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  • श्रीसूक्त- मनी मैग्नेट का रहस्य –

    श्रीसूक्त- मनी मैग्नेट का रहस्य –

    1. एक ऐसा मंत्र जो बदल दे आपका भाग्य।।

    यदि आपके जीवन में एक ऐसा मंत्र हो जो भाग्य को पलट दे! एक ऐसा मंत्र, जिसके उच्चारण से धन, सुख और समृद्धि स्वतः आपकी ओर खींचे, जैसे चुंबक लोहा खींचता है। जिसे युगों से असली मनी मैग्नेट कहा जाता है—श्रीसूक्त।
    यह मंत्र सिर्फ़ शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जो आपके जीवन को समृद्धि और संतुलन से भर सकती है।

    1. श्रीसूक्त का उद्गम और महत्व।।

    श्रीसूक्त का उल्लेख हमें वेदों में मिलता है, खासकर ऋग्वेद के खिल सूक्तों में। यह कोई साधारण स्तुति नहीं, बल्कि हजारों वर्ष पुराना वैदिक ज्ञान है, जिसे ऋषियों ने ब्रह्मांड की शक्तियों को अनुभव कर रचा। श्रीसूक्त देवी लक्ष्मी की स्तुति है, जो न केवल धन की देवी हैं, बल्कि समृद्धि, सौंदर्य, अन्न और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री भी मानी जाती हैं। इस स्तोत्र के 16 से 18 मंत्रों में लक्ष्मी के विभिन्न रूपों का आह्वान किया गया है। हर मंत्र एक अनूठा संदेश देता है कभी लक्ष्मी को कमल पर विराजमान बताता है, तो कभी स्वर्णमयी रूप में।

    1. प्रतीकों का गहरा रहस्य।।

    श्रीसूक्त के मंत्रों में बार-बार कुछ प्रतीक दिखते हैं कमल, स्वर्ण, धान्य और रत्न।
    कमल: यह शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। कमल कीचड़ में खिलता है, फिर भी स्वच्छ रहता है। जब लक्ष्मी को पद्मासना कहा जाता है, तो इसका अर्थ है कि सच्ची समृद्धि हर परिस्थिति में खिलती है।
    स्वर्ण: यह केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि आंतरिक चमक, आत्मविश्वास और जीवन में स्थिरता का प्रतीक है।
    धान्य: पुराने समय में अन्न ही सबसे बड़ा धन था। श्रीसूक्त जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का आह्वान करता है। ये प्रतीक बताते हैं कि श्रीसूक्त केवल भौतिक समृद्धि की बात नहीं करता, बल्कि यह आध्यात्मिक और ऊर्जात्मक संतुलन की ओर ले जाता है।

    1. श्रीसूक्त को मनी मैग्नेट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके मंत्र ध्वनि-ऊर्जा (sound energy) उत्पन्न करते हैं। हर मंत्र एक विशेष कंपन पैदा करता है, जो हमारे अवचेतन मन और वातावरण पर असर डालता है। जैसे मंदिर की घंटियों की आवाज़ मन को शांत और ऊर्जावान बनाती है, वैसे ही श्रीसूक्त के मंत्र नकारात्मकता को मिटाकर समृद्धि की ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। नियमित पाठ करने वाले लोग बताते हैं कि उनके जीवन में धन, अवसर और शांति स्वतः खिंचने लगते हैं। यह मंत्र अबंडेंस माइंडसेट (संपन्नता की मानसिकता) को जागृत करता है, जो हमें अभाव की सोच से मुक्त करता है।
    2. वैदिक परंपरा में श्रीसूक्त के जप के लिए सबसे उत्तम समय है:
      प्रभातकाल: सूर्योदय से पहले, जब वातावरण शांत और ऊर्जावान होता है।
      संध्याकाल: सूर्यास्त के समय।
      खासकर शुक्रवार और अमावस्या के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि ये दिन लक्ष्मी जी की उपासना से जुड़े हैं।
      जप की विधि:
    3. एक तांबे के कलश में शुद्ध जल रखें।
    4. एक दीपक जलाएँ।
    5. मन को शांत कर लक्ष्मी जी का ध्यान करें।
    6. श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रीसूक्त का पाठ शुरू करें।
      नियमितता इस साधना की कुंजी है। समय के साथ यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जो मनी मैग्नेट इफ़ेक्ट को सक्रिय करता है।
    7. आधुनिक जीवन में श्रीसूक्त की प्रासंगिकता।।।
      आज के भागदौड़ भरे जीवन में श्रीसूक्त उतना ही प्रासंगिक है, जितना हजारों साल पहले था। आज हमारे पास धन तो है, लेकिन शांति और संतुलन की कमी है। श्रीसूक्त न केवल धन आकर्षित करता है, बल्कि इनर पीस (आंतरिक शांति) और आर्थिक बुद्धिमत्ता भी देता है। यह हमें सिखाता है कि धन को कैसे आकर्षित करें, उसका सही उपयोग करें और उसे दीर्घकाल तक स्थिर रखें।
      आधुनिक भाषा में कहें तो श्रीसूक्त एक कम्प्लीट प्रॉस्पेरिटी सिस्टम है, जो हमें अबंडेंस माइंडसेट देता है और जीवन में संतुलन लाता है।
      यदि समय की कमी के कारण आप पूरे श्रीसूक्त का पाठ नहीं कर पाते, तो इस विशेष श्लोक का 108 बार जप करें:
      “ताम म आ वह जातवेदो लक्ष्मीम अनपगामिनीम्।
      यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम्।”
      इसका अर्थ है: हे अग्निदेव, मेरे लिए उस लक्ष्मी को लाएँ, जो कभी नष्ट न हो। जिनके आगमन से मुझे स्वर्ण, गौ, अश्व और सुख-संतान प्राप्त हों।
      यह जप स्फटिक माला पर करने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    श्रीसूक्त पाठ की सावधानियाँ।।
    श्रीसूक्त का पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

