदी का लड्डू प्रयोग में लायें व उतारे के बाद उसे कुत्ते को खिला दें।

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    नजर उतारने अथवा उतारा आदि करने के लिये कपूर, बूंदी का लड्डू, इमरती, बर्फी, कडवे तेल की रूई की बाती, जायफल , उबले चावल, बूरा, राई, नमक, काली सरसों, पीली सरसों मेहँदी, काले तिल, सिन्दूर, रोली, हनुमान जी को चढ़ाए जाने वाले सिन्दूर, नींबू उबले अंडे, दही, फल, फूल, मिठाइयों, लाल मिर्च, झाड़ू, मोर पंख लौंग, नीम के पत्तों की धूनी आदि का प्रयोग किया जाता है।
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    स्थायी व दीर्घकालीन लाभ के लिये संध्या के समय गायत्री मंत्र का जप और जप के दशांश का हवन करना चाहिए। हनुमान जी की नियमित रूप से उपासना, भगवान् शिव की उपासना व उनके मूल मंत्र का जप, महामृत्युंजय मंत्र का जप, माँ दुर्गा और माँ काली की उपासना करें।
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    स्नान के पश्चात तांबे के लोटे से सूर्य को जल का अर्ध्य दें। पूर्णमासी को सत्यनारायण की कथा स्वयं करें अथवा किसी कर्मकांडी ब्रह्मण से सुनें। संध्या के समय घर में दीपक जलायें, प्रतिदिन गंगाजल छिडकें और नियमित रूप से गूगल की धूनी दें। प्रतिदिन शुद्ध आसन पर बैठकर सुन्दरकाण्ड का पाठ करें। किसी के द्वारा दिया गया सेव व केला न खाएं। रात्रि बारह से चार बजे के बीच कभी स्नान न करें।

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  • गुप्त नवरात्र के 11 उपाय

    गुप्त नवरात्र के 11 उपाय
    नौ दिनों तक चलने वाले गुप्त नवरात्र पर्व में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विभिन्न साधनाएं भी की जाती हैं। गुप्त नवरात्रि में मनचाही सफलता के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। वहीं तंत्र शास्त्र के अनुसार गुप्त नवरात्रि में किए गए उपाय जल्दी ही शुभ फल प्रदान कर सकते हैं। धन, नौकरी, स्वास्थ्य, संतान, विवाह, प्रमोशन आदि कई मनोकामनाएं इन 9 दिनों में किए गए उपायों से प्राप्त हो सकती है।

    उपाय इस प्रकार हैं👇

    1👉 मनपसंद वर के लिए उपाय

    गुप्त नवरात्रि के दौरान तृतीया पंचमी सप्तमी और नवमी के दिन अपने आस-पास स्थित किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां भगवान शिव एवं मां पार्वती पर जल एवं दूध चढ़ाएं और पंचोपचार (चंदन, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य) से उनका पूजन करें। अब मौली (पूजा में उपयोग किया जाने वाला लाल धागा) से उन दोनों के मध्य गठबंधन करें। अब वहां बैठकर लाल चंदन की माला से मंत्र का जाप 108 बार करें-मंत्र- हे गौरी शंकरार्धांगी। यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।।इसके बाद तीन महीने तक रोज इसी मंत्र का जाप शिव मंदिर में अथवा अपने घर के पूजाकक्ष में मां पार्वती के सामने 108 बार करें। घर पर भी आपको पंचोपचार पूजा करनी है।

    2👉 शीघ्र विवाह के लिए उपाय

    गुप्त नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी पूजा-अर्चना करने के पश्चात मंत्र का 3, 5 या 10 माला जाप करें। जाप के बाद भगवान शिव से विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें-मंत्र- ऊं शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाप विध्वंसनाय, पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।

    3👉 दांपत्य सुख के लिए उपाय

    यदि जीवनसाथी से अनबन होती रहती है तो गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन नीचे लिखी चौपाई को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें। अब नित्य सुबह उठकर पूजा के समय इस चौपाई को 21 बार पढ़ें। यदि संभव हो तो अपने जीवनसाथी से भी इस चौपाई का जाप करने के लिए कहें-चौपाई- सब नर करहिं परस्पर प्रीति।चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।