    • शुद्ध मन: माँ से सौदेबाजी न करें, जैसे “मुझे इतना धन दे दो”। केवल श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करें।
    • कमल पुष्प: माँ को कमल का फूल अवश्य अर्पित करें। भाव कमल पुष्प भी अर्पित कर सकते हैं।
    • सहायता: यदि कोई जरूरतमंद, खासकर कोई महिला, मदद माँगे, तो उसे इनकार न करें। यह माँ लक्ष्मी का रूप हो सकता है।
    • वस्त्र और आसन: सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें और गुलाबी या लाल आसन पर बैठकर पाठ करें।
    • शुद्धता: पाठ के बाद 5 मिनट तक जल का स्पर्श न करें।
      श्रीसूक्त: समृद्धि का संपूर्ण समाधान
      श्रीसूक्त केवल धन की प्राप्ति तक सीमित नहीं है। यह जीवन के हर क्षेत्र—स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख, बच्चों की पढ़ाई, वैवाहिक जीवन—में समृद्धि लाता है। माँ लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं, बल्कि संपूर्ण समृद्धि की अधिष्ठात्री हैं। उनके आशीर्वाद से आपकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
  • शुक्र प्रदोष व्रत आज

    शुक्र प्रदोष व्रत आज


    सितंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाएगा। सितंबर माह का पहला प्रदोष व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से धन संपदा की कोई कमी नहीं रहती है। साथ ही व्रत करने वालों की सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते हैं। साथ ही व्.क्ति को अपने सभी अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है और माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है।

    सितंबर माह का पहला प्रदोष व्रत कब ?

    त्रयोदशी तिथि का आरंभ 5 सितंबर को सुबह में 4 बजकर 9 मिनट पर होगा और त्रयोदशी तिथि समाप्त होगी 6 तारीख की मध्य रात्रि 3 बजकर 14 मिनट पर होगी। शास्त्रों में विधान है कि त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में होने पर ही प्रदोष व्रत किया जाता है। ऐसे में 5 सितंबर को शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।। इसलिए इस व्रत का महत्व और भी अधिक रहेगा।

    शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत के प्रभाव से दांपत्य जीवन खुशहाल होता है। शुक्र प्रदोष व्रत करने से भौतिक, सुख साधनों में भी वृद्धि होती है। वहीं, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। प्रदोष व्रत में रुद्राभिषेक कराने के भी काफी फायदा है।

    शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि

    शुक्र प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठे इसके बाद स्नान करके सूर्यदेव और अर्घ्य दें।
    फिर पूजा घर की अच्छे से साफ सफाई करके भगवान शिव का अभिषेक करें और व्रत का संकल्प लें।
    प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में यानी शाम के समय की जाती है।
    इस दिन शाम के समय शिव मंदिर में जाएं और मंदिर नहीं जा सकते तो घर में ही भगवान शिव की प्रतिमा और शिवलिंग की स्थापना करके पूजा करें।
    सबसे पहले घी की दीपक जलाएं और शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें।
    इसके बाद शिवलिंग पर जनेऊ अर्पित करें और माता पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करें साथ ही लाल चुनरी भी।
    फिर शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और अंत में शिव चालीसा का पाठ करके भगवान शिव की आरती करें।
    अंत में भगवान शिव को प्रसाद अर्पित करके सभी को प्रसाद बांटे और फिर अपने व्रत का पारण करें।
    पारण करने से पहले प्रसाद खाएं और फिर पारण करें।

  • Shivaling पर किस समस्या के लिए क्या चढ़ाएँ

    🌺 Shivaling पर किस समस्या के लिए क्या चढ़ाएँ

    🔆 धन/समृद्धि की प्राप्ति → दूध + शहद + चावल
    🌙 मानसिक शांति / तनाव / चन्द्र दोष → दूध + बेलपत्र
    🔥 क्रोध / मंगल दोष → लाल चंदन + गुलाल
    🌿 बुद्धि / शिक्षा / वाणी दोष → दूर्वा + हरी इलायची
    💛 संतान सुख / बृहस्पति दोष → हल्दी + पीले फूल
    ✨ सौंदर्य / दाम्पत्य सुख / शुक्र दोष → खीर + सफेद फूल
    ⚖️ शनि दोष / बाधा / करियर समस्या → सरसों का तेल + काला तिल
    🐍 राहु दोष / भय / बुरी आदतें → धतूरा + नीले फूल
    🐕 केतु दोष / अचानक संकट / मोक्ष → गुग्गल + कुशा