    4👉 धन लाभ के लिए उपाय

    गुप्त नवरात्रि के समय कम से कम 5 दिन सभी कार्यों से निवृत्त होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें। ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए। दीपक के सामने लाल चावल (चावल को रंग लें) की एक ढेरी बनाएं फिर उस पर एक श्रीयंत्र रखकर उसका कुंकुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें। उसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें। श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से आपको अचानक धन लाभ होने के योग बन सकते हैं।
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    5👉 मनचाही दुल्हन के लिए उपाय

    गुप्त नवरात्रि के समय जो भी सोमवार आए। उस दिन सुबह किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाते हुए उसे अच्छी तरह से साफ करें। फिर शुद्ध जल चढ़ाएं और पूरे मंदिर में झाड़ू लगाकर उसे साफ करें। अब भगवान शिव की चंदन, पुष्प एवं धूप, दीप आदि से पूजा-अर्चना करें।रात 10 बजे बाद अग्नि प्रज्वलित कर ऊं नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते हुए घी से 108 आहुति दें। अब 40 दिनों तक नित्य इसी मंत्र का पांच माला जाप भगवान शिव के सम्मुख करें। इससे शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूर्ण होने के योग बनेंगे।

    6👉 इंटरव्यू में सफलता का उपाय

    गुप्त नवरात्रि में मंगल गुरु और शुक्र के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सफेद रंग का सूती आसन बिछाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके उस पर बैठ जाएं। अब अपने सामने पीला कपड़ा बिछाकर उस पर 108 दानों वाली स्फटिक की माला रख दें और इस पर केसर व इत्र छिड़क कर इसका पूजन करें।इसके बाद धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर मंत्र का 31 बार उच्चारण करें। इस प्रकार 11 दिन तक करने से वह माला सिद्ध हो जाएगी। जब भी किसी इंटरव्यू में जाएं तो इस माला को पहन कर जाएं। ये उपाय करने से इंटरव्यू में सफलता की संभावना बढ़ सकती है।
    👉 मंत्र- ऊँ ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा।

    7👉 लाभ बढ़ाने का उपाय

    गुप्त नवरात्रि में सोमवार और शुक्रवार के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े में अपने सामने मोती शंख को रखें और उस पर केसर से स्वस्तिक का चिह्न बना दें। इसके बाद इस मंत्र का जाप करें-मंत्र- श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:।।मंत्र जाप के ये हैं नियम- मंत्र का जप स्फटिक माला से ही करें। – मंत्रोच्चार के साथ एक-एक चावल इस शंख में डालें।- इस बात का ध्यान रखें की चावल टूटे हुए ना हो। इस प्रयोग लगातार नौ दिनों तक करें।- इस प्रकार रोज एक माला जाप करें। उन चावलों को एक सफेद रंग के कपड़े की थैली में रखें और 9 दिन के बाद चावल के साथ शंख को भी उस थैली में रखकर तिजोरी में रखें। इस उपाय से घर की बरकत बढ़ सकती है।

    8👉 माता जगदंबिका को आम अथवा गन्ने के रस से स्नाान करवाया जाए तो लक्ष्मी और सरस्वती ऐसे भक्त का घर छोड़कर कभी नहीं जातीं। वहां नित्य ही संपत्ति और विद्या का वास रहता है।

    9👉 वेद पाठ के साथ यदि कर्पूर, अगरु (सुगंधित वनस्पति), केसर, कस्तूरी व कमल के जल से देवी को स्नान करवाया जाए तो सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है तथा साधक को थोड़े प्रयासों से ही सफलता मिलती है।

    10👉 द्राक्षा (दाख) के रस से यदि माता जगदंबिका को स्नान करवाया जाए तो भक्तों पर देवी की कृपा बनी रहती है।

    11👉 इसी प्रकार यदि देवी को दूध से स्नान करवाया जाए तो व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-समृद्धि का स्वामी बनता है।

  • Surya namaskar se surya ke upay

    Surya Namaskar (सूर्य नमस्कार) ke dwara na keval sharirik labh milte hain, balki yah ek shaktishaali Surya upay bhi hai jo Surya Dev ki kripa prapt karne mein madad karta hai. Agar kisi janm kundli mein Surya kamzor ho, ya pitra dosh ho, ya aatm-vishwas ki kami ho, to Surya Namaskar ek prabhavi upay hai.

     Surya Namaskar se Surya ke Upay:

     1. Surya ki Shakti ka Aamantran:

    Surya Namaskar subah ke samay (sunrise par) karne se Surya ki positive urja sharir mein pravesh karti hai. Yah ek prakar ka aatmik aabhishik (divine energizing) hai.

     2. Surya dosh nivaran:

    Kundli mein agar Surya neech ka ho, ya rog, shatrubhaav mein ho, to roz 12 baar Surya Namaskar karna aur “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” mantra ka jaap karna labhdayak hota hai.

     3. Aatma-vishwas aur leadership badhata hai:

    Surya ka sambandh man, netritva, prabhav aur pratishtha se hota hai. Surya Namaskar se in sab gunon mein vriddhi hoti hai.

     4. Pitru dosh se mukti:

    Surya Pitruon ke devta hote hain. Unki aradhna se pitru santusht hote hain. Surya Namaskar ke saath Shraddha aur tarpan bhi kiya ja sakta hai.

     5. Rog nasak aur ayu vriddhi:

    Surya Namaskar se liver, heart aur immunity majboot hoti hai. Isse Surya sambandhit rog jaise BP, diabetes aur heart issues mein rahat milti hai.

     Surya Namaskar karte samay kuch vishesh baatein dhyan dein:

    1. Surya ko jal chadhakar shuru karein: Copper ke lota mein thoda sa lal phool, roli, mishri daal kar Surya ko arghya dein.

    2. Mantra uchcharan karein: Har aasan ke saath Surya ke 12 naamon ka jaap karein (जैसे – ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः…)

    3. Niyamit aur shraddha se karein: Kam se kam 21 din lagataar subah suryoday ke samay karein.

    4. Lal kapda ya lal tilak lagakar karein: Surya ki shakti ko aakarshit karta hai.

     Extra Surya Upay jo Surya Namaskar ke saath karein:

    Ravivar ko lal vastra daan karein.

    Lal chandan ya roli ka tilak lagayein.

    Surya Beej Mantra: “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः” ka 108 baar jaap.

    Ravivar ko gehu, gud aur lal phal daan karein.

  • Rahu -ketu in D-30 Chart

    🔮 Rahu in D-30 Chart (House-Wise Results)

    🏠 1st House (Self, Body, Personality)

    Mental unrest, ego issues, identity crises.

    May face mysterious illnesses or accidents.

    Remedy: Grounding practices like yoga, chant “Om Raam Rahave Namah”.

    🏠 2nd House (Family, Speech, Wealth)

    Family misunderstandings, abusive language, sudden financial loss.

    Inherited karmic issues from lineage.

    Remedy: Respect elders, control speech, donate food on Saturdays.

    🏠 3rd House (Siblings, Efforts, Communication)

    Misuse of communication, gossip-related karmas, rivalry with siblings.

    Overconfidence can bring downfall.

    Remedy: Help siblings, avoid false promises.

    🏠 4th House (Mother, Home, Inner Peace)

    Mental trauma, lack of emotional security, conflict with mother.

    Haunted homes or vastu dosha likely.

    Remedy: Light lamp with ghee in home temple; offer milk to Shiva.

    🏠 5th House (Children, Intellect, Creativity)

    Karmic debts related to past-life misuse of knowledge or romance.

    Trouble conceiving or issues with children.

    Remedy: Recite Saraswati Vandana; avoid ego in learning.

    🏠 6th House (Enemies, Diseases, Debts)

    Prone to addiction, legal trouble, hidden enemies.