    🌌 🌺 Shivaling पर किस समस्या के लिए क्या चढ़ाएँ

    🔆 धन/समृद्धि की प्राप्ति → दूध + शहद + चावल
    🌙 मानसिक शांति / तनाव / चन्द्र दोष → दूध + बेलपत्र
    🔥 क्रोध / मंगल दोष → लाल चंदन + गुलाल
    🌿 बुद्धि / शिक्षा / वाणी दोष → दूर्वा + हरी इलायची
    💛 संतान सुख / बृहस्पति दोष → हल्दी + पीले फूल
    ✨ सौंदर्य / दाम्पत्य सुख / शुक्र दोष → खीर + सफेद फूल
    ⚖️ शनि दोष / बाधा / करियर समस्या → सरसों का तेल + काला तिल
    🐍 राहु दोष / भय / बुरी आदतें → धतूरा + नीले फूल
    🐕 केतु दोष / अचानक संकट / मोक्ष → गुग्गल + कुशा

    🌌 Planetwise शिवलिंग पर अर्पण करने योग्य वस्तुएँ

    🌞 सूर्य (Sun) → लाल चंदन, गेंदा या लाल फूल, गन्ने का रस
    🌙 चन्द्र (Moon) → दूध, चावल, सफेद फूल, बेलपत्र
    ♂️ मंगल (Mars) → गुलाल, सिंदूर, लाल फूल, अनार का रस
    ☿ बुध (Mercury) → दूर्वा घास, हरे फल, हरी मूँग
    ♃ बृहस्पति (Jupiter) → हल्दी, पीले फूल, चना दाल, केसर
    ♀ शुक्र (Venus) → खीर, दूध, सफेद फूल, शक्कर
    ♄ शनि (Saturn) → काला तिल, सरसों का तेल, शमी पत्र
    ☊ राहु (Rahu) → धतूरा, नीले फूल, कोयला, उड़द
    ☋ केतु (Ketu) → कुशा, गुग्गल, लाल झंडा, नींबू

    👉 इसका अर्थ है कि यदि किसी की कुंडली में ग्रह कमजोर है, तो उस ग्रह की वस्तु को शिवलिंग पर चढ़ाकर ग्रह को बलवान बनाया जा सकता है। शिवलिंग पर अर्पण करने योग्य वस्तुएँ

    🌞 सूर्य (Sun) → लाल चंदन, गेंदा या लाल फूल, गन्ने का रस
    🌙 चन्द्र (Moon) → दूध, चावल, सफेद फूल, बेलपत्र
    ♂️ मंगल (Mars) → गुलाल, सिंदूर, लाल फूल, अनार का रस
    ☿ बुध (Mercury) → दूर्वा घास, हरे फल, हरी मूँग
    ♃ बृहस्पति (Jupiter) → हल्दी, पीले फूल, चना दाल, केसर
    ♀ शुक्र (Venus) → खीर, दूध, सफेद फूल, शक्कर
    ♄ शनि (Saturn) → काला तिल, सरसों का तेल, शमी पत्र
    ☊ राहु (Rahu) → धतूरा, नीले फूल, कोयला, उड़द
    ☋ केतु (Ketu) → कुशा, गुग्गल, लाल झंडा, नींबू

    👉 इसका अर्थ है कि यदि किसी की कुंडली में ग्रह कमजोर है, तो उस ग्रह की वस्तु को शिवलिंग पर चढ़ाकर ग्रह को बलवान बनाया जा सकता है।

  • शनि अमावस्या

    शनि अमावस्या  अत्यंत शक्तिशाली और दुर्लभ तिथि मानी जाती है। यह तब आती है जब अमावस्या शनिवार के दिन पड़े। यह दिन शनि देव को प्रसन्न करने, पितृ शांति, पूर्वजों की कृपा प्राप्त करने, शत्रु बाधा निवारण, ऋण मुक्ति, और तांत्रिक साधनाओं के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

    शनि अमावस्या का महत्व
    1. शनि पीड़ा शांति – शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैया और शनि की प्रतिकूल स्थिति से मुक्ति।
    2. पितृ शांति – अमावस्या पितरों का दिन है, और शनिवार को आने से पितृ शांति के विशेष उपाय कारगर होते हैं।
    3. ऋण मुक्ति – कर्ज़ से छुटकारा पाने का उत्तम समय।
    4. तांत्रिक साधनाओं की सिद्धि – इस दिन की रात को सिद्धि साधनाएं, शत्रु निवारण प्रयोग और विशेष टोटके अत्यंत प्रभावी होते हैं।
    5. नकारात्मक ऊर्जा शांति – घर या जीवन से बुरी शक्तियों, नजर-दोष और बाधाओं को दूर करने का अवसर।

    🔮 शनि अमावस्या पर तांत्रिक उपाय व टोटके

    1. शनि शांति हेतु
      • पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
      • “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का 108 बार जप करें।
    2. ऋण मुक्ति टोटका
      • काले कपड़े में 7 काली उड़द की दाल, 7 लोहे की कीलें, और थोड़ा सा सरसों का तेल रखकर नदी में प्रवाहित करें।
    3. शत्रु बाधा निवारण
      • शनि अमावस्या की रात काले तिल और सरसों को आग में डालते हुए शत्रु का नाम लेकर मंत्र जपें:
      “ॐ प्राणप्रियाय नमः”
      • इससे शत्रु की बाधाएं शांत होती हैं।
    4. पितृ शांति प्रयोग
      • पितरों के नाम से तिल, जल और पका भोजन अर्पण करें।
      • ब्राह्मणों को खिचड़ी व तिलदान करना विशेष फल देता है।
    5. काले जादू/बाधा मुक्ति
      • आधी रात को 7 नींबू लेकर चौराहे पर रखकर उन पर 21 बार “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” जप करें और नींबू वहीं छोड़ आएं।

    🪔 शनि अमावस्या पर दान

    दान करने से शनि की कृपा शीघ्र मिलती है। इस दिन यह दान करें –
    • काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल
    • काला वस्त्र, काला जूता या छाता
    • लोहे की वस्तुएं
    • गरीब और अपंग व्यक्तियों को भोजन

    👉

  • गणेश चतुर्थी

    🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿🌹🌿
    गणेश चतुर्थी

    🌷🌷 श्री गणेश जी को घर लाने का शुभ मुहूर्त

    🌷🌷हम एक दिन पूर्व ही श्री गणेश जी को लेकर आते हैं
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    कृपया ध्यान रख सपरिवार श्री गणेश जी को आमन्त्रित करके लाएँ

    दुकान से श्री गणेश जी की पूजा करके लायें और कहे श्री गणेश जी ऋद्धि सिद्धि सहित हमारे घर पधारे

    श्री गणेश जी की मूर्ति का ज्यादा भाव मोल ना करे

    उन्हें शुद्ध कोरे लाल वस्त्र से ढ़क कर लाये ।

    कार मे उन्हें सीट पर या अपनी गोद में रख कर लाये । अगर आप *5 सितम्बर* को ही लाना चाहते है तो *मुहूर्त

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    मूर्ति कौनसी लाये :-

    🍁सबसे ज्यादा शुभ पीले रंग और लाल रंग के गणेश जी होते है ।
    🍁नीले रंग के गणेश जी बहुत ही विशेष पूजा के लिये और विशेष मुहूर्त मे लाये जाते है ।
    🍁हल्दी से बने गणेश जी -हरिद्रा गणपति भी विशेष संतान प्रप्ति के लिये लाये जाते है ।
    🍁1दंत गणपति श्यामवर्ण – पराक्रम के लिये लाये जाते है
    🍁सफेद रंग के गणपति : ऋण मोचन गणपति -ॠणों से मुक्ति दिलाते है ।
    🍁4भुजाओं वाले लाल गणपति : संकटष्टहरण गणपति -संकटों का नाश होता है ।
    🍁त्रि नेत्र धारी रक्त वर्ण और दस भुजाधारी -इसमे सारे गणेशजी के रुप होते है ।
    🍁पर घर मे लाल और पीले रंग के गणपति सबसे शुभ है ।
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    🌿🌿 आप डेढ़, 3, 5, 7 या 11 दिन के लिये श्री गणेश जी को आमन्त्रित करने का संकल्प ले सकते हैऔर यह संकल्प मूर्ति लाते समय या स्थापना के समय मन मे ले सकते है

    दोपहर के समय स्थापित करना सबसे शुभ होगा ।

    मगर ध्यान रहे कि जितने दिन का संकल्प करके लाये है उससे पूर्व विसर्जन ना करे।

    पर अधिक दिन रुकने के लिएश्री गणेश जी सेअनुनय विनय करके दिन उपरोक्त संख्या मे बढ़ा सकते है
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    जितने दिन श्री गणेश जी घर में विराजमान रहे घर को ताला लगाकर सपरिवार बाहर नहीं जाये कोई ना कोई सदस्य
    घर पर ही रुके।

    अगर आप दोनो (पति पत्नी) ही कार्यरत हो तोश्री गणेश जी को बोलकर जाना चाहिये किहम इतने बजे तक आ जायेंगे फिर जा सकते है।

    ऐसे ही जो महिलाएँ दिन मे बच्चों को स्कूल बस से लेने जाती है
    वो भी श्री गणेश जी को बोल कर जा सकती है।
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    आपको यह भावना मन में रखनी है कि श्री गणेश जी आपके घर मे अतिथि बनकर विराजमान है।