    Excellent for defeating enemies but brings restlessness.

    Remedy: Donate medicine; chant Durga Chalisa.

    🏠 7th House (Marriage, Partnerships)

    Karmic entanglements in marriage, betrayal, or multiple marriages.

    Problems from in-laws or spouse’s past karma.

    Remedy: Serve cows; avoid partnerships based on greed.

    🏠 8th House (Longevity, Secrets, Occult)

    Powerful but dangerous – indicates black magic, sudden losses.

    Strong occult abilities but with risk.

    Remedy: Meditate on Lord Bhairav or Kali.

    🏠 9th House (Luck, Guru, Dharma)

    Broken faith, disrespect toward gurus or father in past life.

    Difficulties in higher education or foreign travel.

    Remedy: Offer water to rising sun; respect teachers.

    🏠 10th House (Career, Authority, Karma)

    Power misuse in past life; fame with scandal.

    Trouble at workplace; unstable reputation.

    Remedy: Feed black dogs; offer mustard oil to Shani temple.

    🏠 11th House (Gains, Social Circle)

    Greedy desires, false friendships, networking karma.

    Delay in success despite efforts.

    Remedy: Donate food to beggars; keep promises.

    🏠 12th House (Loss, Isolation, Moksha)

    Foreign karmas, imprisonment, addictions, spiritual confusion.

    Secret enemies, astral attacks.

    Remedy: Recite Hanuman Chalisa; avoid intoxicants.


    🔮 Ketu in D-30 Chart (House-Wise Results)

    🏠 1st House

    Past-life detachment from self; identity crisis.

    May feel spiritually disconnected or overly isolated.

    Remedy: Worship Lord Ganesha.

    🏠 2nd House

    Speech karma; hurt people through words in past life.

    Food allergies or financial suffering.

    Remedy: Donate grains, control harsh speech.

    🏠 3rd House

    Detached from efforts or lacks motivation.

    Communication feels blocked or misunderstood.

    Remedy: Write daily affirmations, strengthen Mercury.

    🏠 4th House

    Emotional trauma, past karma with mother or homeland.

    Homelessness or heart chakra issues.

    Remedy: Offer milk to Devi, keep home peaceful.

    🏠 5th House

    Lost connection with children or creativity.

    Misuse of mantras or knowledge in past lives.

    Remedy: Respect children, chant Gayatri Mantra.

    🏠 6th House

    Karmic enemies, chronic illness, or self-doubt.

    Can become spiritually strong through service.

    Remedy: Serve the poor and diseased.

    🏠 7th House

    Detachment in relationships, marriage karmas.

    Spiritual lessons through betrayal or loneliness.

    Remedy: Donate white items; honor commitments.

    🏠 8th House

    Extreme spiritual or tantric karma.

    Sudden mystical insights, but risk of detachment from reality.

    Remedy: Meditate regularly, avoid black magic.

    🏠 9th House

    Disrespect for gurus or belief systems in past life.

    May follow cults or get misled.

    Remedy: Study scriptures, do Guru seva.

    🏠 10th House

    Aversion or detachment from work and authority.

    Sudden job losses or depression from ambition failures.

    Remedy: Offer sindoor to Hanuman ji on Tuesdays.

    🏠 11th House

    Disinterest in gains or friendships.

    Could indicate past misuse of networks for selfish gain.

    Remedy: Help others selflessly.

    🏠 12th House

    Moksha-oriented; seeker’s chart.

    Past-life monk or isolation tendencies.

    Remedy: Visit temples regularly, donate bedsheets in ashrams.

  • Shiv amogh kawach

    Best remedies in astrology: From my experience, finest
    remedy for any problem is worship of the lord Shiva,
    Shiva in our Veda’s mentioned as removing all problems
    and all god’s worship to Shiva because of that we called
    him “MAHADEVA.” For all problems just do only worship
    of lord shiva&I am going to tell you best pooja&method
    as well.
    How we should do the worship of lord Shiva:
    A) Read Shiva Amogh Kavach (“शिव अमोघ कवच
    “) every Monday( This is Rs 20 book in India you can buy
    easily and start this).Amogh shiv kavach benefits very fast.
    B) Every Monday just go to lord Shiva temple and
    drop 1 spoon milk with 2 drop honey on shivaling.
    That’s all. I hope for this pooja money will not stop you
    and lord give you piece and remove your problems.