    कैसे करे पूजा :-
    =======^===
    🌼एक लकड़ी के पट्टी पर पीला वस्त्र बिछाये पीले फूल मेवा 🌼दुर्वा और लडू भोग लगाये
    🌼अखंड घी का दीपक जलाये
    🌼जितनी उम्र है उतने लड़ू चढ़ाये
    🌼पीले वस्त्र पान सुपारी चढ़ाये
    🌼इस दिन जल और फल ही खाये । व्रत करे ।
    🌼 चंद्रमा को नही देखे । चंद्रमा को नीची निगह रख कर अर्घ्य दे । अगर गलती से चंद्र दर्शन हो जाये तो श्री कृष्ण श्री कृष्ण मंत्र बोलकर माफी माँगे । प्रसाद ग्रहण करे और अन्न और वस्त्र का दान करे ।और फिर व्रत खोले ।
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    क्या ना करे :

    🌺🌺काले वस्त्र ना पहने ।घर मे बहुत बड़ी मूर्ति ना लाये । तुलसी नही चढ़ाये । क्रोध ना करे । झूठ ना बोले ।

    Mantra :
    Vakratunda Ganesha Mantra
    श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा
    निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
    Shree Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha
    Nirvighnam Kuru Me Deva Sarva-Kaaryeshu Sarvada॥
    Ganesha Gayatri Mantra
    ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
    तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
    Om Ekadantaya Viddhamahe, Vakratundaya Dhimahi,
    Tanno Danti Prachodayat॥

    🌻🌻संतान प्रप्ति के लिये पीले फ़ूलॊ की या पीले फलों की माला बनकर चढ़ाये ।

    श्री गणेश जी को दोनो समय आरती के समय यथाशक्ति
    लड्डू मोदक,फल व मेवे का प्रसाद अर्पित करे।

    घर मे सात्विक भोजन ही बने व सर्वप्रथम थाली लगा कर
    श्री गणेश जी को भोजन अर्पित करावे।

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    तत्पश्चात परिवार भोजन करे
    घर में कोई क्लेश और चिंता नहीं करे

    श्री गणेश जी विघ्न,क्लेश और चिंता को दूर करने वाले है
    यह दृढ विश्वास मन में रखे।

  • ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग

    ऋण-हरण श्री गणेश-मन्त्र प्रयोग
    ============================〰️🌼〰️〰️〰️🌼〰️〰️〰️🌼〰️
    यह धन-दायी प्रयोग है। यदि प्रयोग नियमित करना हो तो साधक अपने द्वारा निर्धारित वस्त्र में कर सकता है किन्तु, यदि प्रयोग पर्व विशेष मात्र में करना हो, तो पीले रंग के आसन पर पीले वस्त्र धारण कर पीले रंग की माला या पीले सूत में बनी स्फटिक की माला से करे। भगवान् गणेश की पूजा में ‘दूर्वा-अंकुर’ चढ़ाए। यदि हवन करना हो, तो ‘लाक्षा’ एवं‘दूर्वा’ से हवन करे। विनियोग, न्यास, ध्यान कर आवाहन और पूजन करे। ‘पूजन’ के पश्चात् ‘कवच’- पाठ कर ‘स्तोत्र’का पाठ करे।

    विनियोगः- ॐ अस्य श्रीऋण-हरण-कर्तृ-गणपति-मन्त्रस्य सदा-शिव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीऋण-हर्ता गणपति देवता, ग्लौं बीजं, गं शक्तिः, गों कीलकं, मम सकल-ऋण-नाशार्थे जपे विनियोगः।

    ऋष्यादि-न्यासः- सदा-शिव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप छन्दसे नमः मुखे, श्रीऋण-हर्ता गणपति देवतायै नमः हृदि, ग्लौं बीजाय नमः गुह्ये, गं शक्तये नमः पादयो, गों कीलकाय नमः नाभौ, मम सकल-ऋण-नाशार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ।

    कर-न्यासः- ॐ गणेश अंगुष्ठाभ्यां नमः, ऋण छिन्धि तर्जनीभ्यां नमः, वरेण्यं मध्यमाभ्यां नमः, हुं अनामिकाभ्यां नमः, नमः कनिष्ठिकाभ्यां नमः, फट् कर-तल-कर-पृष्ठाभ्यां नमः।

    षडंग-न्यासः- ॐ गणेश हृदयाय नमः, ऋण छिन्धि शिरसे स्वाहा, वरेण्यं शिखायै वषट्, हुं कवचाय हुम्, नमः नेत्र-त्रयाय वौषट्, फट् अस्त्राय फट्।

    ध्यानः-
    ॐ सिन्दूर-वर्णं द्वि-भुजं गणेशं, लम्बोदरं पद्म-दले निविष्टम्।
    ब्रह्मादि-देवैः परि-सेव्यमानं, सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम्।।

    ‘आवाहन’ आदि कर पञ्चोपचारों से अथवा ‘मानसिक पूजन’ करे।

    ।।कवच-पाठ।।
    ॐ आमोदश्च शिरः पातु, प्रमोदश्च शिखोपरि, सम्मोदो भ्रू-युगे पातु, भ्रू-मध्ये च गणाधीपः।
    गण-क्रीडश्चक्षुर्युगं, नासायां गण-नायकः, जिह्वायां सुमुखः पातु, ग्रीवायां दुर्म्मुखः।।

    विघ्नेशो हृदये पातु, बाहु-युग्मे सदा मम, विघ्न-कर्त्ता च उदरे, विघ्न-हर्त्ता च लिंगके।

    गज-वक्त्रो कटि-देशे, एक-दन्तो नितम्बके, लम्बोदरः सदा पातु, गुह्य-देशे ममारुणः।।
    व्याल-यज्ञोपवीती मां, पातु पाद-युगे सदा, जापकः सर्वदा पातु, जानु-जंघे गणाधिपः।
    हरिद्राः सर्वदा पातु, सर्वांगे गण-नायकः।।

    ।।स्तोत्र-पाठ।।
    सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक्, पूजितः फल-सिद्धये। सदैव पार्वती-पुत्रः, ऋण-नाशं करोतु मे।।१
    त्रिपुरस्य वधात् पूर्वं-शम्भुना सम्यगर्चितः। हिरण्य-कश्यप्वादीनां, वधार्थे विष्णुनार्चितः।।२
    महिषस्य वधे देव्या, गण-नाथः प्रपूजितः। तारकस्य वधात् पूर्वं, कुमारेण प्रपुजितः।।३
    भास्करेण गणेशो हि, पूजितश्छवि-सिद्धये। शशिना कान्ति-वृद्धयर्थं, पूजितो गण-नायकः।
    पालनाय च तपसां, विश्वामित्रेण पूजितः।।४
    ।।फल-श्रुति।।
    इदं त्वृण-हर-स्तोत्रं, तीव्र-दारिद्र्य-नाशनम्, एक-वारं पठेन्नित्यं, वर्षमेकं समाहितः।
    दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा, कुबेर-समतां व्रजेत्।।
    मन्त्रः- “ॐ गणेश ! ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्” (१५ अक्षर)
    उक्त मन्त्र का अन्त में कम-से-कम २१ बार ‘जप करे। २१,००० ‘जप’ से इसका ‘पुरश्चरण’ होता है। वर्ष भर ‘स्तोत्र’ पढ़ने से दारिद्र्य-नाश होता है तथा लक्ष्मी-प्राप्ति होती है।
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  • ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताए गए ऐसे काम जो कभी नहीं करना चाहिए।

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    *🌹मेरी भाग्य लक्ष्मी 🌹👉अच्छे और सुखी जीवन के लिए शास्त्रों के अनुसार कई ऐसे नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है। यहां जानिए ब्रह्मवैवर्तपुराण में बताए गए ऐसे काम जो कभी नहीं करना चाहिए। जो लोग ये काम करते हैं, उनके घर-परिवार में दरिद्रता बढ़ने लगती है।*

    इन चीजों को जमीन पर न रखें
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    1. दीपक,
    2. शिवलिंग,
    3. शालग्राम (शालिग्राम),
    4. मणि,
    5. देवी-देवताओं की मूर्तियां,
    6. यज्ञोपवीत (जनेऊ),
    7. सोना और
    8. शंख,

    इन 8 चीजों को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें नीचे रखने से पहले कोई कपड़ा बिछाएं या किसी ऊंचे स्थान पर रखें।

    इन तिथियों पर ध्यान रखें ये बातें
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    हिन्दी पंचांग के अनुसार किसी भी माह की अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि पर स्त्री संग, तेल मालिश और मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

    सुबह उठते ही ध्यान रखें ये बातें
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    स्त्री हो या पुरुष, सुबह उठते ही इष्टदेव का ध्यान करते हुए दोनों हथेलियों को देखना चाहिए। इसके बाद अधिक समय तक बिना नहाए नहीं रहना चाहिए। रात में पहने हुए कपड़ों को शीघ्र त्याग देना चाहिए।

    इनका अनादर नहीं करना चाहिए
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    हमें किसी भी परिस्थिति में पिता, माता, पुत्र, पुत्री, पतिव्रता पत्नी, श्रेष्ठ पति, गुरु, अनाथ स्त्री, बहन, भाई, देवी-देवता और ज्ञानी लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। इनका अनादर करने पर यदि व्यक्ति धनकुबेर भी हो तो उसका खजाना खाली हो जाता है। इन लोगों का अपमान करने वाले व्यक्ति को महालक्ष्मी हमेशा के लिए त्याग देती हैं।

    रविवार को ध्यान रखें ये बातें
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    रविवार के दिन कांस्य के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए। इस दिन मसूर की दाल, अदरक, लाल रंग की खाने की चीजें भी नहीं खाना चाहिए।