  • बुध

    बुध

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    बुध को ग्रहों में सुकुमार ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में बुध को युवराज ग्रह भी कहते हैं। कन्या और मिथुन राशी का स्वामी बुध है और इसका तत्व पृथ्वी है। बुद्धि, एकाग्रता, वाणी, त्वचा, सौंदर्य और सुगंध का कारक होता बुध है। कान, नाक, गले और संचार से भी बुध का संबंध है। बुध बुद्धि तेज करता है। गणितीय और आर्थिक मामलों में कामयाबी दिलाता है।

    कुंडली मे कमजोर बुध से परेशानियां
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    👉👉बुध आपकी जुबान, बर्ताव, आपके दिमाग और आपकी खूबसूरती का कारक ग्रह है.

    👉👉कुंडली में बुध की स्थति तय करती है कि आप कैसा बोलते हैं, कैसा व्यवहार करते हैं, आपका व्यक्तित्व और बुद्धि कैसी है.

    👉👉बुध कमजोर हो तो इंसान अपनी बुद्धि का सही प्रयोग नहीं कर पाता।

    👉👉ऐसे इंसान को कोई भी चीज देर से समझ आती है और वह अक्सर दुविधा में ही रहता है।

    👉👉बुध कमजोर हो तो इंसान ठीक से बोल नहीं पाता, कभी कभी हकलाहट भी होती है।

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    उपाय
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    रोज सुबह तुलसी के पत्तों का सेवन करें। इसके बाद 108 बार ‘ॐ ऐं सरस्वतयै नमः’ का जाप करें।
    हर बुधवार को गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं और इस दूर्वा को अपने पास रखें।
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    💥💥बुध राहु का योग हो तो विचित्र तरह की त्वचा की समस्या होती है।

    बुध के कारण त्वचा की समस्या के उपाय
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    रोज सुबह सूर्य को जल चढ़ाएं. ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों और सलाद का सेवन करें।

    प्रभावित जगह पर नारियल का तेल लगाएं।
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    अगर त्वचा की समस्या ज्यादा हो तो एक ओनेक्स पहनें।

    💥💥बुध बहुत कमजोर हो तो सुनने और बोलने में दिक्कत होती है। कभी-कभी गला खराब हो जाता है और लगातार खराब ही रहता है।

    💥💥सर्दी-जुकाम की समस्या हो सकती है, किसी खास तरह की गंध से एलर्जी होती है।

    उपाय
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    रोज सुबह गायत्री मंत्र का जाप करें या मन में दोहराएं।
    चांदी के चौकोर टुकड़े पर “ऐं” लिखवाकर गले में पहनें।
    ज्यादा से ज्यादा हरे कपड़े पहनें।
    रोज सुबह स्नान के बाद पीला चन्दन माथे, कंठ और सीने पर लगाएं।
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    💥💥बुध कमजोर हो तो गणित या गणित से जुड़े विषयों में समस्या होती है। गणित से मिलते जुलते विषय जैसे – अकाउंट्स, इकोनॉमिक्स या सांख्यिकी में भी दिक्कत होती है।
    इंसान को बार-बार इन विषयों में नाकामी का सामना करना पड़ता है।

    👉👉कमजोर बुध के चलते गणित से जुड़ी समस्याओं के उपाय
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    👉👉अपनी इच्छा से ही गणित से जुड़े विषय चुनें, जबरदस्ती नहीं।
    👉👉रोज सुबह और शाम “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें। अपने पढ़ने की जगह पर कोई हरे रंग की देव प्रतिमा लगाएं। एवं खाने में थोड़ी सी हरी मिर्च का प्रयोग जरूर करे ।
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