    तय तिथि पर पूरा करना चाहिए दान का संकल्प
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    यदि हमने किसी को दान देने का संकल्प किया है तो इस संकल्प को तय तिथि पर किसी भी परिस्थिति में पूरा करना चाहिए। दान देने में यदि एक दिन का विलंब होता है तो दुगुना (दोगुणा) दान देना चाहिए। यदि एक माह का विलंब होता है तो दान सौगुना हो जाता है। दो माह बितने पर दान की राशि सहस्त्रगुनी यानी हजार गुना हो जाती है। अत: दान के लिए जब भी संकल्प करें तो तय तिथि पर दान कर देना चाहिए। अकारण दान देने में विलंब नहीं करना चाहिए।

    दिन के समय न करें समागम
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    दिन के समय और सुबह-शाम पूजन के समय स्त्री और पुरुष को समागम नहीं करना चाहिए। जो लोग यह काम करते हैं, उन्हें महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। कई प्रकार के रोगों का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से स्त्री और पुरुष, दोनों को आंख और कान से जुड़े रोग हो सकते हैं। साथ ही, इसे पुण्यों का विनाश करने वाला कर्म भी माना गया है।

    घर में प्रवेश करते समय ध्यान रखें ये बातें
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    हम जब भी कहीं बाहर से लौटकर घर आते हैं तो सीधे घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। मुख्य द्वार के बाहर ही दोनों पैरों को साफ पानी से धो लेना चाहिए। इसके बाद ही घर में प्रवेश करें। ऐसा करने पर घर की पवित्रता और स्वच्छता बनी रहती है।

    पुरुषों को ध्यान रखनी चाहिए ये बात
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    पुरुषों को कभी भी पराई स्त्रियों को बुरी नजर से नहीं देखना चाहिए। कभी भी मल-मूत्र को भी नहीं देखना चाहिए। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार ये काम विनाश की ओर ले जाते हैं। इनसे दरिद्रता बढ़ती है।

    स्त्रियां को ध्यान रखनी चाहिए ये बातें
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    जो स्त्रियां अपने पति को डांटती हैं, सताती हैं, पति की आज्ञा का पालन नहीं करती हैं, सम्मान नहीं करती हैं, उनके पुण्य कर्मों का क्षय होता है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार जो स्त्रियां वाणी द्वारा दुख पहुंचाती हैं वे अगले जन्म में कौए का जन्म पाती हैं। पति के साथ हिंसा करने वाली स्त्री का अगला जन्म सूअर के रूप में होता है।

    ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए
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    किसी बुरे चरित्र वाले इंसान के साथ एक स्थान पर सोना, खाना-पीना, घूमना-फिरना वर्जित किया गया है। क्योंकि किसी व्यक्ति के साथ बात करने से, शरीर को छूने से, एक स्थान पर सोने से, साथ भोजन करने से, एक-दूसरे के गुणों और दोष आपस में संचारित अवश्य होते हैं। जिस प्रकार पानी पर तेल की बूंद गिरते ही वह फैल जाती है, ठीक उसी प्रकार बुरे चरित्र वाले व्यक्ति के संपर्क में आते ही बुराइयां हमारे अंदर प्रवेश कर जाती हैं।

    ब्रह्मवैवर्तपुराण का परिचय
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    यह पुराण वैष्णव पुराण है। इस पुराण के केंद्र में भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण हैं। यह चार खंडों में विभाजित है। पहला खंड ब्रह्म खंड है, दूसरा प्रकृति खंड है, तीसरा गणपति खंड है और चौथा श्रीकृष्ण जन्म खंड है। इस पुराण में श्रेष्ठ जीवन के लिए कई सूत्र बताए गए हैं।

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  • मानव जीवन के लिए अरिष्ट कारक ग्रहों का विवेचन –

    मानव जीवन के लिए अरिष्ट कारक ग्रहों का विवेचन –
    ग्रह रहित अष्टम भाव पर जिस भी बलवान ग्रह की दृष्टि होती है उस ग्रह के धातु अथवा वात, पित्त, कफ आदि दोषों के प्रकोप से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
    यथा – ग्रह और उनकी धातुएं-
    सूर्य — पित्त प्रधान
    चंद्रमा — वात/ कफ
    मंगल — पित्त प्रधान
    बुध — कफ वात पित्त
    गुरु — कफ़/ वात
    शनि — वात प्रधान
    काल पुरुष के अष्टम स्थान स्थित मे‌षादि राशि का जो कथित अंग स्थान है, शरीर के उस अंग में उस राशि के या राशि अधिपति ग्रह के कथित धातु- ताम्र और लोहा आदि से चोट आदि लगने से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
    अधिक संख्या बलशाली ग्रहों की अष्टम भाव पर दृष्टि से उन सभी ग्रहों के कथित धातु दोष विशेष से जातक की मृत्यु की संभावना होती है।
    अष्टम भाव स्थित ग्रह का प्रभाव –
    सूर्य से अग्नि कोप
    चंद्र से जल द्वारा
    मंगल से अस्त्र-शस्त्र द्वारा
    बुध से वात पित्त कफ आदि दोष उत्पन्न रोग द्वारा
    गुरु से ऐसे रोग से मृत्यु होती है की रोग का ज्ञान ही नहीं हो पाता‌।
    शुक्र से तृषा पिपासा द्वारा
    शनि से क्षुधा पीड़ित होकर जातक की मृत्यु होती है।

  • श्री गणेश की दाईं सूंड या बाईं सूंड

    आईए जानते हैं ,श्री गणेश की दाईं सूंड या बाईं सूंड आप सभी लोगों के प्रश्न सुबह से आ रहे हैं………
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    अक्सर श्री गणेश की प्रतिमा लाने से पूर्व या घर में स्थापना से पूर्व यह सवाल सामने आता है कि श्री गणेश की कौन सी सूंड होनी… चाइये ?
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    क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाई या कुछ में बाई ओर होती है। सीधी सूंड वाले गणेश भगवान दुर्लभ हैं। इनकी एकतरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है।

    भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप के भी कई भेद हैं। कुछ मुर्तियों में गणेशजी की सूंड को बाई को घुमा हुआ दर्शाया जाता है तो कुछ में दाई ओर। गणेश जी की सभी मूर्तियां सीधी या उत्तर की आेर सूंड वाली होती हैं। मान्यता है कि गणेश जी की मूर्त जब भी दक्षिण की आेर मुड़ी हुई बनाई जाती है तो वह टूट जाती है। कहा जाता है कि यदि संयोगवश आपको दक्षिणावर्ती मूर्त मिल जाए और उसकी विधिवत उपासना की जाए तो अभिष्ट फल मिलते हैं। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है।

    प्राय: गणेश जी की सीधी सूंड तीन दिशाआें से दिखती है। जब सूंड दाईं आेर घूमी होती है तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। एेसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है।
    वहीं बाईं आेर मुड़ी सूंड वाली मूर्त को इड़ा नाड़ी व चंद्र प्रभावित माना गया है। एेसी मूर्त की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली।

    सीधी सूंड वाली मूर्त का सुषुम्रा स्वर माना जाता है और इनकी आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। संत समाज एेसी मूर्त की ही आराधना करता है। सिद्धि विनायक मंदिर में दाईं आेर सूंड वाली मूर्त है इसीलिए इस मंदिर की आस्था और आय आज शिखर पर है।

    कुछ विद्वानों का मानना है कि दाई ओर घुमी सूंड के गणेशजी शुभ होते हैं तो कुछ का मानना है कि बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ फल प्रदान करते हैं। हालांकि कुछ विद्वान दोनों ही प्रकार की सूंड वाले गणेशजी का अलग-अलग महत्व बताते हैं।
    यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं। ऎसी मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है व शुभ फल प्रदान करता है।इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है।

    घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए। बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है। घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्वविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती।

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    ओम नमः शिवाय
    शिवजी सदा सहाय
    सबका कल्याण हो……. ..

  • इस गणेश चतुर्थी पर हम आपको श्री गणेश जी का खास स्नान बता रहे हैं।

    💥इस गणेश चतुर्थी पर हम आपको श्री गणेश जी का खास स्नान बता रहे हैं। स्नान कराने से आप अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।

    💥यदि आपके सूर्य की महादशा हो तो साफ जल में बिलपत्र और कुमकुम डालकर श्री गणेश जी को स्नान करना है। अनार का भोग उनके आगे रखें।

    💥चंद्रमा की दशा में है तो गाय के दूध से श्री गणेश जी को स्नान करा के मिश्री का भोग लगाओ।

    💥 मंगल की महादशा चल रही है तो लाल चंदन से श्री गणेश जी को स्नान करें और गुड़ का भोग लगाओ।

    💥बुध की महादशा चल रही है तो आप पंचगव्य को जल में डालकर स्नान कराये और हरी सौंफ का भोग लगाएं

    💥गुरु की महादशा चल रही है तो जल में केसर डालकर स्नान कराएं। केले का भोग लगाएं।

    💥शुक्र की महादशा चल रही है तो आप पंचामृत श्री गणेश जी को स्नान कराएं और जलेबी का भोग लगाएं।

    💥शनि की महादशा चल रही है तो जल में शमीपत्र डालकर श्री गणेश जी को स्नान कराएं। बूंदी का भोग लगाएं।

    💥राहु की महादशा चल रही है तो आप जल में दुर्वा डाल कर स्नान कराए। उड़द से बनी हुई मिठाई का भोग लगाओ।

    💥केतु की महादशा चल रही है तो आप डाभ को जल में डाल कर स्नान कराए और तिल से बनी हुई मिठाई का भोग लगाएं।

    💥यदि आपको अपनी जन्म कुंडली का ज्ञान नहीं हो तो आप गुडहल का फूल और केली का फूल जल में डालकर श्री गणेश जी को स्नान कराएं और मोदक का भोग लगाएं तो सभी समस्याओं से छुटकारा प्राप्त हो जाएगा….
    🌹जय गणेश🌹